Author Topic: UTTARAKHANDI LANGUAGE TERMINOLOGY WITH DEFINITION- हमरी बोली  (Read 11914 times)

purushotamsati

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good job mehta jii.............nice start.........keep it up.....with this you would bring many old word infrount of us which we do not know...........thxxx n congrats....

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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नातक - सूतक
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यह शब्द भी संस्कृति से संभंधित है ! जब किसी के परिवार में कोई बच्चा लेता है तो आम शब्दावली में इसे नातक कहते है ! और पूजा के विशेष कार्य भी नामकरण होने तक नहीं किये जाते है, क्योकि नातक में कुछ असुधि माना जाता है !

सूतक -  किसी के परिवार के यदि कोई व्यक्ति का निधन होता है तो परिवार में हुए इस शोक को सूतक कहते है !

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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कुवीड
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पहाडो में जब गर्मी के दिनों में एक अजीब का धुधली परत आ जाती है जिसे एक पहाड़ की दूसरी पहाड़ की चोटी अच्छी दंग से नहीं दिखाई देती है!  इस स्थानीय भाषा में कहते है कुवीड ! दानो मा कुवीड फगी गे ! यानी पहाडो में कुवीड आ गयी है ! इसका कारण तेज गर्मी और जंगलो में लगने वाली आग ही होती है !

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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फाग
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शब्द के प्रतीत होता है फाग यानी फागुन का महीने से सम्भंदित ! फागुन के महीने में चीड के पेडो से एक पीले रंग का पाउडर जैसा निलकता है ! जैसे स्थानीय भाषा में फाग कहते है !

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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बांट
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आप इस बात का मतलब वजन तोलने वाले बाँट से नहीं लगाए ! इसका मतलब मीट से है ! पहाडो में जब लोग मीट पकाते है इसका पानी वाले हिसे को स्थानीय भाषा में बाँट कहते है ! यह कुमाओं की तरफ इस शब्द का इस्तेमाल किया जाता है !

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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लुट
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पहाडो में जानवरों के लिए धान के फसल का बचा हुवा हिसा जिसे पराव भी कहते है! लोग शीत काल में जानवरों के लिए इसे पेडो या अन्य जगहों पर पराव का चबूतरा बनाते है जिसे लुट कहते है !

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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ब्रम गाना या औषण लगाना
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यह शब्द उत्तराखंड के लोक संगीत से है ! जब देवी देवताओ का मंदिर मे आराधन होती है भगवान् के अस्तुति के लिए ढोली या जगरिया भगवान् की किसी बीरता का चमत्कार की कहानी को गाने के रूप में बया करता है जिसे ब्रम गाना या औषण लगाना है !

Dinesh Bijalwan

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Raimad
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This word relates to cuisine of Uttarakhand. There is a tree called Timul. The fruit of this tree are used in making Raimad. To make the “Ramaid”, timul fruits are crashed in Okhli and after missing salt etc, it called “Raimad”.   

In Garhwali   it is called Raimodi and  generally  Buraansh flowers are used for it.
 

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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Chilke
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When there was no electricty in gone days, people used to lit Chilke as a torch during the night, if they had to go some where.

Chilke are small pieces of Cheed (Pine Tree) which has Leesa on it  (Leesa kind of liquid which comes from Cheed which is flammable).  Even today people used chilke to lit fire also.

Risky Pathak

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Ise humaare yha 'Chhiluk' kehte hai.

These pieces of wood catch fire very easily, so they are used for ignition.

Chilke
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When there was no electricty in gone days, people used to lit Chilke as a torch during the night, if they had to go some where.

Chilke are small pieces of Cheed (Pine Tree) which has Leesa on it  (Leesa kind of liquid which comes from Cheed which is flammable).  Even today people used chilke to lit fire also.

 

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