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Poems by Rajendra Singh Kunwar-युवा कवि राजेन्द्र सिह कुवर 'फरियादी' की कविताएं

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, July 15, 2012, 01:54:27 PM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

विकाश कु रूप देख्याला

तिसोल्या छन मन्खी यख
डांडियों मा हरियालो नी
रुमक पौडिगे पाखियों मा
जोनिकू उजाल्यु नी !!
कनु होणु च यू विकाश देखा
कनु होणु च यू विकाश देखा
कनु होणु च यू विकाश देखा देखा मेरा पहाड़ मा !

हफार पार धारुमा, शाहरू का अख्बारुमा !
सैणी सड़क बनी च सरकारी बहीखातों मा
प्रधान पटवारी मिलिक रकम चटगौणा छीन
आवाज उठाई जैन तैतै भी धम्कौणा छीन
कनु होणु च यू विकाश देखा
कनु होणु च यू विकाश देखा
कनु होणु च यू विकाश देखा देखा मेरा पहाड़ मा !

गौ का गौ पड़ीयाँ छीन खाली
राशन हर मौ मा बटेंनी छ
ड्यूटीयालू की पोड़ीन बार
अपणु पहाड़ी दिखेंदु निच
कनु होणु च यू विकाश देखा !
कनु होणु च यू विकाश देखा !
कनु होणु च यू विकाश देखा देखा मेरा पहाड़ मा !.....गीत - राजेन्द्र सिंह कुँवर 'फरियादी'

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

राजेन्द्र सिंह कुँवर 'फरियादी' shared a link.
Thursday near Noida
स्वर्गविभा फौरम पर मेरी कविता

मेरा बचपन


कब छोड़ चला वो बचपन मुझको,
मुझको कुछ भी याद नहीं
क्या मांगू अब किसे पुकारूँ,
सुनता कोई फरियाद नहीं
नादानी थी ऊपर मेरे,
चाँद की मै हठ कर बैठा
रूठ गया है बचपन मुझसे,
तब से खोया सा मै रहता l ............ रचना-राजेन्द्र सिंह कुँवर 'फरियादी'