Author Topic: Satire on various Social Issues - सामाजिक एवं विकास के मुद्दे और हास्य व्यंग्य  (Read 100138 times)

Bhishma Kukreti

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                          सन २०११ ई. क ल्याखा ज्वाखा (कुछ खास घटनाअं )     
         

   (Garhwali Satire, Garhwali Humour, Himalayan Language Satire, Satire from Uttarakhandi Languages)

                                भीष्म कुकरेती
 

             उन त कै बि सालौ लेखा जोखा दीण कठण इ होंद. जन जन आँखी तन तन घटनाउं दिखण मा विवधता ह्व़े जांदी.
 
हमखुण ज्वा बात  गौड़ बियाण जन महत्वपूर्ण होंदी हैंका कुण मूसी  बियाण जन तुच्छ बात होंदी. मनमोहन सिंग सिद्धान्तुं

मा हींग हगण (गरीबी ) हटौणो बान सिरफ़ अमीरों तैं प्रश्रय दिए जांद त भारतीय कम्युनिस्टी  निष्ठा मा अमीरुं अर अमीरी

क ईं धरती मा क्वी काम इ नी च.  मनमोहन सिंह क सिधांत गरीब हटाण चान्दन अर अमीर ल़ाण चान्दन त भारतीय

कम्युनिस्टी निष्ठा अमीरुं तैं मिठाण चांदन. गरीबी हटौणे कौंळ द्वी जगा गवे इ लगाणि रौंदी अर इन मा गरीबी हटौणे

  कौंळ द्वी जगा पैथर इ रै जांदी 

        अब द्याखो ना भाजापाई  मुंडअळी (हाई कमांड ) न  डा रमेश पोखरियाळ तै मुख्य मंत्री क खुर्सी बिटेन धकये द्याई

अर भुवन चंद खंडूड़ी  तैं मुख्य मंत्री क खुर्सी मा दुबर चिपकै द्याई. डा पोखरियाळ  कु  जाण अर खंडूड़ी क दुबर आण भारतीय

जनता पार्टी क दोगला पन की पोल खुल्दी. ये भै पैल त तुमन इमानदार मुख्यमंत्री हटायि अर फिर जब पोखरियाळ राज मा

जब तबादला उद्यम मा बढ़ोतरी, घूस -भ्रष्टाचार को राज ह्व़े अर जगा जगा भाजापाई सरकार की जग-हंसाई हूण लगी, चुनौ 

नजीक आण लगीन त भाजापाई मुंडअळी (हाई कमांड ) न सर से रमेश पोखरियाळ की जगा खंडूड़ी तैं खुर्सी मा पतकै दे .

वाह ! भ्रष्टाचार, भ्रस्टाचार्युं तैं टिक्क्वा (सह, समर्थन) दीण अर दगड मा अपणि छवि बि बणे क रखण हैं ? इ द्वी चीज

कबि दगड़ी ह्व़े सकदन ? अच्छा ! भुवन चन्द्र तैं मुख्यमंत्री क खुर्सी मा बिसौण ( थक  उतारने हेतु बैठना ) जन धौर  त दे पण

जु कारिन्दा , मंत्री डा रमेश क दगड छ्या उंकी खुर्सी जन्या की तन्नी . य़ी भाजापाई वल़ा अबि बि जनता तैं सीधा साधा नि

समजदन बलकण निरपट लाटो , कालो , बेवकूफ समजणा छन, उंह !  क्या अबि बि २०११ मा जनता बेवकूफ च ? जु

भाजापा क दियीं भुवन चन्द्र खंडूड़ी नाम की खिळवणि/पिंपरी  से बौगे जाली ?

          डा मनमोहन सिंह क आर्थिक सिद्धांत की पोल त हौरी बि तब खुल जब प्लानिंग कमीसन न भारतीयुं तैं सन २०११ मा बताई बल

भारत मा गरीब तीन चार सौ रूप्या मा अपण घौर चलै सकद बल. वाह ! डा.  मनमोहन सिंह क सिद्धांत ! वाह ! जख अम्बानी सरीखा

अमीर क तीन चार सौ कमरों क ड्यारौ  खर्चा सालाना तीन चार सौ करोड़ रूप्या ह्वाऊ वख गरीब तीन चार सौ रुपया मा जिंदगी जी ल्यालु !

मनमोहन सिंह जी ! आग लगावा  तै सिद्धांत पर, गुज्यर चुलाओ  तैं सिद्धांत तैं.

             गद्दाफी की हत्या अर मुबारक हुसैन को राज पाठ छोडिक जाण बथान्दन बल जब तलक अमेरिका जन डमडमो,  स्वार्थी देश को

हाथ  पैथर राओ त कुकर्मी, निर्दयी, नीच तानाशाह बि भौत सालों तक राज कॉरी सकद अर जै दिन अमेरिकी स्वार्थ पूर्ती बन्द ह्वाई ना

की प्रजातंत्र बहाली क नाम पर  गद्दाफी की  मौत होली अर मुबारक हुसैन तैं राज पाठ छुड़ण पोडल. कनी बि अमेरिका की  गुलामी करण

आज एक परम, अटल सत्य च 

     अमेरिका क सेना क इराक बिटेन जाण बि ये साल की बडी घटना च अर अमेरिका की फ़ोकट की धौंस बाजी, रौबबाजी , हेकड़ी बाजी

को एक ज्वलंत उदारण  च . अमेरिका तैं अपुण देस मा छोडिक प्रजातंत्र की कबि बि चिंता नि राई अमेरिका  तैं त बस अपण स्वार्थ पूर्ति अर रौब दाब इ चयेणु च .

         सन २००१ के अभिन्न घटना - टू जी स्कैम अर कॉमनवेल्थ गेम्स घुटाल़ा बथान्दन बल हर जुग मा धृतरास्ट्र काणो/अंधा  राजा ही पैदा होन्दन. डा. मनमोहन सिंह तैं इमानदार

प्रधान मंत्री माने जांद पण म्यारो बुलण च मनमोहन सिंह से बड़ो काणो/नेत्रहीन /अंधा/स्वार्थी  राजा (प्रधान मंत्री) आज तक भारत मा ह्वाई नी च . अरे

 पाणी भर्युं घौड़ जरा सी बि फुटदो त आस पास हीलू ह्व़े जांद. अर हमारा दर्शन -न्याय/तर्क  शास्त्र हिसाब से हम तैं पता चौली जांद बल घौड़ मा

पाणी छौ . त हे मनमोहन सिंह जी  (जु इमानदार प्रधान मंत्री छन) !  तुम तैं पता इ नि चौल बल तुमर राज मा इतिहास जनक घोटाल़ा/घपला/गडबड/गोलमाल

 होणा छन?वाह ! जनाब इमानदारी का पुतला ! तुम से बड़ो काणो राजा त धृतरास्ट्र  बि नी ह्वाई. इमानदारी को द्यू /दिया मनमोहन सिंह जी !   धृतरास्ट्र त आँखों अंधा/काणो

छौ पण तुमन सिद्ध करी दे बल कन स्यूं आँखों का बि कन अंधा /काणो  हुए सक्यांद अर जब भविष्य मा बच्चों तैं  स्यूं आँखों का कन अंधा/काणो हुए जांद

का उदाहरण दिए जाला त बुले जालो बल डा. मनमोहन सिंह माने स्यूं आँखों काणो /अंधा मनिख. इमानदार मन मोहन  सिंह जी ! आपन अर्थ शास्त्र मा डॉक्टरी कार

आप रिजर्ब बैंक का गबर्नर   बि रैन त साब , त जनाब ! इमानदार प्रधान मंत्री जी ! अप बि जाणदा हवेला की मैंनेज्रियल अकौंटिबिलिटी अर रिस्पोंसिबिलिटी क हिसाब से त

आपका प्रधानमंत्रित्व काल मा हुयां स्कैम का असली दोषी/पापी/कसूरवार/अभियुक्त/मुजरिम   आप ही छन कि ना ? इमानदार प्रधानमंत्री जी  ! क्या इमानदारूं मा

आत्मा/चेतना/अन्तःकरण/ब्रह्म/धर्म   को सरासर  ह्र्चंत ह्व़े जान्दो ?

    सन २०११ की सबसे  बडी घटना च अन्ना हजारे क भारतीय सामाजिक अर राजनैतिक अस्मान  मा आण .  पण अन्ना  हजारे को आण अर फिर २८  दिसम्बर खुणी

हताशा मा अपण अनशन तोड़ी दीण कथगा इ सवाल छोड़ीगे. लोक सभा मा लोकायुक्त बिल पास हूण अर  वी बिल राज्य सभा मा पास नि हूण बि अन्ना हजारे प्रकारण

को ही हिस्सा  च .

   अन्ना हजारे आन्दोलन से साबित ह्व़े बल राजनीति सिरफ़ स्वार्थी इ नी च बल्कण मा निर्दयी , कठोर बि च. पैलक रज्जा स्वार्थ बशीभूत अपण बुबा , अपण भयात तैं

ही मारी दीन्दी छया  आज को प्रजातंत्र मा बि इनी होणु च  . हाँ ! केवल हत्या जन बात दूर इ च पण राजनैतिक स्वार्थ का बान झूट  तैं सच घोषित करण, सच तैं झूट

बणे दीण , अपण स्वार्थ का बान जनता क्या अपण बुबा तैं तैं सरेआम धोखा दीण, लम्पटगिरी, छाल-परपंच, आत्मा की हत्या, बेईमानी की पूजा,  कर्म कुकर्म,

अपण गुनाहों तैं खुले आम दूसरों पर थोपण, चोर का चर्र चर्रा बोल, भ्रस्टाचार तैं ज्युंद रखणो बान भ्रष्टाचार तैं खूब गाळी दीण, सब कुछ हमन अन्ना हजारे आन्दोलन प्रकरण 

मा खुले आम द्याख.

   अर एक हैंकि बात बि लोगुन नोटिस कार जब अन्ना हजारे तैं मीडिया अर लोगुं क  अपार, अणथक जन समर्थन मील त अन्ना हजारे क टीम बि बेलगाम

 घोर डिक्टेटर जन आचरण करण लगी गे छे . उ त मुंबई मा २७ दिसम्बर खुणी अन्ना हजारे क अनशन मा लोक नि ऐन त अन्ना हजारे अर हजारे क

टीम तैं अकल आई की जन आन्दोलन मा डिक्टेटरी भली नि होंदी, लोग सब जाणदा छन , लोग सब पछ्याणदा  छन अर समौ  पर ही बुल्दन, जनता समौ पर

इ अपण सक्यात/तागत  दिखांदी

         अन्ना हजारे अर हजारे की टीम तैं समजण चएंद बल महात्मा गाँधी तैं भारतीय इ ना हौरू लोगुं क समर्थन थौ पण गांधी जीन ब्रिटिशुं  समणि तानाशाही

कबि बि नि दिखाई. अर कोंग्रेस तैं बि बिंगण चएंद  बल बाबा रामदेव तैं भगाणो बान कोंग्रेस्युं तानाशाही क तेवर ठीक नि छया . बाबा राम देव तैं बि समजण चएंद

जनता क भलो बान लाठी-गोळी खाण इ पड़द . बाबा राम देव समजी त गेई होला बल पुलिस क डौर न स्टेज बिटेन फाळी मारिक भजण वालुं  तैं भारतीय जन मानस

ना त गाँधी क च्याला माणदी ना ही महान ऋषि पातंजलि क शिष्य. डौरक  भजण वाळ  तैं ना त  जोगी बुले जांद अर ना ही नेता वै तैं त डरख्वा ही बुले जांद.

बाबा रामदेव जी ! जनता सब जाणदी च सब पछ्याणदी च अर समौ पर ही अपण हथियार निकाल्दी. जनता  तुमर जन हर समय बक बक नि करदी. 

 

      Garhwali Satire, Garhwali Humour, Himalayan Language Satire, Satire from Uttarakhandi Languages to be continued in next issue

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                             सन २०१२ की बाक (भविष्यवाणी )       

(Garhwali Humour, Garhwali Satire, Humour and Satire from Uttarakhandi Languages,

Satire and Humour in Himalayan Languages.)

                       Bhishm Kukreti

       

           अब जन कि रिवाज च नयो सम्बत्सर मा गौं का पंडित जी नै सालौ भविष्य बथान्द .

ए साल बान बि पन्डि जी न बाक बोली.

            जन कि ये साल बि ह्यूंद मा हिमाला मा बर्फ़बारी ह्वेली अर मैदानी इलाका मा ठंड पोड़ली.

           अमीर लोकुं  कुणि कंपकंपी जड्डू आनंद दायक होलू. अमीर लोक अपण गरम कोट, गरम सुलार, गर्म पैंट

गरम मफलर, गरम स्वेटर, गरम दस्ताना , गरम डिसाण , हीटर , गीजर  का प्रयोग जड्डू भगाणो बान कम  कारल

पण यूँ चीजुं तैं अपण अमीरी दिखाणो बान जादा प्रयोग कारल.       


               गरीब लोक परेशान राला बल इन कर्करू जड्डू मा ज्यान बचाणो लारा कखन ल़ाण . राती आग तापणो लखड़ कखन

लाण !

              जड्डू मा अमीर लोक  जड्डू खाणो  कश्मीर, शिमला, मसूरी, नैनीताल जाला  अर उख जड्डू अं मजा ल्याल.

  ठनडन  गरीब लोक मोरणा राला अर सरकार भर्वस अ हीटर चलाणी राली , गैर सरकारी दल विरोध का गरम बथौं

चलैक माहौल तैं गरम करणे कोशिश करणा राला. सबी राजनैतिक दल गरीबुं मरणो  क आग मा  अपण राजनैतिक

भड्डूअ दाळ पकाणा राल .


         पैथराँ सरकारी कुम्भकरणी निंद टुटली अर जड्डू निरोधक इन्तजामौ बान ठेकेदारूं  खोज ह्वेली. टेंडर  पास कराये

जाल.

          इथगा मा रुड़ी ऐ जालो अर इना सरकारी ठेकेदार शीत निरोधक योजनौ पर काम शुरू कारल कि  टी.वी. अर

प्रेस मीडिया से गैर सरकारी द्लूं  तैं पता चौलल बल रूडी ऐ गे अर पारा पैंतालीस डिग्री तलक जाण बिसे गे . गैर सरकारी

द्लूं तैं टी.वी चैनलूं अर प्रेस मीडिया से इ पता चौलल बल ल़ू से सैकड़ाक लोख मोरी गेन. जनि गैर सरकारी द्लूं तैं

टी.वी. चैनल अर प्रेस से पता चौलल बल गौंऊँ  मा शहरुं  मा पाणी कि कमी ह्व़े गे, ग्रामी क बीमारी सौरणि(फ़ैलण ) 

त सबी राजौं क विरोधी दल मुख्य मंत्री से इस्तीफा मांगल तब   हरेक राज्य का मंत्र्युं  अर प्रशासन तैं पता चौलल बल

 राज्य मा रुड़ी /गर्मी से कुहाल ह्व़े गे. बस दे दनादन रुड़ी निरोध का कथगा इ  योजनौं बान जेठअ  मैना मा ठेकेदार तैनात

ह्व़े जाला . उना जड्डू निरोधक का काम शुरू इ नि ह्व़े कि इख जेठ मैना क अंत मा ग्रीष्म  निरोधक योजनौं का दस्ता गौं गौं ,

शहर शहर पौंची जाला .   

           इना ग्रीष्म निरोधक ठेकेदार पाणी कनो बट्याण पर काम शुरू कारल कि तैबरां  बरखा अर बाढ़ आई जैली . टी.वी अर

प्रेस से ही भादों -असूज मैना मा सरकार तैं पता चौलल बल बरखा से जन जीवन असत व्यस्त ह्व़े गे त बाढ़ रोको योजना

बौणली अर बाढ़  रोको योजना का ठेकेदार गौ-गौ अर शहर-शहर पौंची जाला . पण हे भगवान !

तैबारी जड्डू अपण प्रकोप फैलाण शुरू करी दयालो. 

              सरकार, सरकारी महकमा को काम करणो ढर्रा, फिलम कु ढर्रा अर चिलम पीणो ढर्रा मा बदलौ  नि

होंद त पन्डि जी कि बाक (भविष्य बाणी ) बि झूट नि होंदी. सन द्वी हजार मा बि इनी ह्व़े छौ, सन २०११ मा बि इनी ह्व़े

त सन द्वी हजार बारा मा बि इनी होण . पन्डि जी झूट  बोली नि सकदन किलैकि सरकार अर सरकारी महकमा अपण काम करणों

ढर्रा मा बदलाव लाण से  रै त सब कुछ इन चलणो रालू .

 

            रघुकुल रीति सदा चलि आई , कुवां कि खुदाई बाढ़ को मौसम मा ही ह्वाई

            जड्डू भगाओ नीति तहत  जेठ मा कमुळ बंट्याय़ी




Garhwali Humour, Garhwali Satire, garhwali Ironi, Humour, Irony  and Satire from Uttarakhandi Languages,
Satire, Irony  and Humour in Himalayan Languages to be continued in next issue....

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चमकताळ -भड़कताळ   [/color]           

 

                        बड़ आदिमौ   पछ्याणक       
 
 

    (Garhwali Humour, Garhwali Satire, Humour and Satire from Uttarakhandi Languages,
Satire and Humour in Himalayan Languages.)

                                    भीष्म कुकरेती
 
 

          कबि कबि मनिख अपणो  सुपिनों तैं पूरा करणों बान इथगा इना-उना, वार-प्वार डबकणो रौंद,

इं दुनिया- वीं दुन्या मा भटकणो रौंद  बल अपण न्याड़ ध्वार क्या हूणु च , य़ी इ पता इ नि चल्दो .
 
            अब द्याखो ना !  मी बडू आदिम बणण चाणो छौ अर यांक बान  रोज कुछ ना कुछ करण इ लग्युं रौंद,

बॉस का समणी तनखा बढाणो रुणी धाणी, प्रमोसनौ बान बॉस का बस्ता उठाण से लेकी बौसौ  कुत्ता क

  टट्टी क लिंड़र पिंदक साफ़ करण तक सबी कुछ करदो . अब मुंबई मा म्यारो एक फ़्लैट ह्व़े इ ग्याई, कार ह्व़े ग्याई  अब

मुंबई से भैर एक फ़ार्म हॉउस ल्हें ल्योलू त मी बि  बड़ो आदिम बौणी जौल. पण इन नी च दुन्या कखन से कख चलि गे, बदली गे 
 
             सी ब्याळी स्याम की इ त  छ्वीं छन .मी ओफ्फिस बिटेन ड़्यार अपण दस बै दस को ड्रवाइंग रूम

 मा (जै तैं मेरा दिल्ली अर ड्याराडूण का रिश्तेदार पीठ पैथराँ पिजनहोल या दुज्यळ बुल्दन)

घुसु कि घरवाळी कुणाट करण बिसे ग्याई .

         " तुम तैं कुछ खबर बि च ? " मेरी समज मा नी आई बल घर्वाळी  कुछ पुछणि च या दनकाणि च ,

डांटणि च .

      मीन बि तड़तड़ो ह्वेक बोली दे ," अब सरा दिन त्वी टी.वी. क समणि रौंदी त खबर ..त .. त्वे मा इ .."
 
         घर्वाळी न घुर्याण, धमकाण अर रुणफती मिलीं भौण ब्वाल," सी अनिल अम्बानी , सी टाटा,बाटा,

प्रेम जी, रुईया सब्युं क फोन टेप हुणा छन . पण हमारा इ  फोन टेप  नी हूणा छन . लोक बाग़ क्या

ब्वालल कि  हमम राजकीय सीक्रेट  लुकाणो कुछ बि नी च. सरा बिल्डिंग अर रिश्तेदारों बीच हमारी

नाक कट्याणी च ."

         " अरे ! इख्मा नाक कट्याणे बात क्या च . य़ी सौब लोक उद्योगपति छन . सरकार यूंक फोन टेप

कौरिक पता लगान्दी बल य़ी उद्योगपति क्या-क्या धान्दाली करणा छन ?" मीन बिंगाई या समजाणो
 
पुट्ठ्याजोर(कोशिस)  लगाई .

    इथगा मा म्यार बड़ो न ब्वाल," पापा ! यही त रोणे वाळी बात है  ! आज हमर कोलेज मा हमारि  बडी

बेज्जती ह्व़े  कि हम बड़ आदिम नि छंवां. सरकार जौं जौं क फोन टेप करणि च वो सब अब बड़ा आदिम छन

अर कौलेज मा सौब तैं पता चौली गे बल सरकार  हमारा फोन टेप नि करणि च  ".

     मी कुछ जबाब दीन्दो कि मेरी छ्वटि  न ब्वाल, "पता है पापा !  हमर  कोलेज मा  रिंकी, पिंकी, जौनी,

रशीदा सब्युं न  मिळवाक कौरिक हम सौब तैं कोका कोला अर फ्रेंच फास्ट फ़ूड की पार्टी द्याई किलैकी सरकार यूँ  सब्युंक

फोन टेप करणी च अर यांकी न्यूज अखब़ारूं  मा बि छपी गे "

        मीन घंघतोळ मा पूछ , " या पिंकी वै च ना जैक   बुबा न  बन विभागै जमीन प्राइवेट बिल्डरूं नाम कौरी दे छौ अर

अबि जेल बिटेन छुटिक आई. रिंकी क चचा अर मामा  टू जी घोटाला मा फंस्यां  छ्न अर रशीदा क ददा अर बुबा पर बि आठ दस 

आरोप छन  अर द्वीई बार बार जेल जाणा रौंदन अर छूटणा रौंदन...अर जौनी क ..?"

           छ्वटि न बिची  मा ब्वाल, " एंड पापा ! वी  आल आर  प्राउड दैट दे आर  ऑवर क्लासमेट्स."

   मि कुछ बोल्दु कि घर्वाळी न बोली, " आज पता च मोहल्ला मा तीन जनान्यूँ क  सामाजिक सम्मान ह्व़े ?"
 
        मीन कुछ नि ब्वाल बस आंख्युं न सैन  कार बल बोल मेरी भेमाता !

           घरवाळी न मुहल्ला पुराण चालु कार," आज पैल त मिसेज घोटालावती तैं मुहल्ला हौल मा सम्मान ह्व़े, फिर दुफरा मा मोहल्ला

    वेलफेयर बिल्डिंग मा मा मिस ब्लैक मार्केटिया क सामाजिक सम्मान ह्व़े अर चाय काल मा मिसेज स्कैम स्कैन्डलिया क

मोहल्ला सोसल रिफोर्म होंउस मा सम्मान ह्व़े"

     मीन गंगडेक ब्वाल, " पण यूंक हजबैंड या बुबा सौब शातिर लोक छन त ..."

 मेरी घर्वाळीन खुलासा कार , " हाँ सरकार यूँ सब्युंक फोन टेप करण पर लगीँ च अर ये बाबत अखबारूं मा बि खबर छपी गेन. अर

अब त भोळ बिटेन  म्यार मोहल्ला मा मुख दिखाण बि मुस्किल ह्व़े जालो."

    मीन पूछ , ' क्या स्या छ्वटि कैक दगड भगण वाळ च ?"

      मेरी पत्नी न दनकैक ब्वाल  , " तुम बि ना ! अबि तलक अपण दादा क जमानो मा ही छंवां. आजकाल कैकी बेटी ब्वारी

दस दें बि कैक दगड भाजी जावन त   बुरु नि माने जांद उलटा अच्काल त कैकी बेटी कखी नि भाजदी त  जादा बदनामी होंद."

   मीन तड़कैकी पूछ  , " ह्यां ! त हम मुख दिखाण लैक बि नि छंवां वाळ बात क्या ह्व़े ?"

  बड़ न ब्वाल," पापा ! मोहल्ले में बात फैल गयी है कि सरकार  हमारा फोन टेप नहीं  कर रही है ."

  छ्वटि न बिंगाई , " एस ! पापा टुडे  फोन टेपिंग बाई  गवर्मेंट इज सर्टेनली अ   बिग स्टेट्स सिम्बल ."

 मेरी घरवाळी न ब्वाल," अब कुछ बि कारो पण इन जतन कारो कि सरकार हमर फोन टेप करण

लगी जाउ अर यांकी खबर अखब़ारूं मा बि आण चएंद ."

  बड़ न ब्वाल, " पापा ! हमने अपने दोस्त के पापा जो टेलीफोन डिपार्टमेंट में हैं उनसे बात कर ल़ी है. ही विल हेल्प अस.:

   मीन पूछ , "क्वा च उ ? "

       छ्वटि न जबाब दे, " ओ छन ना मिस्टर टेलीफोनवाला. आप मिस्टर  टेलीफोनवाला  तैं पैलि बि मिल्यां छंवां."

          बड़न  , " पापा ! मैं मिस्टर टेलीफोनवाला  को फोन लगा के दे रहा हूँ और स्पीकर ऑन किया हुआ  है 

आप बात कर लीजिये. हमन मिस्टर टेलीफोनवाला  तैं सौब समजयुं च . बस फीस की बात बाकी च ."

  बड़न फोन लगे, स्पीकर ऑन कार अर फोन मीम दे द्याई

मीन ब्वाल , " मिस्टर टेलीफोनवाला, " मै कुकरेती बोल रहा हूँ अभी ..."

मिस्टर टेलीफोनवाला  , " हाँ हाँ मिस्टर कुकरेती ! आप चान्दन बल सरकार आपक फोन टेप कारो .हैं ?"

   मीन क्या बुलण छौ पण बुलण इ पोड़ , ' हाँ जी !"

  मिस्टर टेलीफोनवाला  न बथाई , " इन च खाली सरकार  फोन टेप कारली त आप तैं तीन लाख दीण पोड़ल."

 मीन खौल़े क ब्वाल , " तीन ल़ा आ आ आ आ  .."

मिस्टर टेलीफोनवाला  , जी ! अर जु आप चाँदवां कि फोन टेप की खबर अखब़ारूं   मा बि छपी जाव त सात लाख फीस च .."

मीन  बुलणे कोशिश कार , "क्या ....."

मिस्टर टेलीफोनवाला  न अग्वाड़ी खुलासा कार , अर जु आपकी इच्छा च की फोन टेप की बहस विधान सभा या लोक सभा मा

मा ह्वाऊ त भौत खर्चा लगी जालो. अर मैं नि लगद बल आपकी हैसियत इथगा च  ."

मी कुछ पूछ्दो कि मिस्टर टेलीफोनवाला  न ब्वाल, " इन च अच्काल सरकार से फोन टेप हूण एक स्टेट्स सिम्बल ह्व़े गे

त ज़रा फीस जादा लगणि होली पण म्यार रेट सबसे कम छन . अर हाँ ! सौब पैसा म्यार एजेंट को ही दीण हाँ .

जनि आप सात लाख तैयार कौरी देल्या , म्यार एजेंट आप मांगन पैसा ल़ी जालो . अर  तिसर दिन बिटेन आपका फोन टेप

हूण बिसे जाल अर पंचौ दिन अखब़ारूं मा खबर छपी जाली कि  सरकार तैं मिस्टर कुकरेती पर देश द्रोही होणो शक च

अर यांका वास्ता सरकार मिस्टर कुकरेती का फोन टेप करणि च. " इथगा बुलणो बाद  मिस्टर टेलीफोनवाला  न फोन बन्द 

कौरी दे .

 बड़न ब्वाल ," पापा ! अच्काल भौत सा बैंक यांक बान सौंगु/ सरलता से लोन बि दीणा छन. आप सात लाख का इंतजाम कारो..."

  म्यार समज मा नि आणो कि इ होणु क्या च  पैल समाजप्रेमी, देशप्रेमी दिखाणो बान लोक खर्चा करदा छया.  अच्काल

देशद्रोही होण  स्टेट्स सिम्बल ह्व़े गे अर देशद्रोही होणो बान इथगा  टुटब्याग करण पड़दन ?               

 

 Garhwali Humour, Garhwali Satire, Humour and Satire from Uttarakhandi Languages,


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[i]कुतगळी  अर खैड़ाs कटांग[/i]  

 

                                हे! खिल्वणि  : तेरा कथगा रूप ?         
 
 

(Garhwali Humour, Garhwali Satire, Humour and Satire from Uttarakhandi Languages,
Satire and Humour in Himalayan Languages)

 

                                               भीष्म कुकरेती
 

               खिल्वणि काम बौगा न होंद .  खिल्वणि  आजी ना पुरण जमानो मा बि  छया.

खिल्वणि बच्चों ह्वेन या बूड दुयूं तैं पसंद आंदो. हाँ खिल्वणि क ढांचा  समौ, जगा, ,

अर वर्ग को हिसाब से , भौं भौं का प्रकारअलग अलग रूप  होन्दन. ढुंग जुग/पाषाण युग की

खिल्वणि आज  बूड या बच्चों तैं रास त ना अली पण जु यि खिल्वणि म्यूजियम मा राली
 
 त सब्युं  तैं रौंस देली , हरेक खुणि मजा की बात ह्वेली .

                खिल्वणि कै बि जुग की ह्वावन पण छ त 'हैब्स अर हैब्स नॉट ' भेद करणे  निसाणि.
 
हरेक जुग मा खिल्वणि बर्ग भेद (क्लास डिफरेन्स ) करण मा कामयाब राई च .  राजा अर राजकुमार

हाथी मा बैठिक हाथी , शेर , गैंडा तैं खिल्वणि जाणिक  यूँ जानवरूं  शिकार  करदा छा त गरीब गुरबा
 
चखुली तैं खिल्वणि  मानिक  पथरों न शिकार करदा छा. कती लोक  स्याळ , कुरस्याळऊँ  दगड

प्रतिस्पर्धा करदा छा अर सौलु तैं खिल्वणि समजिक सौले  शिकार करदा छा.

            हमन त बाळपन मा खिल्वणि द्याख नी छे हाँ म्यार गौळउन्द एक अज्वाणे (अजवाइन )
 
की थैली लटकी रौंदी छे .   अज्वाणे वा इ थैली खिल्वणि बि छे अर पथ्य बि छे. जब हम रूस्वड़ ब्वालो या

बेडरूम ब्वालो क भितर रौंदा था त भांड कूंड, लुट्या (वो बि एक) , गिलास या थाळी इ  हमकुण

खिल्वणि छया . भैर चौक मा जु बि माटो , गारो या कठग छया खिल्वणि छया. जौंका ब्व़े -बाब

जरा समजदार या ब्यूँतदार  छया त ओ  अपण छ्वटों कुण रिंगाळ की  पिंपरी बणेक दीन्दा छया .

जरा बड़ होण पर हम अपण पाटी,  बुळख्या अर कम्यड़ू  तैं इ खिल्वणि समजिक खेल करदा छया.

प्याजौ बगत पर प्याजौ डंकुळी से पिंपरी बजान्दा छया. हमर बगत मा  बस यो ही  खिल्वणि छया.

 

           अब त खिल्वणियूँ मा बि भौत  विकास ह्व़े गे . अब त मनोविज्ञान का हिसाब से

खिल्वण अर खिल्वणि बणना छन. अर इलेक्ट्रोनिक टॉयज को  त क्या बुन !  हाँ गरीबुं खुणि

प्लास्टिक का खिल्वणि अर मातबरूं / अमीरुं खुणि मनोविज्ञान का हिसाबन खिल्वणि उपलब्ध छन .
 
 

           खिल्वणि खाली बच्चों खुणि इ नि होन्दन बल्कण मा राजनीति का खल्यण /खलिहान

 मा तक  बैक (प्रौढ़) जनता कुणि बि खिल्वणि इजाद करे गेन अर रोज इ असंख्य खिल्वणि

राजनीति कबौण मा कुल्चर करे जान्दन.

 

                मि तैं याद च जब उत्तरप्रदेश   मा पर्वतीय मंत्रालय खुली  छौ  त भग्यान शिवा नन्द नौटियाल

न धाई लगैक , किरैक, फडेक , ऐड्याट भुभ्याट  कौरिक बोली छौ , "उ.प्र. सरकार ने पहाड़ियों को

पर्वतीय मंत्रालय डे कर झुनझुना पकड़ा दिया है." शिवा नन्द नौटियाल तैबारी विरोधी पार्टी मा छया

त पृथक पर्वतीय मंत्रालय तैं  खिल्वणि बतायी .पण जै तैं बि जब बि पर्वतीय मंत्रालय की

खुर्सी मील वो बड़ो उलारी  / उत्साही भौण मा बुल्दु छौ, " पर्वतीय मंत्रालय खिल्वणि नी च बल्कण मा

 पहाड़यूँ  बान रसगुल्ला च, गुलाबजामुन च, अरसा च, रसमलाई च, अरे राजभोग च ." 

 

             इथगा मा शिवा नन्द जी औडळ बीडळ ल्हैका बोल्दा छया , " हाँ पृथक पर्वतीय मंत्रालय राजभोग त छें

 च पण वैखुणि जु पर्वतीय मंत्रालय को मंत्री बौण." विरोध अम छया त नौटियाल जी न इन बुलणि छौ 

             हाँ पर एक बात सत्य च जु पर्वतीय मंत्रालय का मंत्री -संतरी रैन वूं खुण पृथक पर्वतीय मंत्रालय

राजभोग इ राई अर पहाड़ी जनता खुणि पृथक पर्वतीय मंत्रालय खिल्वणि ही राई. उन दिखे जाओ त

पृथक उत्तराखंड राज्य बि अब पहाड़यूँ  बान झुन झुना इ साबित हूणु च. हाँ !  खिल्वणि ज़रा बडी च .

 

            अच्काल क्या आजादी मिलणो उपरान्त डिल्ली मा अर प्रदेसुं राजधान्युं मा रोज नी बि हवाव्न त

सैकडाक कमीसन बैठाए जांदा  होला  . अर कमीसन क्या खुणी की मंत्री न घूस खायी की ना , जनता की

क्या क्या परेशानी छन , बाढ़ किलै आन्द अर रुड़ी मा पाणी क किल्लत किलै हूंद. इख तलक कि

विधान सभा परिसर का आस पास कुत्ता किलै  टंगड़ उठान्दन जन विषयूँ  पर कमीसन बैठदा छन.

 

            राजनीति क चौक / परिसर मा कमिसन बैठाण कुछ नी च बलकण मा जनता तैं

बौगाणो  'जिग्सौ पज्जल' च कमीसन अपण काम टैम पर करदो नी च अर जनता आस मा इ बौगीं रौंदी

           राजनीति मा कमिसन बैठाण मतबल लोगूँ तैं कैबेज पिच किड्स कि खिल्वणि दीण   कि लोग बौग्याँ
 
रावन . 

           जब लोक परेशान ह्व़े जान्दन अर आतुर्दी  मा आन्दोलन करण बिसे जान्दन त सरकार क्वे कमिसन नाम क

कैलिडोस्कोप जन खिल्वणि  जनता तैं पकडै दींद अर कैलिडोस्कोप मा जन बनि बनि क रंग से लोग रौंस लीन्दन
 
उनि कमिसन का रंग ढंग देखिक लोक अचेते जान्दन अर समस्या तैं बिसरी जान्दन. सरकारी कमिसन

जनता तैं असली समस्या से दूर रखणो खिल्वणि च ,

 

     राजनीति मा नेताओं आश्वासन कुछ नी च बल्कण मा यो-यो, हुला -हूप, लेगो, बार्बी , , पोगो स्टिक, स्लिंकी.
 
सुपर सोकर , टेड्डी बियर , लिनकॉलिन लौग्स, रुबिक क्यूब्स, कोर्गी , जोवो, ऐन्ट फार्म,  लीप फ्रौग , स्नूपी ,

जन खिल्वणि होन्दन . हाँ खिल्व णि त बच्चों तैं रौंस बि दीन्दी अर बौगांद बि च . पण राजनीतिक आश्वासन

रूपी खिल्वणि बस पैल पैल बौगांदी च अर बाद मा निराशा पैदा करदी .

 

               उन यो फोकट मा बौगाणो काम आज इ नी होंद बल्कण मा पुराणो जमानो मा बि होंद था .

 गुरु द्रोणाचार्य न त अपण नौनु तैं बौगाणो बान दूध कि जगा चूना क सुफेद पाणी पिलाई थौ. 

 
          खिल्व णि बौगांद बि च अर वर्ग भेद की बिसात बि बिछांदी करदी . जन आजकल

टॉय /खिल्वणि /खिल्वण उत्पादक नया अनवेषण/खोज  करणा रौंदन की ग्राहकुं तैं नया नया

खिल्वणि मिलन  उनि अजकालौ नेता लोक हर पल , हर सेकंड मा आश्वासन अर कमिसन बैठाण 
 
की खिल्वणि जनता तैं दीणो बान खोज पर लग्यां  रौंदन. द्वीई टॉय उत्पादक बि अर नेता लोक बि

खोजी छन.

 

Garhwali Humour, Garhwali Satire, Humour and Satire from Uttarakhandi Languages,

Satire and Humour in Himalayan Languages to be continues in next issue ...

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मूस ब्वाद म्यार बगैर सब्बी चीज बेकार         

       

                     साइबर जनानी या कम्प्यूटरी कज्याण


                                                                  भीष्म कुकरेती


इ राम दा  म्यार बुबा जी कु जमानु माँ इथ्गा किस्मू कज्याँn   नि होंद था अब ता क्या बोलूं भै. कंप्यूटर को ज़माना माँ ल्या द्याखो हाँ.....
 हार्ड डिस्क कज्याण  :

कज्याणि ए मेरी ब्वै ! क्या यादास्त च भै इन जनानी की . ईन जनानी की यादास्त कबी बी ख़तम नी होंदी .
इन्टरनेट स्त्री
ईं जनानी तै सबी पाण चांदन, पण सबूं तैं एक्सेस नी होंदी  मतलब या जनानी सब्युं तैं उपलब्ध नी ह्व़े सकद
विंडोज जनानी :

सौब जाणदा   छन बल या जनानी क्वी बी चीज ठीक से  नि कौरी सकदी पण ईं बगैर क्वी रै बी  त नि सक्दू .इन चा या जनानी .
वाइरस स्त्री  :
उफ ! या त बिलकुल घरवाली  च . शी  इज जस्ट एज  वाइफ .  जब तुम तैं ईंक आँणो  आशा कत्तई नी होऊ   या वै इ  बगत फार आंदी . तुमारा घर  फर बेधड़क कबजा जमें दीन्दी. तुमारा सबी संशाधंनु (रिसोर्सेस ) फ़र यींको राज ह्वै  जान्दो . द्यारम रखील्या त नुक्सान  आर घार  से भैर नि निकलिल्या त बहुत ही नुक्सान क्या बिजां नुक्सान हून्दो .
 स्क्रीन सेवर :
अहा ! सौब  जाणदा  छन बल या कज्याण निकज्जी छ , पण दिख्याण  दरसन माँ बिग्रैली बांद हुन्दी अर दिखण   माँ मजा आनंद/रौंस  त औंदी च .
एक्सेल जनानी :
या जननी बुल्दी बल या सब कुछ  कौरी सकद च  पण इन दिखे ग्याई  कि  सबी ईं जनानी से दूर ही रौण  चांदन  .

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Satire and Fatkar

                       उत्तराखंड मा ह्युन्दो टैम पर चुनौ


                         भीष्म कुकरेती


         अच्काल उन त उत्तरखंड मा ह्यूंदो मौसम च, हाँ जी थ्वड़ा -थ्वडा  बरखा होणो मौसम च,

जख बरफ पोड़दो उख बर्फ पड़दो, जख नि पोड़दो उख नि पड़दो. बर्फ अपणी मर्जी

से कखिम बि नि पोडद  . बरफ मनिख नी च,  बर्फ पोड़णो नियम होन्दन अर मनिख

गां-गौळओ (सामाजिक) अर सम्वैधानिक नियम बणादो  इं इलै  च बल नियम

बणदा यि तोड़े जवान . हाँ त मि बुल णो छौ बल उत्तराखंड मा ह्युन्दो ,ठंड को, जडडू 

मौसम च पण चुनाव रूपी महाभारत से मौसम मा गर्मी ऐ गे.

        प्राकृतिक हिसाब से बर्फ पिघळणो टैम मार्च-अप्रैल मा होंद पण संवाददाता

खबर दीणा छन चुनावी तातोपन से अबि बिटेन  बर्फ पिघळण बिसे गे.


        अच्काल अबि इ उत्तराखंड का  विधायाकुं तैं याद आई बल पांच साल पैल

ओ विधायक बौणी छया.अब बिचारा विधायक ! ड्याराडूण राज्धानित्व का

सुख का गैरो तालाब  मा फंस्या रैन अर बिसरी गेन बल चुनाव त पाँच सालुं मा आन्द. अब बिचारा 

विधायक ! नक्शौं मा देखी देखी अपण चुनावी क्षेत्र को भूगोल याद करणु च .

इनी जु पैल्या दें चुनाव हारी गे छा ओ बि याद करणे कोशिश करणा छन, विश्लेसण, समीक्षा

अब इ   करणा छन  बल ऊंका हार की असली वजे क्या छे .


     क्त्त्युं पर जनसेवा क खज्जी होणी च, समाज सेवा की मर्च लगणी च वो चुनाव लड़णो ऐ गेन  ,

जौं तैं उत्तराखंड तैं सोराग बणोणे पीड़ा होणी च वो बि चुनाव मैदान मा आई गेन.

, क्त्त्युं तैं याद आई बल अबि तक  ड्याराडूण इ उत्तराखंड की राजधानी च अर

गैरसैण  अबि तक राजधानी नी बौण  त वो गैरसैण तैं राजधानी बणाणो 

चुनाव लड़णा छन. पता नी गैरसैण का ग्रहूँ मा राहू केतु की क्या दसा च धौं !

जब बि चुनाव आन्दन तबी लोकुं तैं गैरसैण याद आन्द.

     क्त्त्युं तैं पता च की वो   ये जनम त दूर वै जनम मा बि चुनाव नी जीत सकदन

पण वो चुनाव इलै लड़णा  छन की कै हैंक  उम्मेदवारो  पत्ता साफ़ ह्व़े जाओ. 


   अच्काल मिंडकूं समौ नी च ,  पण चुनावी महाभारत मा

अच्काल नेताओं का बोल मिंडकूं  टरटर्याट जन छन अर जन  मिंडकी मिंडकु तैं पटाणो बान

टर्र टर्र करदन उनि  अच्काल उमेदवार बि जनता पटाणो बान टरटराट करदन. दुयूंक टरटराट मा 

प्रेम होंद आशा होंद  .   


   अच्काल ह्युन्दुं मा गरम कपड़ों मौसम होंद थौ पण ये साल उत्तराखंड मा जनवरी तलक

पोस्टरूं  टुपला, पोस्टरूं मफलर, बैनरूं कोट, कुर्ता , सबि कुछ चुनावी बैनरूं का .इख तक की

ढिकाण-डिसाण बि चुनावी बैनरूं का ही होला.


       ये साल उत्तराखंड मा ढांडउन नी पोड़न . ये बरस त नेताओं का भाषणु  ग्व़ाल़ा पोडल.

ये साल बर्फन बि नी पोड़न  ये साल त नारेबाजी से उपजीं आश्वासन की बरखा होली .


  आप दिखदा होल्या किजादातर ह्यूंद मा इ तन्त्र मन्त्र कर्मकांड क पूजन हुंद पण ये साल

नेताओं का प्रपंची मन्त्र तन्त्र , काल़ो जादू  दिखणो मीलल. राजनीति का जादूगर

झूट तैं सच अर सच तैं झूट सिद्ध करण मा झाड़ ताड़ वालुं से जादा होस्यार होन्दन त तांत्रिक-मान्त्रिक

ये समौ  पर कूण्या चलि जाला.  झूट का भुज्यल , झूट का गिगुड़ ,चुनावी झाड़ ताड़ का ताम झाम होला. 


      मूस अर किरम्वळ जन अपणो डुडख्युं/दुंलुं  मा बगत कुबगतो बान खाणक पीणक जमा करदन

तन्नी छुटभया  नेता उमीदवारों से कमीसन लेकी अगला पाँच सालो खुणि अपण पुटकी भरणो इंतजाम करी

लीन्दन. प्रजातंत्र च त बड़ा नेता राजधानी मा मौज कारल त छुटभया बि अपण मेनत मजदूरी उगाला

कि ना ?


   उन त ह्युन्दुं मा पहाड़ कि नद्युं मा पाणी सुकी जान्द पण ये साल नदी, गाड, गदनु मा

पाणि ना शराब बौगलि. चुनावी मौसम शराब की कम्पन्यूँ  क प्रोडक्सन मा बढ़ोतरी को

बि मौसम च.

       चुनावी मौसम अखबार वाल़ू खुणि बि कमणो  मौसम च. भारत मा एक नयो बिजिनेस

इजाद ह्व़े गे अर ये बिजिनेस को नाम च 'पेड़ न्वूज ' . जी हाँ अच्काल 'पेड़ न्वूज' का

बिजिनेस मा उछला ऐ जालो.  प्रजातंत्र  मा भौं भौं नया नया  टुटब्याग की जै हो!.


             अच्काल ह्यूंदो  मौसम नी रै जालो .उन ह्यूंद मा सर्दी  जुकाम की बिमारी होन्दन

पण अच्काल त गढवाळ मा , कुमाऊं मा ' खब'  याने खश्या-बामण  नाम की उकै-उन्द,

 खश्या-बामण का दस्त, खश्या-बामण को खुर्या , खश्या-बामण बुखार जन मौसमी बीमारी

ऐ जाली. ख-ब की  बीमारी भौत पुराणी बीमारी  च अर बुल्दन बल कुमाओं-गढ़वाळ  मा गुरख्याणी 

औण मा भौत हड़ तक ख-ब बीमारी को बि हाथ छौ .


    पुराणा जमानो मा   ह्यूंद को मौसम मा लोक बल्दुं तैं नाळन तेल घी पिलान्दा छया ये चुनावी

मौसम मा   नेता जनता रूपी बल्दुं तैं  आश्वासन, अणभिग्य पण अभिनवी सुपिनो

पिलाली अर जनता भोट दीणे जाली बल सैत   च ये चुनाव मा जित्याँ नेता पहाडु 

बान कुछ सकारात्मक कदम उठाली . नेता कथगा बि कुकर्मी ह्व़े जाला, नेता लोक कथगा बि

कुनेथिक ह्व़े जाला, नेता लोक कथगा बि कुपाण इ (बुरी प्रवृति ) होला, पण   जनता त हमेसा से

 आशावान हुंदी अर या ही प्रजातंत्र की खूबी च. 


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कुछ  चबोड़   इ सै

                      इंटरनेटी जमाना मां सासूं की छ्वीं

(Garhwali Satire, Garhwali Humour, Garhwali wits)

                                       भीष्म कुकरेती

आज न भोळ  त हूणि  चा अर जादातर अरेंज्ड शादी ब्यौ इन्टरनेट का मार्फ़त ही होला .

दुन्या मां बदलाव कथगा  बी आला पण काट करण या  एक हैंका मां  अपनी खैरी लगान बंद नि होला .

इनी इन्टरनेट का जमाना मां सासू अपनी खैरी कन सुणाली  सुनाली या काट कनें कारली :

एक सासू: क्या बुन्न मेरी त मौ घाम इ लगी ही ग्याई  जन बुल्या !

हैंकि: क्या बुन. मेरी ब्वारी  अमेरिकन मैरिज़ डॉट वाली च. दस साल ब्यौ कर्याँ  होई गेन मूसो बी नि जनम !!

दूसरी : कनो नौनो मां खोट च या ब्वारी ही बांज च ?

 सासू: तन हुन्दो त भगवान् का नाम फर रुंदा हम . अमेरिकन स्टाइल वाली जी च ब्वारी . बोलणि  च बल मां बणणो  कु

दुःख, पीडा कैन सैणे ?. बुल नि रौंद बल बच्चा पैदा करण मा डौ होंद बल  ! द  बथावा इं अमेरिकन  शादी डॉट कॉम वाळी  तैं मां बणन कि पीडा नि सयाणी च ,

दरद नि चयाणो  च   . अपण त मवासी क्या सरा  साखी इ बांज पोडी ग्याई

हैंकी : ए भूली ! अरे ब्वारी त छें  च .कै दिन त कुछ त  होलू . एक मेरी भूलि  का नौनन अमेर्कन शादी डॉट वाली ल्हायी. सारा गाँव  एरिया मां मेरी भुली मुख दिखाण  लैकि नी रईं च.

पैली: कनो क्या व्हाई ?

वैइ : हूँ क्या छो मेरी भुली  का नौनु अमेरिकन डॉट कॉम बिटेन मोछ वळी  ब्वारी खुजेक ल्हेई ग्याई . ब्वाई बोलवां या ब्वारा ब्वालवां ?

उख बी मवासी त घाम अलग लग अर जग मा  बदनामी अलग हूणी  च

एक हैंकि  : ए भुली !! ओ द्याख च जमुना कि नौली नयी नयी ब्वारी . गौड़ी ,भैंसूं , बखरूं  त छ्वादों मूसों दगड बी अंगरेजी मां बचल्यांद ..

दूसरी : अब टाईम्स शादी डॉट कॉम वळी  होली त डाळ बूटों दगड बी अंगरेजी मां ही छ्वीं कारली कि ना ?

एक; हाँ भारत डॉट कॉम वाली होंद ता वा ब्वारी ना बहु ह्व़े जांद . त फिर ,  वहु त हिन्दी मां ही  बच्ल्याली, बात करली की ना?

तीसरी: ब्वारी ल़ाण   होऊ  त उत्तराखंड डॉट कोम  बिटेन ल़ाण  चयांदी

पैली:  हाँ उन त  उत्तराखंड डॉट कोम  की ब्वारी ठीकि होंदी . घर कु काम बी कॉरी लीन्दी पण राज्य का ओफिसरुं तरां जादा तर देहरादून ही पड़ीं रौंदी .

दूसरी : सबसे बढिया त अपन गढ़वाली ब्वौ डॉट कौम वळी  वाली बल  घर का कम बी करदन अर हम सासुं  का खुट बी पटके लीन्दन

चौथी : पण गढ़वाली शादी डॉट कोम वालिम सवोर , सगोर, एटीकेट  कुछ बी नि होंदी वी घर्या हिसाब  किताब ...

सबी: हाँ हमारो जमानो ही ठीक छायो जब ........



 Garhwali satire , Garhwali Humour, Garhwali wits to be continued in next.....

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Satirical Artical

चबोड़ इ चबोड़ मा


              म्यारो नातिक रिटायरमेंट प्लानिंग
 

                भीष्म कुकरेती
 

        हम सबी ड्रवाइंग कम डाईनिंग रूम, म्यार बेडरूम जादा  मा बैठयाँ छया कि

अपण बेडरूम कम स्टडी रूम कम भौं भौं रूम बिटेन म्यारो दस सालौ नाती खुसी मा

चिल्लान्द चिल्लान्द आई . अर बुलण  बिस्याई , " आइ गौट  इट .आई  फिनिश्ड इट.."

   मीन पूछ , ' छौनु! क्या ह्व़े ? तीन क्वी कठण  सवाल पूरो कौरी दे क्या?"

 छौनु (प्यारो नाम) न झिड़काई,"  कमौन  ग्रैंड पा ! आप बि उनीसवीं  सेंचुरी  मा छंवां क्या ! जब

विद्यार्थी अपण सवाल खुद करदा छया . अब त ड्यारम, पैरेंट्स होम वर्क करदन

ना कि स्टुडेंट्स."

  " ये छौनु !  त फिर, तू  ख़ुशी मा इथगा किलै कुतकुणु छे रे?"मेरी ब्व़े न पूछ

 छौनु न जबाब दे , " ग्रेट ग्रैंड मौम ! आप यीं बात तैं नि बींगी सकदवां. यू कांट जस्ट

अंडरस्टैंड ग्रेट ग्रैंड मौम. इट्स जस्ट फंटास्टिक, इट्स जस्ट ग्रेट ! अहा मजा आई गे    ."

  " ह्यां ! बिजोग पोड़ीन  ये जमानो पर. अरे ! बिंगैल त किलै नि बिंगुल  मि .." मेरी ब्व़े

क बुलण छौ.

मीन बि ब्व़े क बुल्यां पर हाँ हाँ मिलाई,' अरे फैंटास्टिक क्या ह्व़े? ग्रेट क्या ह्व़े ?"

छौनु न  अति उलार/उत्साह मा जबाब दे , " मि सुबेर बिटेन दिमाग खपाणु छौ अर

अब जैक मेरो रिटायरमेंट प्लान पूरो ह्व़े . "

 छौनु क जबाब सुणिक हम सबि अचिते सी गेवां  .

मीन पूछ , " रिटायर्मेंट प्लान?"

 छौनु न जबाब दे , ' एस!  ग्रांड पा ! आई हैव कम्पलीटेड माई  रिटायरमेंट प्लान."

मेरी ब्व़ेन पूछ, " ये क्या बुलणो छे रे ? क्या च रै वै प्लान मा ?"

म्यार दस सालौ नाती न जबाब दे , ' ओह! ग्रेट ग्रैंड मौम ! यू पक्को प्लान च.

रिटायरमेंट क बाद म्यार द्वी घौर याने फ़ार्म हाउस ह्वाल . एक मैदानी गाँव मा .इख सब कुछ ह्वालू

जडडू मा मि मैदानी गौं क फ़ार्म हॉउस मा रौलू. आराम से . म्यार हिसाब से

गोआ क गाँव ठीक रालों . उख ना त जादा गर्मी होंद अर ना ही जादा जडडू.

नेट मा मीन पौड़ बल गोवा  क गाँव बि शहरूं  बराबरी करदन.टु स्पेंड लाइफ इन

 अर्बन विलेज  वाह ! मजा इ कुछ हौर ह्वालू . सुबेर बिजलू उठिक बस ..अपण जिमनास्ट  हॉउस मा कुछ बर्जिस....

  नास्ता मा कोंटीनेंटल नास्ता करलू , फिर मि समोदर मा स्विमिंग को जौंलू . एक ठंडी बियर मारलू .

या कबि कबि गोवा की लोकल फेनी प्योलू .हमेसा इ नौन वेजिटेरियन लंच खौंलू .

फिर फकोरिक से जौंलू .स्याम दें  समोदरौ छाल पर  घुमणो जौलू . घुमणो परांत  क्लब मा जौलू .

उख द्वी चार पैग मारलु अर फिर डयार एका पक्को वेजिटेरियन डिनर ल्योलू, नेट मा

लिख्युं च बल डिनर वेजिटेरियन इ ठीक होंद. फिर फकोरिक से जौलू . मजेदार

गोवा मा जिंदगी ... अर गर्म्युं खुणि कै पहाड़ी गाँव मा फार्म हॉउस ..."

 छौनु कुछ बोल्दु कि मीन पूछी दे, "  ओ ! त अपण गां जसपुर मा फार्म हॉउस बणेल  हैं? वेरी गुड

छौनु , जु काम मीन नि कौर साक ओ म्यार नाती पुरो कारल . इट्स वेरी गुड़ एंड नोबल  आइडिया

तो हैव रिटायर्मेंट हॉउस इन नेटिव विलेज . वाह! .."

झट से बिच इ मा मेरी ब्व़े न बोली, " नागर्जा सुफल ह्वेन. भुम्या सुफल ह्वेन. पितर कुड़ी

सैकीं (संभाली हुयी) राली. त्यरा ददा अर बुबा न त पितर कुड़ी बचाणो  कुछ नि कार पण त्वी ल़े सै ..! "

  छौनु  न चिरडेक  ब्वाल, " ग्रैंड पा ! आप बि ना ! चलो बूड दादी की बात तो ठीक है, जसपुर,ढान्गु  या

अपण पितर कुड़ी की बात करना . पण आप बी नही सुधरे . पैंतालीस  साल ह्व़े गेन आप तैं मुंबई मा 

पण अबि बी जसपुर, ढान्गु , गाँव, पितर कुड़ी, कंडाळी , फाणु -बाड़ी से बाहर नही आये. ..

आपने मेरा अच्छा खासा मूड खराब कर दिया . कथगा बढ़िया रिटायरमेंट प्लान बणे छौ ..सब ..बस ."

 छौनु  कि ददि याने  मेरी घरवाळी न मेखुणि  आँख घुरैक डांट , " तुमर ! सद्यनी यी हाल रैन. पैल बच्चों

कि बात पूरी नि सुणदा छया  अर बिच इ मा जसपुर, ढान्गू .गाँ मा  पितर कूड़ी,  की बात कनि  बी

लै आन्द छया. अर अब नाती तैं बी जसपुर, ढान्गु, गाँव क बातुं से बोर करणा रौंदा  .. हाँ बोल म्यरो छौनु .

तेरो समर  हॉउस कख होलू ?"छौनु न बोली, " थैंक यू ग्रांड मौम ! यू ऑलवेज इनकरेज मी ..अदरवाइज .

.हाँ त ! मेरो रिटायर्मेंट कु दुसरो फ़ार्म हॉउस कै पहाड़ी गाँव मा होलू. वै फ़ार्म हॉउस मा सौब फैसीलिटि

होली . अब जन की जिम कु  इंतजाम, मेडीटेसन रूम ,ड्रिंक  बार , स्विमिंग पूल सबी कुछ ह्वालू.

पूरो समर का वास्ता व्हिस्की, वाइन, जिन ,  बियर को पुरो इंतजाम रालों. पण ग्रैंड मौम ..एक बात च मुंबई ..!"

 " क्या मुंबई मा क्या ?' मेरी ब्व़े न पूछ

छौनु न बोली, " मी कबि कबि मुंबई बि आणु रौलू . बरसात क बान , मुंबई मा बि एक बड़ो फ़्लैट रालो."

मीन पूछ, " ये छौनु ! अरे रिटायरमेंट  प्लान छोड़ अर अपण पड़णो अर अग्वाड़ी नौकरी , ब्यवसाय की सोच .

पैल वांक प्लान बणादी. "

छौनु कु जबाब थौ, " ओ ! डियर ग्रैंड पा ! मेरी पढ़ाई अर नौकरी की प्लानिंग त पैरेंट्स कारल.

मी त अपणो  असली भविष्य की प्लानिंग करल़ू . ओल्ड एज इज रियल  एज टु  फौलो ." 

मेरी ब्व़े की अबि बि ल्हाल्सा बचीं छे , त ब्व़े न पूछ ," ह्यां ! यि, पहाड़ी गां कख स्वाच तीन ?"

छौनु क जबाब छौ, " अं.अं.अं मेरी समज से मसूरी तौळ  इ कें जगा मा फ़ार्म हॉउस ठीक रालो.

मीन नेट मा पौड़  बल द प्लेस बेलो मसूरी इज  अर्बन एंड रुरल एज  वेल ."

मीन बोल," मतबल जसपुर का फिर बि भाग  नि खुलल. हैं ?"

यां मा मेरी घरवाळी  पर डौंड्या नरसिंग चौढी गे. वींन डांटि क ब्वाल," तुम तैं कथगा दें

 समजाण बल बच्चों न   त   तुमारि जसपुर, घर कूड़ी क बात सुणी याल, सुणी याल . पण अब

नात्युं तैं त चैन से रौणी द्याओ " 

मेरी ब्व़े न पूछ , " ए छौनु ! त रुड़ी, बरखा ,  ह्यूंद , मा तू अपण ब्व़े बुबा तैं बि अटकाणु रैली हैं ?'

छौनु  क जबाब छौ, " व्ह्ट परेंट्स!  नो वे. मी कैक पैरेंट्स उरेंट्स क दगड  रौण वाळ नि छौं. आई  श्यल

लिव माई ओन लाइफ. नो डिस्टरबेन्स  फ्रॉम पैरेंट्स ऐट ऑल."   
 
अबे दै मेरी घरवाळी पर रैणी पोड़ अर वींन पूछ , " मतलब तू अपण ब्व़े बुबा क दगड नि रैली क्या ?'

छौनु क जबाब छौ, " ओ ग्रैंड मोंम ! ग्रेट ग्रैंड पा अर ग्रैंड पा न त अपण रिटायरमेंट प्लान नि

बणायि त हम सब्युं तैं दगड मा रौण पड़णु च. बट आई एम् स्योर कि  ममी  अर पापा  न

अपणो  रिटायर्मेंट प्लान बणे याल होलू. वो अपणी जिन्दगी जियेंगे मै अपनी जिंदगी का

लुत्फ़ उठाउंगा."

मेरी घर्वाळी न पूछ, "  अर  नौनि-नौन्यळ ?"

छौनु क जबाब छौ , " व्हट ! नौनी -नौन्याळ. दसवीं के बाद मै उनको बैक से एज्युकेसन लोन

दिलाई द्योलू . नौनी या नौनु नौकरी मिलदी  लोन भरणा राल. हम द्वी झण त जिंदगी का मजा ल्योला !"

  मेरी ब्वें से नि रये ग्याई, " ह्यां ! ए छौनु ! यीं उमर मा तीन इथगा कखन सीख ?"

छौनु न घमंड मा ब्वाल, ' ग्रैंड मौम ! मीन य़ी सौब इंटरनेट से सीख.'

मेरी ब्वें न ब्वाल," काण्ड लगल ईं सीख परे , बुरळ पोड़ल इन सीख पर  जै  सीख मा  दूसरों जुमेवारी क

बात त भौत होंदी च पण अपण जुमेदारी क क्वी बात इ नि होंदी. कुजाण भै कुजाण  "



Satire, Satirical articles  to be continued......

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चबोड़ इ चबोड़ मा

            कनि कनि कुगति

 
 
             भीष्म कुकरेती 

 

परसी सुपिन मँ क्या दिखुद बल बशिष्ठ तैं बी.ऐड. मँ एड्मिसन नी मील ता कोचिंग क्लास का बड़ा मास्टर बौणिक छकिक रुपया कमाणा छन इ
 
दशरथ को नौनु भरत ब्रदरहुड का नाम फर एन जी ओ चलैका सौकार बण्या छन

मेनका कू फिलम इंस्टिटट्युट भौत मजा से चलणु च किलैकि वुक गर्ल नाच सिखए जांद



उरबसी सरोज खान का इक भांड मंजांदी , झाड़ू पुत्या करदी .

आचार्य रामानुजम रास्ता मां बैठिक कल़ू/तोता क मौ मदद से ज्योत्षी का काम करणा छन .

 


इन्टरनेट आण से नारद जी मां क्व्वी काम नि रै ग्याई ता रेलवे स्टेसन का समणि दाद खाज खुजली की दवाई क पर्चा बंटाणा छन .

सरकारी नौकरी मां लग्या हरिश्चंदर अर युधिष्ठर जख जान्दन सच बोलणा कारण उंकी दर तीन मैना मां बदली होणि रौंद .

भीम कुस्ती असोसिआसन मां चपड़ासी की नौकरी मां दिन काटणा छन ता अर्जुन दिली मा वी.के.मल्होत्रा का यख चिलम भरणा छन
शंकर टीका कार का काम छोड़ीक का विद्यार्थ्युं खुनी Ph D की पोथी लेखिक अपन पुटुक भरणा छन

गांधारी वैबरी आख्युं फर पट्टी बांधदी जब द्रोपद्यूं फर अनाचार होणु हो . धृतराष्ट्र क आंखां त ठीक छन पण सम्विधान को छैल मा वै तैं कुछ नि दिख्यांद .

कंस अच्काल भ्रूण डाक्टर छ कथगा इ नर्सिंग होम का मालिक च अर भ्रूण टेस्ट कौरिक नौन्युं क भ्रूण हत्या से सौकार बणी गे .
 
 

इन सुणण मा आन्द बल सबि राजनैतिक दल वालुं तैं कंस चंदा दीन्दू , अखबार -टी,वी वालुं तैं खूब विज्ञापन दींदु त वैक इक सरकारी निरीक्षण कबि बि नी ह्व़े सकदो .

दुर्योधन अर दुशाहसन भीक मग्दन किलैकि राजस्थान मा भंवरी केस से अंडाक लगी सकदो बल अब अनाचार को ठेका कै बि नेता तैं मिल जान्दो.

भीष्म , विदुर, द्रोणाचार्य कृपाचार्य आई ए एस औफ़िसर छन कैकी बि सरकार हो मजा इ छन .

शुक्राचार्य न चीफ एक्जीक्यूटिवूं खुणि हिंदी मा अपनों शुक्रनीति क हिंदी अनुवाद कौरिक किताब छपाई

ल्याख त अमेरिका वालुंन कोपी राइट क नियम तहत शुक्राचार्य तैं जेल मा बन्द करे दे.

कारण 'शुक्रनीति' क रजिस्ट्रेसन अमेरिका मा चारेक साल पैल ह्व़े गे छौ . अब अपनों बणयाँ गडया सिद्धान्तुं

तैं शुक्राचार्य बि नि छापि सकदो


भारत मुनि का बि कुहाल छन , अमेरिका वालुंन 'भारत नाट्य शाश्त्र' को रजिस्ट्रेसन करे याल त भारत मुनि अच्काल

मराठी नाट्य ग्रहूँ मा स्टेजो पर्दा इन उना करणों नौकरी पर लग्यां छन. गुरु धनवंतरी क त हौर बि बुरा हाल छन.
 
परार औ साल धनवंतरी न अपण दवाई अज्वाणो बुरका ब्याच अर कोपीराईट क हनन मा भारतीय जेल मा च . कै इन्डियन फार्मेस्युटिकल

कम्पनी न अजवायन को कापीराईट लियुं च.
चाणक्य की पोलिटिकल कंसळटेंसी की दुकान नि चौल ता पावर ब्रोकर /राजनीतिक बिचौलिया बौणिक रुप्या गटकणा छन I




महात्मा बुद्ध तैं बुद्धू , बौल्या अर पागल समजी का पागलखाना भीजे गयी

अशोक की सबी राजनैतिक दल मुख ऐथर अर टी.वी. चैनलूं मा बडै करदन पण चुनाव टिकट क्वी नी दींद. सबी बुल्दन बल अच्काल चुनाव मा अहिन्सकुं क्या काम ? .

गुरु गोरखनाथ "चौर्यां स्याळ " का नाम से राजनीतिक औघड़ बाबा बणयाँ छन

 

 वात्सायन को सेक्स पर वेब पोर्टल धडेले से चलणु च. हुर्स्या हुर्सी मां सेक्स एक्सपर्ट कोका को भी सेक्स पोर्टल की दुकान खुली गे .

मुंबई मा कपड़ो मिल बन्द होण से कबीर बिचारा बेरोजगार ह्व़े गेन  अर अब राज्य परिहवन बसून मा काणु बौणिक  सोनू निगम का गाणा सुणेक दिन काटणा छन .

 तुलसी दास अच्काल बी जे पी का वास्ता बैनर बणाना छन .

कालीदास फिल्मू मां गीत लिखणा छन पण कुगति च गीतूं का क्रेडिट मां ऊंको नाम नि आन्द .

 

अकबर को दीन इलाही धर्म तब नि चौल अर अब बि इन भलो धर्म की क्वी कदर नी होंद  त अकबर अच्काल व्क्फ्फ़ बोर्ड की

सदस्यता बान पिछ्ला दस सालुं बिटेन कोशिश मा लग्युं च. 

शाह जंहा अच्काल सरकारी ठेकेदारूं इख मजदुरूं डेली प्रेजेंस को इंचार्ज च.  उन पैल कुछ दिन ताजमहल मा चौकीदार बि छौ

औरंगजेब तैं बिन लादिन न 'इंसानियत ए आजम' को पुरुष्कार दीणे कोशिश कार पण औरंगजेब ना बोली दे बल मदरसों मा टुपल बिचण ठीक च .

बहादुर शाह अर ग़ालिब हिंदी फिल्मो का म्यूजिक डाईरेकटरूं क  इख पान सप्लाई करदन .

अच्काल अश्वथामा कु जन्म अमेरिका मा ही होणु रौंद . जु देस अफु हजारों न्यूकलियर बम बणान्दू अर हौरी देसूं तैं धमकांदु बल बम्ब नि बणाण

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चबोड़ इ चबोड़ मा

          प्रवासी सामाजिक कार्यकर्ताऊं कौकटेली दुःख
                       
                 भीष्म कुकरेती 

     
           मी तैं जब गढवाळ को बारा    मा खबर सार चयेणि ह्वाऊ त
 
मी अखब़ारूं  अर टी.वी चैनेलूं पर भर्वस नि करदो अच्काल टी.वी. चैनेल सबसे

जादा  अणभर्वसी    ह्व़े गेन . टी.वी.चैनेल अर समाचार पत्र त भै क्या बुन तुम मा, तुमर
 
लंगसी फंगस्यूं सौं छन  धौं ! अरे पैलो जमानो मा आकाशवाणी अर दूरदर्शानो बारा मा सोळ आनो भर्वसु छौ

बल य़ी द्वी माध्यम सरकारी मंत्र्युं क भोंपू छन . पण भै  अच्काल त पता इ नि चलदो बल 
 
 टी.वी.चैनेल या समाचार पत्रुं   की क्वा न्यूज  पेडन्यूज  च,  क्वा  न्यूज स्पोंसर्डन्यूज च अर क्वा न्यूज  सेंसेसनलन्यूज  या 
 
तहलका मचौणो का बान सुद्दी की न्यूज  च , क्वा न्यूज  स्पेस भरणो च अर क्वा न्यूज   कखिम सै च. 

 

   त इलै मुंबई मा बैठिक मी गढवाळऐ  न्युजो बान अपण लोगूँ पर ही भर्वस करदू . मतबल
 
अपणा सामाजिक कार्यकर्ता . यि सौब न्यूज की खाण छन, माईन्स छन.

 हाँ यि लोग न्यूज जब बेपियाँ होन्दन त न्यूज उथगा नि दीन्दन जथगा कोकटेल पार्टी मा
 
सच्ची खबर दीन्दन .  बस कें बि संस्था क कार्यकारिणी क बैठक ह्वाओ त सबसे पैथर हाजरी

बुझाणो जान्दो मी , अर  रघुकुल रीति सदा चलि आई क सास्वत बाट पर चलिक हमारा
 
सामाजिक सदस्य कै बियर- बार या कै दर्वड़ी क ड़्यार इ गढवाळ सम्बंधित असली डिस्कसन करणो

बान पीण बिसे जान्दन .
 
       इनी सामाजिक कार्य कर्ताओं क कोकटेल पारटयूँ  से मीतैं गढ़वालै असली खबर मिलदी जन कि

ब्याळी इ 'अखिल गढवाळ बिटेन  पलायन बन्द कारो संस्था, मुंबई  (रजिस्टर्ड ) की कोकटेल पार्टी
 
से पता चौल बल पलायन से गौं प्रवास्युं कूड उजड़ी गेन, गाँव का लोक प्रवास्युं उजड़याँ कुडो क

पठळ चोरी कौरिक ल्ही जान्दन. ब्याल़े कोकटेल पार्टी मा शामिल चार प्रवास्युं का इ क गां मा उजड़याँ  कूड का बौळी सिंगार
 
बि चोरी ह्व़े गेन अर चर्री प्रवास्युं (जौन्क उजड़याँ कुडों पठळ ,बौळी , दार-सिंगार,चोरी हेवे )  न प्रूफ का साथ ( सब्युंन  ग्विल्ल क सौं घटीं)

सूचना बि दे बल  प्रवास्युं कूड उजड़णा छन पर सरकार कुच्छ नी करणी च. अर चूँकि सब्युनं सरकार तैं मा बैणी
 
क गाळी देन त साफ़ छौ की खबर  सोळ आनो सै च , सत्य च निथर यूँन  मुंबई मा -बैणी गाळी  किलै दीण छौ. 

      दारु क पार्टी चलणी इ छे की एकन सूचना दे बल 'अखिल गढवाळ बिटेन पलायन बन्द कारो संस्था, मुंबई (रजिस्टर्ड )'
 
क अध्यक्ष अर महा मंत्री न दस दिन पैलि देहरादून मा प्लाट खरीद . त सब्युं न दुयूं तैं बधाई दे. एक न त इथगा बडे कार,

इथगा बड़ाई कार  की अध्यक्ष अर महामंत्री जीक पूठों पर नौ पूळ पराळ चलि गेन अर ऊन दुयूं न सूचना दे क्या पक्की
 
न्यूज दे  बल गढवाळ मा बड़ो ख़राब रिवाज चळण बिसे गे , गढवाळ मा गलत प्रचलन शुरू ह्व़े गे . महामंत्री जीन सूचना दे

बल अब गाँव का स्कूल टीचर, पटवरि  बि रिटायरमेंट का बाद देहरादून, ऋषिकेश, कोटद्वार मा बसण शुरू ह्व़े गेन .

अध्यक्ष जीन सूचना दे बल ईन कुनगस, गलत बात, उलटो रिवाज,   पैल नी होंदा छौ . अब त गाँव इ खाली ह्व़े जाला .

सब्युंन अपण अपण क्षेत्र का कु टीचर , कु कु वी.एल.डब्ल्यू .कु कु पटवारी गाँव छोड़िक कोटद्वार या हैरी जगा बसी गेन.

की पक्की सूचना दे याँ ! इख तक  तक पूरो ब्योरा दे  की कैन कथगा मा जमीन खरीद.

सब्युं न एकमत ह्वेका ब्वाल बल  सरकार कुछ नी करणी च. सरकार साली बदमास हो गयी है .
 
सब्युं न सरकार अर नेतौं तैं गाळी बि देन बल सरकार गाँव क  टीचरों , पटवारियों, वी.एल.डब्ल्यूओं तैं गाँव छुडण से नी रुक्णी च.

पैल  माहौल  गाळीयूँ से गरमाई त पैथर गरम माहौल गमगीनी मा बदली गे अर सब्बी करूण रस का  तलौ
 
मा  गुत्ती मारण लगी गेन बल इन त एक दिन गढ़वाळ मनुष्य विहीन ह्व़े जालो!  उ त भलो ह्वेन एक सदस्य को जैन झांझ मा ऐक  फिर

से सूचना दे कि 'अखिल गढवाळ बिटेन पलायन बन्द कारो संस्था, मुंबई (रजिस्टर्ड )' क ज्वाइंट सेक्रेटरी न कोटद्वार मा,
 
प्रचार प्रसार मंत्री न रिसिकेश मा अर कोषाध्यक्ष जीन श्यामपुर मा बण्यु-बणयूँ  मकान खरीद याल. माहौल मा बधाई 

क फ्वारा बगण बिसे गेन, बधाई क बंसुळी बजण बिसे गेन.

        पण चूंकि प्रवासी संस्था क कार्यकारणी सदस्यों  क कोकटेल पार्टी छे त रघुकुल रीति क बाटू फिर से

रस्ता मा ऐ गे अर फिर से गढ़वाळ मा परेशानी क्य क्य छन पर गम्भीर चर्चा या सुचनाऊ आदान प्रदान शुरू ह्व़े गे 

  एक एक  कौरिक  सदस्यों न सूचना दे बल गौं मा जब तीन आदिम पलायन  करदन त गौं मा दस सुंगर पैदा

ह्व़े जान्दन . बस सुंगरूं  बात आई कि सौब सरकार तैं अर नेताओं तै सुंगरौ गाळी दीण बिसे गेन.सब्युंन  सूचना दे बल सरकार

कुछ नी करणी च. 

     कुछुंन सूचना दे बल गाँव मा गौं का इ लोक अपणा कुल देवता क मंदिरूं  से घंडल चुर्याणा छन पण गौ बुरी चीज

जु सरकार कुछ करणी ह्वाऊ धौ.

   अर अखिरैं जन सद्यनी होंद   उनि ह्व़े . भौत सा सदस्यों न सूचना दे , पक्की न्यूज दे  बल गढ़वाळ मा शराब को प्रचलन भौत बढ़ी गे अर

बार की कैशियर देखिक एक सदस्य तैं एक महत्व पूर्ण सूचना याद आई बल अब त गढवाळ मा जनानी बि शराब परोसणी लगी गेन 

अर सरकार कुछ नी करणी च.जनि गढवाळ मा शराब कि छ्वीं शुरू होंद त समाजी ल़ीण चएंद बल अब दरवडयौं मा

क्वी सूचना नी बचीं च .

  सी भोळ मीन  'अखिल भारतीय गढवाळ बिटेन  गूणी-बांदर भगाओ, संस्था, मुंबई (रजिस्टर्ड )' क कार्यकारिणी क

बैठक मा जाण मी तैं पूरो भरवस च   बैठक का बाद कोकटेल पार्टी मा गढवाळ मा कथगा गूणी-बांदर छन पर क्वी नई सूचना

जरुर मीली  जाली


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