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Kumauni & Garhwali Poems by Various Poet-कुमाऊंनी-गढ़वाली कविताएं

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 05, 2011, 12:00:34 AM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालम सिंह नेगी

ल्यो मित्रों एक आजि गीत पेश छू हो.....
अरे हमूलै जनम धरौ गरीबै घर मा
साग...पातै की पट्ट है रै छौ...नूण रौटै मा !!!
आहा जबरूवा जामा जबरूवा जामा
ग्यौँ घालनी घामा.....!!
पाँच भै पांडव छिया..चार भै रामा
मैँकणी भूल गे छै सरू...कर लियै फामा...!!
अरे हमूलै जनम धरौ गरीबै घर मा
साग...पातै की पट्ट है रै छौ...नूण रौटै मा !!!
राजधानी देहरादून मेरी......कोर्ट नैनीताला
जिला अल्मोडा मेरो...घर तडागताला !!
अरे हमूलै जनम धरौ गरीबै घर मा
साग...पातै की पट्ट है रै छौ...नूण रौटै मा !!!

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Darsansingh Rawat

ब्यखुनि कु बगत च, पैटदु डेरा कु घाम।
दिन भर उज्यलु दे,सूरज जाणु कैरि काम।
तपोभूमी दमकणी,अब दयू बत्यो कु काम।
काश हमन भी सिखी होंद,प्रकृति सी काम।
देव भूमि भ्वरी होंदी,कर्मभूमि होंदु भै नाम।
रैंदा मनखी यखी, बणदा पहाड़ कर्म धाम।
पलायन नाम बोली,नि बिगड़ंदु हमरू नाम।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Darsansingh Rawat
April 26 at 3:01pm ·
वर्दी जरूरी च भै,अब का स्कुल्यो कु।
गुरू जी कु न, इंतजार भोजन माता कु।
बदलेंदा पहाड़ छी, उम्मीद म भला कु।
पट भ्वरेंद प्वटकी,मिलंद खूब खाणा कु।
छुटि पिछनै पाटी,पता ना ब्वलख्या कु। शिक्षा न पैलीसी,स्तर बदले शिक्षार्थी कु।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Jogasingh Kaira
April 25 at 8:56pm
एक प्रयास !!!
बेडू पाकल काफल पाकल ,"पाकाला वां बमौर हिस्यालू पिल पिल पाकाला ,धिगांरूका लमौर
किमूं पाकल निमूं पाकल पाकल लूकाट टौर
आमे डाई कोयल बासैलीं , जब ऐजाल बौर।
आडू दडिम तिमिल पाकाला जाँ मेरी जाग ठौर
कसिका भूलूं पीपल डाई तेरी छाया क दौर।
मात्रा भार 28 222 222 222 222 121

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Jogasingh Kaira
April 27 at 8:11am
कुछ ध्वनि सूचक शब्दों के प्रयोग का प्रयास
खामियों के लिये मांफी ।
ऊचां ऊचां डानाँमें पड़, पड़ हावाक सरसराटा
डाना काना उज्याई बड़, पड़ चड़ांक चहचहाटा
सर्गापाणी दीखाई पड़,पड़ छिड़ांक छणछड़ाटा
डवां डवां फुलोंमे पडं, पड़ मोनोंक भनभनाटा
पूरव ढाई उज्याई बड़, घर भीतेर मणमणाटा
चाहा पाणी चुलांमें चड़ पड बुढांक कड़कडाटा
नाना नानी ऊठाओ कनि, पड़ नानूक लरबराटा
भारी झौलो नानू छू च्यल बड़ ईजौक घड़बड़ाटा

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालम सिंह नेगी
April 25 at 10:39pm
ल्यो मित्रों एक आजि गीत पेश छू हो.....
अरे हमूलै जनम धरौ गरीबै घर मा
साग...पातै की पट्ट है रै छौ...नूण रौटै मा !!!
आहा जबरूवा जामा जबरूवा जामा
ग्यौँ घालनी घामा.....!!
पाँच भै पांडव छिया..चार भै रामा
मैँकणी भूल गे छै सरू...कर लियै फामा...!!
अरे हमूलै जनम धरौ गरीबै घर मा
साग...पातै की पट्ट है रै छौ...नूण रौटै मा !!!
राजधानी देहरादून मेरी......कोर्ट नैनीताला
जिला अल्मोडा मेरो...घर तडागताला !!
अरे हमूलै जनम धरौ गरीबै घर मा
साग...पातै की पट्ट है रै छौ...नूण रौटै मा

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Jogasingh Kaira

इसी क्रम में आप अपनी बोली में देनाचाहें तो पोस्ट में दिजिये । स्थान और जिला जरुर दें ।
स्थान का नाम - जारहा हूँ सो रहा हूँ आरहा हूँ
अ०
रानीखेत जान छूं सिन छूं आन छूं
भिक्यासैन जाँहरु सिहरू आहारु
बिनता जाणरिन सेतुरिन औंरिन
बागे०
सिरकोट जाणिन सितनयी उ़ड़िंन
गरूड़ जानयू सितनयू उनयू
ग्वालदम जारिन सितनु अल्ले आंनू
चम्पा०
चम्पावत जानयूं सेरयूं ओनयूं
नैनिता०
नैनिताल जानरोछु सितनरोछु अनार छु
गरमपानी जांणयूं सितरयूं उंणरयू
हल्दवानी जानयो सेरयो आनयो
पिथोरा ०
थल जाँणयू पड़नयू ऊणयू
बेरीनाग जाणयू पणनयु उणयू
मुनस्यारी जांणैंयों प्वढनयों उणैंयौं
गंगोलिहाट जानू पाडीजों उलो

बहुत सी जगहों से जानकारी अभी तक नहीं
मिली इस लिए दुबारा पोस्ट डाली है ।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Puranchandra Pandey
April 27 at 11:26pm

सुंण चेली महुंनी सुण मेरि बाता
मैता नि कुंना ईजा सौरासी घाता
पैन्याक गीतन म ले
कदुक भलि शिक्षा हुंछि बल...

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Darsansingh Rawat

अमृत च नवली कु पाणी,बनयी छी पुरण्यो की।
सारी बूण बाटो म,तीस बुझ्यंदी भै तिसल्यो की।
जल जीवन च,पाणी बचाणा की रीत पुरण्यो की।
जरूरत पूरी पाणी की,करदी हमारी देवभूमि की।
समृद्ध जल परंपरा,बाटु लगी भै अब मिटेणा की।
पाणी कु तड़फदा गौं थै,ना फिकर भै नवलियों की।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Darsansingh Rawat
April 28 at 6:28pm ·

ब्यखुनि कु बगत च, पैटदु डेरा कु घाम।
दिन भर उज्यलु दे,सूरज जाणु कैरि काम।
तपोभूमी दमकणी,अब दयू बत्यो कु काम।
काश हमन भी सिखी होंद,प्रकृति सी काम।
देव भूमि भ्वरी होंदी,कर्मभूमि होंदु भै नाम।
रैंदा मनखी यखी, बणदा पहाड़ कर्म धाम।
पलायन नाम बोली,नि बिगड़ंदु हमरू नाम।