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Ghansali,Mini Japan Of Uttarakhand,घनसाली,टिहरी गढ़वाल, उत्तराखंड का मिनी जापान

Started by Devbhoomi,Uttarakhand, June 21, 2010, 02:36:47 AM

Devbhoomi,Uttarakhand

टिहरी जिले के घनसाली ब्लाक में कई गांवों के लोग हैं जापान में  -इन गांवों के प्रत्येक घर से एक सदस्य कर रहा जापान में नौकरी -जापानी  मुद्रा 'येन' की बदौलत इलाके में सबसे समृद्ध हैं ये गांव घनसाली (टिहरी):  शीर्षक पढ़कर आप सोच रहे होंगे कि आखिर भारत के पर्वतीय राज्य उत्तराखंड  के सुदूरवर्ती अंचलों में मिनी जापान कैसे बस सकता है। यह सोचना बिलकुल  सही है, लेकिन यह बात भी सच है कि इन गांवों में एक भी जापानी नहीं रहता  है। इसके बावजूद इलाके में ये गांव 'मिनी जापान' के नाम से ही जाने जाते  है।

अब आप सोच रहे होंगे कि ऐसा क्यों, चलिए हम ही बता देते हैं।  बात दरअसल यह है कि इन गांवों के कमोवेश हर घर से कम से कम एक सदस्य जापान  में नौकरी कर रहा है। ऐसे में जापानी मुद्रा 'येन' की बदौलत दूरस्थ होने  के बावजूद आज इस गांव में कई आलीशान दोमंजिला पक्के मकान हैं। गांव में  बिजली नहीं है, लेकिन हर घर में सौर ऊर्जा उपकरण लगे हैं। 

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सड़क मार्गों से काफी दूर खड़ी चढ़ाई पार करने के बाद इन गांवों  को देखकर यकीन ही नहीं होता कि ये दूरस्थ क्षेत्रों के गांव हैं। यह गांव  इतने समृद्ध कैसे हुए। इसकी कहानी शुरू हुई करीब दो दशक पूर्व जब रोजगार  की तलाश में यहां के कुछ युवा शहरों की ओर गए। खास बात यह रही कि उन्होंने  नौकरी के लिए सीधा जापान का रुख किया और बस गांव की तस्वीर बदलनी शुरू हो  गई। आज पट्टी हिंदाव क्षेत्र के ग्राम सरपोली, पंगरियाणा, भौंणा, लैणी,  अंथवालगांव आदि गांवों में लगभग हर घर से कम से कम एक सदस्य जापान में है। 

इनमें से अधिकांश वहां होटल व्यवसाय से जुड़े हुए हैं। गांव के  अधिकतर लोगों का जापान में होने का असर यहां की आर्थिकी पर भी पड़ा। आज  पट्टी के सभी गांवों में सीमेंट के पक्के आलीशान भवन बने हुए हैं। इनमें न  केवल आधुनिक सुख-सुविधाएं हैं, बल्कि मनोरंजन के सारे साधन मौजूद हैं। खास  बात यह है कि जब क्षेत्र के अधिकांश गांवों में बिजली पहुंची ही नहीं थी,  तब इन गांवों के लोगों ने अपने खर्चे पर सौर ऊर्जा उपकरण लगवा लिए थे।  जापानी मुद्रा यानि येन की बदौलत यह गांव अन्य गांवों के मुकाबले सुविधा  संपन्न हो गए। 

सरपोली के ग्राम प्रधान कुंदन सिंह कैंतुरा कहते हैं कि विदेश  में बसे लोगों ने गांवों की तस्वीर बदल दी, लेकिन सड़क व शिक्षा जैसी  मूलभूत सुविधाएं जुटाने को प्रयास किए जाने की जरूरत है। 500 विदेशी खाते  हैं घनसाली बैंक में घनसाली: जनपद टिहरी की भारतीय स्टेट बैंक की घनसाली  शाखा में 500 बैंक खाते ऐसे हैं, जो विदेश से संचालित होते हैं। यही वजह  है कि एसबीआई घनसाली का सालाना टर्नओवर बैंक की अन्य शाखाओं से अधिक है।

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उत्तराखंड का मिनी जापान कहे हाने वाले घनसाली-सेमली जोड़ने को बने कच्चा पुल

घनसाली, निज प्रतिनिधि: विकासखंड भिलंगना के मुख्य बाजार घनसाली से सेमली तक जाने वाले कच्चे लकड़ी के पुल का निर्माण अभी नहीं हुआ। इससे लोगों को तहसील मुख्यालय, ब्लाक, थाना सहित कई विभागों में जाने के लिए तीन किमी की दूरी पैदल नापनी पड़ रही है। क्षेत्रवासियों ने वन विभाग से पूर्व की भांति जल्द कच्चा पुल बनाने की मांग की है।
प्रखंड के मुख्य बाजार घनसाली को सेमली कस्बे को आवागमन की सुविधा मुहैया कराने के लिए वन विभाग ने दशकों पूर्व भिलंगना नदी पर हर साल नवंबर दिसंबर माह में आठ छह माह के लिए एक कच्चे लकड़ी के पुल का निर्माण करता चला आ रहा था, लेकिन इस वर्ष वन विभाग ने अभी तक उक्त जगह पर पुल का निर्माण नहीं किया गया है
। क्षेत्र के लोगों को तहसील, ब्लाक, पुलिस थाना, विद्युत विभाग, शिक्षा विभाग सहित एक दर्जन के करीब सरकारी गैर सरकारी कार्यालय में जाने के लिए अतिरिक्त तीन किमी की दूरी पैदल नापनी पड़ती है। इससे सबसे अधिक परेशानी पैदल राहगीरों को उठानी पड़ती है। यदि स्थान पर कच्चे अस्थाई लकड़ी के पुल का निर्माण किया जाता तो लोगों को आवागमन में सुविधा मिलती और समय भी बचता।
क्षेत्र पंचायत सदस्य रूची सेमवाल, जसवीर नेगी, जिला पंचायत सदस्य पिंगल दास, सरस्वती मैठाणी आदि लोगों का कहना हे कि हर वर्ष की तरह वन विभाग को उक्त जगह पर पुल निर्माण करना चाहिए। रेंज अधिकारी एनडी कंडारी का कहना है कि पुल निर्माण शीघ्र किया जाएगा। लेकिन अभी वन विभाग से लकड़ी नहीं मिल पाई है। लकड़ी मिलते ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
   

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भिलंगना प्रखंड की सबसे बड़ी रिंग रोड घनसाली


घनसाली । भिलंगना प्रखंड की सबसे बड़ी रिंग रोड घनसाली-अखोड़ी मोटरमार्ग के डामरीकरण व चौड़ीकरण की मांग को लेकर दो पट्टी ग्याहरगांव व हिंदाव के सैकड़ों ग्रामीण सड़क पर उतर आए। ग्रामीणों ने पांच घटे तक तहसीदार व लोनिवि के अधिशासी अभियंता को घेरे रखा। बाद में जिलाधिकारी सचिन कुर्वे के मामले की मजिस्ट्रेटी जांच के आश्वासन पर ग्रामीण शांत हुए।

बुधवार को उक्त पट्टियों के करीब आठ सौ ग्रामीण, जिसमें अधिसंख्य महिलाएं थी घनसाली में एकत्रित हुए और जुलूस के रूप में नारेबाजी करते हुए लोनिवि कार्यालय पर पहुंचे। यहां उन्होंने प्रदर्शन कर धरना शुरू कर दिया। साथ ही ग्रामीणों ने तहसीलदार व अधिशासी अभियंता को पांच घंटे तक घेरे रखा। ग्रामीणों का कहना है कि प्रखंड की सबसे बड़ी रिंग रोड की डामरीकरण व चौड़ीकरण की मांग करते आ रहे हैं, लेकिन विभाग इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है।

मार्ग की स्थिति इतनी खराब है कि इस पर कभी भी कोई दुर्घटना हो सकती है। ग्यारह गांव संघर्ष समिति की सदस्य लक्ष्मी देवी ने कहा कि लोनिवि के पूर्व में डामरीकरण के नाम पर 7 करोड़ रुपये खर्च किए, लेकिन मोटरमार्ग की दशा खराब है। भिलंगना सखी संघर्ष समिति की अध्यक्ष सुषमा शाह ने आरोप लगाया इसी वित्त वर्ष में सड़क डामरीकरण के नाम पर चार करोड़ रुपये खर्च कर दिए, लेकिन मार्ग की स्थिति जस की तस है। उन्होंने किए गए डामरीकरण के जांच तथा दोषी अधिकारी व ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

बाद में जिलाधिकारी ने दूरभाष पर ग्रामीणों को आश्वासन दिया गया कि पूर्व में डामरीकरण के नाम पर हुए खर्च की मजिस्ट्रेटी जांच की जाएगी। उन्होंने तहसीलदार को उक्त मोटरमार्ग की फोटोग्राफी करने के निर्देश दिए। उधर विभाग के अधिशासी अभियंता एमए खान ने बताया कि उक्त मोटर मार्ग के दस किमी तक डामरीकरण के टेंडर हो चुके हैं।

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