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भरत नाट्य शास्त्र का गढवाली अनुवाद , Garhwali Translation of Bharata Natya Shast

Started by Bhishma Kukreti, November 13, 2020, 04:18:38 AM

Bhishma Kukreti


वेपथु भाव अभिनय: वेपथु  भावौ पाठ खिलण

गढवाल म खिल्यां नाटक आधारित  उदाहरण
Performing Trembling Sentiment in Garhwali Dramas
( इरानी , अरबी शब्दों क वर्जन प्रयत्न )
 
भरत नाट्य  शास्त्र  अध्याय - 6, 7 का : रस व भाव समीक्षा - 65
  s  = आधी अ   
भरत नाट्य शास्त्र गढवाली अनुवाद  आचार्य  – भीष्म कुकरेती
वेपनात्स्फुरणात्कम्पाद्वेपथुं सम्प्रदर्शयेत्।  । 
(७, १०४ )
गढ़वाली अनुवाद व व्याख्या  - -
अनुवाद - वेपथु क अभिनय इन्द्रियों स्फुरण, कमण , जन क्रियाओं  से करे जांद
व्याख्या -
गढ़वाली म वेपथु  भाव  उदाहरण -
जब बि घडेळ  म क्वी  दिव्ता नाचदु  तो दिवता आंद  दैं प्रत्येक पश्वा वेपथु क्रिया /मनोदशा से  आर पार/ सामना  हूंदो। 

भरत  नाट्य शास्त्र अनुवाद  , व्याख्या सर्वाधिकार @ भीष्म कुकरेती मुम्बई
भरत नाट्य  शास्त्रौ  शेष  भाग अग्वाड़ी  अध्यायों मा   
गढ़वाली काव्य म   वेपथु  ; गढ़वाली नाटकों म वेपथुभाव ;गढ़वाली गद्य म  वेपथुभाव ; गढवाली लोक कथाओं म  वेपथु  भाव
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Bhishma Kukreti

वैवर्ण्य भाव अभिनय:  वैवर्ण्य भावौ पाठ खिलण

गढवाल म खिल्यां नाटक आधारित  उदाहरण
Performing  Change of Facial Expression  Sentiment  in Garhwali Dramas
( इरानी , अरबी शब्दों क वर्जन प्रयत्न )
 
भरत नाट्य  शास्त्र  अध्याय - 6, 7 का : रस व भाव समीक्षा - 66
  s  = आधी अ   
भरत नाट्य शास्त्र गढवाली अनुवाद  आचार्य  – भीष्म कुकरेती
मुखवर्णपरावृत्या  नाडीपीडनयोगत : I
वैवर्ण्यमभिनेतव्यं प्रयत्नात्तद्धि  दुष्करम्। ।
(७ , १०५ )
गढ़वाली अनुवाद व व्याख्या  - -
अनुवाद -
वैवर्ण्य पाठ  खिलणो  कुण नाड़ियों  पर दबाब , मुखौ वर्ण परिवर्तन करी , प्रदर्शित करे  जांद , वैवर्ण्य अभिनय परिश्रम व प्रयत्न्न करिक बि  दुष्कर कार्य च। 
व्याख्या सर्वाधिकार @ भीष्म कुकरेती मुम्बई
भरत नाट्य  शास्त्रौ  शेष  भाग अग्वाड़ी  अध्यायों मा   
गढ़वाली काव्य म  भाव ; गढ़वाली नाटकों म भाव ;गढ़वाली गद्य म  भाव ; गढवाली लोक कथाओं म  भाव
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Bhishma Kukreti

अश्रु भाव अभिनय:  अश्रु भावौ पाठ खिलण

गढवाल म खिल्यां नाटक आधारित  उदाहरण
Performing Tears  Sentiment  in Garhwali Dramas
( इरानी , अरबी शब्दों क वर्जन प्रयत्न )
 
भरत नाट्य  शास्त्र  अध्याय - 6, 7 का : रस व भाव समीक्षा - 67
  s  = आधी अ   
भरत नाट्य शास्त्र गढवाली अनुवाद  आचार्य  – भीष्म कुकरेती

वाष्पाम्बुप्लुतनेत्रत्वा न्नेत्रसम्मार्जनेन  च। 
मुहुरश्रुकणापातै रास्रं  त्वभिनयेद्बुध:।  ।   
(७,१०६ )
गढ़वाली अनुवाद
अश्रु पाठ खिलणो कुण  आंख्युं म पाणि , आँख मिंडण  दिखाण , अर  बार बार आंख्युं  से पाणी झड़न जन क्रिया दिखाण पड़द I 

भरत  नाट्य शास्त्र अनुवाद  , व्याख्या सर्वाधिकार @ भीष्म कुकरेती मुम्बई
भरत नाट्य  शास्त्रौ  शेष  भाग अग्वाड़ी  अध्यायों मा   
गढ़वाली काव्य म  अश्रु भाव ; गढ़वाली नाटकों म  अश्रु भाव ;गढ़वाली गद्य म   अश्रु भाव ; गढवाली लोक कथाओं म   अश्रु भाव
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Bhishma Kukreti


     प्रलय  सात्विक भाव अभिनय: प्रलय  सात्विक भावौ पाठ खिलण

गढवाल म खिल्यां नाटक आधारित  उदाहरण
Performing Fainting    Sentiment in Garhwali Dramas
( इरानी , अरबी शब्दों क वर्जन प्रयत्न )
 
भरत नाट्य  शास्त्र  अध्याय - 6, 7 का : रस व भाव समीक्षा - 68
  s  = आधी अ   
भरत नाट्य शास्त्र गढवाली अनुवाद  आचार्य  – भीष्म कुकरेती
निष्चेश्टो  निश्प्रकम्पत्वादव्यक्तश्वासितादपि। 
महीनिपातानाच्चापि प्रलयभि नयो भवेत्।  ।   
( ७ , १०७ )
गढ़वाली अनुवाद  - -
अनुवाद -
प्रलय भावो पाठ खिलणो  कुण  निश्चेष्ट , निष्कम्प, सांस रोकिक ,
भ्यूं पोड़ि  आदि जन करतब दिखाण चयेंद। 
गढ़वाली म  भाव  उदाहरण -
सब स्थानों म , रामलीला नाटक म जब राम तैं  दशरथ मृत्यु समाचार मिल्दो  तो राम पात्र  बेहोशी , भीम पड़नो , सांस रोकि  उस्वासी लीण  अदि क्रियाओं से प्रलय को अभिनय करदो। 
भरत  नाट्य शास्त्र अनुवाद  , व्याख्या सर्वाधिकार @ भीष्म कुकरेती मुम्बई
भरत नाट्य  शास्त्रौ  शेष  भाग अग्वाड़ी  अध्यायों मा   
गढ़वाली काव्य म   प्रलय भाव ; गढ़वाली नाटकों म  प्रलय भाव ;गढ़वाली गद्य म  प्रलय  भाव ; गढवाली लोक कथाओं म   प्रलय  भाव
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Bhishma Kukreti



    शृंगार रस म भाव

(  गढवाल म खिल्यां नाटक आधारित  उदाहरण )
Sentiments of the Love Rapture
( इरानी , अरबी शब्दों क वर्जन प्रयत्न )
 
भरत नाट्य  शास्त्र  अध्याय - 6, 7 का : रस व भाव समीक्षा - 69
  s  = आधी अ    जांद
भरत नाट्य शास्त्र गढवाली अनुवाद  आचार्य  – भीष्म कुकरेती
व्यभिचारिणिश्वास्यालस्यौग्रयजुगुप्सावर्ज्या:।   
विप्रलम्भकृतस्तु निर्वेदग्लानिशंकासूयाश्रमचिंतौत्सुक्यनिद्रास्वप्नविबोधव्याधुन्मादपस्मार-जाड्यमरणादिभिरनुभावैरभिनेतव्य।  । 
( ६, ४५ का परवर्ती गद्य )
गढ़वाली अनुवाद व व्याख्या  - -
श्रंगार रसम अळगस , उग्रता अर जुगुप्सा भाव वर्जित  हूंदन।
शेष ४६ भावों  को प्रयोग हूंद। विप्रलम्भ म  निर्वेद, ग्लानि , शंका , असूया , श्रम , चिंता , उत्सुकता, निद्रा , सुपिन , विबोध , उन्माद , अप्पसार , जड़ता अर मरण  भावों प्रयोग पाठ खिलणम करे जांद। 

भरत  नाट्य शास्त्र अनुवाद  , व्याख्या सर्वाधिकार @ भीष्म कुकरेती मुम्बई
भरत नाट्य  शास्त्रौ  शेष  भाग अग्वाड़ी  अध्यायों मा   
गढ़वाली काव्य म  भाव ; गढ़वाली नाटकों म भाव ;गढ़वाली गद्य म  भाव ; गढवाली लोक कथाओं म  भाव
Raptures in Garhwali Poetries,   Sentiments  in Garhwali Dramas and Poetries and in miscellaneous  Garhwali  Literature,  Sentiments   in Garhwali Poetries,   Sentiments in Garhwali Proses

Bhishma Kukreti

हास्य रस का भाव
(गढवाल म खिल्यां नाटक आधारित  उदाहरण )
   Sentiments  of the Laughter  Rapture
( इरानी , अरबी शब्दों क वर्जन प्रयत्न )
 
भरत नाट्य  शास्त्र  अध्याय - 6, 7 का : रस व भाव समीक्षा - 70
  s  = आधी अ   
भरत नाट्य शास्त्र गढवाली अनुवाद  आचार्य  – भीष्म कुकरेती
ग्लानि: शंका , ह्यसूया, च श्रमश्चपलता   तथा I
सुप्तं निद्रावहित्थं  च हास्ये भावा: प्रकीर्तितीता:। 
( ९, १० )
गढ़वाली अनुवाद व व्याख्या  - -
अनुवाद -
हास्य रस म हास , ग्लानि , शंका , असूया , श्रम , आलस्य , चपलता , निद्रा सुप्त , विवोध , अवहिथ  भाव प्रयोग हूंदन।  ,

भरत  नाट्य शास्त्र अनुवाद  , व्याख्या सर्वाधिकार @ भीष्म कुकरेती मुम्बई
भरत नाट्य  शास्त्रौ  शेष  भाग अग्वाड़ी  अध्यायों मा   
गढ़वाली काव्य म  भाव ; गढ़वाली नाटकों म भाव ;गढ़वाली गद्य म  भाव ; गढवाली लोक कथाओं म  भाव
Raptures in Garhwali Poetries,   Sentiments  in Garhwali Dramas and Poetries and in miscellaneous  Garhwali  Literature,  Sentiments   in Garhwali Poetries,   Sentiments in Garhwali Proses

Bhishma Kukreti


करुण रस माँ भाव /करूण  रस में प्रयुक्त  होने वाले  भाव

(गढवाल म खिल्यां नाटक आधारित  उदाहरण )
   Sentiment  of the  Pathos Rapture
( इरानी , अरबी शब्दों क वर्जन प्रयत्न )
 
भरत नाट्य  शास्त्र  अध्याय - 6, 7 का : रस व भाव समीक्षा - 71
  s  = आधी अ   
भरत नाट्य शास्त्र गढवाली अनुवाद  आचार्य  – भीष्म कुकरेती
व्यभिचारिणश्चास्य निर्वेदग्लानिचिंतौत्सुक्यावेगभ्रममोहश्रमभयविषाददैन्यव्याधिजडतोन्मादापस्मारत्रासालस्यमरणस्तम्भवेपथुवैववर्ण्याश्रुस्वरभेदादय।  । 
(६. ६१)
गढ़वाली अनुवाद -
करुण रसम  निर्वेद, ग्लानि , चिंता , औत्सुक्य, आवेग , वितर्क , मोह श्रम, भय, विशद, दैन्य, व्याधि, जड़ता, उन्माद, अपस्मार , त्रास, अळगस , मोरण, स्तम्भ , वेपथु, वैवर्ण्य, अश्रु अर स्वर भेद भावों प्रयोग स्वांग खिलण म हूंदन। 
भरत  नाट्य शास्त्र अनुवाद  , व्याख्या सर्वाधिकार @ भीष्म कुकरेती मुम्बई
भरत नाट्य  शास्त्रौ  शेष  भाग अग्वाड़ी  अध्यायों मा   
गढ़वाली काव्य म  भाव ; गढ़वाली नाटकों म भाव ;गढ़वाली गद्य म  भाव ; गढवाली लोक कथाओं म  भाव
Raptures in Garhwali Poetries,   Sentiments  in Garhwali Dramas and Poetries and in miscellaneous  Garhwali  Literature,  Sentiments   in Garhwali Poetries,   Sentiments in Garhwali Proses


Bhishma Kukreti


रौद्र रसम प्रयुक्त हूण  वळ  भाव

(गढवाल म खिल्यां नाटक आधारित  उदाहरण )
   Sentiment used in   Rapture  of Wrath
( इरानी , अरबी शब्दों क वर्जन प्रयत्न )
 
भरत नाट्य  शास्त्र  अध्याय - 6, 7 का : रस व भाव समीक्षा - 72
  s  = आधी अ   
भरत नाट्य शास्त्र गढवाली अनुवाद  आचार्य  – भीष्म कुकरेती
भावाश्चास्यासम्मोहोत्साहावेगामर्षचपलतौग्रयगर्वस्वेदवेपथुरोमांचगदग्दादय:।   
(६, ६३ )
गढ़वाली अनुवाद 
रौद्र रस का अंतर्गत  मोह , उत्साह , आवेग , अमर्ष , चपलता , उग्रता , गर्व , स्वेद , वेपथु, रोमांच तथा स्वर भेद भावों प्रयोग पाठ खिलणम करे  जांद। 

भरत  नाट्य शास्त्र अनुवाद  , व्याख्या सर्वाधिकार @ भीष्म कुकरेती मुम्बई
भरत नाट्य  शास्त्रौ  शेष  भाग अग्वाड़ी  अध्यायों मा   
गढ़वाली काव्य म  भाव ; गढ़वाली नाटकों म भाव ;गढ़वाली गद्य म  भाव ; गढवाली लोक कथाओं म  भाव
Raptures in Garhwali Poetries,   Sentiments used in   Rapture  of Wrath  in Garhwali Dramas and Poetries and in miscellaneous  Garhwali  Literature,  Sentiments  used in   Rapture  of Wrath    in Garhwali Poetries,   Sentiments used in   Rapture  of Wrath     in Garhwali Proses


Bhishma Kukreti

वीररस में प्रयुक्त  होने वाले  भाव : वीर  रसक भाव 

(गढवाल म खिल्यां नाटक आधारित  उदाहरण )
   Sentiment  of the  Chivalry Rapture
( इरानी , अरबी शब्दों क वर्जन प्रयत्न )
 
भरत नाट्य  शास्त्र  अध्याय - 6, 7 का : रस व भाव समीक्षा -
  s  = आधी अ   
भरत नाट्य शास्त्र गढवाली अनुवाद  आचार्य  – भीष्म कुकरेती     

गढ़वाली अनुवाद व व्याख्या  - -
अनुवाद -

वीर रसौ अंतर्गत
अस्म्मोह
उत्साह
आवेग
हर्ष
मति
उग्रता
अमर्ष
मद
रोमांच
स्वर-भंग
क्रोध
असूया
धृति
गर्व
अर
वितर्क
नामौ भावों प्रयोग हूंदन  I
भरत  नाट्य शास्त्र अनुवाद  , व्याख्या सर्वाधिकार @ भीष्म कुकरेती मुम्बई
भरत नाट्य  शास्त्रौ  शेष  भाग अग्वाड़ी  अध्यायों मा   
गढ़वाली काव्य म  भाव ; गढ़वाली नाटकों म भाव ;गढ़वाली गद्य म  भाव ; गढवाली लोक कथाओं म  भाव
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Bhishma Kukreti

भयानक रस  में प्रयुक्त होने वाले   17 भाव : भयानक रसौ   १७ भाव


(गढवाल म खिल्यां नाटक आधारित  उदाहरण )
   Sentiment  of the  Fear Rapture
( इरानी , अरबी शब्दों क वर्जन प्रयत्न )
 
भरत नाट्य  शास्त्र  अध्याय - 6, 7 का : रस व भाव समीक्षा - 74
  s  = आधी अ   
भरत नाट्य शास्त्र गढवाली अनुवाद  आचार्य  – भीष्म कुकरेती
भावाश्चास्य  स्तम्भस्वेदगद्गदरोमांचवेपथुस्वर-भेदवैवर्ण्यशंकामोहदैन्यावेगचापल्याजडतात्रासापस्मारमरणादेय। 
(६, ६८ ) 
गढ़वाली अनुवाद व व्याख्या  - -
भयानक रस  का  पाठ खिलद दैं  तौळक भाव प्रदर्शित करण  चएंदन -
स्तम्भ
स्वेद
गदगद
रोमांच
वेपथु
स्वर -भेद
वैवर्ण्य
शंका
मोह
दैन्य
आवेग
चपलता
जड़ता
त्रास
अपस्मार
अर
मरण
भरत  नाट्य शास्त्र अनुवाद  , व्याख्या सर्वाधिकार @ भीष्म कुकरेती मुम्बई
भरत नाट्य  शास्त्रौ  शेष  भाग अग्वाड़ी  अध्यायों मा   
गढ़वाली काव्य म  भाव ; गढ़वाली नाटकों म भाव ;गढ़वाली गद्य म  भाव ; गढवाली लोक कथाओं म  भाव
Raptures in Garhwali Poetries,   Sentiments of Fear in Garhwali Dramas and Poetries and in miscellaneous Garhwal Literature,  Sentiments   in Garhwali Poetries,   Sentiments in Garhwali Proses