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Poems and Article by Shri Udaya Pant -श्री उदय शंकर पन्त जी के कविताये और लेख

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, January 21, 2013, 10:03:09 PM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

 निमित्त मात्र(By Udaya Pant)
देखा है मैंने यहाँ
हर तरफ़ मौज़ूद
अन्याय कई तरह
किंकर्तव्यविमूढ़ हूँ 
चाहूँगा मैं बनना
फाँसी का फँदा
निर्जीव होकर भी
दे सकूँगा दंड उन्हें
जो अपराधी धरा के
सक्रिय मैं न भी सही
निमित्त मात्र बनकर
दूंगा मैं भी योगदान
  Posted by   Udaya
http://uspant.blogspot.in/
   

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

 चिराग / Lamp(By Udaya Pant)

   चिराग हूँ जल कर रौशनी देता हूँ तुम्हें
फ़ितरत है मेरी खुद अँधेरे में हूँ तो क्या
तुम्हें तो बस ख़ुद रौशनी का शौक़ जो है
मेरी तरह जल कर भी देखोगे तुम क्या
I'm a lamp that gets burnt but brighten your lives
It's my nature so what if beneath me the darkness
You all have just the fascination to be in the lights
You can't even try to get burnt like me you witness!
http://uspant.blogspot.in/

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

 सरगोशी  ये तबस्सुम ये हवाएं और महकता मौसम
हरेक गोशे से छनकती मोहब्बत की सरगम
दिल का आया है कोई शायद एक नया पैगाम
अब बहारें भी मेरे साथ चलेंगी बस हाथ थाम

कोई सरगोशी से कह रहा है मेरे मन की बात
धीमे से जगाता मुझे कह के मेरे दिल की बात
अब तो इक़रार को हूँ मैं भी यहाँ बहुत बेक़रार
है तो हकीक़त ही बस अब ये मुझे कोई न बहम

शबनमी बूँदें  यहाँ सुनाती हैं मोहब्बत के तराने
हरेक लफ्ज़ कुछ ऐसा जो छू जाता है मेरे दिल को
हौले हौले सुनाते अब मुझे इश्क़ की कोई दास्तान
मानो सारे नगमे किसी ने कर दिए हों ये मेरे नाम

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अंजुमन/Agora  शायद समझ नहीं पा रहा हूँ महफ़िल को
अंजुमन भी अब लगने लगा है अनजान
मुझे लगा कि लोग नहीं समझ पाए मुझे
कुछ मैं अनजाना कुछ महफ़िल अनजान
Perhaps I do not understand musicale
Agora now I feel like a place unknown
I thought people didn't understand me
Me some and some musicale is unknown
  Posted by   Udaya     

कह लेने दो  आज कह लेने दो गीतों को मेरे ऐसा कुछ
अब भी ज़िन्दा हूँ मुझे बस ये यकीं हो जाए

चुप रहा बरसों मैं यहाँ किसी न किसी डर से
सोचा न कभी कब डर ये मुझे भी खा जाये
अब मैं बोलूँगा बिना किसी से भी डर कर
दामन में लगा हरेक दाग़ मेरा यूँ धुल जाये

मैंने देखे हैं कई वो ज़ुल्मो सितम औरों पर
जाने क्यों न करी इनकी खिलाफत मैंने
खाता हूँ क़सम अब ये ख़ता न होगी मुझसे
मेरा हर नगमा नया इंसाफ़ के नाम हो जाये

ज़ुल्म सहना भी गुनाह है ज़ालिम की तरह
है ये भी ज़ुल्म जब नज़रंदाज़ कोई कर जाये
ये ज़हां है नहीं मिल्कियत बस चंद लोगों की
सबको हक है कि उन्हें भी इन्सां समझा जाये
  Posted by   Udaya     
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Udaya Pant जियारत के नाम पर तुम किसका इम्तहान लेना चाहते थे
ख़ुदा के नाम पर तुम खुदाई को ही क्यों आज़माना चाहते थे

In the name of pilgrimage who did you want to be tested
In God's name why did you want Godness itself be tested! ~Udaya

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Udaya Pant हमें रक़ीब समझो तो ये समझे रखना
लेकिन इतना एहसान तुम किए रखना
मेरे नाम कोई रंज़िशें कभी न लिखना
इन्हें तुम अपने खाते में संभाले रखना

Continue that way if you thought I'm enemy
But do please keep obliging me on any count
Don't write any vengeance in my name ever
You continue crediting them in your account!~ Udaya

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Udaya Pant जाने क्यों शर्मसार होने के बाद छोड़ दिया
क़ानून ने यहाँ शर्म-ओ-हया का दामन अब
रज़ामंदी रहेगी अपनी जगह जो भी हो पर
सोलहवाँ सावन नहीं तूफ़ान ले आयेगा अब

Don't know why but left after being ashamed
The law its thin curtain of even the shame now
Consent may what it be may have its own logic
But the sixteen shall bring the storms here now! ~ Udaya

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Udaya Pant चुनाव के पहले और चुनाव में
नेता को नहीं कहने में संकोच
कि मैं हर दर्द की दवा लाया हूँ
मेरी परेशानियाँ रहीं अब तक
तभी अपेक्षाओं में खरा न उतरा
अब मैं मसीहा बन के आया हूँ
और चुनाव ख़त्म तो नेता ग़ुम
मेरे अपने है कई गम ओ दर्द हैं
सब का ठेका लेके नहीं आया हूँ
दर्द सहन करो हमारी तरह तुम
संघर्ष करो जीवन सुधार लो ख़ुद
मैं पांच साल का बीमा लाया हूँ~ Udaya

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Udaya Pantposted to कोई विकास की कोई विकास दर की रट लगाते हैं
लोग यहाँ दो जून को रोटी की जुगत लगाये बैठे हैं
Some repeat like parrot on 'development' or 'growth rate'
People busy working out for two square meals even today~ Udaya

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Udaya Pant
तुम्हें तो हँसी आती है हमारे उसूलों और तरीक़ों पर
हमें हँसी आती है तुम और तुहारी मग़रूर सोच पर
You laugh at my methods and my principles
I laugh loud at your thinking and arrogance ~ Udaya

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Udaya Pant
हम भी तो चाहते हैं आज़ उन्हीँ के क़रीब होना
इसलिए महसूस करते हैं दूर से भी क़रीब होना
I too have the desire to be by her side today
Hence I feel even from a distance by her side ~ Udaya