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Kumauni & Garhwali Poems by Various Poet-कुमाऊंनी-गढ़वाली कविताएं

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 05, 2011, 12:00:34 AM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Darsansingh Rawat
April 3 at 10:25am ·
गुंजी शब्द परंपरा का,आज सरा दुन्या म।
पौंची विघ्या दुन्या म,जो दबी छै पहाड़ो म।
नमन बसंती बिष्ट जी,जो गठयी आपन सुरो म।
सुर आपका शब्द परंपरा का,गुंजणा जन जन म।
नमन आप थै पहाड़ो कु,पौंछै जो नयी ऊँचाई म।
अमर विघ्या करी भै,अमर आप पहाड़्यो का दिल म।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Darsansingh Rawat with Prem Kuliyal.
April 1 at 11:33pm ·
खड़ि छु विरासती खिड़की म,बाटु रैंदु रोज देखणी।
आलु क्वी बोड़िक गौं म,ऐ विरासत बचाणा खणी।
सम्हाललु ऐ जब क्वी, तभी होलु संतोष हम सणी।
बनै छौ पुरण्योल, मन लगै अपणा नौन्यालु खणी।
नि आणु रास आज, बनी छै जो नयी पीढ़ी खणी।
कखि इंतजार हमरू,जग्वाल ही न रै जौ हम खणी।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासू

अपणि जिंदगी मा....
मैंन यनु देखि,
कुछ मनखि अफुतैं,
भारी चितौन्दा,
यनु नि स्वोच्दा,
मनखि त माटु छ......
-कवि जिज्ञासू,
म्येरा कविमन कू कबलाट,
खासपटटी, बागी नौसा,
10/4/2017

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासू
8 hrs ·
ढुंगा न चलैन भै....
भागीरथी का बीच बैठि,
एक बड़ा ढुंगा ऐंच,
गढ़वाळि मा रैप पॉप,
बौळ मा गाणु छौं,
बतावा दौं भै बंधु,
मैं कख जाणु छौं.....
-कवि जिज्ञासू,
म्येरा कविमन कू कबलाट,
खासपटटी, बागी नौसा,
10/4/2017

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720



जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासू

ढुंगा न चलैन भै....
भागीरथी का बीच बैठि,
एक बड़ा ढुंगा ऐंच,
गढ़वाळि मा गजल,
बौळ मा गाणु छौं,
बतावा दौं भै बंधु,
मैं कख जाणु छौं.....
-कवि जिज्ञासू,
म्येरा कविमन कू कबलाट,
खासपटटी, बागी नौसा,
10/4/2017

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासू

पाबौं बिटि भानुमति कु,
अयुं छ रैबार,
पाबौं घूमिक चलि जवा,
हे दिन द्वी चार....
भारी मजबूरी छ,
हे पाबौं की भानुमति,
दर्द भरी दिल्ली मा,
होणी हे दुर्गति......
-कवि जिज्ञासू
रचना-1093
8.4.17

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासू 
April 8 at 7:29am ·

धर्ती स्वाणी सब्बि धाणी,
ज्वानि देखा बगदु जाणी,
एक दिन चलि जौला,
तब भौत याद औला,
जब तक जिन्दगी छ,
तुम दगड़ी दगड़ू निभौला.....
-कवि जिज्ञासू
rachna-1092
8.4.2017

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासू
April 7 at 2:30pm ·
घत्त आज यनु आई,
भग्यानु की सार,
खासपटटी की बात छ,
भागीरथी का पार.....
ओल्या गदना भतग खाई,
पल्या गदना मार,
हाडग्यौं कू बणिगी पिन्ना,
बतौणु हपार......
-जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासू
रचना.1092, दिनांक 7.4.2017

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

निंदी
ढुल ढुल कैकि
आंदि जांदी छे
मुंड थे झुल झुल कैकि
हिलांदी छे
कु हुलु निर्जक सियुं
गुर गुर करनु
नाक कु छिद्र कु बथों थे
सुर सुर करनु
कैथे ऐजाँदी
सिंकुली सुरक करि की
मिठा सुपनीयू ले जांदी
अंचल भौरि कि
कैथे याखुली याखुली
क्दगा तड़पादीं छे
पिछणे पिछणे अपडा
क्दगा दौड़ांदी छे
खेळ छन विंक
रति बेराती न्यारा न्यारा
कबि हसंदी रुलांदी
कबि खूब बचांदी छे
निंदी जबै
में पास आंदि जांदी छे
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Darsansingh Rawat

देखिक तस्वीर तुमारी,संस्कृति याद हम थै आंद हमारी।
कंदड़्यूम म गीत भै,गोपाल बाबू का गुंजदी रात सारी।
नौ पाटा घघरी,माथिया अंगड़ी,
के भली छाजी रै रंगीली पिछोड़ी।
,,,,,,,
गवा गलोबन्द हाथो की धगूली,
चम चमा चमकी रे ख्वारा की बिंदूली।
हाय तेरी रूमाला,,,,,,,गुलाबी मुखड़ी।