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Changing Kumaoni & Garhwali Language-बदलती कुमाउनी & गढ़वाली भाषा

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, November 17, 2011, 03:46:17 AM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


रीश - गुस्सा आना (कुमाउनी)

लेकिन इस शब्द को बोल चाल की भाषा में भी कम इस्तेमाल किया जाता है!

मोहन मीके रीश ने गडा!
(मोहन मुझे गुस्सा मत दिला)

वर्तमान -
मोहन मीके गुस्सा न दिला !

Devbhoomi,Uttarakhand

उत्तराखंडी भाषाएँ अब वो भाषाएँ नहीं बोली जाती हैं जो की पहले बोली जाती थी बदलते समय के अनुसार कुमाउनी और गढ़वाली के बोल चाल में अब हिंदी सब्दों का विलय हो रहा है,अगर किसी को गढ़वाली या कुमाउनी में एक वाक्य कहाँ या बोलना हो तो उस वाक्य में ३०% शब्द हिंदी के होते हैं, एक समय ऐसा भी आयेगा जा कुमाउनी और गढ़वाली भाषाएँ ही बिलुप्त हो जायेंगीं !