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Live Chat with Promising Cricketer Unmukt Chand on 21 Jan 2011 at 11 am

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, January 18, 2011, 03:16:48 PM

CA. Saroj A. Joshi

Dear Unmukt ( Bhaneej Lavi )
Wish you all the Best for your Bright Future !!
We're proud of you Dear !!!


quote author=एम.एस. मेहता /M S Mehta link=topic=1740.msg75107#msg75107 date=1295395732]

The detailed news Article by Sunder Chand Thakur ji.. Uncle of Unmukt Thakur. (from http://kabaadkhaana.blogspot.com/2010/11/blog-post_660.html)

लव यू लवी, ऑल द बेस्ट    आज मेरा सीना चौड़ा होकर दूना हो गया है. लवी यानी उन्मुक्त चन्द, मेरा पुत्र-भ्राता-मित्रसुलभ याड़ी बच्चा आज एक इतनी बड़ी ख़बर ले कर आया है. रहस्य ज़रा बना रहे. बस यह कि नीचे लिखा नोट सुन्दर ठाकुर कबाड़ी का लिखा है.

मैं लवी को धन्यवाद देता हूं. उसके माता-पिता को धन्यवाद देता हूं और सबसे ऊपर अपने सबसे प्यारे यार सुन्दर को कहता हूं "बौफ़्फ़ाइन बेटे! बौफ़्फ़ाइन!!"

लव यू लवी, योर चाचू सेज़ ऑल द बेस्ट टु यू! इतनी ख़ुशी देने का शुक्रिया!

कि रंग लाती है हिना पत्थर पे घिस जाने के बाद

*सुंदर चंद ठाकुर

यह एक बेहद निजी मामला है, मगर मैं अशोक भाई के कहने पर इसे सार्वजनिक कर रहा हूं। वैसे मौका खुशी का है भी, ऐसी खुशी जिसे समेट पाना मेरे लिए मुमकिन नहीं हो पा रहा। दो घंटे पहले ही खबर मिली है कि उन्मुक्त दिल्ली की रणजी टीम में शामिल कर लिया गया है। वीनू मांकड अंडर-19 टूर्नामेंट में दिल्ली की कप्तानी करते हुए उसने क्वार्टर फाइनल और सेमीफाइनल दोनों ही मैचों में लगातार शतक ठोक कर अपनी दावेदारी रखी थी। सेलेक्टरों ने संभवतः उसके पिछले साल का भी रेकार्ड देखा हो। उसने शिखर धवन के साथ ओपनिंग करते हुए रणजी वनडे में पंजाब के खिलाफ 75 रनों की पारी खेली थी।

अब मैं उन्मुक्त के बारे में कुछ और बातें आपसे साझा करना चाहता हूं। उन्मुक्त मेरा भतीजा है यानी बड़े भाई का बेटा. दिल्ली में पला-बढ़ा बच्चा है और चार साल की उम्र से क्रिकेट खेल रहा है। मेरे कुछ साहित्यकार मित्र जानते हैं कि उन्मुक्त के क्रिकेट को लेकर मैं और उसके पापा बचपन से ही पागलपन की हद समर्पित रहे हैं। एक बार जब वह सात साल का था, उसकी सहनशक्ति को बढ़ाने के इरादे से मैं और भाई मई की भरी दोपहर उसे पब्लिक पार्क में ले गए थे और हमने चार घंटे प्रैक्टिस करवाई थी। उस दिन भाई, जो कि अन्यथा बहुत सीधा-सरल और अपेक्षाकृत भीरू है, अपनी बॉलिंग की स्पीड दिखाने पर तुला था। एक बॉल, वह बाकायदा क्रिकेट बॉल थी, मगर साइज में जरा-सी छोटी थी, उन्मुक्त के हेलमेट की ग्रिल से निकलकर सीधे उसकी नाक पर लगी और खून की धार बह चली। मगर उस चोट के बावजूद हम उसे प्रैक्टिस पूरे चार घंटे प्रैक्टिस करवाकर ही लौटे। उन्मुक्त की यही खासियत रही है। उसने प्रैक्टिस से कभी जी नहीं चुराया और दो-दो घंटे बसों में धक्के खाकर भी प्रैक्टिस करने मयूर विहार से भारत नगर जाता रहा।

दिल्ली में स्कूलों और मध्यवर्गीय घरों में बच्चों के करियर को लेकर माता-पिता बहुत चिंतित रहते हैं। उन्मुक्त के साथ भी ऐसा था। मैं आजमाना चाहता था कि अगर एक लक्ष्य चुनकर पूरी ताकत और समर्पण के साथ उसे हासिल करने की कोशिश की जाए, तो वह हासिल होता है या नहीं। लेकिन उन्मुक्त के दसवीं तक आते-आते मुझे भी डर लगने लगा। अगर क्रिकेटर नहीं बन पाया तो! तब यह फेसला किया गया कि क्रिकेट के साथ उसकी पढ़ाई को भी बराबर महत्व दिया जाए। इस मामले में मैं उन्मुक्त को सलाम करूंगा। उन्मुक्त चौदह साल की उम्र में दिल्ली की अंडर-15 टीम में आ तो गया था, मगर उसे एक ही मैच खेलने को मिला, जिसमें वह कुछ खास नहीं कर पाया। तब हमें दिल्ली क्रिकेट की राजनीति समझ में आई क्योंकि उन्मुक्त ने दो साल लगातार टायल मैचों में सबसे ज्यादा रन बनाए थे। मगर उसके दिल्ली अंडर-15 टीम में आने से मुझे बहुत राहत मिली। जिस साल उन्मुक्त को दसवीं का बोर्ड देना था, उस साल नियम बदले और बीसीसीआई ने अंडर-15 के बदले अंडर-16 शुरू कर दिया। इस साल भी टायल मैचों में उन्मुक्त ने सबसे ज्यादा रन बनाए, मगर उसका फिर भी टीम में सेलेक्शन नहीं हुआ। मैं गुस्से में फनफनाया तब उन्मुक्त की अब तक अखबारों में छपी खबरों की पूरी फाइल लेकर सीधे डीडीसीए के प्रेजिडेंट अरूण जेटली जी से मिला। उनके हस्तक्षेप से उन्मुक्त को तीसरे मैच में खेलने का मौका मिला। इसके बाद तो उन्मुक्त ने दिल्ली की ओर से रन बनाने का ऐसा सिलसिला शुरू किया कि इस साल उसे अंडर-19 की कप्तानी ही दे दी गई। मगर वह पढ़ाई को बराबर तवज्जो देता रहा और दसवीं के बोर्ड में महज डेढ़ महीने की तैयारी के बावजूद 83 फीसदी अंक लेकर आया।

उन्मुक्त की एक ओर खासियत उसका नेचर है। उसे मैंने जब जो कहा उसने किया। ऐसे बच्चे किसी को कम ही मिलते हैं। पिछले साल एक दिन वह दस किलोमीटर भागा, क्योंकि मुझे लग रहा था कि उसका वजन बढ़ने से उसके मूवमेंट धीमे हो रहे हैं। मैं अपने साहित्यकार मित्रों से भी उसे मिलाता रहा हूं। विष्णु खरे की कविता कवर डाइव मैंने उसे पढ़कर सुनाई। वे जब भी मेरे घर आए मैंने उन्मुक्त को उनसे जरूर मिलाया। मेरे साहित्यिक लगाव ने उसे ज्ञानरंजन की कहानी अमरूद का पेड़ पढ़ने को मजबूर किया। अशोक के साथ उसका और भी गजब का रिश्ता है। अशोक हर बार उसे चुनौती देकर जाता- इतने रन बनाएगा तो ये दूंगा, वो दूंगा। उसे इसका नुकसान भी उठाना पड़ा है। पिछले साल उसे उन्मुक्त को 18000 का मोबाइल देना पड़ा और इस साल लगता है कि वह लैपटॉप हारने वाला है। पिछले महीने दिल्ली में उसने लैपटॉप के लिए उन्मुक्त के सामने अंडर-19 में तीन सेंचुरी मारने की शर्त रखी थी। उन्मुक्त अब तब दो सेंचुरी मार चुका है। हालांकि एक में वह 96 पर आउट हो गया। 15 को उन्मुक्त फाइनल खेल रहा है। अगर इसमें सेंचुरी लग गई तो अशोक को 30000 की चपत लगनी तय है। वैसे वह उदार है। हर बार दो पैग पीने के बाद उन्मुक्त की पिछली कामयाबियों से खुश होकर उसे हजार-दो हजार रूपये तो थमा ही देता है।

खत्म करने से पहले उन्मुक्त के बारे में कुछ और बातें - कि वह किताबें पढ़ता है। अशोक ने उसे दसियों किताबें दी हैं। बड़े भाई ने उसके लिए पूरी लाइब्रेरी ही बना दी है। वह पिछले कई सालों से डायरी भी लिखता है। मुझे हमेशा लगा है कि लिखने की आदत डालने के लिए डायरी लेखन सबसे बेहतरीन तरीका है। खुद मैंने 14 साल बिना एक दिन छोड़े डायरी लिखी। बहरहाल, क्रिकेट और उन्मुक्त की बात की जाए। उन्मुक्त के समर्पण का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 7 साल की उम्र से अब तक एग्जाम्स के दिनों के अलावा शायद ही कोई दिन होगा जब उसने बैट नहीं पकड़ा हो। उसे इस समर्पण के लिए मैं सौ में से सौ नंबर देता हूं और उम्मीद करता हूं कि वह सिर्फ अच्छा क्रिकेटर नहीं, एक पढ़ा-लिखा, समाज के प्रति दायित्वों को समझने वाले इंसान बने। मित्रों से भी उसके लिए ऐसी शुभकामना की अपेक्षा करता हूं।

फिलहाल इतना ही।
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


उन्मुक्त बहुत ही होनहार एक प्रतिभाशाली खिलाड़ी है! मै जब उन्मुक्त को उनके निवास पर मिला बहुत सारे मेडल एव ट्राफी से सजा हुवा कमरा उनके उपलब्धि का सबूत दे रहा था. !  खेल के साथ पदाई में उन्मुक्त अवल है!

उन्मुक्त का एक शिक्षित परिवार से सम्बन्ध रखते है उनके पिताजी खुद राष्ट्रपति पुरूस्कार से सम्मानित टीचर है!


unmukt ji ..

How many times you have visited Pahad?

Do you listen pahadi music sometime ?


Dinesh Bijalwan

unmukut ho kar khelte raho  koi seemaiyan tumhe baandh na paiye.

dramanainital


Devbhoomi,Uttarakhand

Quote from: एम.एस. मेहता /M S Mehta on January 20, 2011, 06:26:01 AM

उन्मुक्त बहुत ही होनहार एक प्रतिभाशाली खिलाड़ी है! मै जब उन्मुक्त को उनके निवास पर मिला बहुत सारे मेडल एव ट्राफी से सजा हुवा कमरा उनके उपलब्धि का सबूत दे रहा था. !  खेल के साथ पदाई में उन्मुक्त अवल है!

उन्मुक्त का एक शिक्षित परिवार से सम्बन्ध रखते है उनके पिताजी खुद राष्ट्रपति पुरूस्कार से सम्मानित टीचर है!

मेहता जी ये उत्तराखंडियों के लिए गर्व की बात है की उन्मुक्त आइ पि यल मैं खेल रहा है और उसे यहाँ अपने जौहर दिखाना होगा की उत्तराखंड में किरकेटरों की कमी नहीं है

Himalayan Warrior /पहाड़ी योद्धा



A very warm Welcome to Merapahad Community Unmukt.

Many-2 Congratulations Unmukt Ji.... A few questions from my side :

1)   At what age you started plying Cricket ?

2)   Who is your Role Model ?

3)   Do you speak Pahadi Language ?


All the best wishes..... God bless you.


दीपक पनेरू

सर्वप्रथम मेरापहाड़ फोरम में आपका स्वागत है........
हेलो उन्मुक्त आपको बहुत बहुत बधाई हो, आपने अपने माता पिता के साथ हमारे उत्तराखंड का भी नाम रोशन किया है, कुछ सवाल मेरी और से भी :-

१- क्या आपको आपकी मात्रभाषा का ज्ञान है,

२- आपने अपने खेल की शुरुवात कितनी छोटी उम्र से की थी,
३- आपका इस खेल में रोल मॉडल कौन है,
४- अगर आपका चयन राष्ट्रीय टीम में हो जाता है तो क्या आप उत्तराखंड का लिए कुछ करना चाहेंगे,
५- अगर आप क्रिकेटर नहीं होते तो किस क्षेत्र में अपना योगदान देते,
६- क्या आई०पी०एल० नए क्रिकेटरों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अच्छा प्लेटफार्म है, अगर हाँ तो आप इसके लिए कितने उत्सुक है,

आप सदा अच्छा खेलें उत्तराखंड प्रदेश के साथ साथ अपने माता पिता और अपने देश का नाम रोशन करे ताकि सदियों तक आपका नाम इस जगत में आता रहे. धन्यवाद

गुड मोर्निंग  उन्मुक्त ......

ढेर सारी शुभकामनाये!  आने वाला IPL आपके लिए बहुत सफल रहे और एक दिन आप भारत के टीम में शामिल हो यही हम सब की दुवाए है ! हाँ अपनी कड़ी मेहनत भी जारी रखियेगा !

प्रशन - उत्तराखंड में किनती बार गए हो,, वहां की कौन सी चीज आपको सबसे पसंद है ?

कभी काफल, हिसालू, किर्मोली आदि खाए है क्या?