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My Uttarakhand Tour - मेरा उत्तराखंड भ्रमण

Started by Anubhav / अनुभव उपाध्याय, March 28, 2008, 12:19:02 PM

हेम पन्त

सत्य कथन
Quote from: Anubhav / अनुभव उपाध्याय on March 28, 2008, 04:24:13 PM
Hem bhai kuch replies aati hain to posting ka man bhi karta hai warna sab kuch 1 saath post kar de to kya faayda fir page ka size bhi bahut badh jaata hai.

हलिया

आहा हा... यही तो...
बस इसी तरह जारी रखिये...पडा़व - दर - पडा़व ... चाहे कितने ही दिन् लगें।  एक कर्मा आपको.. मेरी मनपसन्द शुरूआत केलिये ।


Quote from: Anubhav / अनुभव उपाध्याय on March 28, 2008, 04:19:26 PM
Raju Da material to itna hai ki abhi 1 hafta chalega tab tak yeh padhiye:

हम २३ मार्च २००८ की सुबह ५:३० बजे घर (दिल्ली से) निकले १० बजे हल्द्वानी - काठगोदाम रोड पर हमने वाटिका रेस्टौरेंट में नाश्ता किया, भीमताल, भवाली होते हुए हम अल्मोड़ा की तरफ़ रवाना हुए २:३० बजे दोपहर में हम अपने गंतव्य कटारमल में जीबी पन्त इन्स्टीच्युट ऑफ़ हिमालयन एनवायरनमेंट एंड डेवेलपेमेंट के गेस्ट हाउस पहुँच गए. कोसी नदी के ऊपर स्थित इस गेस्ट हाउस से अल्मोड़ा का बहुत ही मनोरम दृश्य दिखाई पड़ता है.

wah wah anubhav da .. bahut hi sundar ...

Anubhav / अनुभव उपाध्याय

Dhanyavaad Raju Da aur Mohan bhai.

Anubhav / अनुभव उपाध्याय


हेम पन्त

हमें और भी फोटो और यात्रा वर्णन का इन्तजार है...

हलिया

और आगे का हाल भी सुनाइये महाराज...
Quote from: Anubhav / अनुभव उपाध्याय on March 28, 2008, 04:19:26 PM
Raju Da material to itna hai ki abhi 1 hafta chalega tab tak yeh padhiye:

हम २३ मार्च २००८ की सुबह ५:३० बजे घर (दिल्ली से) निकले १० बजे हल्द्वानी - काठगोदाम रोड पर हमने वाटिका रेस्टौरेंट में नाश्ता किया, भीमताल, भवाली होते हुए हम अल्मोड़ा की तरफ़ रवाना हुए २:३० बजे दोपहर में हम अपने गंतव्य कटारमल में जीबी पन्त इन्स्टीच्युट ऑफ़ हिमालयन एनवायरनमेंट एंड डेवेलपेमेंट के गेस्ट हाउस पहुँच गए. कोसी नदी के ऊपर स्थित इस गेस्ट हाउस से अल्मोड़ा का बहुत ही मनोरम दृश्य दिखाई पड़ता है.

पंकज सिंह महर

वाह अनुभव दा, मजा आ गया, मैं भी दो-तीन बार यहां गया हूं, मन्दिर तक सड़्क बनाने का भी प्रयास चल रहा है, ताकि पैदल न चल पाने की वजह से जो लोग मंदिर तक नहीं पहुंच पाते, वे वहां तक पहुंच पायें।

पंकज सिंह महर

कटारमल :

कटारमल का सूर्य मन्दिर अपनी बनावट के लिए विख्यात है।  महापंडित राहुल सांकृत्यायन ने इस मन्दिर की भूरि-भूरि प्रशंसा की।  उनका मानना है कि यहाँ पर समस्त हिमालय के देवतागण एकत्र होकर पूजा अर्चना करते रहै हैं।  उन्होंने यहाँ की मूर्तियों की कला की प्रशंसा की है।

कटारमल के मन्दिर में सूर्य पद्मासन लगाकर बैठे हुए हैं।  यह मूर्ति एक मीटर से अधिक लम्बी और पौन मीटर चौड़ी भूरे रंग के पत्थर में बनाई गई है।  यह मूर्ती बारहवीं शताब्दी की बतायी जाती है।  कोर्णाक के सूर्य मन्दिर के बाद कटारमल का यह सूर्य मन्दिर दर्शनीय है।  कोर्णाक के सूर्य मन्दिर के बाहर जो झलक है, वह कटारमल मन्दिर में आंशिक रुप में दिखाई देती है।

कटारमल के सूर्य मन्दिर तक पहुँचने के लिए अल्मोड़ा से रानीखेत मोटरमार्ग के रास्ते से जाना होता है।  अल्मोड़ा से १४ कि.मी. जाने के बाद ३ कि.मी. पैदल चलना पड़ता है।  मन्दिर १५५४ मीटर की ऊँचाई पर स्थित है।  अल्मोड़ा से कटारमल मंदिर १७ कि.मी. की निकलकर जाता है। रानीखेत से सीतलाखेत २६ कि.मी. दूर है।  १८२९ मीटर की ऊँचाई पर बसा हुआ है। 

मेरा पहाड़ / Mera Pahad

Dhanyavaad Pankaj bhai is info ke liye.