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Bal Krishana Dhyani's Poem on Uttarakhand-कविता उत्तराखंड की बालकृष्ण डी ध्यानी

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, May 08, 2014, 08:15:59 AM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

कविता उत्तराखंड की बालकृष्ण डी ध्यानी with 
October 17 at 5:56pm ·

जखि म्यारा स्वामी वखि मि जी

जखि म्यारा स्वामी वखि मि जी
देश हो या हो अब भैरदेशा जी
जखि म्यारा स्वामी वखि मि जी

लुन रोटी अब मिल नि खाणु जी
बर्गर पिज्जा जब म्यारा स्वामी लाणु जी
जखि म्यारा स्वामी वखि मि जी

रामी नि बनने ना मीथै बहूरानी जी
पैल टिकिट कटै जब स्वामी मुंबई दिखाणु जी
जखि म्यारा स्वामी वखि मि जी

ये उकाला का बाटा अब व्हैजा टाटा
दोई मैन की छुट्टी मा स्वामी स्विजरलैंड घुमाणु जी
जखि म्यारा स्वामी वखि मि जी

हीटे हीटे ये पहाड़ किले अब कमरी पटणु जी
हवाई जहाज मा जब म्यारा स्वामी मि थे उढणु जी
जखि म्यारा स्वामी वखि मि जी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

फिर बी फैशन हो ऐसा जी

खानु कू नि पैंसा
फिर बी जमानु चैणु ऐसा जी
फिर बी फैशन हो ऐसा जी

छोरी जनि लट्लु
ब्याल च की बैठूल नि समझने हो
फिर बी फैशन हो ऐसा जी

बोबा व्हैगे बोई जी
बोई व्हैगे अब बोबा हो
फिर बी फैशन हो ऐसा जी

कन बदली हुणि च
वो कख जाने की सोचणी हो
फिर बी फैशन हो ऐसा जी

बालकृष्ण डी ध्यानी
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मि त लिख द्यूलु लाख कविता

मि त लिख द्यूलु लाख कविता
वैल नि पैढ़ स्की त मिल कया कण
मि त लिख द्यूलु लाख कविता

पड़ी राई सदनी कुल्हणा भितर
भैरी नि ऐस्की त मिल कया कण
मि त लिख द्यूलु लाख कविता

लाख विपदा लाख पीड़ा सैई विल
आंसूं आखों मा राई त मिल कया कण
मि त लिख द्यूलु लाख कविता

ढुंगा गारा ही रे गैल्या अब मेरो
तिल ऐ समझी नि त मिल कया कण
मि त लिख द्यूलु लाख कविता

झम्प मारी की ये मेर कविता ग्याई
क्वी अपरो ना मिल त मिल कया कण
मि त लिख द्यूलु लाख कविता

बालकृष्ण डी ध्यानी
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कविता उत्तराखंड की बालकृष्ण डी ध्यानी with Dayakrishna Kandpal and 103 others
November 6 at 11:09pm ·

पंद्रह बरस व्हैगैनी पंद्रह बरस जी

पंद्रह बरस व्हैगैनी पंद्रह बरस जी
उत्तराखण्ड तै बनि कि ये ढुंगों गारों मा पंद्रह बरस जी

क्वी पोंछीगे लंदन त क्वी पोंछीगे अमेरिका जी
उत्तराखण्ड दिस मनिगे अब मेरा देश परदेशा मा जी

एक दिनों को सोर हुंयुँ ३६३ दिन सब बिसरी भूल जी
ये मेरो उत्तराखण्ड ते थे सब अपरा अब भूलि गयां जी

उत्तराखण्ड नाईट धरियुंच प्रवासी भै - बन्दों न अब सजी धजी जी
द्वि चार लस्का ढसक लगे की ऊँ पर दारू खूब अब चढ़ गै जी

कन इनि तुम थे अपरुँ की खुद लगनि मि अचरज मा पड़यूँ जी
उत्तराखण्ड शहीदों का सुप्निया किलै पड्यां अब भी अपुरा जी

पंद्रह बरस व्हैगैनी पंद्रह बरस जी
उत्तराखण्ड तै बनि कि ये ढुंगों गारों मा पंद्रह बरस जी

बालकृष्ण डी ध्यानी
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मि त लिख द्यूलु लाख कविता

मि त लिख द्यूलु लाख कविता
वैल नि पैढ़ स्की त मिल कया कण
मि त लिख द्यूलु लाख कविता

पड़ी राई सदनी कुल्हणा भितर
भैरी नि ऐस्की त मिल कया कण
मि त लिख द्यूलु लाख कविता

लाख विपदा लाख पीड़ा सैई विल
आंसूं आखों मा राई त मिल कया कण
मि त लिख द्यूलु लाख कविता

ढुंगा गारा ही रे गैल्या अब मेरो
तिल ऐ समझी नि त मिल कया कण
मि त लिख द्यूलु लाख कविता

झम्प मारी की ये मेर कविता ग्याई
क्वी अपरो ना मिल त मिल कया कण
मि त लिख द्यूलु लाख कविता

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कविता उत्तराखंड की बालकृष्ण डी ध्यानी
October 20 at 7:53am ·

फिर बी फैशन हो ऐसा जी

खानु कू नि पैंसा
फिर बी जमानु चैणु ऐसा जी
फिर बी फैशन हो ऐसा जी

छोरी जनि लट्लु
ब्याल च की बैठूल नि समझने हो
फिर बी फैशन हो ऐसा जी

बोबा व्हैगे बोई जी
बोई व्हैगे अब बोबा हो
फिर बी फैशन हो ऐसा जी

कन बदली हुणि च
वो कख जाने की सोचणी हो
फिर बी फैशन हो ऐसा जी

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कविता उत्तराखंड की बालकृष्ण डी ध्यानी with Deepaupreti Ganjoo and 98 others
2 hrs ·

आओ राज्य गठन के शहीदों का सपनों का उत्तराखंड बनायें

आओ राज्य गठन के शहीदों का सपनों का उत्तराखंड बनायें
ना टिहरी ना अल्मोड़ा ना पौड़ी इन्हे चलो मिलाकर एक बनायें
आओ राज्य गठन के शहीदों का सपनों का उत्तराखंड बनायें

पंद्रह बरस भागे अपने से एक जोर से आवाज देके उसे बुलायें
नवंबर की इस पावन बेला को मिलकर चलो आज साथ मनायें
आओ राज्य गठन के शहीदों का सपनों का उत्तराखंड बनायें

कोदो मंडवा खायेंगे क्यों ना हम अब अपना उत्तराखंड सजायेंगे
चलो मिलकर एक सुर में गायेंगे और भी अपने भाई बहन आयेंगे
आओ राज्य गठन के शहीदों का सपनों का उत्तराखंड बनायें

देहरादून गैरसैण में हम पहाड़ी तनिक भी फर्क ना आने देंगे
शहीदों के सपनों की राजधानी लेकिन हम पहाड़ पे ही बनायेंगे
आओ राज्य गठन के शहीदों का सपनों का उत्तराखंड बनायें

पलायन की इस बहती गंगा में हम रोजगार का बांध लगायेंगे
स्वरोजगार बीज से हम खंडहर घरों बांज खेतों को लहलहायेंगे
आओ राज्य गठन के शहीदों का सपनों का उत्तराखंड बनायें

बालकृष्ण डी ध्यानी
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आओ राज्य गठन के शहीदों का सपनों का उत्तराखंड बनायें

आओ राज्य गठन के शहीदों का सपनों का उत्तराखंड बनायें
ना टिहरी ना अल्मोड़ा ना पौड़ी इन्हे चलो मिलाकर एक बनायें
आओ राज्य गठन के शहीदों का सपनों का उत्तराखंड बनायें

पंद्रह बरस भागे अपने से एक जोर से आवाज देके उसे बुलायें
नवंबर की इस पावन बेला को मिलकर चलो आज साथ मनायें
आओ राज्य गठन के शहीदों का सपनों का उत्तराखंड बनायें

कोदो मंडवा खायेंगे क्यों ना हम अब अपना उत्तराखंड सजायेंगे
चलो मिलकर एक सुर में गायेंगे और भी अपने भाई बहन आयेंगे
आओ राज्य गठन के शहीदों का सपनों का उत्तराखंड बनायें

देहरादून गैरसैण में हम पहाड़ी तनिक भी फर्क ना आने देंगे
शहीदों के सपनों की राजधानी लेकिन हम पहाड़ पे ही बनायेंगे
आओ राज्य गठन के शहीदों का सपनों का उत्तराखंड बनायें

पलायन की इस बहती गंगा में हम रोजगार का बांध लगायेंगे
स्वरोजगार बीज से हम खंडहर घरों बांज खेतों को लहलहायेंगे
आओ राज्य गठन के शहीदों का सपनों का उत्तराखंड बनायें

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थग्ल्या लग्यां जिंदगी मा

थग्ल्या लग्यां जिंदगी मा.... २
कन और्री कब
बैठ्युं रैग्युं
बैठ्युं रैग्युं लिखणु इन सिलाणु थे
जबेर जबेर लगि तब
थग्ल्या लग्यां जिंदगी मा
थग्ल्या लग्यां थग्ल्या लग्यां

कबै जामा मेरी मोरिगे छे
कबै आपा मेरी ख्वैगे छे
खोजी खोजी यख वख वैथे मिल
तबैर और्री थग्ल्या पौड़ीगे छे
थग्ल्या लग्यां जिंदगी मा
थग्ल्या लग्यां थग्ल्या लग्यां

भाग मेरा ये करमा का छन
काप्ला इन रेघया कैल रेट्या छन
जमै नि थे ना गमै मि थे
किले लगलूँ का इन थग्ल्या पौड्या छन
थग्ल्या लग्यां जिंदगी मा
थग्ल्या लग्यां थग्ल्या लग्यां

जद्गा सिल्दु वद्ग चिरड्या छन
अपरा अपरी मा धागा लग्या छन
हर्ची गै कै सुख अब कै दुःख मा
थग्ल्या आपरी गिनती गीणा छन
थग्ल्या लग्यां जिंदगी मा
थग्ल्या लग्यां थग्ल्या लग्यां

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चन्द्र सिंह राही थे नमन
सात समुन्दर पार छ जाणू ब्वै

सात समुन्दर पार छ जाणू ब्वै हो.... माँ
जाज मा जौलु कि ना हो..... माँ

सात समुन्दर पार छ जाणू ब्वै हो.... माँ
जाज मा जौलु कि ना .....

सात भाईओं की ब्वै सात ब्वॉरी
सात भाईओं की माँ सात ब्वॉरी

कन के छड़लु ब्वै अप्डी तिबारी
कन के छड़लु माँ सजली तिबारी

सजली तिबारी माँ हो.... माँ
जाज मा जौलु कि ना ..... हो.... माँ

सात समुन्दर पार छ जाणू ब्वै हो.... माँ
जाज मा जौलु कि ना .....

भुजा कू न्याळ ब्वै भुजा कू न्याळ
घर मा छोड़्यूं च माँजी दुधि कू नौन्याळ

घर मा छोड़्यूं च माँ दुधि कू नौन्याळ
दुधि कू नौन्याळ ब्वै हो.... माँ
जाज मा जौलु कि ना ..... हो.... माँ

सात समुन्दर पार छ जाणू ब्वै हो.... माँ
जाज मा जौलु कि ना .....

सात भाईओं की ब्वै सात धगुली
सात भाईओं की माँजी सात धगुली

सात ब्वॉरीयूँ की ब्वै गढ़ेली नथुली
सात ब्वॉरीयूँ की मांजी गढ़ेली नथुली

गढ़ेली नथुली ब्वै हो.... माँ
जाज मा जौलु कि ना ..... हो.... माँ

सात समुन्दर पार छ जाणू ब्वै हो.... माँ
जाज मा जौलु कि ना .....

लड़े मा जाण मांजी जर्मन फ्रंस
लड़े मा जाण ब्वै जर्मन फ्रंस

अन्ख्युं मा अोढ़ल दड़बड़ आंसूं
अन्ख्युं मा अोढ़ल दड़बड़ आंसूं

दड़बड़ आंसूं ब्वै हो.... माँ
जाज मा जौलु कि ना ..... हो.... माँ

सात समुन्दर पार छ जाणू ब्वै हो.... माँ
जाज मा जौलु कि ना .....

चन्द्र सिंह राही जी थे नमन
सात समुन्दर पार छ जाणू ब्वै
उत्तराखंडी भाषा को बढ़वा देने के लिये
उत्तराखंड मनोरंजन
बालकृष्ण डी ध्यानी
-देवभूमि बद्री-केदारनाथ
अब भोळ भेंट हुली जी