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UTTARAKHANDI STAR IN BOLLYHOOD - उत्तराखंडी फ़िल्मी सितारे बालीहुड में

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, January 07, 2008, 12:23:46 PM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

उत्तराखंड में हुआ था जोहरा सहगल को प्यार

जोहरा सहगल का देहरादून से पुराना नाता

मशहूर अभिनेत्री जोहरा सहगल का देहरादून से पुराना नाता रहा है। खास बात यह है उनकी शादी भी दून स्थित कचहरी में ही हुई थी।

अल्मोड़ा में मशहूर कलाकार उदय शंकर की एकेडमी में नृत्य के दौरान ही उनकी मुलाकात कामेश्वर सहगल से हुई और दोनों के बीच प्यार हो गया।

फिल्मों के जानकार और दून लाइब्रेरी एंड रिसर्च सेंटर से जुड़े मनोज पंजवानी ने बताया कि जोहरा ने यूरोप में उदय शंकर की एकेडमी से थियेटर की भी ट्रेनिंग ली।

अल्मोड़ा में कामेश्वर सहगल से हुआ प्यार
इसके बाद वह उदय शंकर के ग्रुप से जुड़ गई। उदय शंकर ने अल्मोड़ा में अपनी एकेडमी खोली।

जोहरा यहीं नृत्य सिखाने लगी। तब कामेश्वर सहगल इनसे नृत्य सीखने आते थे और इसी दौरान दोनों में प्यार हो गया।

पांच साल यहां नृत्य सिखाने के बाद वह मुंबई चली गईं। फिर वहां इन्होंने पांच साल तक नृत्य-निर्देशन की दिशा में काम किया
चकराता में था उनका पुश्तैनी मकान
जोहरा सहगल अक्सर बचपन में दून आया करती थीं। जानकार बताते हैं कि यहां चकराता में उनका पुश्तैनी मकान था। जहां वह छुट्टियां बिताने आया करती थीं। वह अक्सर पेड़ पर चढ़ जाया करती थीं और खूब शरारते किया करती थी।

हालांकि उनका जन्म 27 अप्रैल, 1912 को सहारनपुर में हुआ था। रोहिल्ला पठान मुमताजउल्लाह खान की वह सातवीं संतान थीं।

उनके मामा साहेबजादा सइदुज्जफर खान रामपुर से ताल्लुक रखते थे, जिनका परिवार बाद में देहरादून में रहने लगा था।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

मायानगरी में सितारों के बीच उत्तराखंड की बेटी ने पाया मुकाम

जुनून तो जुनून होता है। यह कब और कैसे पैदा होता है। इसकी कहानियां अलग-अलग हो सकती हैं। कुछ ऐसी ही कहानी दून निवासी गरिमा प्रेम की है। जिन्होंने मुंबई में कम समय के भीतर एक अलग मुकाम बनाया। गरिमा बतौर क्रिएटिव हेड कई सीरियलों और फिल्मों में काम कर रही हैं पापा ये सीरियल कौन बनाता है...। मुझे भी बड़े होकर सीरियल बनाने हैं...। बचपन में अक्सर गरिमा प्रेम अपने पिता राजेश
गुलाटी से इस तरह के सवाल पूछती थीं। पर तब शायद उन्हें भी यह अहसास नहीं होगा कि उनकी बेटी एक दिन अपने सपने
को साकार करेगी।गरिमा ने फोन पर अमर उजाला को बताया कि 2011 में जब वह मुंबई पहुंची तो काफी स्ट्रगल करना पड़ा। बकौल गरिमा कई बार तो ऐसी नौबत आई कि लगा सपना सपना रह जाएगा। पर हिम्मत नहीं हारी। पहला मौका शशि सुमित प्रोडक्शन के रूप में मिला। बतौर एसोसिएट क्रिएटिव हेड लाइफ ओके के साथ 'मैं तुलसी तेरे आंगन की' में काम किया। इसके बाद डायरेक्टर्स कट प्रोडक्शन के साथ अमृत मंथन किया। 'गुमराह', 'मेरी आशिकी तुम से ही' में काम करने का मौका मिला। काफी कुछ सीखने को मिला। 2012 में क्रिएटिव हेड के तौर पर बाला जी टेलीफिल्मस के साथ करीब तीन साल तक गुमराह सीरीज की। जो चैनल वी का काफी पापुलर शो था।

source amar ujala