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Public Protest For Development - जिबड़ियो छाल्यो पड़ो विकास पुकारि-पुकारि

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, November 10, 2007, 11:20:22 AM

पंकज सिंह महर

स्वीकृत पेयजल योजनाओं के न बनने से ग्रामीण आक्रोशितAug 05, 11:37 pm

रानीखेत (अल्मोड़ा)। रामगंगा-चमड़खान पम्पिंग पेयजल योजना अब तक पूरी न होने से सिलोरघाटी व ककलासौं पट्टी के क्षेत्रवासियों में भारी रोष है। ग्रामीणों ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि स्वीकृत पेयजल योजना के जल्द शुरू न की गई तो व्यापक आन्दोलन छेड़ा जाएगा। सिलोरघाट व ककलासौं पट्टी के ग्रामीणों को पेयजल उपलब्ध कराने के लिए डेढ़ साल पूर्व 12 करोड़ 30 लाख की रामगंगा-चमड़खान पम्पिंग पेयजल योजना स्वीकृत की गई थी। पेयजल योजना के बनने से इन पट्टियों के लगभग 147 ग्रामसभाएं लाभान्वित होनी थी लेकिन शासन-प्रशासन की लापरवाही के कारण योजना अभी तक नहीं बन पाई। प्रदेश भाईचारा कमेटी के संयोजक पूरन सिंह डंगवाल ने बताया कि इस योजना के लिए 50 लाख की अग्रिम धनराशि व 6 करोड़ की पुन: धनराशि स्वीकृत हो चुकी है, लेकिन विभागीय लापरवाही के कारण योजना अधर में लटक गई है। उन्होंने बताया कि अगर जल निगम चाहे तो योजना एनजीओ के माध्यम या ग्रामसभाओं की समितियों के माध्यम से बना सकती है। श्री डंगवाल ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर पंचायत चुनावों के बाद एक महीने तक रामगंगा-चमड़खान पेयजल योजना नहीं बनी तो चमड़खान से जनांदोलन करने को मजबूर होना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि दूसरी पेयजल योजना रानीखेत-चिलियानौला-खीरौघाटी, जिससे ताड़ीखेत ब्लाक के 122 व द्वाराहाट ब्लाक के 57 तोक समेत कई गांवों के लिए लगभग 56 करोड़ 40 लाख की योजना शासन को स्वीकृति के लिए भेजी गई है। अगर यह योजनाएं स्वीकृत हो गई तो दूर-दराज के गांवों के लोगों को पानी बूंद-बूंद को नहीं तरसना पडे़गा। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं की स्वीकृति के सरकार पर दबाव बनाया जाएगा।

Abhinav

उत्तराखंड में इन दिनों नदियां संकट में हैं. राज्य की अलग-अलग नदियों पर बांध बनाने और उन्हें सुरंग में डालने की प्रक्रिया शुरु हो गई है. हालत ये है कि गंगा नदी को भी सुरंग में डाला जा रहा है. ऊर्जा के नाम पर चल रही इस कथित विकास प्रक्रिया के खिलाफ राज्य भर में लोग एकजुट हो रहे हैं और उन्होंने नदियों को बचाने के लिए कमर कस ली है. उत्तराखंड से प्रसून लतांत की रिपोर्ट
http://raviwar.com/news/38_save-river-uttarakhand-prasunlatant.shtml

पंकज सिंह महर

Movement continues in Reni village
By Our Staff Reporter


Joshimath, 5 Aug: Scene one: On 26 March 1974, Gaura Devi with other women of Reni village in Chamoli Garhwal hogged worldwide attention by adopting a noble non-violent method of saving trees by hugging them and saying, "First cut us, before cutting down our trees."
Scene two: The forest that made Reni famous worldwide now faces the hard test of time. This time, a hydropower project has emerged as a threat to Reni village and its forests.
Reni villagers have launched a movement against the Rishi Ganga Hydel Power Project. They have been staging demonstrations against the project since 2006. They allege that the blasting done for the project has ruined their peace. The blasting has resulted in erosion and the historic place from where the Chipko Movement gained fame is now in total neglect.
Bali Devi, former President of the Mahila Mangal Dal, rues, "We have requested the power company not to carry out blasting in the wee hours of the day. They do this at any time of the day, even as early as 4 a.m."
She claims that the houses in the village have suffered cracks and no government official and public representatives have visited to understand the problem.
The Rishi Ganga Hydro Power Project, being constructed on the confluence of Dhauli Ganga and Rishi Ganga - is facing the criticism of the villagers for its approach towards the environment. The villagers are demanding that the District Magistrate, Chamoli, visit the village and assess the ground reality and sufferings of the local people.
Reni, located 26 kms from Joshimath, is home to 36 families. The total population of the village is around 150.
The women fought for environment conservation in the 70s and now they have launched a similar agitation. "The power project has had an adverse effect on our village. The Mahila Mangal Dal planted hundred of trees. Our forests are facing degradation due to the project. The tunnel is passing under our village and we are feeling threatened," said another villager.
Reni village launched a movement in the 70s to save its trees and now it is demanding better rehabilitation and environment conservation.

पंकज सिंह महर

डीडीहाट(पिथौरागढ़): तहसील के लामाघर गांव में पिछले तेरह वर्षो से विद्युत व्यवस्था भंग है। बावजूद इसके विद्युत विभाग ने यहां के आधा दर्जन उपभोक्ताओं को हजारों रुपये के बिल भेज दिये। इसको लेकर ग्रामीणों में जबरदस्त आक्रोश व्याप्त है। ग्रामीणों ने अब मुख्यमंत्री से गुहार लगायी है।
प्रदेश के मुख्यमंत्री को भेजे ज्ञापन में ग्राम सभा के नारायण सिंह, बहादुर सिंह, प्रेम सिंह, त्रिलोक सिंह, सुजान सिंह और महेन्द्र सिंह ने कहा है कि उनके गांव लामाघर की आपूर्ति के लिए लगा विद्युत ट्रांसफार्मर चार जून 1995 को फुंक गया था। इसकी सूचना विभाग को दी गयी परन्तु आज तक ट्रांसफार्मर बदलने की सुध नहीं ली गयी। परन्तु अब विभाग द्वारा 20 हजार से ऊपर की धनराशि वाले बिल वसूली नोटिस के जरिये भिजवाये गये है। ग्रामीणों ने बिना विद्युत आपूर्ति के बिल वसूलने के लिये नोटिस भिजवाने को घोर अन्याय करार दिया है। ग्रामीणों ने कहा है कि खराब ट्रांसफार्मर को बदलने के लिये पिछले तेरह वर्षो में सैकड़ों बार विभाग को अवगत कराने के बाद भी सुनवाई नहीं की गयी है। परन्तु विभाग हजारों रुपये के बिल वसूली के लिये नोटिस भेजना नहीं भूला है। उन्होंने मुख्यमंत्री से गुहार लगाकर शीघ्र इस मामले में उचित कार्रवाई करने की मांग की है।





हेम पन्त

डीडीहाट(पिथौरागढ़): डीडीहाट को जिला बनाये जाने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है। जनपद की मांग को लेकर अब तक दर्जनों बार आंदोलन छेड़ चुके लोगों में गहरा आक्रोश व्याप्त है। जिला बनाओ संघर्ष समिति ने शीघ्र सकारात्मक पहल नहीं होने पर निर्णायक आंदोलन छेड़ने की चेतावनी दी है।

वर्ष 1962 में पिथौरागढ़ जनपद की घोषणा की गयी थी तब डीडीहाट को ही जिला मुख्यालय बनाया जाना था। परंतु घोषणा के बाद पिथौरागढ़ को ही मुख्यालय बना दिया गया। इसके बाद डीडीहाट को भी जनपद बनाने की मांग जोर पकड़ने लगी। इस बीच क्षेत्रवासियों ने जिला बनाओ संघर्ष समिति का गठन कर अपनी मांग सरकारों के सामने पुरजोर तरीके से उठायी गयी। पृथक राज्य गठन के बाद जिला बनाने को लेकर क्षेत्रवासियों द्वारा कई बार आंदोलन भी किया जा चुका है। परन्तु क्षेत्रवासियों को इस मामले पर अब तक केवल आश्वासन ही मिले है। जिला बनाओ संघर्ष समिति के अध्यक्ष दान सिंह और उपाध्यक्ष जोध सिंह बोरा ने कहा है कि डीडीहाट जिले के सभी मानक पूरे करता है। उन्होंने कहा है कि पिथौरागढ़ जनपद मुख्यालय की दूरी अधिक होने से सीमांत के लोगों को तमाम मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। इसके चलते विकास कार्य भी प्रभावित होते है। यदि डीडीहाट जिले की घोषणा की जाती है तो डीडीहाट सहित सीमान्त की धारचूला और मुनस्यारी तहसीलों का विकास भी हो सकेगा। संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने प्रदेश के ग्राम्य विकास मंत्री विशन सिंह चुफाल के समक्ष दोहराते हुये शीघ्र डीडीहाट को जनपद घोषित किये जाने की मांग की है। इस मामले में मंत्री श्री चुफाल ने कहा है कि जब भी प्रदेश सरकार पृथक जनपद की घोषणा करेगी डीडीहाट को वरीयता दी जायेगी।


एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Like Didi Haat, there has been demand for Ranikhet since long. People have been agitating for this.

Quote from: H.Pant on September 27, 2008, 12:55:32 PM
डीडीहाट(पिथौरागढ़): डीडीहाट को जिला बनाये जाने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है। जनपद की मांग को लेकर अब तक दर्जनों बार आंदोलन छेड़ चुके लोगों में गहरा आक्रोश व्याप्त है। जिला बनाओ संघर्ष समिति ने शीघ्र सकारात्मक पहल नहीं होने पर निर्णायक आंदोलन छेड़ने की चेतावनी दी है।

वर्ष 1962 में पिथौरागढ़ जनपद की घोषणा की गयी थी तब डीडीहाट को ही जिला मुख्यालय बनाया जाना था। परंतु घोषणा के बाद पिथौरागढ़ को ही मुख्यालय बना दिया गया। इसके बाद डीडीहाट को भी जनपद बनाने की मांग जोर पकड़ने लगी। इस बीच क्षेत्रवासियों ने जिला बनाओ संघर्ष समिति का गठन कर अपनी मांग सरकारों के सामने पुरजोर तरीके से उठायी गयी। पृथक राज्य गठन के बाद जिला बनाने को लेकर क्षेत्रवासियों द्वारा कई बार आंदोलन भी किया जा चुका है। परन्तु क्षेत्रवासियों को इस मामले पर अब तक केवल आश्वासन ही मिले है। जिला बनाओ संघर्ष समिति के अध्यक्ष दान सिंह और उपाध्यक्ष जोध सिंह बोरा ने कहा है कि डीडीहाट जिले के सभी मानक पूरे करता है। उन्होंने कहा है कि पिथौरागढ़ जनपद मुख्यालय की दूरी अधिक होने से सीमांत के लोगों को तमाम मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। इसके चलते विकास कार्य भी प्रभावित होते है। यदि डीडीहाट जिले की घोषणा की जाती है तो डीडीहाट सहित सीमान्त की धारचूला और मुनस्यारी तहसीलों का विकास भी हो सकेगा। संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने प्रदेश के ग्राम्य विकास मंत्री विशन सिंह चुफाल के समक्ष दोहराते हुये शीघ्र डीडीहाट को जनपद घोषित किये जाने की मांग की है। इस मामले में मंत्री श्री चुफाल ने कहा है कि जब भी प्रदेश सरकार पृथक जनपद की घोषणा करेगी डीडीहाट को वरीयता दी जायेगी।



Rajen

गैस उपभोक्ताओं ने फिर लगाया जाम    Oct 08, 11:35 pm

बागेश्वर। बागेश्वर में गैस का वितरण अब चक्का जाम के बाद ही हो रहा है। गुरुवार को भी कांडा रोड में उपभोक्ताओं ने खाली सिंलेंडरों के साथ मोटर मार्ग जाम कर दिया। जिस कारण यात्रियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। तीन घंटे तक हुआ यह चक्का जाम जिलाधिकारी के आश्वासन के बाद ही खुल पाया। गैस के लिए चक्का जाम करना इंडेन गैस के उपभोक्ताओं की आदत में शुमार हो गया है। प्रशासन भी बिना जाम किये ही गैस का वितरण नहीं कर रहा है। गुरुवार को उपभोक्ताओं का गुस्सा फिर फूट पड़ा उन्होंने खाली सिलेंडरों के साथ कांडा मोटर मार्ग में चक्का जाम कर दिया। उपभोक्ताओं ने कहा कि प्रशासन निर्धारित तिथि को गैस का वितरण नहीं कर रहा है। जिस कारण लोगों के घरों में चूल्हा नहीं जल पाता है। केएमवीएन के संचालक मांग के अनुरूप गैस का वितरण कर पाने में नाकाम साबित हो रहे है। चक्का जाम के दौरान यात्रियों व पुलिस प्रशासन की आंदोलनकारियों से तीखी नोंक झोंक भी हुई। बाद में जिलाधिकारी के आदेश पर गैस वितरण हुआ तथा उन्होंने आश्वस्त किया कि निर्धारित तिथि पर ही गैस का वितरण किया जाएगा। मनोज कपकोटी ने डीएम के आश्वासन को आंदोलनकारियों के बाद ही आंदोलन समाप्त हुआ। बाद में गैस का भी वितरण किया गया।


Rajen

सुविधाओं के अभाव में ग्रामीण पलायन को मजबूर    Oct 21, 12:19 am

रुद्रप्रयाग। जिले के अधिकांश दूरस्थ ग्रामीण अंचलों में पलायन का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। खंडर में तब्दील होते पौराणिक काष्ठ कला से निर्मित अधिकाश आशियाने पलायन की दास्तां बयां कर रहे हैं। इसका जीता जागता उदाहरण है तल्लानागपुर क्षेत्र का गरसारी गांव।

जनपद रूद्रप्रयाग का गरसारी गांव कभी अपना विशिष्ट स्थान रखता था। सिंचित खेती व केला उत्पादन में इस गांव की अलग पहचान थी। अस्सी के दशक में यहां हुए भारी भूस्खलन ने इस गांव का नक्शा ही बदल दिया। हालांकि इस भूस्खलन से गांव में कोई जनहानि तो नहीं हुई थी, मगर यहां की उपजाऊ सिंचित भूमि नष्ट हो गई है। भू कटाव के कारण यहां के लोगों का पलायन शुरू हो गया। देखते ही देखते वर्तमान में करीब तीस से चालीस परिवारों का यह गांव महज छह-आठ परिवारों तक सिमट गया है। शिक्षा, स्वास्थ्य व सड़क सुविधा के अभाव में पलायन थमने का नाम नहीं ले रहा है। गरसारी निवासी कुसुम पुरोहित का कहना है कि दैवीय आपदा से ग्रामीणों की सिंचित भूमि नष्ट होने व यातायात, शिक्षा के साथ ही स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव होने से लोग बेहतर जीवन जीने के लिए अन्य क्षेत्रों में पलायन करने को मजबूर है। वहीं क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता उमेद सिंह बुटोला कहते है कि इस गांव में हो रहे पलायन का मुख्य कारण बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। उन्होंने बताया कि प्राकृतिक आपदा से ग्रामीणों को हुई क्षति का सरकार ने कोई मुआवजा नहीं दिया। ऐसे में अजीविका की तलाश में पलायन जरूरी हो गया।

Rajen

चाका गाढ़: एक वर्ष बाद भी नहीं बनीं क्षतिग्रस्त पुलियां      Oct 21, 12:19 am

रुद्रप्रयाग। प्रखण्ड जखोली के चाका गाढ़ क्षेत्र में गत वर्ष दैवीय आपदा की भेंट चढ़ीं पैदल पुलियों का अभी तक निर्माण नहीं हुआ है। इससे ग्रामीणों को आवाजाही में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि व जनता ने संबंधित विभाग के खिलाफ अब आंदोलन की चेतावनी दी है।

Rajen

मंत्रियों को क्षेत्र न घुसने देने की चेतावनी   Jagran News

लोहाघाट (चंपावत)। प्रशिक्षित बेरोजगारों का आन्दोलन पाटी में चौदवें दिन भी जारी रहा। लोहाघाट में प्रशिक्षित बेरोजगारों ने मंगलवार को दूसरे दिन भी धरना दिया। पाटी तहसील मुख्यालय में चल रहे क्रमिक अनशन के दौरान प्रशिक्षितों की एक बैठक में निर्णय लिया गया कि यदि उनकी मांगें शीघ्र पूरी नहीं होती हैं तो क्षेत्र में आने वाले राज्य सरकार के मंत्रियों का विरोध करते हुए उन्हें क्षेत्र में घुसने नहीं दिया जायेगा। धरना स्थल पर प्रशिक्षित बेरोजगार संघ के जिला संयोजक कविराज मौनी की अध्यक्षता में हुई बैठकमें वक्ताओं ने राज्य सरकार के खिलाफ गहरा आक्रोश जताया। बेरोजगारों का कहना है कि राज्य के विभिन्न विद्यालयों में हजारों पद रिक्त पड़े हैं। लेकिन सरकार उन्हें भरने में आनाकानी कर रही है। यदि शीघ्र उनकी मांगें पूरी नहीं हुई तो पूरे राज्य में उग्र आन्दोलन शुरू कर दिया जायेगा।