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Dr Lalit Mohan Pant, World's Fastest Surgeon from Khantoli, Uttarakhand डॉ ललित

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, December 24, 2012, 09:46:20 PM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Lalit Mohan Pant मैं करूँ जो दुआ ....

जिंदगी इस तरह मुस्कुराती रहे
ज्यूँ चिरैया दरीचों से गाती रहे .
 
हर सुबह ताजगी रोशनी की किरन
हौले हौले तुम्हें गुदगुदाती रहे
 
आसमाँ  पे कई रंग छाये रहें
जमीं सब्ज बागों से छाती रहे .
 
मैं करूँ जो दुआ सब मुकम्मल रहें
वो खुशियों से तुमको मिलाती रहे .
 
चश्मे बद्दूर उसकी इनायत रहे
तेरा हिंडोला बहार झुलाती रहे .
 
सारे सप्तक सुरों के सरस हों सदा
नाद , लय , ताल तेरी थाती रहे .
 
-ललित मोहन पन्त
24.02.2013


एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


From - Dr Lalit Mohan Pant


Lalit Mohan Pant ये कौन है
जो बुरूँश के फूलों की तरह
खिल उठा है
दूर पहाड़ों के
बाँजों के जंगल में
ये कौन है
जो अनायास टेरता है मुझे
और मैं चौंक जाता हूँ
ये कौन है
जो अल्हड़ पहाड़ी नदी सा
शोर मचाता हुआ
वेग से बहा ले गया है मुझे
ये कौन है
जो बिंदास हँसी की
खनक बिखेरता
गुजर गया मेरे करीब से
ये कौन है
बरबस ढूँढने लगती हैं आँखें 
जिसे कभी देखा ही नहीं
ये कौन है
जो कभी चलता है साथ
आत्मा के सहचर की तरह
और न जाने कब ओझल हो जाता है
ये कौन है
जो अनंत की निरंतर यात्रा में
पड़ाव दर पड़ाव
शून्य भरता जा रहा है मेरे भीतर
कैसा है यह तिलस्म
बुद्धि और ज्ञान से परे
जितना भेदता हूँ
उतना ही फिर जकड लेता है मुझे
ढो रहा हूँ कबसे
बढ़ते हुए अनुभवों और
तथाकथित ज्ञान का बोझ
नतमस्तक हूँ
आखिर कब तक
सीधी  होगी / दोहरी होती हुई सुषुम्ना
मुक्त होंगे
शरीर /आत्मा और सारे बंधन
जिनसे तुम मुझे
एक के बाद एक जकड़ते रहे हो .....

- डॉ . ललित मोहन पन्त 
16.03.2013
01.26 रात्रि

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

From -Lalit Mohan Pant

होली ... मन तो है सबके जीवन में, छायें टेशू और गुलाल .

गली मोहल्लों चौराहों पर, सजी हुई थी होली
दिन डूबा फिर रात हो गई, धधक रही थी होली .

देखा नहीं किसी ने, अबके भी प्रह्लाद जल गया
बरसों से इस बार ,आज भी फ़फ़क रही थी होली .

बच कर सारी भीड़ से, जब भीतर झाँका का हमने
उफ़न रहा है लावा, अब भी भभक रही थी होली .

तारे जी के टट्टे , और बल्ली कल्लू के टपरे की
जला रहे थे मनचले ,पर झिझक रही थी होली .

किसी किसी की होली होली, और किसी की होली
झुलस गया परिवार किसी का, सुबक रही थी होली .

सुनी न कोई फाग न ढपली, न रंगों की बरसात
याद आ गया बचपन, कैसी सरस रही थी होली .

भाग रहा सपनों के पीछे , कैसे ये हुजूम है सारा
यहाँ वहां सड़कों पे ,पीनक में बहक रही थी होली .

मन तो है सबके जीवन में, छायें टेशू और गुलाल
हो वसंत मन आँगन में, कहें थिरक रही थी होली .

-ललित मोहन पन्त

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Lalit Mohan Pant

अजनबी तो तुम थे नहीं, पर लगते रहे अंदाज़ से
इसलिये थोड़ी सी इबादत, हमने बढ़ा दी आज से .

सोच कर आसानियों में, तब्दील होंगी एक दिन
मुश्किलें सिर पर उठाये, चलते रहे हम नाज़ से .

ढूँढता हूँ शाख कोई ,गर्दिश की पनाहों के लिये
आसमाँ नापे हैं अब तक, हौसलों की परवाज़ से .

हम तो बहते ही रहे ,आवारा आबशारों की तरह
ठोकरों ने गुदगुदाया , हमको हमेशा आगाज से .

रेत में थे घर बनाए ,हमने पहले भी बार बार
अब क्यों करें कोई गुजारिश, बेरहम सैलाब से .

ये कहानी कब तलक, अंजाम तक पहुंचेगी अब
दिल खोल कर रखा है हमने, आज फिर हमराज से

जद्दोजहद की जिंदगी में, इस बात का कोई गम नहीं
हमने तीतरों को क्यों लड़ाया, जिंदगी भर बाज से .

-ललित मोहन पन्त
02.35 रात 03.04


एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Dr Pant is also very swimmer. He made a created by continuously swimming in Narmda River for 12 hours.




एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Lalit Mohan Pant
एक नाटक खेला था पागलखाना ...उसमे पागल टेलर की भूमिका में ...Dr Lalit Mohan Pant ji is a man of many qualities. Apart from a successful Doctor, he is a good Actor and has acted in many plays.

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Lalit Mohan Pant
मैं तब खरगोन में पदस्थ था . वहाँ अधिक समय नहीं हुआ था .एक मरीज उसका नाम मुझे अभी भी याद है हुसैन था , मरणासन्न अवस्था में लाया गया . उसके पेट में अपेंडिक्स के ऑपरेसन के बाद मवाद भर गया था .यह ऑपरेसन इंदौर की विशेष सुविधाओं में हुआ था .इलाज के लिए पैसा ख़त्म हो जाने और जीवन की आशा ख़त्म होने पर उसे वापस लौटने पर मजबूर होना पड़ा था .ईश्वर की कृपा से उसके पुनः स्वस्थ होने का मैं माध्यम बना ...घर जाते हुए हुसैन और उसके इष्ट मित्रों ने वार्ड में इस तरह से आभार व्यक्त किया ........