Author Topic: Kumauni & Garhwali Poems by Various Poet-कुमाऊंनी-गढ़वाली कविताएं  (Read 74448 times)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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कथगा खैल्या

कवि :नरेन्द्र सिंह नेगी (पौड़ी गाँव, पौड़ी )

1- Stanza
कमीशन कि मीट भात, रिश्वत को रेलों
कमीशन कि शिकार भात, रिश्वत को रेलों
रिश्वत को रैलो रे ...
बस कर बै ! बिंडी ना सपोड़ अब कथगा खैल्यौ ..
कथगा जि खैलो रे ...
यनि घुळणु रैल्यो , कनकै पचैल्यो
दुख्यारो ह्व़े जैल्यो रे
कमीशन कि मीट भात, रिश्वत को रेलों
रिश्वत को रैलो रे
बस कर बै ! बिंडी ना सपोड़ अब कथगा खैल्यौ
Stanza -2
घुण्ड -घुन्ड़ो शिकार -सुरवा कमर-कमर भात रे
भात रे भात बासमती भात
घुण्ड -घुन्ड़ो शिकार -सुरवा कमर-कमर भात रे
इथगा खाण -पचाण तेरे बसै बात रे ..
मैगे की मरीं जनता ..हे जनता ..
कनक्वे बुथैल्यो रे...
बस कर बै ! बिंडी ना सपोड़ अब कथगा खैल्यौ
Stanza -3
नयो नयो राज उत्तराखंड आसमा छन लोग
लोग जी लोग आसमा लोग
नयो नयो राज उत्तराखंड आसमा छन लोग
बियाणा छन डाम यख लैन्दो को छ जोग
कुम्भ न्हेगे भूलू ..हे भूलू ...
अब आपदा नहेल्यो रे
बस कर बै ! बिंडी ना सपोड़ अब कथगा खैल्यौ

Stanza -4

नियुक्त्युं की रस मलाई , ट्रांसफ़रों को हलवा
हलवा रे हलवा सोहन हलवा
नियुक्त्युं की रस मलाई , ट्रांसफ़रों को हलवा
माना कि भागमा तेरा , चेलों को जलवा
चेलों को जलवा , चेलों को जलवा
बिंडी मिट्ठो नि खलौवु त्यूँ सूगर बढी जालो रे
बस कर बै ! बिंडी ना सपोड़ अब कथगा खैल्यौ
Stanza - ५
छप्पन डामों की डड्वार कै कैन बांटी
बांटी रे बांटी कै कैन बांटी
छप्पन डामों की डड्वार कै कैन बांटी
स्टरडिया की रबडी कथगौन्न चाटी
कथगौन्न चाटी कथगौन्न चाटी
बारम चुनौ छ भूलू हे भूलू ..
हंसल्यो कि रोल्यो रे
बस कर बै ! बिंडी ना सपोड़ अब कथगा खैल्यौ
Stanza- 6
कमीशन को डेंगू रोग . सर्यीं दिल्ली मा फैल्युं
फैल्युं रे फैल्युं रे दिल्ली मा फैल्युं रे
कमीशन को डेंगू रोग . सर्यीं दिल्ली मा फैल्युं
नेता अफसर लीगेनी भोरी भोरी थैल्युं रे
भोरी भोरी थैल्युं, भोरी भोरी थैल्युं
भोरे गेन बिदेसी बैंक ..हे बैंक
भोरे गेन बिदेसी बैंक .अब कख कुचोल्यो रे
बस कर बै ! बिंडी ना सपोड़ अब कथगा खैल्यौ
Stanza -7
रास्ट्रमंडल खेल टू जी घोटाला
घोटाला रे घोटाला टू जी घोटाला
रास्ट्रमंडल खेल टू जी घोटाला
अरबों .खरबों को माल लगेयाली छाला
लगेयाली छाला , लगेयाली छाला
ये देस की लाज प्रभो कनक्वे बच्योले रे ....
बस कर बै ! बिंडी ना सपोड़ अब कथगा खैल्यौ

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ससोड़ ले दारु ,पेल ले दारु
विद्वान कवि ; पूरन पंत 'पथिक'
अहा दारु , वाह दारु
इख दारु , उख दारू
तख दारू , कख नी दारू
ले दारु , पे दारु
राजस्व बढ़ौ दारू
माफिया बणौ दारू
चुनाव जितौ दारू
भाषणो आधार दारु
कवि सम्मेलनों पछ्याण दारु

सूंग दारु , सुंगा दारु
पे दारु पिलौ दारु
जनमबार मा दारु
नामकरण मा दारु
मुंडन मा दारु
जंद्यो लींद दैं दारु
ब्यौ बरात्यूं दारु
भितर पैंचिम दारु
घड्यळम दारु

मुर्दाघाट मा बरजाति दारु
तिरैं मा बामणु भोग दारु
बरखी मा शुद्ध होणो दारु
शराध मा अभागण दारु
सर्वशक्तिमान दारु
असली पहलवान दारु
कुर्सी चारपाया दारु
ऐंच दारु , निस दारु
चखळ पखळम दारु
कळच पळचम दारु
आपणो परायो दारु
स्वर्ग बि दारु , नरक बि दारु
राजनीति का मर्म दारू
दरवड्यों धर्म दारू
प्रेम दारु , गुस्सा दारु
खुसी दारु , दुःख दारु
देव दारु , पिचास दारु
अर्दली दारु , वीआईपी दारु
नीली बत्ती दारु , लाल बत्ती दारु
पंचायत दारु ,ब्लॉक दारु
जिला दारु , प्रदेश दारु
पार्टी दारु , बयान दारु
सत्ता -प्रेस दारू ही दारु
कार दारु , जीप दारु
टैक्सी दारु , क्या नी दारु
सरकारी दारु , प्राइवेट दारु
फौजी दारु , स्मगल्ड दारु
कुटीर उद्योग दारु
छि बि दारु , ला तब दारु , हाँ तब दारु
चंदा कुणि बहाना दारु , सब मा दारु
हाँ मि दारु , तू दारु , वह दारु
वाह दारु , आह दारु
बाड़ा बि दारु , काका बी दारु
नाती दगड़ ददा बि दारु
टीचर बि दारु , च्याला बि दारु
मिनरल वाटर संग दारु
ढँढिक पाणिमा दारु
निथर नीट ही सै पर पेल ले दारु
फ़ोकट की , वाह दारु
अपण खीसाकी , आःह दारु
भलो बुरो काज दारु
जोड़ दारु
तोड़ दारु
भेंट दारु
तिकड़म दारु
रिसवत दारु
मार दारु , सार दारु
वाह दारु , धन्य दारू
गिच्च बंद कर दे दारु
जै दारु ! वाह दारु !

Copyright @ Puran Pant 'Pathik' Dehradun
garhwali.dhai100@gmail.com
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तोतकृष्ण गैरोला (1895 -भग्यान, द्यूळ , लस्या टिहरी गढ़वाल ) की कविता
इंटरनेट प्रस्तुति -भीष्म कुकरेती

श्रीधर सेठ
रौंत्याळा सिरधूर गाऊं भर मा गोधूळि का साजमा
दौ धौळी भरपाळि काळि घरऔ पांखे गूंजी गाजमा
लैंजे लगिन खोळिऊं तईं सजी बाछे अड़ाई अमा
बौळैणी थण थामि पंहुची हुंकारदी चौकुमा
औणी रमकदि झम्कदि बणु बिटे ब्वारी घणी घाणिमा
नान्हा दनकिनि दाणि छाणि मई दे द्येली तू जाणिमा
रासे भक्कर की पुणीक पड़नी खार्योंन कोठारुमा
तै गौं मा सुख शान्ति शर्द ऋतू मा ये तौर होणी जमा
(शेष …… )


स्वच्छ भारत ! स्वच्छ भारत ! बुद्धिमान भारत !

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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~अतुल्य उत्तराखंड~
देवभूमि च जे कू नाम, इन च हमर अपणु अतुल्य उत्तराखंड
संस्कृति अर संस्कार छन विरासत, इन पछाण च उत्तराखंड
गढ़वली, कुमौनी, जौनसारी जन भासा बढेदीन हमरी सान
डांडी - कांठी कू मुल्क, इख क धरती च हमर मान सम्मान

स्कन्द पुराणों मा उदृत च नौ कुर्माचल अर केदारखंड जे क
ऋषि अर मुनियों क च जख धाम, तपोभूमि बुल्दीन नाम वे क
बावन गढ़, चार धाम, पंच प्रयाग यी भूमि ते पावन छन बणाणा
गंगोत्री - जमनोत्री अजी भी छन जनमानस की तीस बुझाणा

कुमाॐ मंडल मा अन्दिन जिला अल्मोड़ा, चम्पावत, बागेश्वर
नैनीताल, पिथोरागढ़ अर दगड मा आंद वेक उधम सिंह नगर
गडवाल मंडल म अन्दिन जख पौड़ी, टिहरी, चमोली, हरिद्वार
रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी अर देहरादून, जख बटी चलदी सरकार

धौली, विष्णु गंगा अर मंदाकिनी छन अलकनंदा ते सजाणा
होंस, गिरी अर आसन नदी छन यमनोत्री की सान बढ़ाणा
राम गंगा, सोंग नदी, कोसी, गोमती गौरी अर पिंडर नयार
बगणा छन बिना रुक्याँ थक्याँ अर छन उत्तराखंड कू शृगार

म्याला थोलो की च या धरती, बारा बरसू मा आँद जख कुम्भ म्याला
दिबता बुलान्दीन जख जागर, डौंर थाली ढोल दमो छन वूका खेला
फूलो क घाटी, औली, चकराता, कोसानी, अर लैंसडौन ते नी भूल्या
ऋषिकेश, मसूरी, भीमताल अर हेमकुंड साहिब कू बाटू छन खुल्या

संस्कृति अर प्रकृति जख हंसदी खिल्दीन, घुघती जख रैबार पहुंचेदीन
कुयेड़ी जख खैरी सुणान्द, बुरांश अर फ्योली हमर पहाड़ ते सजादीन
बेडू, तिम्ला, हिसरा, काफल, झुंगर,बाड़ी कफली गीच मा पाणी लियांदीन
झोडा, छपेली, न्योली त रणसिंग, भेरी, मशुकबाज दगड रंगत मचेदीन

गीत संगीत पहाडा कू, खान्णी पीणी पहाड़ा की, घूमण घुमाण पहाड़ मा
अफ़ी आवा, दगडयो ते लावा, उत्तराखंडे की रौंतेली सान देखि कं जावा
छ पूरो बिस्वास मीते ‘प्रतिबिम्ब’, उत्तराखंड क अच्छू दिन बौडी क आला
भासा साहित्य भी खूब छ्वीं लगाला, खैरी न खुसी क दिन वापस आला
- प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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माणा की बिरही (गढ़वाली मेघदूत ) (1950 से पहले की कविता )
रचना - सदानंद जखमोला (1901 -1977, चंडा , शीला पट्टी , पौड़ी गढ़वाल )
इंटरनेट प्रस्तुति --भीष्म कुकरेती

रांसो सी या हुड़कि बजदो ताल कांसो कंस्याळ
नन्ना भै की खितकणी जसी भौण सी माळुसै की
सौंजड्या की मलकणि जसी स्यूंद सी ह्यून्द बौ की
बिळमें दींदा बिकळ मन कु बौळ बगदी छिचाड़ी

xxx xxx
जैंकि होली कुरळी मनमा जैकु घंगतोळ नाड्यूँ
झूली का जो भंबड़ि पगळी डांडि ढळकी सिं आणी
आंशू जेँ का पलक पकड़ी खैरी लांदा झुमैला
स्या होली मयळि मुखड़ी मेरी रुपए निशाणी।

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कथगा खैल्या

कवि :नरेन्द्र सिंह नेगी (पौड़ी गाँव, पौड़ी )

1- Stanza
कमीशन कि मीट भात, रिश्वत को रेलों
कमीशन कि शिकार भात, रिश्वत को रेलों
रिश्वत को रैलो रे ...
बस कर बै ! बिंडी ना सपोड़ अब कथगा खैल्यौ ..
कथगा जि खैलो रे ...
यनि घुळणु रैल्यो , कनकै पचैल्यो
दुख्यारो ह्व़े जैल्यो रे
कमीशन कि मीट भात, रिश्वत को रेलों
रिश्वत को रैलो रे
बस कर बै ! बिंडी ना सपोड़ अब कथगा खैल्यौ
Stanza -2
घुण्ड -घुन्ड़ो शिकार -सुरवा कमर-कमर भात रे
भात रे भात बासमती भात
घुण्ड -घुन्ड़ो शिकार -सुरवा कमर-कमर भात रे
इथगा खाण -पचाण तेरे बसै बात रे ..
मैगे की मरीं जनता ..हे जनता ..
कनक्वे बुथैल्यो रे...
बस कर बै ! बिंडी ना सपोड़ अब कथगा खैल्यौ
Stanza -3
नयो नयो राज उत्तराखंड आसमा छन लोग
लोग जी लोग आसमा लोग
नयो नयो राज उत्तराखंड आसमा छन लोग
बियाणा छन डाम यख लैन्दो को छ जोग
कुम्भ न्हेगे भूलू ..हे भूलू ...
अब आपदा नहेल्यो रे
बस कर बै ! बिंडी ना सपोड़ अब कथगा खैल्यौ

Stanza -4

नियुक्त्युं की रस मलाई , ट्रांसफ़रों को हलवा
हलवा रे हलवा सोहन हलवा
नियुक्त्युं की रस मलाई , ट्रांसफ़रों को हलवा
माना कि भागमा तेरा , चेलों को जलवा
चेलों को जलवा , चेलों को जलवा
बिंडी मिट्ठो नि खलौवु त्यूँ सूगर बढी जालो रे
बस कर बै ! बिंडी ना सपोड़ अब कथगा खैल्यौ
Stanza - ५
छप्पन डामों की डड्वार कै कैन बांटी
बांटी रे बांटी कै कैन बांटी
छप्पन डामों की डड्वार कै कैन बांटी
स्टरडिया की रबडी कथगौन्न चाटी
कथगौन्न चाटी कथगौन्न चाटी
बारम चुनौ छ भूलू हे भूलू ..
हंसल्यो कि रोल्यो रे
बस कर बै ! बिंडी ना सपोड़ अब कथगा खैल्यौ
Stanza- 6
कमीशन को डेंगू रोग . सर्यीं दिल्ली मा फैल्युं
फैल्युं रे फैल्युं रे दिल्ली मा फैल्युं रे
कमीशन को डेंगू रोग . सर्यीं दिल्ली मा फैल्युं
नेता अफसर लीगेनी भोरी भोरी थैल्युं रे
भोरी भोरी थैल्युं, भोरी भोरी थैल्युं
भोरे गेन बिदेसी बैंक ..हे बैंक
भोरे गेन बिदेसी बैंक .अब कख कुचोल्यो रे
बस कर बै ! बिंडी ना सपोड़ अब कथगा खैल्यौ
Stanza -7
रास्ट्रमंडल खेल टू जी घोटाला
घोटाला रे घोटाला टू जी घोटाला
रास्ट्रमंडल खेल टू जी घोटाला
अरबों .खरबों को माल लगेयाली छाला
लगेयाली छाला , लगेयाली छाला
ये देस की लाज प्रभो कनक्वे बच्योले रे ....
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ससोड़ ले दारु ,पेल ले दारु
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अहा दारु , वाह दारु
इख दारु , उख दारू
तख दारू , कख नी दारू
ले दारु , पे दारु
राजस्व बढ़ौ दारू
माफिया बणौ दारू
चुनाव जितौ दारू
भाषणो आधार दारु
कवि सम्मेलनों पछ्याण दारु

सूंग दारु , सुंगा दारु
पे दारु पिलौ दारु
जनमबार मा दारु
नामकरण मा दारु
मुंडन मा दारु
जंद्यो लींद दैं दारु
ब्यौ बरात्यूं दारु
भितर पैंचिम दारु
घड्यळम दारु

मुर्दाघाट मा बरजाति दारु
तिरैं मा बामणु भोग दारु
बरखी मा शुद्ध होणो दारु
शराध मा अभागण दारु
सर्वशक्तिमान दारु
असली पहलवान दारु
कुर्सी चारपाया दारु
ऐंच दारु , निस दारु
चखळ पखळम दारु
कळच पळचम दारु
आपणो परायो दारु
स्वर्ग बि दारु , नरक बि दारु
राजनीति का मर्म दारू
दरवड्यों धर्म दारू
प्रेम दारु , गुस्सा दारु
खुसी दारु , दुःख दारु
देव दारु , पिचास दारु
अर्दली दारु , वीआईपी दारु
नीली बत्ती दारु , लाल बत्ती दारु
पंचायत दारु ,ब्लॉक दारु
जिला दारु , प्रदेश दारु
पार्टी दारु , बयान दारु
सत्ता -प्रेस दारू ही दारु
कार दारु , जीप दारु
टैक्सी दारु , क्या नी दारु
सरकारी दारु , प्राइवेट दारु
फौजी दारु , स्मगल्ड दारु
कुटीर उद्योग दारु
छि बि दारु , ला तब दारु , हाँ तब दारु
चंदा कुणि बहाना दारु , सब मा दारु
हाँ मि दारु , तू दारु , वह दारु
वाह दारु , आह दारु
बाड़ा बि दारु , काका बी दारु
नाती दगड़ ददा बि दारु
टीचर बि दारु , च्याला बि दारु
मिनरल वाटर संग दारु
ढँढिक पाणिमा दारु
निथर नीट ही सै पर पेल ले दारु
फ़ोकट की , वाह दारु
अपण खीसाकी , आःह दारु
भलो बुरो काज दारु
जोड़ दारु
तोड़ दारु
भेंट दारु
तिकड़म दारु
रिसवत दारु
मार दारु , सार दारु
वाह दारु , धन्य दारू
गिच्च बंद कर दे दारु
जै दारु ! वाह दारु !

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Shailendra Joshi
 

कारगिल विजय दिवस की शुभकामना साथ कारगिल लड़ाई से जुड़ा नेगी दा के
गीत से जुडी चंद लाइन
कारगिले लड़े मा छौ
पलटनों आदेश चा
तू यखुली रुवे न माजी
मै दगडी गढ़वाल रेजिमेंट चा
रॉयल गढ़वाल छीन हमारी
जीतनु पीसा च हमरु .
तिरंगा कु हो कफ़न तन मा
ये आखिर ख्वेइस च

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Shailendra Joshi
July 24 at 6:22pm ·

दुन्या की तिरवेणी मा
म्यरी अंसुलै सरसुती
ह्वेकी बि नि दिखली
इतगा जिद्द तेरी त
तिल दिखण ही दिखण
सरसुती म्यरी
त बस
दिखा जाली त्वैकु बि
बस जिकुडा तै
कावंसु करी दे अपणा .........शैलेन्द्र जोशी

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Shailendra Joshi
July 23 at 1:11pm ·

पैली नि देखी कबि
त्वैकु इन्नु सजी धजी
कख जानि
रंगली पिंगली बनी हो
पैली नि पूछी कबि कैन
आज पूछी त बतै द्यौ
जवनि ऐगी मैमू
कै पायी कै चितई
जवनि देखी तिन भयी
चकोर सी आँखि
ह्वेगी दुन्या की म्यरी
जवनि देखी
यी जवनि सिंगार कु
क्वी त मायादार
होलु साँचु
अब साँचु हो या काचु
अबि त जवनि का
रंग मा रंगयु च
सच बोलू त तेरु
रूप देखी आज मि
ढगै ग्यो
सच्ची तू ढगै त
क्या चकडैती
नौ च जवनि .........शैलेन्द्र जोशी

 

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