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18 Aug 10-18 School Children Killed in Kapkot, Bageshwar due to Cloudburst

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, August 18, 2010, 08:38:07 PM

Devbhoomi,Uttarakhand

प्रकिरती ने भी कैसा खेल खेला है इन मासूम बच्चों के साथ, इन तस्वीरों को देखने के लिए भी सहास होना जरूरी है

Devbhoomi,Uttarakhand

                          प्राकृतिक आपदाओं मे मृत आत्माओं के लिए शोक सभा
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साथियो जैसे की आपको भलीभांति ज्ञात है कि हमारे उत्तराखंड में इस वर्ष और बीते वर्षो मे कई प्रकार कि प्राकृतिक आपदाएं आई है, आती रही है! और हमारा पहाड़ शुरू से और अबतक इन प्राकृतिक आपदाओं का सबसे जादा विनाश झेलता रहा है! हाल मे बादल फटने से बागेश्वर जिल्ले के कपकोट मे आये भयंकर विनाश जिसमे कि 18 मासूम बचो को अपनी जान गवानी पड़ी अत्यंत दुखदाई था! यह दृश्य देखकर तो हर किसी का ह्रदय करुणा से भर गया!

दिनांक 22 अगस्त 2010 रविवार को शाम 4:00 बजे गडवाल भवन, पंच्कुयाँ रोड (रामकृष्ण आश्रम मेट्रो स्टेशन के पास), नई दिल्ली, मे इस वर्ष उत्तराखंड में आई प्राकृतिक आपदाओं मे मृत लोगों कि आत्मा की शांति के लिए एक शोक सभा का आयोजन रखा गया है जिसमे आप सभी आमंत्रित हैं!

निवेदक,
म्यर उत्तराखंड ग्रुप (पंजी.)
क्रिएटिव उत्तराखंड (पंजी.)
मेरापहाड़ एवं जनपक्ष आजकल

संपर्क सूत्र
मोहन सिंह बिष्ट : +91 9310999960
सुदर्शन सिंह रावत : +91 8010798843

दीपक पनेरू

हल्द्वानी कुदरत के कहर से थर्राया सुमगढ़ तो महज बानगी है। उच्च हिमालयी जोन में सुमगढ़ सरीखे तमाम गांवों को अपने में समेटे पूरी कपकोट तहसील भू-विज्ञानियों व शोधकर्ताओं की नजर में बेहद संवेदनशील है। यहां के गगनचुंबी व संकरे पहाड़ों से भ्रंश व फॉल्ट के गुजरने की वजह से बादल फटते रहते हैं। मगर अफसोस कि वैज्ञानिकों के चेताने के बावजूद आपदा प्रबंधन मंत्रालय गहरी नींद सोया रहा। इसकी परिणति सुमगढ़ में 18 बच्चों की अकाल मौत के रूप में सामने आई। दरअसल, कपकोट, बागेश्वर, भारत-तिब्बत सीमा समेत मुनस्यारी, धारचूला आदि तमाम क्षेत्र भूस्खलन व बादल फटने की दृष्टि से संवेदनशील श्रेणी में आते हैं। जहां तक बागेश्वर जिले का सवाल है तो सुमगढ़, सालिंग, सालिंग उडियार, सुडिंग, काफड़ी कमेड़ा ही नहीं बल्कि पूरी कपकोट तहसील बेहद संवेदनशील है। कपकोट तहसील के डेंजर जोन में शोध कर चुके कुमाऊं विश्वविद्यालय के भूगर्भ वैज्ञानिक डॉ. बहादुर सिंह कोटलिया कहते हैं कि सुमगढ़, सौंग,बघर, कर्मी, सालिंग आदि में मुख्य सेंट्रल थ्रस्ट, मुनस्यारी थ्रस्ट व बेरीनाग थ्रस्ट में शामिल हैं। धारचूला के बजांग फाल्ट की मानिंद कपकोट में मेन थ्रस्ट बेहद सक्रिय है और इसमें भूगर्भीय हलचल होती रहती है। इन परिस्थितियों में बादल फटने के हालात बनने लगें तो यह क्षेत्र अति संवेदनशील श्रेणी में आ जाता है। ये परिस्थितियां कपकोट क्षेत्र में बन भी रही हैं। यहां की ऊंची व संकरी पहाडि़यां ही बादल फटने के लिए जिम्मेदार हैं। चूंकि ऐसी पर्वतमालाओं से थ्रस्ट व फॉल्ट गुजरते हैं लिहाजा ऊंचे व संकरे पहाड़ों के बीच बादल आने से उनका घनत्व बढ़ जाता है। ऐसे में बारिश होने पर बानी सामान्य तौर पर या मूसलाधार रूप में नहीं बल्कि झरने के रूप में गिरता है, जो तबाही का सबब बन जाता है। ऐसा ही कुछ सुमगढ़ के साथ ही सालिंग व सालिंग उडियार आदि गांवों में भी हुआ। हालांकि जान-माल का नुकसान सुमगढ़ में ज्यादा हुआ।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

आपदा प्रभावितों के लिए मदद राशि देने का सिलसिला जारी

बागेश्वर। कपकोट क्षेत्र के विभिन्न आपदा प्रभावित गांवों के प्रभावितों को राहत देने का क्रम जारी है। बुधवार को राजकीय जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ व अन्य ने जिलाधिकारी को प्रभावितों के लिए राशि प्रदान की जबकि पतंजलि योग समिति का एक दल राहत सामग्री लेकर कपकोट को रवाना हुआ।

कपकोट के आपदा प्रभावितों के लिए खडि़या खान मालिक हरक सिंह कनवाल ने एक लाख रुपये की राशि जिलाधिकारी को प्रदान की। इससे पूर्व जिलाधिकारी डीएस गब्र्याल व हल्द्वानी के खान अधिकारी इं. राजपाल लेघा की पहल पर माइंस एसोसिएशन द्वारा 11 लाख रुपये की सहायता प्रभावितों को दी जा चुकी है। जबकि जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के 35 सदस्यों ने प्रभावितों के लिए 17 हजार 500 रुपये की पहली किश्त जिलाधिकारी को सौंपी। इस अवसर पर डीईओ सी सिंह, एडीईओ बेसिक मदन रावत समेत संघ के दीवान सिंह दानू आदि ने यह चैक जिलाधिकारी को सौंपा। इस दौरान संघ के सदस्यों ने प्रशासन को सुझाव दिया कि सभी अध्यापकों व कर्मचारियों का एक दिन का वेतन राहत कार्यो के लिए लिया जाना चाहिए। इसके अलावा पतंजलि योग समिति के सदस्यों ने प्रभावितों के राहत सामग्री भेजी।

http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_6674715.html

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

सुमगढ़ प्रभावितों के लिए उद्यमियों ने दिए 16 लाख     

बागेश्वर : 18 अगस्त को सुमगढ़ में हुई भीषण आपदा से प्रभावित परिवारों के लिए राहत राशि देने का क्रम जारी है। खनन व्यवसायियों व उद्यमियों ने शुक्रवार को जिलाधिकारी को 10 लाख से अधिक की राशि सौंपी। जबकि इनके द्वारा प्रभावितों के लिए 6 लाख से अधिक की सामग्री भेजी जा चुकी है।
जिलाधिकारी डीएस गब्र्याल को शुक्रवार को खनन मालिकों व उद्यमियों ने 10 लाख 39 हजार की राशि सौंपी। श्री गब्र्याल ने कहा कि दानदाताओं के साथ प्रशासनिक अधिकारी प्रभावित क्षेत्र का दौरा करेंगे व इस राशि का उपयोग करेंगे। श्री गब्र्याल ने बताया कि इसमें एनएस कार्पोरेशन ने 2, 62हजार, कटियार माइंस ने 1.50 लाख, जगदीश कालाकोटी व ठाकुर गढि़या ने 2-2 लाख, पर्वतीय माइंस ने 1.50 लाख, दरपान परिहार व हरक कनवाल ने 1-1 लाख, महेश भौर्याल, खीम सिंह मेहता व एसोसिएशट सोप स्टोन ने 50-50 हजार, नितिन तिवारी, दीवान पपोला, एमएस बिष्ट, रमेश पाल, मोहन पाल, शिव केडि़या, राजेंद्र दफौटी, निर्मला दफौटी, बखेत सोप स्टोन ने 25-25 हजार, शिव मिनरल ने 27 हजार, श्रीराम मिनरल 20 हजार, विजय इंडस्ट्री ने 15 हजार, उमेश डालाकोटी ने 11 हजार, सुधीर अग्रवाल व एके मिनरल, माइकोन लि ने 10-10 हजार तथा अमित कांत, शेर सिंह गढि़या, केमिको इंडस्ट्रीज ने 5-5 हजार रुपये दिए हैं। श्री गब्र्याल ने राहत कार्य में सहयोग दिए जाने पर आभार व्यक्त करते हुए इसे पीडि़तों की सच्ची सेवा बताया।

http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_6679999.html

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


It was a totally a big disaster. A women who had lost her husband last year, she lost three children in this incident. It is very-2 unfortunate.

May God .. such incident never take place again anywhere.

YouTube - Broadcast Yourself.

विनोद सिंह गढ़िया



बागेश्वर : उत्तर भारत हाइड्रोपावर प्राइवेट लिमिटेड ने सुमगड़ के आपदा प्रभावितों के लिए 1 लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान की है। यह राशि कम्पनी के महाप्रबंधक धीरेंद्र कुमार बंसल ने जिलाधिकारी के पास जमा की है। श्री बंसल ने बताया कि उनके द्वारा हादसे के बाद गांव में राहत कार्य के लिए मजदूर भी उपलब्ध कराए।


http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_6687866_1.html

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

          सुमगढ़ पीढि़तों के लिए गरीब वृद्धा ने दिए 5 हजारगरुड़ (बागेश्वर)। मां की ममता को एक मां ही पहचान सकती है। कुछ ऐसा   ही हुआ सुमगढ़ में जब 18 बच्चे काल के ग्रास बन गए। हर व्यक्ति ने इस पर   शोक व्यक्त किया परंतु उन मां के मन में क्या बीता इसे मां ही जान सकती   हैं। जब गरुड़ की कलावती तिवारी को घटना की जानकारी मिली तो वह भी बदहवास   सी हो गई। होश संभाला तो पीढि़तों के लिए अपनी ओर से मदद करने की ठान ली।
गरुड़ के टीटबाजार के अयोध्यानगरी की रहने वाली महिला 72 वर्षीय कलावती   तिवारी सुमगढ़ हादसे से काफी व्यथित है कलावती कहती है कि वह कर भी क्या   सकती उसने अपनी कमाई से 5 हजार रुपये जमा किए व उन्हें गरुड़ के   उपजिलाधिकारी को सौंपा। कलावती तिवारी को पेंशन मिलती है जिससे उसका   गुजर-बसर चलता है। जो कमाई होती है उसे वह धार्मिक कार्यो के साथ ही दान   में लगा देती है। प्रतिवर्ष भागवत कथा करके विश्व शांति की कामना करना, दान   करने को अपना कर्तव्य मानती है। जहां बच्चों के सहायतार्थ कार्य हो वहां   अपनी सहभागिता निभानी नहीं भूलती। कलावती ने बताया कि उसकी इच्छा है कि वह   सुमगढ़ पीढि़तों से मिले व उनके साथ दुख बांटे।


http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_6692351.html

   

विनोद सिंह गढ़िया

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कपकोट के सुमगढ़ (तप्तकुंड) एवं हरसिन्घाबगड़ गाँव में आयी भयंकर तबाही के मंजर के बारे में आप सभी देख/सुन चुके हैं | इस वीडियो में आप सरयू नदी के विकराल रूप को देख सकते हैं , १८ अगस्त २०१० को इस नदी में भयंकर बाड़ आयी, जिसमें कपकोट इलाके में लगभग ५० करोड़ से ०१ अरब क्षति हुयी थी। इस तबाही में लोगों के घर बार उजड़ गए। इस प्रकार की तबाही कहीं न आये।

Anil Arya / अनिल आर्य

This a very sad new. Our 18 children killed due to carelessness of state's Diasaster Management System. Should have been an alert in time, life of 18 kids would have been saved. I also read in one news paper that a woman from kapkote lost her husband last year and lost her only two kids in this cloudburst.

(A member has given very good example of Malpa, Pithoragarh)

Sate Goverment must charge sheet the responsible officials, who are really accountable.

As I joined late. Shayad ghaw hare kar raha hu. Lekin dil ki peeda rok nahi paa raha hu.

:(