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Exclusive Poems of many Poets-उत्तराखंड के कई कवियों ये विशिष्ट कविताये

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, July 11, 2010, 10:20:44 PM





एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


फूली गयी घर आँगन में, सुव,
आरू - चुआरू  खुमानिक रुखा,

धार क मेहल, गाड़क सेमल
फूलन गाछी गयी जड टूका

बौरन भार लदी फड  आमक
आड़ भरी सिस्नी जस झूका

हौरन कोख बसंत भरी, सुव,
मै निरभागी य गंग ले सूका!

बुरुशी कदू झक लाल हेगे !
चड जोभन को य खुमार यसो,

तुमैने हुन्छी जस ताप चड़ी
मुखडी रुपसा, य बुखार यसो!

उन्दो हुन, सूरज पूरब में
मनखा अति लाल आकार यसो !

बसंत दिखाव असंत यदु
हुछ जोभन को या विकार यसो!

लेखक - संपादक - दुदबोली
पम्पापुर, राम नगर नैनीताल








एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


कवि - चारू चन्द्र पाण्डेय
जन्म - १९२३
ग्राम - कसून, जिला अल्मोड़ा
रचना - अड्वाल, गौर्दा का काव्य दर्शन और छोडो गुलामी
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भौ की निनुरी ये जाली, चुप-२ आँखी भै जाली
फूल दिसाण छजै जाली, दू दू भाति खै जाली !

मुसी खटपट जहाँ करिए, माखी भिन भिन झन करिए !
घुघूती घू घू झन करिए, कोयल कू कू झन करिए!

कुकुर हूँ हूँ झन करिए, बिराऊ म्याऊ म्याऊ झन करिए !
बाकरी मै मै झन करिए, सुवा टे टे झन करिये !

बाछी हम्मे झन करिए, भैसी बाई झन करिए !
दातुली छणमाण झन करिए, तौली डीनमिन झन करिए

कसनि तू मुख झन पड़िये, डाडू तू माठु माठु रडीए!
बड बजियु की हवाक सुनिए , हलकी भै गुडघुड करिए