Author Topic: Kumauni & Garhwali Poems by Various Poet-कुमाऊंनी-गढ़वाली कविताएं  (Read 78631 times)

Bhishma Kukreti

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सजग सतर्क रे तै,

प्रेरक गढवाली कविता
कविता: अश्विनी  गौड़

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सजग सतर्क रे तै,
कोरोना दूर भगावा,
अफु भी बचा-
अर होरु बचैक,
फर्ज अपडु निभावा।
देशी परदेसी
घौर-गौं जु औंणा,
पैलि
जांच अपडि करावा!
अपडि माटी-थाति का
भै-बंधो मा,
बीमारी ना फैलावा।
देश बिटि जब
घौर-गौं एगिन,
सबसे पैलि नयौंण,
खांसी-जुकाम अर बुखार
जूं मनख्यूं
सि डाक्टर मा पौछौंण।
हर यन लक्षण
जैमा दिखैंदा,
कोरोना त नी होलू?
ना,चिंता-फिकर कन
नी सरमाणू !
अस्पताल चलि जांणू।
खांदि-पैंदि ,
उठदि-बैठदि दौ,
सेनिटाइजर लगावा,
जथ्या बगत भी हवै
सकदू त
हाथ सबुका धुलावा।
ब्यौ-बराती,
अर बर्थडै पार्टी,
भीड़ मा ना क्वच्यावा,
आलतू-फालतू, सैर-बजारु,
कुछ दिनों,
आणु-जांणू छोड़ी जावा।
भेंटण भी नी अर,
हाथ नि मिलाणू!
नजीक सुदि,
कैका भी नी जांणू,
जख तख थूकण,
नाक सिक्न्न,
अर
खासदि दौ,रखा ध्यान,
रूमाल अपडि खीसी बै गाडी
गिच्ची पर टप्प लांण।
बीमारी का जाळ मा,
दुनिया फंसी च,
मनखि लग्या,
सुद्दि मन्न पर,
थोड़ा सजग,
सतर्क रैक सबि
लग्या रौला कुछ कन्न पर।
एकमुठ्ठ सोचि ,
बिचारि हमुन अब,
मन मा ठांणी द्यौंण,
साफ सफै करी,
जागरूक रैक
कोरोना हरौंण
---अश्विनी गौड़ ---दानकोट अगस्त्यमुनि ----

Bhishma Kukreti

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हीत प्रीत हर्चि गै
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Garhwali Poet - कमल जखमोला


ये जsमन को झणि कन ढंग ह्वै गैनी।
हीत प्रीत हर्चि गै,सब बदरंग ह्वै गैनी।।
आवा बैठो नी बुल्याँद गौं मा भी अब।
छ्या सीधा जूँगा,वू भी टेढ़ा बंग ह्वै गैनी।।
जुंअरि शsरबि,चौक तिबारी कब्जेदार।
शरीफ़ों से शायद लोग अब तंग ह्वै गैनी।।
होली दिवाली मा यूँ की ही खिदमत।।
नी पीणा वल़,जयां बित्यां नंग ह्वै गैनी।।
हैरत की बात नी तो और क्या बुलुण।
बिटलर भी अब यूंका ही संग ह्वै गैनी।।
उगटण का दिन ई ही हूँद ह्वाला ‘कमल’।
गौं को यू हिसाब देखी मै जना दंग ह्वै गैनी।।
........कमल जखमोला

Bhishma Kukreti

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  पाणी

गढवाली कविता
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कवि – विवेका नन्द जखमोला
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जीवन की रसधार च पाणी।
ब्वगदी जीवन धार च पाणी।।
कै नि सकदू जीणै कल्पना।
धरती  कू क्वीईई भी प्राणी।।
पाणि बचाणू फर्ज हमारू।
करला तभी जीवन की स्याणी।।
आवा डाल़ी बूटि लगावा ।
बचलु तभी धरती मा पाणी।।
विश्व जल दिवस फरि आवाहन।
हाथ जोड़ि शैलेश  च करणू।।
आवा सब संकल्पित ह्वावां।
मिली जुली बचौंला पाणी।

Bhishma Kukreti

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गढवाली गज़ल
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गजलकार – पयास पोखड़ा

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कुनस कनमेसि का लोग ।
कुनागर कुनेथि का लोग ॥
सच घूळिक झूट बुखाणा ।
गवै दिंदरा पेशी का लोग ।।
ह्वै ग्याई बिंगुणु-बच्याणु ।
ये बूण परदेसि का लोग ।।
सुख्यां डाळा मौळ्यां बुझ्या ।
उतड़्यां कमिबेसि का लोग ।।
सुदि नि छड़ेदां कै दगड़ ।
ह्वैगीं ठुणां ठेसि का लोग ।।
आंख्यूं मा आंसु हैंसणा छन ।
उलखणि हैंकिमेसि का लोग ।।
लंग्वट्या छीं त्यारा "पयाश"।
करणा ऐसी तैसी का लोग ।।
© पयाश पोखड़ा 22/03/2020.

Bhishma Kukreti

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"खंतुड़ु फुक्यां सि"
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पयास पोखड़ा की गढवाली कविता
*
***************
चौका का तिर्वळि बैठ्यां छवा,
खंतुड़ु फुक्यां सि ॥
सग्वड़ा की ढिस्वळि घैंट्यां छवा,
ठंग्रा सुख्यां सि ॥
हैळ,तांगळ,ज्यू,जिमदरु,खैरि,पस्यौ ।
बांजि पुंगड़ि जनै पैट्यां छवा,
स्वीणा लुक्यां सि ॥
खंतुड़ु फुक्यां सि ॥
सुपिना किनमजात सुनिंद प्वण्या छन ।
किळै बिजळण फर बैठ्यां छवा,
कुकर भुक्यां सि ॥
खंतुड़ु फुक्यां सि ॥
खुचिलि मा त कभि पीठि मा बैठि ।
आज भि घ्वाड़ा जन कस्यां छवा,
कमर झुक्यां सि ॥
खंतुड़ु फुक्यां सि ॥
पुंगुड़ु बांदा बांदा निसुड़ु निखुळि ग्याइ ।
बंसुलु अच्छण्याट बंदळु बण्यां छवा,
च्यौलु ठुक्यां सि ॥
खंतुड़ु फुक्यां सि ॥
ळाळ चाट भुक्कि प्याई कखर्यळि सिवाळु,
आज लूण सि पण्यां छवा,
थूक थुक्यां सि ॥
खंतुड़ु फुक्यां सि ॥
ताड़ लगीं आंखि अभि बुजै नि साकी ।
जग्वळ्या जोगी जण्या छवा,
प्राण रुक्यां सि ॥
खंतुड़ु फुक्यां सि ॥
@पयाश. पोखड़ा

Bhishma Kukreti

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""""""" कोरोना""""""""""""""
Garhwali Poem
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गढवाली कविता
शिव दयाल शैलेज

--
आदिकाल बटि ;आज तलक !
मनखी सुखै बान भटगुणू !
पर सुख पिछनै तबि बटि ;
दुःख अटगुणू !!
कबि रोजऽ डौ -पिड़ा ;
जैर-मुंडरू त लग्यूं हि छ !
त कबि कबि दैवी आपदा ;
भ्वींचळो ;बाढ़ ;अर सूखा ;
त कबि कबि अतौणि बतौणी !
अर कबि महामारी !
पैली हैजा ;चेचक ,
मलेरिया जन ;
महामारी छाई।
पर मनखीन ;
विज्ञान दगड़ि मीलि कै ;
नै नै दवै आविष्कार कै ;
जिन्दगी या जंग जीत द्याई ।
पर यीं जीत मा कतनै ;
प्यारा रिश्ता हारी ग्याई !!
महामारियूंन हि त सिखै होलू !
बिंगै होलू !
हमरा ऋषि मुनियों तैं ;
भारतीय संस्कृति का ;
आदि पुरखौं तैं ;
तबि त वैदिक संस्कृति मा ;
द्वी हात जोड़ि प्रणाम !
त्रिकाल संध्या ;पंचमहायज्ञ !
एकान्त ध्यान ;धूप दीप ;अर पूजा पाठ!
स्वच्छता पैलो संस्कार राई ।
तब गर्भाधान से लेकि ;
अंत्येष्टि कर्म तक ;
सोळा संस्कार बणै गिन !
मनख्यात तै श्रेष्ठ मारग बतै दिखै गिनी !
पांच तत्व का ये मंदिर तैं "
तीन गुणों का सूत से बांधि गिनी !
सात्विक ;राजसिक;अर तामसिक ;
भौजनै गुण बथै गिनी !
पर पीड़ा ;पर्या गैती मांगस ;
खाणू पाप ;
अर निरबल तैं सताणू ;मरणू ;
सगत निषेध कै गिनी !!
तबि त छौ भारत विश्व गुरू!
पर बगछट ह्वैग्या मनखी !
सरै दुन्या जीव जन्तुओं तैं ;
मरि मरि खाणू !
चखुला ;कीड़ा मकोड़ू खैकि ;
वूंकी बीमारी ;
हौरि मनख्यूं फरि सराणू!
अबि भि चेति जावा !
भगवान से विनती कारा !
हे प्रभो ! तेरी कुदरत मा ;
अनेई ;अत्याचार नि करुला !
पर अब अगनै इनु कबि होना !
जतगा डाडू डाडू ;बकै थकै इनै गाडू ;!
बिना नुकसान कर्यां ;
विदा ह्वै जयां कोरोना !!
प्रलय की झलक दिखै गे कोरोना !
पर अब विदा ह्वै जयां कोरोना !!
""""""शिवदयाल शैलज """""""


Bhishma Kukreti

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कोरोना की छ डर सुवा हो

प्रेरक गढवाली कविता : देवेश जोशी


कोरोना की छ डर सुवा हो
अपणा घोल बैठि रौंला हो,हो।
बसंत रितु की कनि बहार सुवा हो
ज्यू बोदू सैल करि औंला सुवा हो, हो।
बच्यां रौंला त् सैल फेर सुवा हो
चल हथ-खुटि ध्वैइ खौला सुवा हो,हो।
मैतैकि भारी खुद सुवा हो
मैं मैत छोड़ि आवा सुवा हो,हो।
मैत न सैसुर, देस न पाड़ सुवा हो
जखि छन वखि रौंला सुवा हो,हो।
@देवेश जोशी


Bhishma Kukreti

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गढ़वाली गज़ल
जलकार – पयाश पोखड़ा

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कुनस कनमेसि का लोग ।
कुनागर कुनेथि का लोग ॥
सच घूळिक झूट बुखाणा ।
गवै दिंदरा पेशी का लोग ।।
ह्वै ग्याई बिंगुणु-बच्याणु ।
ये बूण परदेसि का लोग ।।
सुख्यां डाळा मौळ्यां बुझ्या ।
उतड़्यां कमिबेसि का लोग ।।
सुदि नि छड़ेदां कै दगड़ ।
ह्वैगीं ठुणां ठेसि का लोग ।।
आंख्यूं मा आंसु हैंसणा छन ।
उलखणि हैंकिमेसि का लोग ।।
लंग्वट्या छीं त्यारा "पयाश"।
करणा ऐसी तैसी का लोग ।।
© पयाश पोखड़ा 22032020.
Garhwali Ghazal by Payash Pokhda

Bhishma Kukreti

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निरबै कुरोना
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एक समसामयिक गढ़वाली  गीत
गीतकार यतेन्द्र गौड़ ,

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कैन जण्नु छौ हमुथै यू दिन बि दिख्यालौ
निरबै कुरौना यन् काळ बणिकि आलौ
डौर भौ छोडिकि फेर हिकमत करला
सबि मिलि जुलिकि येकू संघार करला।।
सैरि दुन्या मा सुरूक निरबै पसरै ग्याई
बाळा ज्वान दानों पर यो सरै ग्याई
ना दिखेणू ना पच्छेणू क्वी क्य जि कार
लुकिछिपि कनु छ यो, अपणि लुकि मार।।
गौळ भिंटै हथ मिलौ न कत्तै ,भै बन्धौ
छांटु रा कखि सुद्दि नि जावा भै बन्धौं
जाण बि प्वाडल त् चित्वळचंट रावा
यीं निरबै बिमरि थै तुम दूर भगावा ।।
मोदी जि क बथैं बाटू भयूं याद रख्यांन
देशहित मा सबि अपणु योगदान द्यान
एकजुट एकमुट ह्वेकि ईं लडै लडला
हारलू कुरोना अर हम जरूर जितला ।।

गीत रचना-यतेन्द्र गौड "यति"

Bhishma Kukreti

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करोना कु उपचार दूर रावो
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कविता - मधुर वादनी  तिवारी
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जु होंणु इबारी विश्व मा
डरणै बि बात छ,
डोर क्वै उपचार नी
सुरक्षा अफरे हात छ!
हाति ध्वावा घडि घडि
साफ,सफै चौत्तरफि रखा!
आवत जावत बन्द करिक
अफरा ज्यू तैं बस मा करा!!
ओरु देश का खातिर त
य बिचित्र सी बात छ
हमारी संस्कृति समाज मा
या रचि बसि मनख्यात छ
हात जोडी प्रणाम करणुं
खुट्टा ध्वैक भितरू जाणु
जुडबुड अफरि धाण निभोंणु
पूजा संध्या आरती डुलोंणु
सदानि बिट्यू रिवाज छ!
अफरि सुरक्षा अफ्यु रखण
य अफरे हाते बात छ!
दगड्या कुछ दिन करा किनारा
चटोरि जीब फर डाम धरा!
जीवन छ अनमोल हमारू
ये चौला कु ध्यान करा!!
मनखि कैं कुछ ओखू नि छ!
यीं बात तैं सै साबित करा!!
पैली बिंगा तब छांणा पूंणा
जोड ,घटावा,करल्या गुंणा
जु सै बोलणु वै ढंग से सूंणा
सावधानि उपचार छ
रोग ब्याधि से बचिक रणुं
अफरा हाते बात छ!!
हम सब भारत वासी छां
देश कु सम्मान करा!
हैका देश कि कुबिमारी
देश से दुत्कार ! करा
बलसाली सब्बि बण्यां रवा
कोरोना की हार करा
कोरोने हार करा......
मधुररवादिनी तिवारी
23-3-2020


 

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