Author Topic: Kumaoni-Garwali Words Getting Extinct-कुमाउनी एव गढ़वाली के विलुप्त होते शब्द  (Read 36135 times)

Bhishma Kukreti

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Garhwali Words, now Being Extinct -12






                                 Presented by Bhishm Kukreti





Sources  : 1-Shri Ramakant Benjwal and Shrimati Vina Benjwal , Garhwali Shabdkosh, Vinsar Publishing co. Dehradun

   2- late Kanhyaa Lal . Dandriyal   Garhwali shabd Kosh (Series in Shailvani, Kotdwara )




   ठञगट्याट  = बनवतिपन , दिखावा

  ठञगट्याट्या = दिखावा करने वाला

ठट्टा = नकल, मजाक

ठडगल़ा = मुंह में ऊपर से गिरा कर पानी पीने का तरीका

ठड्याळउ = सीधा

ठड़यौण= सहारा देना 

ठप्पा = सांचा , खांचा

ठमणि = एक नृत्य

ठमसाट -असंतोष

ठमसाण = असंतोष प्रकट करना

ठाञड़णु = तय करना

ठाणी  = गाँव का चौकीदार

ठुबसौण = पलटना जैसे बौंळी ठुबसौण

ठुल्ला =बड़ा  (नाते में  उमर में )

ठुल्ली = नाते में, उमर में बडी

ठेकि=परोठी (अधिक्तर लकड़ी की) 

ठेणि =नाटु / ठिगना

 ठऐञडि  =पौधे का टूटा अगर भाग

ठोंट = चोंच

ठौंसो/ ठौंसी  =छोटी टहनी (सोंटी )

ठोकराट  = उलाहना


 ञ= बिन्दु

   

Courtesy: Shri Ramakant Benjwal and Shrimati Vina Benjwal , Garhwali Shabdkosh, Vinsar Publishing co. Dehradun

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टुकियाव -

यह बहुत ही पुराना शब्द है जिसका मतलब होता है, किसी को जोर से आवाज लगाना! किसी ऊँची छोटी या दूर से!

Bhishma Kukreti

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                          Garhwali Words, now Being Extinct -13



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डंक्वणि = चालाकी से पंहुचाया ग्या नुकसान

डंग्याण = पत्रों वाली जगह

डंड्वाक  = पहाड़ी भालू

डंणसिलु  = दूसरों को सहन न करने वाला 

डक्वति  = झूटी बाते, शेखी 

डडैल  = वस्तु को तेल में पकाने के बाद वर्तन में बचा तेल

डळघास = पेड़ों की पत्तियाँ जो घास के काम आती है , चारे के पेड यथा भीमल, खड़ीक

डांडरा, डांडर, डांडण  = हल लगे दो स्यूं के बीच की बिन जुती जमीन

डमराण = सीं पर सीं हल न लगाकर ऐसे ही बेतरतीब  हल लगाना

डांसि = नुकसान

डाबर = जंगल

डार = झुण्ड , समूह, कतार

डिगण = किसी खाद्य  पदार्थ की तीब्र इच्छा

डिलारू = खेत में मिटटी के ढेल़े फोड़ने का लकड़ी का टुकड़ा

 डीट  = नजर, दृष्टि 

डीप = नीचे की ओर का किनारा

डुकाण = गाय/भैंस के थानों में स्वाभाविक रूप से दूध उतर आणा

डुकौणु - गाय/भैंस के स्तनों को मलासना जिससे दूध उतर जाय

डोंर्या  - डमरू बजाने वाला

डोंर्या (Dounryaa ) =समूह में सबसे ताकतवर या बड़ा

 ड्वैंटा,  ड्वणेटु , द्वणेटु = तेल पिराने के लिए प्रयुक्त लकड़ी


ञ= अनिस्वर बिन्दु




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Bhishma Kukreti

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                    Garhwali Words, Now Getting  Extinct -14

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ढंगच्याळ =प्रबंध, हालत

 ढंगबाणि  =अनुकूल, कहना मानने वाला

ढंट =बदमाश

ढंडक =अस्योग, विरोध

ढंडकौण =बरगलाना

 ढाञट/ ढाञटणि =कुत्ता/कुत्ती

ढाडि  =अफवाह

ढुंढयासु =धान का भूसा

ढुडीर = नितम्ब


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                          Garhwali Words, now Being Extinct -16

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थंवार = दिलासा , संतोष देना

थड़थड़ा (वि.) = रूठे हुए

थरपण   =स्थापित करना

थरा = पेंदा, तला

थांगडु = अकौंट रजिस्टर

थल्ला = तिबारी के नक्कासिदार खम्भों के नीचे के नक्कासी वाले  पत्थर

थातवान = समृद्ध

थाम = उत्तराधिकारी विहीन

थाम = रोकना , थामना

थिन्थरौण = बच्चों को कुछ देकर बहलाना

थोकदार =कुलीन

थोच =पशु के बच्चे द्वारा थनों पर मुंह का धक्का

थोपी = खच्चरों को दी जाने वाली गुद-आते की खुराक

थेपण = अनिछापुर्बक रोटियाँ बनाना

थेपण =चिपकाना

थैस  = आराम



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दंद= झगड़ा , कष्ट

दगडचंद  = जो  हमेशा दोस्तों के साथ रहता हो

दड्यौंण  = किसी भी बरत की संध्या जिसमे सामर्थ्यानुसार भोजन बनाया जाता है

दबड़ाक =बौछार

दमद्यौण =उत्साहित करना

दळकण/ दाकळयण = वर्षा के मलवे के नीचे किसी स्थान का दब जना

दागला = दुखों की कहानी

दाळउ = अधिक वर्षा के कारण गधेरों में आने वाले मिटटी, पथर कंकड़ आदि .

दिंग्थाल़ू  =अधिक मोटापे कारण ठीक से ण चल पाना

दिमटाळ = रसोई में एक सीमा जंहाँ रसोइये के अतिरिक्त कोई अन्य ना जा सके.

दिसावर = परदेश

दिसैरी = मैदानी क्षेत्र का

दिस्वळी/द्यसळी  = मैदानी क्षेत्र का

दुचित्या = दुविधा

दुणासु = गाय, भैंस का एक बर्ष के अन्दर गर्भ धारण करना

दौंकरा फौन्करी  =हाँफते हुए की जाने वाली दौड़ भाग



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Some words missing from normal day-today conversation

Dhaad - Stomach
Lukud  -  Cloth
Buth    -  House Hold Chore.




Bhishma Kukreti

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Garhwali Words, now Getting Extinct -18


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धंकळयोण = धांधली , अव्यवस्था

धंद/धंध  = आश्चर्य, विष्मय

धजबांधण =धनवान होना

धडां =समूह में , एक साथ

धड्वी =पक्ष लेने वाल्, वाली

धड्वे  =मु मदद, सहायता

धन-चन = पालतू पशुओं क समूह

धनालु =  पशुधन वाला

धयेणु =उत्तेजित करना

धर्दारी = माँ, धारक 

धरगस= जिद्दी, हट्ठी

धाद्दि   = दौड़ कर किया जाने वाला पीछा

धिध्राट्या = ऋतु में आया पशु

धिया/धियाण  = कन्या, बेटी, बहन

धुरसाल़ेण /धुरसाल़ेणु =पशु को काबू में करना

धुळएन्क =पत्नी द्वारा उपेक्षित

ध्याणतो  =भांजा

ध्वंका =धुंए में अधिक देर तक रहने से आँखों का दुखना

धऐडु = पहाड़ी ढलान



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                                                Garhwali Words, now Getting Extinct -19

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धौल = चपता

नंगझाड़ =पांव से नाखुनो तक बाल निकालने का कार्य

नंगस्वन्नि  = नाखुनो के पूर

नंग्यूळ = नग्नता

नS  = कुँवें  की पक्की बौडी

 नकटंडि =नटखट

नकथोड़  =नथुने

नक-फक = विपत्ति

नजवाड़ा /नजवाडु  = अनाज के खेत

नट्ठु / नट्ठो =मकई ,  झंगोरे या कोदे के डंठल जो चरे के काम आते हैं किन्तु उन्हें मुन्ग्रेट (मकई का डंठल ) झंग्रेट  (झंगोरे का डंठल ) व कुदेट (कोदे का डंठल ) ही कहा जाना श्रेयकर है 

नठणु  = इनकार करना

नठयण = गुम होना

निठण्याण  = बच्चे का रोना जिसमे वह पुरा रो नही सकता ( ए मेरी ब्व़े !  म्यार नौनु निठण्याणु च )

नडक्यण/ रुस्याण  = गुसा होना

नडयौण्या = पशु बांधने की रस्सी

ननकौण =धमकौण

नरनरु =रूठा हुआ

नर्फ़ट्टा  = कन्धे क नीचे का बजु क भाग

नळग्यञडा= घुटने से नीचे का भाग

नळक- पळक   तीब्र, प्रबल

नवाण =शुरुवात, नये अनाज खाने का शुभ दिन

नसेटि  = भागी हुई, पति गृह छोड़ कर आई हुयी

नाकड़बाजि = जिद्द

नाकड़बाजि= स्पर्धा

नाकिस्ती = बेज्जती

नागळ = कलह , वाद विवाद

नागळी =कलह/वाद विवाद  करने वाला

नाट = निस्संतान

नाड = वेवकूफ

नामल़ो = सीधा -साधा

नामल़ो =सुन्दर, बढ़िया

निंगटन = वर्तन से तरल पदार्थ धीरे धीरे निकलना , निथरना

निकर्तुत्याल़ो  =अकरमणय 

निक्न्याणि =अस्वाभाविक रूप से हंस रही है

निगर= शुद्ध, बगैर मिलावट का, जो खोखला ना हो

निफ्रां= स्वतंत्र , अलग, एकांत

निमका, निम्कि  = बहुत   

निमलु = निर्मल

निरतण = भुगतना, निपटना

निरासिलू/निरासिलो = निर्दई

निस्तुक = निश्चिन्त , चिंता रहित

निस्सोलि =सावधानी पूर्बक, सम्भलकर

नौताड़=  नई आबाद  की गयी जमीन 

न्यासि = तरह, जैसे   

                               कृपया ध्यान दें :



गढ़वाली व्याकरणनुसार   व्यंजनान्त में बडी ई की मात्रा अधिकतर  वर्जित ही है

क, का, को भी गढ़वाली व्याकरण सम्मत नही है 

ष भी प्रयोग नही होता था प्राचीन काल में ष को ख पढ़ते थे 


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पंख्यूड़ = पंख

पंचघेता= किसी के व्यक्तिगत कार्य में दिया जाने वाला श्रम सहयोग जैसे धाण सहयोग करने के एवज में सहयोगी के खेत में धाण करणा

पंचर = सिंचित भूमि

पंचारन  =ललकारना

पंज्वे, पंजोइ  = पंचायत  करने वाला , समझौता करने वाला मध्यस्थ

पच्चार =दो टुकडो को जोड़ने के लिए लगा टुकडा

पSजण =दुधारू गाय/भैंस   के स्तनों से दूध  उतरना

पSजण= धान आदि के पौधों में बाल निकलना

पज्वणि = झंगोरा आदि का मांड

पड़कुंडा =पपड़ी

पड्याळ = काम के बदले काम

पड्वा = गळया= हाल चलाते समय लेटने वाला बैल

पढ़दारु  =विद्यार्थी, पढने वाला

पणकुल़ा =मुंह में बार बार पाणी आना

पणग्वड = धान के खेतों की पहली गुड़ाई

पणतरु = अन्न उधार देने की प्रथा जिसमे उधार व व्याज फसल आने के बाद ही वापिस किया जाता है

पणसारु =पानी ढोने वाला

पणसौणु /संतर्योण = समान को व्यवस्थित ढंग से रखना

पनौला/ भ्वीणा  = पहेली

पन्नौ= पांडव

पयाणु = छेद   

पयाणु =प्रस्थान

पयार = उंचाई पर चारागाह जहाँ पेड ना हों

पराज= पैरों/हथेली पा सुरसराहट जिसका अर्थ की कोई याद कार रहा है

पर्वाण  = पर्वी ण, नेतृत्व के गुण वाला, बिना किसी के कहे कार्य में पहल करना, पहल कनरे वाला

पळछण =तराशना

पलास = सहलाओ

पसाळउ  =हल्का प्रकाश

पस्तौ= मृतक के सगे स्म्बंधिय्यों को सम्वेदना देना,  कन्डोलेंस 

पाडु  = वस्तु विनियम में ड़ी जाने वाली अतिरिक्त वस्तु/  धन राशि

पाण = दराती आदि की धार

पाण= आदत , (सुपाण =भली आदत, कुपाण= बुरी आदत )

पातडि  = पिछले कारनामे

पिचग्व़ाण/बिखल़ाण  =किसी खाद्य पदार्थ से होने वाली अरुचि

पिठा लोटी = आगे पीछे के भाई-बहन

पीठया = सहोदर

पुंजळु =समूह

पुच्याडु =पानी रोकने हेतु अव्यवस्थित प्राकृतिक या मनुष्य कृत घास फूस का अवरोधक

पुणन/ पूण  =भुसयुक्त अनाज को सिर से ऊँचाई से गिराना जिससे भूसा उड़ जाय/  बथौं लगना

पेटरौण = गर्भ ठहरना

पेवण्या = चारा या घास जो पशुओं को दूध दुहने से पहले दिया जाता है

पैलोठ /पैलि पैणि =प्रथम बार बच्चा जनने वाली गाय/भैंसी

पैसार/पैसुक  =फैलाव

पोळेञचु = परेशानी में डालने वाला कार्य, कलंक, आरोप, बकाया

पौंछा/पौंठा  = कलाई   

पौंडळ = जवान भैंसी

पौंळ्या= जवान पशु

पौडि /फैडि  (ड़ + इ ) =सीढ़ी

प्वंस  =ऊँचे स्थान पर होने वाली वर्षा

पौणखि =दावत

प्वथल्या =पक्षी प्रेमी

प्वथल्या= बच्चों का प्रिय या निक नाम

प्यSडा =सुटक या बर्जात वाले परिवार

 


कृपया ध्यान दें :

 

गढ़वाली व्याकरणनुसार व्यंजनान्त में बडी ई की मात्रा अधिकतर वर्जित ही है

क, का, को भी गढ़वाली व्याकरण सम्मत नही है

ष भी प्रयोग नही होता था प्राचीन काल में ष को ख पढ़ते थे


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