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Milam Glacier, Munsiyari Uttarakhand-मिलम ग्लेशियर उत्तराखंड

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 07, 2011, 12:00:51 AM



विनोद सिंह गढ़िया

गोरखाओं के आतंक का गवाह मिलम किला


मुनस्यारी तहसील के अंतिम गांव मिलम में अब भी एक ऐसे किले के अवशेष मौजूद हैं जिसका प्रयोग क्षेत्र के लोग गोरखा शासन में आत्मरक्षा के लिए किया करते थे। डीडीहाट यूथ सोसायटी के तत्वावधान में जिले के दूरस्थ गांवों के सामाजिक, आर्थिक और ऐतिहासिक विषयों की जानकारी हासिल करने के लिए भ्रमण पर निकले दिल्ली के ध्रुव त्यागी, गणेश बोरा और चंद्रप्रकाश ने बीते दिनों मुनस्यारी से 57 किलोमीटर की दूरी पर स्थित मिलम गांव की यात्रा की थी। वहां उन्हें इस किले के अवशेष देखने का मौका मिला। किला बड़े-बड़े पत्थरों से निर्मित किया गया है। इसके साथ गोरखा शासन के आतंक की कहानी भी जुड़ी हुई है। कुमाऊं में गोरखाओं का शासन 1790 से 1816 तक था।
गांव के बुजुर्ग चंद्र सिंह ने दल के सदस्यों को बताया कि यह किला गोरखा शासनकाल में बनाया गया था। इसे गांव के लोग अपनी सुरक्षा के लिए प्रयोग में लाते थे। जैसे ही गोरखा सेना के जवानों के आने की सूचना मिलती तो सभी लोग गांव छोड़कर इस किले में छिप जाते थे। जब गोरखा सेना के जवान गांव से चले जाते, उसके बाद ही लोग किले से बाहर निकला करते थे। गोरखाओं ने तब भारी नरसंहार मचाया था। गोरखा शासन के आतंक के किस्से आज भी कुमाऊं में प्रचलित हैं।
इतिहासकार डा. मदन चंद्र भट्ट ने बताया कि मिलम में एक किलेनुमा भवन है। इससे सैकड़ों लोग रह सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस भवन को लोग गोरखाओं के आतंक से बचने के लिए उपयोग में लाते थे। इसमें इतनी जगह है कि जानवरों को भी आसानी से रखा जा सकता है।

श्रोत: अमर उजाला