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Brijendra Lal Sah Lyrist of Bedo Pako- बेडू पाको गाने के रचियता बिजेंद्र लाल साह

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, February 12, 2010, 10:05:28 PM


एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


सुमित्रा नंदन पन्त से ब्रिजेन्द्र लाल साह की मुलाकात

लखनऊ से अल्मोड़ा लौटने के बाद संन १९४९ की गर्मियों की छुट्टी में ब्रिजेन्द्र लाल साह ही पहली बार सुमित्रा नंदन पन्त जी से मुलाकात हुयी! उन्होंने ने पन्त जी को अपनी कविताई सुनायी!  पन्त जी उनकी कविताओ से बड़े प्रभावित हुए और उनमे काव्य सृजन की सम्भावनाये देखकर उनके इलाहाबाद चलने को कहा !

ब्रिजेन्द्र लाल साह जी ने इलाहाबाद के प्रयाग विश्वविधालय में प्रवेश लिया जहाँ पड़ाई के दौरान उन्होंने रजत काव्य की रचना की !

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1950
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Brijendra Lal Sah ji got a chance to meet great poet like Hari Vansh Bachhan Ray, Dr Raj Kumar Verma during his study in Prayag University Allahabad. He also started broadcasting in Aakashwani.  Sumitra Nandan Pant ji always remained with him there.



राजेश जोशी/rajesh.joshee

मेहता जी,
यह सर्वमान्य है कि "बेडु पाको बार मासा" गीत के रचियता श्री ब्रिजेन्द्र लाल साह हैं, श्री मोहन उप्रेती जी और गोपाल बाबू गोस्वामी जी ने इसे पुरे विश्व में उत्तराखण्ड की पहचान बना दिया।  पंजाबी के "चक दे. ......" के बाद शायद यही ऎसा आंचलिक वाक्य है जो हर देशवासी की जुबान पर आता है। 
जहां तक  इस रचना के श्रोत की बात है यह एक पारंपरिक रचना लगती है क्योंकि पुराने बुजुर्ग लोगों से मेरी वार्ता से यह तथ्य मेरे संज्ञान में आया है कि यह पंक्तियां साह जी के जन्म के काफ़ी पहले से भी प्रचलन में है, साह जी ने इस पारंपरिक रचना को एक व्यवस्थित गीत के रूप में हमारे सामने प्रस्तुत किया है।

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ब्रिजेन्द्र लाल साह जी द्वारा रचित प्रसिद्ध गाना इस प्रकार है! 
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बेडू पाको बारो मासा
ओ नरैणा काफल पाको चैता मेरी छैला ...

२) रुणा  भूणा दींन ऐगो
     ओ नरैणा ना तेरो मैता . मेरी छैला

बेडू पाको बारो मासा
ओ नरैणा काफल पाको चैता मेरी छैला ...

३)  अल्मोड़ा की नंदा देवी 
     ओ नरैणा फूल चडूनु पाती मेरी छेला ..

बेडू पाको बारो मासा
ओ नरैणा काफल पाको चैता मेरी छैला

४)  आपु खानि पान सुपारी..
     ओ नरैणा मीके दीनी बीडी मेरी छैला
 
बेडू पाको बारो मासा
ओ नरैणा काफल पाको चैता मेरी छैला

५)   अल्मोड़ा का लाल बाजार..
       ओ नरैणा लाल माट की सीडी मेरी छैला

बेडू पाको बारो मासा
ओ नरैणा काफल पाको चैता मेरी छैला

जब प्रसिद्ध गायक गोपाल बाबु गोस्वामी जी यह गाना गाया उन्होंने ने इस गाने के रचियता का नाम इस गाने में एक लाइन जोड़ कर श्री ब्रिजेन्द्र लाल साह को याद किया !  जो इस प्रकार है !

बेडू पाको बारो मासा
ओ नरैणा काफल पाको चैता मेरी छैला

" श्री ब्रिजेन्द्र लाल साह,
ओ नरैणा यो तनार गीत मेरी छैला!

(यानी श्री ब्रिजेन्द्र लाल साह जी और उनके गीत बहुत प्रसिद्ध है!





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ब्रिजेन्द्र लाल साह जी से जुडी कुछ और जानकारिया

१९५० से पूर्व आकाशवाणी के कविताये कवी नहीं आते थे! आकाशवाणी इलाहाबाद से सन १९५० में मैथली शरण गुप्त ने पहली बार ' माटी' शीर्षक से अपनी कविता प्रस्तुत की थी ! उन्ही दिनों स्वर्ण किरण के अशोक वन की रेडियो प्रतुती में ब्रिजेन्द्र लाल साह जी ने रावण जी भूमिका निभायी थी और आकाशवाणी के लिए पन्त जी की कुछ कविताये का स्वर भी किया था !

अन्य महतवपूर्ण भूमिकाओ को निभाने के लिए ब्रिजेन्द्र लाल साह को बुलाया जाता था ! विश्वविधालय के अध्यन के दौरान ही आकाशवाणी इलाहाबाद के तत्कालीन कार्यकर्म अधिशाषी प्रभाकर आचार्य के कहने पर चयनिका शीर्षक के अंतर्गत कई रेडियो रूपक उन्होंने ने लिखे !

हालैंड हाल छात्रावास के स्वर्ण जयंती समारोह के सन १९५० में ब्रिजेन्द्र लाल साह द्वारा लिखित " चौराहे की आत्मा"  उन्ही के निर्देशन में मानचित किया गया था, जिसे अत्यधिक लोक प्रियता प्राप्त हुयी !

१९५१ में प्रयाग विश्व विद्यालय से बी ए करने के पशचात ब्रिजेन्द्र लाल साह जी अल्मोड़ा लौट आये !

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ब्रिजेन्द्र लाल साह जी की राहुल सांक्रत्यान जी मुलाक़ात
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जब बी ए पास करने के बाद ब्रिजेन्द्र लाल साह अल्मोड़ा लौटे, तो उन्ही दिनों राहुल सांक्रत्यान से भी उनकी भेट हुयी ! राहुल तब कुमाऊ और गढ़वाल पर इतिहास लिखने के लिए सामग्री संकलन के लिए अल्मोड़ा आये हुए थे! उन्होंने ब्रिजेन्द्र लाल साह से कुछ कुमौनी लोक गीतों की जानकारी ली! ब्रिजेन्द्र लाल साह जी ने कुछ गाने गा कर सुनाये तो राहुल जी ने उन्हें लिपिबद्ध कर लिया!

सं न १९५० में ही आकाशवाणी इलाहाबाद से राहुल जी द्वारा लिखित एक रूपक पर्वत श्री प्रसारित किया गया था! पर्वत श्री रूपक कम , यात्रा वृतांत अधिक था ! प्रभाकर माचने उसे सरश बनाने में कठिनाए महसूस कर रहे थे! उन्होंने ब्रिजेन्द्र लाल साह जी को बुलाकर इस समस्या से अवगत कराया! ब्रिजेन्द्र लाल ने पर्वत श्री को सरस बनाने की जिम्मेदारिया संभाली और उसमे कुमौनी भाषा के कुछ संवादों व एक लोक गीत का समावेश किया ! उस लोक गीत को ब्रिजेन्द्र लाल साह के साथ लक्ष्मी वर्मा तथा कु सरुज ने प्रस्तुत क्या ! ब्रिजेन्द्र की पीड़ी द्वारा आकाशवाणी के प्रसारित वह पहला गीत था !

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


1951-1952
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Mohan Upreti and Lenin Pant were Principal in Almora Inter College. When he returns to Almora from Allahabad, Plays have once again started.

Baake Lal Sah, Jag Mohan Sah, Surendra Mehta, Lenin Pant, Tara Sati, Iftkhaar Khaan, Brijendra Lal Sah were then the famous play artiests.

With Mohan Upreti, these all artiests started performing with. They selectd big classical types of plays rather than small ones and started performing in "Regal Cinema" Almora.

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Formation of The United Artiest Almora Group
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Mohan Upreti, Lenin Pant, Brijendra Lal Sah, Baake Lal Sah, Tara Dutt Sati, Surendra Mehta and other artiests formed a group in 1952 and they named it "The United Artiest Almora".

However, later on 29 June 1955, the group was renamed as "Lok Kalakar Sangh" on advice of Kamala pati Tripathi.  In the month of Sept, the society was registered.

Briendra Lal Sah started performing under this group