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Kumauni & Garhwali Poems by Various Poet-कुमाऊंनी-गढ़वाली कविताएं

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 05, 2011, 12:00:34 AM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

मेरा जिया कि प्यारि बांसुळी
रचना --अमरनाथ शर्मा ( सिराळा, कण्डवालस्यूं , पौड़ी गढ़वाल , जन्म 1912 )
इंटरनेट प्रस्तुति और व्याख्या - भीष्म कुकरेती

मेरा जिया कि प्यारी बांसुळी छै तू
बांस की मेरी बांसुळी
तेरा गित्तुं मा मेरा पराण
भौंण तेरि रसीली
धारु धारु ऊँ डाँड्यूं ऐंच
बैठदि तु ठुमकुली
तौं उदासी गीत केकु
बजौन्दि बांसुळी !
बिसरीं खुद बौड़ान्दि तु
गीत उऴयारा गैकी
तौं खुदेड़ गित्तु सुणैकि
दुनिया तु रिझान्दी
रिझै तिन कृष्ण दगड़ि
गोपी मेरी बांसुळी
त्वै बिना भगवान कृष्ण
कभी नि रै यखुली।
कना मोहनी स्यू गीत तेरा
बांस कु तेरा गात
मिट्ठा खट्टा सब्बु लगदा
क्वी होंदा उदास
बग्ड्वाळ जीतू कि रये
तू बणी हँसूळी
स्याळि दगड़ वेकु विणास
किलै ह्वै बांसुळी।

Copyright @ Bhishma Kukreti for any interpretation

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

विकास बल गाँव से विमुख
कवि : डा . प्रीतम अपछ्याण (1974 ,गढ़कोट , चमोली गढ़वाल )
विकास यानि
ग्रामसभा से ब्लौक प्रमुख
जिला प्रमुख
विधायक सांसद
अर गाँव से विमुख

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

हलो.. हलो.. भैजी... भुलौ
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By Harish Juyal
आले काचे नर हैं, हमें याद करते रैणा जी ।
हथज्वडै़ है आपसे कि कविता पढ़ते रैणा जी ।।
हमें बिसरि जाणा दिदौ कविता बुरी लगे तो ।
अगर अच्छी लगे तो कमेंट करते रैणा जी ।।
किसी को त्यूंराणा नहीं यूं कवितौं पैणु से ।
सब्यों खुणै बरौबर है, "शेयर " करते रैणा जी ।।
हम तो गढ़्वळि भाषा के " यंग " ऐबी बोड़ हैं ।
कखिम क्वी बि "फौल्ट "होवै डाम धरते रैणा जी ।।
नै नवड़्या कब्यों की त भुक्की पीणा चुट्ट चुट्ट ।
हरिबि वूंकि गल्वड़्यों तै "क्लिक "करते रैणा जी ।।
ब्वै त ब्वै है, ब्वै का सौं, ये हमरि ब्वै कि भाषा है ।
प्यारी गढ़्वळि ब्वै कि भाषा प्यार करते रैणा जी ।।
काठ कू कपाळ है ये खरमुंड्या" जुयाळ" है ।
जरसि ये जुयाळ तैं बि टैट कैर देणा जी ।।
Copyright@ Harish Juyal

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

तेरी मति मरिगि

रचना : नवीन डबराल

हे इतवरु
तेरी मति मरिगि
बिंसरे बिजी की
ढेपुर भितर किलै
लुकणे छै तू
इतरु बडु लौठिंग
व्है गे तू
मन लगैकी अंक्वेकी
पढ़ी णी त्वेन
देख लठ्यारा, त्यार दगड्या
देस चलि गेन
पैसा कमौण मिस्यां छण
और ऐश का साधन
जुटांण लग्यां छन
तू त तन्नी मन्नी रेगे इतवरु
तेरी कपाळी फूटीं च
तू रिबडनै रै
ढोरू ढंगारु का दगड़ै
उन्द ऐजा इतवरु
बौण जांण त्वेन
ढिबरयूं और बाखरा दगड़ै
गौड़ा बल्दा लेकि
बौड़ी बिंगणे छौउ
त सूणी लेवा
जू तैयार च ढबडि रुठ्ठी
तुर्केकि घ्यूँ डालिक
गिंदौड़ु अर ल्ह्याशनक
चटनी दगड़ै
त मि मुन्नेंद आन्दु छौ
ब्वाला बौड़ी ब्वाला
निथर मितैं सेणं देवा
अबी थुडा देर
चुच ल्वाला
भौं ऐजा तू
जतना ज्यु करि
खैजा तू
चम्म करिक ऐतवारु
भौ ऐजांद
अपणी दीदा बौड़ी दगडी
छुईं लगौण
देख बौड़ी
मेरी मति णी मरि
मति ऊँ मनख्यूं की मरि च
जू ईख बिटेन पलेंन करि गिण
देखि लिन बौड़ी तू
ऊ सब बौड़ी आला
बिमारियों का दगडी
द्वी लतड़ांग भी हिटी णी सकदन
एक पुंगडा भी फौल णी लगै सक्दन
मितै देख तू
आज भी मी
बांदर और गुणियों तै
छौपीं सकदू
ढिबरा अर बखरों दगडी
बांसुरी बजैकी
गीत लगै सकदु
बांज अर कुळैं की बथौं
देसियों का भाग माँ णी छ
ऊत रौंदा रैला
अपणी अपणी तबैत पर
अर मी हसदो रौळू
अपणी सुन्दर सोच पर
मीन क्या पाये
बौड़ी तेरा दगडी
सबकुछ त मैतैं मिलें
ये गाओं माँ रैकी
तेरा चरणोँ माँ रैकी
मेरी बिगरैली बौड़ी
स्वरचित.....८/८/२०१५/
( नवीन डबराल ), वड़ोदरा

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

कविता नं-17
___________

ओ भाई साहब जी नमस्कार
भै नि पछ्यणना छौ कि तुम,
याद कारो भै ज़रा अक्वेकि
सालेकि पैलि त मीला छौ हम...

खादी कु सफेद सुलार-कुर्ता
अर् मुंडमा मा टुपला धर्युं छाई,
म्यारा चौकमा बैठा छौ घड़ेक अर्
एक च्या कु गिलास भि सड़काई..

वे दिन त कुछ हैंकि बनिं का सि
खूब हथ फर् हथ जोड़णा छाई,
क्या मैलंण्यां अर् क्या सिप्लंण्यां
सब दगड़ प्यार से मिलणा छाई...

टक्क लगैकि मिथैं याद च
सुरुक मेरि उबरि मा औ तुम,
द्वी बोतल अर् हज़ार कु नोट
मेरि जलाठी मा धैरि ग्यो तुम...

सबका समणि बोलि तुमन कि मि
जीतिकि अथेला-पथेल कै ड्युंलु,
क्वी भूखु, तीसू, नांगु नि रालु, मि
विकास कि इनि गंगा ब्वगे ड्युंलु...

अर् अब सर्र कन बिसरो तुम
कब तक जि सिन मुख फिरैला,
देखुलु मी भि चार साल बाद फिर
म्यारा चौकमा कन जि नि ऐला...

©® धर्मपाल रावत.,
ग्राम-सुन्दरखाल, ब्लॉक- बीरोंखाल, पौड़ी गढ़वाल।
11.08.2015

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Sudesh Bhatt
August 10 at 7:42pm ·

चुलख्यंदों मा गुरा पडयूं
उबरी सुंगरी बिययीं च
कुड की मुंडल्यूं मा गुण्युं की
दमद्याट खुब मचयीं च
मुसु बिरलु की भी रस्याण यन
दबुलुंद ही डिलीवरी हुंयी च
छै दूण क दबुल बुये क
टवटकां क्वाण मा पडीं च
चूलख्यंदों मा गुरा....
दाली क भड्डु पींड की तौली
पर जंक की कस्यांण लगीं च
द्वार मोर पर भयुं खुब
धीवडु की मेस लगयीं च
उबरी बिटी सरा आकास
गैंणा साफ गिंण्यांणा छन
तुम्हरी स्कूल्या ड्रैस क्वांण मा
लुखुंदर रोज चीरना छन
जैं पाली तै लीपी बुये न
वीं पर सुर्रा लग्यूं च
क्याडु की बिठकी आज भी
छज्जा मुड धरीं च
चुलख्यंदों मा गुरा पडयूं
वबरी सुंगरी बियंयी च
कुडी क मुंडली मा गुण्यूं क
दमद्याट खुब.......

सर्वाधिकार सुरक्षित@लिख्वार सुदेश भटट(दगडया

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Shailendra Joshi
August 11 at 4:06am · Edited ·

पौ फिर फटली
उंदकार दियू जल्लु
परगना बारह्स्यु
पट्टी नादलस्यु पौड़ी गौ
पौड़ी गडवाल मा
जख रिटायर फौजी
अर समुद्रा देबी घौर
जख जल्म्यु नरु रतन
गढ़रतन उतराखंड रतन
नरेन्द्र सिंह नेगी.................शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

गडवाल का बड़ा बड़ा डांडा कांठा
कुमाऊ का छोटा छोटा डाना काना
का बीच रे
ऐसु साल फिर बिछला
गैरसैंण मा तिरपाल
मिल भी टीबी अखबार मा
देखी सुणयाली पढ़याली
राजनीती का ग्वेर
फिर जाला
गैरसैंण की छानियों मा
राजनीती की दुध दै घी छाच
खै पैकी फिर चली जाला दूँण
जख बीटि ऊ आया छन
अर जख ऊँकु राजनीती निवास च
सदानी कु
कुमया दाज्यू अर गड्वाली भयों
हम पहाड़ी त डांडो मा खल्ली
हरेला मनाओ अर झुमैला नाचो खुणि
हुया छन मंत्री जी आला रिबन काटला
तामसु होलू तमासगेर बणी फिर वू चली जाला
इन्नी हाल रालू उतराखंड कु त फिर कबि दिन नि आला ..............शैलेन्द्र जोशी

फोटो क्लिक .......शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Shailendra Joshi
August 10 at 1:45am · Edited ·

गीत गावा त कुछ ईन गावा सुणीक
अमरिका कु स्टीफन फ्यौल बि
फयूली दास हवे जौ
गीत गावा त कुछ ईन गावा सुणीक
उड़िया मुलौ प्रभात कुमार सारंगी
गाण लग जौ नारंगी की दाणी
गीत गावा त कुछ ईन गावा सुणीक
कन्दुड भग्यान हवे जौ
गीत गावा त कुछ ईन गावा सुणीक
धित ही नि भरू सुण सुणीक
गीत गावा त कुछ ईन गावा सुणीक
मन नाचौडिया ह्वे जौ
गीत गावा त कुछ ईन गावा सुणीक
सरकार की हार हवे जौ
गीत गावा त कुछ ईन गावा सुणीक
जनता जाग जौ
गीत गावा त कुछ ईन गावा सुणीक
भूली बिसरी लोक भासा मा
एक नयी जोत जग जौ
गीत गावा त कुछ ईन गावा सुणीक
गितैर वी मुल्क संस्कृति कु
ब्रांड एंबेसडर हवे जौ
गीत गावा त कुछ ईन गावा सुणीक
मनखी उतराखंडी हवे जौ
गीत गावा त कुछ ईन गावा सुणीक
सुणदरा बोलुन कख बिटि आदन
नरेन्द्र सिंह नेगी मा ईना इना शब्द
रचना................शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Prithavi Laxmi Raj Singh
July 26 at 10:59am · Edited ·

ज्जौडि बाट्टले ओ दीदी
ख्वार सज्लै स्वीण बैंणा
ख्वार सज्लै स्वीणा,
उत्तराखंडेक कसिलै ग्ढौलि
होलि रज्धाणि गैरसिणा।

जब जलि रौछि पहाड
दिल्ली में रौछै
लासमैं बणैलि कूनै-कूनै
भौट मागणी ए गौछे,
कौस विकास- विकास हूना
दिल्लिक् नजीक दूना;
ना- ना- ना नाखर नरैणा
होलि रज्धाणि गैरसिणा।

सौच्चि में एक राजेक चलि
हमुल बसैदि कौछि भुलि,
कैकि आख्या निमू चिहैरु
कैकि आख्यों पाणि मर,
डबडब आखियों में हमर
हाय! डूबौ टिहरी नगर;
कान पैबैर सुणि लिजा
नी चलैलि तेरी रे राजा,
जा कै हालौ वयिं बणा
होलि रज्धाणि गैरसिणा।

शौ-शौ लिआ बूआ सिंघ
अन्नत लिआ कू-मारा,
जऑ चाछै करिलै राजा
मुजफ्फरनगर तैयारा,
यायि छ: कैलाश, यायि पारवतिक मैता,
हुडकी बाजि शिव नाचि, जागरौक गिता
आग्ग में कौले आग्गे में ल्यूल
पाणी में कौले पाणी
गैरसैंणा कैहा
हमूल वाइयी ल्यूल राजधाणी

ज्जौडि बाट्टले ओ दीदी
ख्वार सज्लै स्वीण बैंणा
ख्वार सज्लै स्वीणा,
उत्तराखंडेक कसिलै ग्ढौलि
होलि रज्धाणि गैरसिणा।

पृथ्वी (14/10/2004)