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Articles & Poem on Uttarakhand By Brijendra Negi-ब्रिजेन्द्र नेगी की कविताये

Started by Brijendra Negi, August 17, 2012, 01:27:49 AM

Brijendra Negi

   मैं निशब्द हूँ           
       
          (15)

व्यक्ति के   चक्षुओं   में
नित बढ़ती निर्लज्जता से
            स्तब्ध हूँ
         मैं निशब्द हूँ।

निर्लज्जता  के  चक्षुओं
नित  बढ़ती  धृष्टता  से
            स्तब्ध हूँ
         मैं निशब्द हूँ।

        (16)

व्यक्ति   की   देह   में
नित पनपती व्याधियों से
            स्तब्ध हूँ
         मैं निशब्द हूँ।

व्याधियों  की  देह में
नित   घटते  ओज से
           स्तब्ध हूँ
        मैं निशब्द हूँ।

Brijendra Negi

इत्गा चान्दु मि


कंदूड़ म्यारा
उत्गै सुणदी
जत्गा सुणण चान्दु मि।

आँखा म्यारा
उत्गै द्यखदी
जत्गा द्यखण चान्दु मि।

नाक म्यारु
वी  सुंघद
जो सुंघण चान्दु मि।

जीभ मेरि
वी चखद
जो चखण चान्दु मि।

दिमाग म्यारु
उत्गै चल्द
जत्गा चलाण चान्दु मि।

मन म्यारु
उत्गै मन्द
जत्गा मनण चान्दु मि।

हथ म्यारा
उत्गै कर्दी
जत्गा कन्न चान्दु मि।

खुट्टा म्यारा
उत्गै चल्दी
जत्गा चलण चान्दु मि।

दिल म्यारु
उत्गै रून्द
जत्गा रूण चान्दु मि।


अप्णु मतलब कि
बात करदु
मतलब कि सुणदु छौ।

बिना मतलब कि
बत्था सुणणी
म्यारु हिसाब से ठिक नि हून्दु।

हैंका चिर्या मा
टँगड़ी फसाण
पुरण्या बोलगीं खराब हून्दु।

हैंक कु दुख-दर्द
पुछण नि चान्दु
बिना बात कि उम्मीद रैन्द।

रिस्ता-नाता
बोझा सम्झुदु
घसर-पसर नि चान्दु मि।

पिठै लग्द
मुख कु ऐथर
जुत्ता लग्ददा पैथर जान्दु।

पर हर मौका
मदद ह्वा मेरी
सिर्फ इत्गा चान्दु मि।

Brijendra Negi

कन्न कै निभाण

विकास हूणू
बल पौछणी
सड़क, बिजली, पाणी।

पर नि छीं
सुध लीणा
शिक्षा, स्वास्थ्य, धंधा-पाणि।

शिक्षा हमरी
लूली लंगड़ि
होटल-ढाबों मा बैरा बणाणी।

बिमरी कु इलाज नीच
वक्त से पैल
मरघट पौछाणी।

धंधा-पाणि
कुछ नीच
स्यकुन्द भांडा मुंजवाणी।

ट्वपल्या नमान
खौण-कमाण खुण
स्यकुन्द छीं भजणा।

गाड़-गाड़िन्यू कु
पाणी तरै
निरंतर छीं व्वगणा।

जो ब्वगणा
वो समुंदर कु
पाणि मा छीं रैल जाणा।

खारु पाणि मा
रैलि की
खारा छीं ह्वे जाणा।

अप्णि
पछ्याण भूलणा
संस्कृति थै छीं हर्चाणा।

जन्न गाड़-गाड़िन्यू
कु पाणि
कभि वापस नि आन्दु।

उन्ही वो भि
स्यकुन्द बोगी
लौटि नि आणा।


क्रमश.......

Brijendra Negi

कन्न कै निभाण

(2)

लौटणा कु बोली
सवाल छीं
पुछणा।

द्वी बेली
पुटिगी
तख कनखै पुर्याण।

न विकास
न ऐथर की आस
खालि बिणास हि बिणास।

हर वक्त  रैन्द
द्वी बेलि
पुटिगी भ्वना कि तलाश।

कभि
दुकानदार कु
उधार कु सारू।

कभि
सौकार ब्वाडा कु
कर्ज कु सारू।

कभि
नौकरि वालों की
हत्थ-पैंछी कु सारू।

हर क्वी
खुज्यान्द
क्वी-न-क्वी सारू।

जिमदार कि
उखड़ी सारि
सर्ग दिदा कु सारु।

उखड़ी पुंगड़ी मा
बुत्यूँ बीज
नमी कु सारु

उखड़ी पुंगड़ी
नमी खुण
बरखा कु सारु।

क्रमश

Brijendra Negi

कन्न कै निभाण

(3)

न वक्त
पर
बरखा हून्दी।

न वक्त
पर
बीज जम्दु।

हाड तोड़
मेनत पर
मौसम भारी प्वड़द।

रींगी-रांगी
मन्याडर खुण
डाखाना कु रस्ता ह्यर्द।

मन्याडर
भ्यजणा कु
एक कमांदरू चैन्द।

कमाण खुण
स्यकुंद
भजण प्वड़द।

अप्णि काबलियत
पर काम
कन्न प्वड़द।

जत्गा लैक
शिक्षा चा
उत्गै काम मिल्द।

हमरी शिक्षा
अधिकतर
स्यकुन्द बैरा बणान्द।

कैल हमरि
या लचर
शिक्षा थै उठाण ?

कख बटी
अच्छी शिक्षा खुण
मैंगी फीस चुकाण ?

कख छीं अच्छा
इसकूल-कॉलेज
जख हम थै पढ़ाण ?


क्रमश

Brijendra Negi

कन्न कै निभाण

(4)

अलग उत्तराखंड
का सुपन्या
चूर-चूर ह्वेगीं।

नेताजि
चुनौ का बाद।
देरादून का ह्वेगीं।

पधान जी
गौं का
फुण्ड्यनाथ बणगीं।

विकास कर्मचारी/अधिकारी
हर वक्त
अप्णु कीसा जपकन्दी  ।


बी॰डी॰सी॰ सदस्य
सरकरी पैसा कु पैथर
बौल्या बणन्दी।

विकास कु पैसा
रौलौं मा
खड्वला खैन्डवाणू।

नशेड़यूं थै
ब्यखुंदा
अध्धा-पव्वा दिलाणू।

गरीब-गुर्बा-सीधु
कपाल पर हत्थ
लगाकी रूणू।

कब बिणास
ह्वालु यूंकू
दिन-रात क्वसणू।

कब जौला
हम यख बटी
हर वक्त ई स्वचणू।

अर तुम
हम थै
वापस छौ बुलाणा !

स्यूँ सरब्यूँ
दगड़ हमल
कन्न कै निभाण ?

सिन्ना विकास का
ठ्यक्यादारूँ की शरण मा
कन्न कै जाण ?
......

Brijendra Negi

;)वेलेंटाइन डे ;)


'वेलेंटाइन डे' पर
एक गुलाब का फूल ले
उसके आगे घुटने टेक   
'आई लव यू' बोल दे।

बीच सड़क, चौराहे में
होटल, कैफे, पार्क में
अभिभावकों से बच के
गले में हाथ डाल ले।

जान-पहचान के डर से
जाकर दूसरे क्षेत्र में
प्यार का इज़हार कर
बेशर्मी से बैठ के।

पैसे नहीं तो उधार ले
झूठ बोलकर मांग ले
बड़ा नहीं तो छोटा ही
एक दूसरे कु 'गिफ्ट' दे।

फूल को किताब में
'गिफ्ट' को बैग में
अगले 'वेलेंटाइन' तक
रख उसे संभाल के।

हर खुशी में साथ दे
दुख में उसे भूल ले
इस 'वेलेंटाइन' का वादा 
अगले वर्ष तक तोड़ दे।

सूखे हुये गुलाब को
किताब से निकाल के
पंखुड़ियों को तोड़ कर
पाँव तले मसल दे।

वर्ष भर 'फेस बुक' में
मोबाइल पर एस॰एम॰एस॰ से
पुराने के साथ-साथ
रख एक 'स्टैंड-बाइ' में।

'वेलेंटाइन' के जोश में
फिर अपने होश खो के
पुराना नहीं तो नए को
प्रेम का संदेश दे।

बीसवीं सदी के देख के
कहतें हैं ये  चिढ़  के
भारत की संस्कृति नहीं
पार्क, चौराहों में जुड़ के।

दुनिया नहीं चलती
घुटनों के बल बैठ के
मंजिल नहीं मिलती
घुटनों के बल रेंग के।

जंग जिंदगी की वो हारे
घुटने जिन्होंने टेक दिये
फिर कैसे चलोगे तुम
साथी का बोझ उठा के।

लैप-टॉप, टैबलेट को
घुटनों पर रखके
भले जोड़ लेते हो
दुनिया को इंटरनेट से।

परंतु तरंगो की दुनिया
कुछ समय बाद समझ के
खुद दार्शनिक बन जाते
धरातल पर पसीना बहा के।

तुम इक्कीसवीं सदी के
कंप्यूटर, मोबाइल युग के
'फ़ेस बुक' और 'यू ट्यूब' को 
'सर्च' कर रहे बचपन से ।

इसलिए तुम डरना नहीं
बढ़ते रहना बिना हिचक के 
जिसको पसंद नहीं है
चले आंखे बंद कर के।

Brijendra Negi

पावक ज्वाला

मैंने भ्रष्टाचार, धर्म जाति की राजनीति, तथाकथित धर्मगुरु इत्यादि के भ्रष्ट कारनामो की आहुति के लिए एक काव्य लिखा है। मैंने पावक (अग्नि) देवता जिसके बिना ये देह नहीं है और जो मनुष्य के हर शुभ-अशुभ कार्यों का साक्षी होता है या ये कहिए की अग्नि की बिना कोई कर्म होता ही नहीं है और जिसकी ज्वालाओं के विभिन्न रूप है उन्हे आपतक पहुंचाने का कार्य किया है। मेरा ये प्रयास कहाँ तक सफल होगा ये आप लोगो पर निर्भर है।

अपनी प्रतिकृया देते रहना जिससे इसे परिमार्जित करने मे सुविधा होगी।
       

       1

शुद्ध भाव और  पावन मन से
आज ले आया पावक ज्वाला,
यज्ञ विधि व्यवस्था स्वामी
अर्पित तुझको अक्षमाला,

हवन कुंड की शुद्धि करके
प्रज्वलित करता तेरी ज्वाला,
हे अग्नि देव तुम प्रकट होना
बन कर के दिव्य ज्वाला।

       2

हे सर्वज्ञाता, यज्ञ विधाता
देवों को हवि पहुंचाने वाला,
मेरे दर पर हर प्रहर
प्रज्वलित रहे तेरी ज्वाला,

स्वार्थ निमित्त हवन कुंड में
प्रज्वलित करता तेरी ज्वाला,
रहे प्रज्वलित अखंड ज्योति
मेरे दर पर तेरी ज्वाला। 


       3

हे देवमंडल के प्रथम देव
देवों को तुष्ट करने वाला,
पावन मन से आह्वान करके
प्रज्वलित करता तेरी ज्वाला,

पहले मेरा गृहपति बनना
फिर जग का बन पाएगा,
अर्पण घृत, हवन सामग्री
खूब धधके तेरी ज्वाला।

       4

पूजन विधि पूर्वक करता
गृहपति तू मेरा रखवाला,
हवनीय मंत्र उच्चारित कर
आहुति देता तुझको ज्वाला,

मैं निरीह याचक हूँ स्वामी
मेरी याचना अवश्य सुनना,
जितनी आहुति दूँ मैं तुझको
उतनी धधके तेरी ज्वाला।

क्रमश.....

Brijendra Negi

पावक ज्वाला


    5

प्रजापालक, देवों तक
तू हवि पहुंचाने वाला,
मेरी प्रार्थना प्रजापालक तक
पहुंचाए तेरी ज्वाला।

हाथ जोड़कर विनती करता
झोली मेरी परिपूर्ण रहे,
निरंतर दूँगा आहुती तुझको
हे पावन पावक ज्वाला।

      6

यज्ञ स्थल का रक्षक तू है
जग की  रक्षा करने वाला,
मेरी रक्षा करना स्वामी
भक्तो को अभय देने वाला,

भक्त प्रहलाद को बिठा बेदी पर
हिरण्यकश्यप ने प्रज्वलित की ज्वाला,
बाल न बांका हुआ भक्त का
जली होलिका की जीवन ज्वाला।

     7

पाँच तत्व में एक तत्व तू
सभी तत्वों में अग्रिम ज्वाला,
तेरे बिना जीव निर्जीव है
हर देह में तेरी ज्वाला,

तेरी ज्योति जलती जब तक
हर प्राण में सांस तब तक,
मेरी देह में रहे प्रज्वलित
सदैव तेरी दिव्य ज्वाला।

     8

ऊर्जा प्राण का नाम दूसरा
देह को ऊर्जा देने वाला,
जीव के अंतर में स्थित है
प्राण स्वरूप तेरी ज्वाला,

ऊर्जा विहीन देह निष्कृय होती
जीव न जीवित रहा पाता,
तेरी ऊर्जा यदि न मिले
माटी है ये देह ज्वाला।

क्रमश.....

Brijendra Negi

पावक ज्वाला

       
      9

अग्नि देव तेरे नाम विभिन्न,
विभिन्न कार्य करने वाला,
मानव जाती के धर्म कर्म में
प्रथम तेरी दिव्य ज्वाला,

तेरे बिना अस्तित्व नहीं
मानव जन्म न ले पाता,
तेरी ही दिव्य ज्योति से
जलती है जीवन की ज्वाला।

    10

'गर्भाधान' में 'मारुत' तू
जीव को उत्पन्न करने वाला,
तेरी ही अनुपम कृपा से
जलती जीवन की ज्वाला,

तेरी अलौकिक ज्योति से
गर्भ में आकार लेता जीव,
तेरी ज्योति से जलती है
धरती पर जीवन की ज्वाला।

   11

'पुंशवन' में 'चंद्रमा' तू
गर्भस्थ शिशु बुद्धि विकसित वाला,
तेरी ज्योति प्रज्वलित करती
गर्भ में चेतना की ज्वाला,

मंद बुद्धि न हो उत्पन्न
बुद्धि, विवेक संचेतना भरता,
धरती पर आने से पहले
प्रज्वलित होती बुद्धि की ज्वाला।

    12

'सीमान्तोन्नयन' में 'मंगल' तू
माता को प्रसन्नचित्त  रखने वाला,
गर्भस्थ शिशु के अष्टम माह में
प्रज्वलित करती सौभाग्य ज्वाला,

सुख सौभाग्य निर्धारित करती
गर्भ में रहते तेरी ज्वाला,
जीवनपर्यंत भोग, उपभोग से
संसतृप्त कराती तेरी ज्वाला।

क्रमश.....