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Tourism Related News - पर्यटन से संबंधित समाचार

Started by पंकज सिंह महर, April 08, 2008, 11:17:24 AM

विनोद सिंह गढ़िया

सुप्रीम कोर्ट के जज ग्लेशियर की यात्रा पर

बागेश्वर। सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति अनिल आर दबे आज यहां से कफनी ग्लेशियर की साहसिक यात्रा को रवाना हो गए हैं। उनके साथ चार महिलाओं सहित पांच अन्य लोग भी हैं। न्यायमूर्ति दबे रविवार लोहारखेत कैंप में रात्रि विश्राम करेंगे।
प्रशासन के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार न्यायमूर्ति अनिल आर दबे रविवार दोपहर बाद जिला मुख्यालय पहुंचे। उनके साथ इस अभियान पर एक पुरूष तथा चार महिला सदस्य भी हैं। बागेश्वर में एसडीएम श्रीश कुमार ने दल का स्वागत किया। यहां अल्प विश्राम के बाद यह दल कपकोट पहुंचा। कपकोट के एसडीएम फींचा राम चौहान ने उनकी अगवानी की। वाहन द्वारा अभियान दल के सदस्य सायंकाल लोहारखेत स्थित कैंप पर पहुंचे। जानकारी के अनुसार वह न्यायमूर्ति तथा उनके साथी सदस्य कुल दस दिन की कफनी ग्लेश्यिर यात्रा पर निकले हैं। लोहारखेत से पैदल अभियान शुरू होता है। यह दल धाकुड़ी, खाती, द्वाली के बाद कफली ग्लेशियर जाएगा और 23 मई को दिल्ली रवाना होगा। उनके आगमन से पूर्व नैनीताल से कुमंविनि के साहसिक यात्रा प्रबंधक गिरधर मनराल तथा बागेश्वर से वरिष्ठ ट्रैक प्रभारी जानकी गड़िया ने रूट और पड़ावों की तैयारियों का जायजा लिया। लोहारखेत में वहां के ट्रैक प्रभारी इंद्र सिंह बिष्ट, वनक्षेत्राधिकारी तथा प्रशासन के प्रतिनिधियों ने अगवानी की।


विनोद सिंह गढ़िया

कौसानी के होटल पैक

मैदानी इलाकों में भीषण गर्मी पड़ने और स्कूलों में एक माह के ग्रीष्मकालीन अवकाश की छुट्टियां पड़ने से पर्यटकों का रुख इस बार कौसानी की ओर अन्यों सालों की अपेक्षा कुछ ज्यादा है। पर्यटकों से यहां के अधिकांश होटल और सरकारी विश्राम गृह पैक चल रहे हैं। कुमाऊं मंडल विकास निगम का पर्यटक आवास गृह पूरे जून के लिए पर्यटकों ने बुक कर लिया है।
पर्यटकाें की आवाजाही के चलते जिपं का विश्राम गृह, वन विभाग विश्राम गृह, राज्य संपत्ति विभाग का विश्राम गृह, पर्यटक आवास गृह कौसानी इस बीच पर्यटकों से पैक हैं। भारी संख्या में पर्यटकों के आगमन से कौसानी के होटल मालिक पानी की व्यवस्था करने में परेशान हैं। जल स्रोतों में पानी की मात्रा कम होने से होटलों और स्थानीय उपभोक्ताओं को जल संस्थान दिन में मात्र एक घंटा पेयजल संयोजनों में पेयजल की सप्लाई कर रहा है। इससे अधिकांश होटल मालिक गोमती और कोसी नदी से टैंकरों से पानी मंगाने को मजबूर हैं। पर्यटक आवास गृह कौसानी के मैनेजर टीडी जोशी ने बताया कि पर्यटक आवास गृह 30 जून तक के लिए अग्रिम बुक हो गया है। उन्होंने बताया कि पेयजल की बराबर सप्लाई नहीं होने से कई दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। होटल एसोसिएशन कौसानी के अध्यक्ष बबलू नेगी ने बताया कि कौसानी के अधिकांश होटल इस बीच पैक हैं।


Devbhoomi,Uttarakhand

हेमकुंड यात्रा मार्ग पर घोड़ा मोबाइल सेवा शुरू

 

गोपेश्वर: चारधाम यात्रा मार्गो पर हार्ट अटैक से हो रही यात्रियों की मौतों से सबक लेते हुए हेमकुंड गुरुद्वारा प्रबंधन समिति ने हेमकुंड यात्रा मार्ग पर मोबाइल हॉस्पिटल सेवा शुरू करने का निर्णय लिया है।


यह सेवा इसलिए भी अनूठी होगी, क्योंकि इसे घोड़ों के सहयोग से चलाया जाएगा। योजना के तहत डॉक्टर प्रतिदिन घोड़े पर सवार होकर गोविंद घाट से घांघरिया तक चक्कर लगाएंगे। यात्रियों को प्राथमिक चिकित्सा नि:शुल्क प्रदान की जाएगी।

समुद्र तल से 15210 फीट ऊंचाई पर स्थित गोविंद घाट से हेमकुंड साहिब की यात्रा दुर्गम है। 21 किलोमीटर की पैदल यात्रा के दौरान घांघरिया ही एक मात्र पड़ाव है। इस यात्रा मार्ग पर न तो दूरभाष की सुविधा है और न ही चिकित्सा सेवा।

ऐसे में इस यात्रा मार्ग पर समय से उपचार नहीं मिलने के कारण कई यात्री जान गंवा चुके हैं। हेमकुंड ट्रस्ट ने घांघरिया में गुरुद्वारे पर धमार्थ चिकित्सालय के साथ ही रास्ते के लिए मोबाइल चिकित्सालय भी शुरू किया। घोड़े पर चल रहे इस मोबाइल चिकित्सालय में डॉक्टर, दवाएं और ऑक्सीजन सिलेंडर मौजूद रहेंगे।


प्राथमिक उपचार मौके पर ही किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की देखरेख में मरीज को गोविंद घाट लाया जाएगा ताकि समय से चिकित्सालय पहुंचाकर जान बचाई जा सके। हेमकुंड प्रबंधन समिति समिति ने यह कदम इसलिए उठाया कि अबतक  चारधाम यात्रा के दौरान 77 तीर्थयात्रियों की मौत हो चुकी है।

Source Dainik Jagran

Devbhoomi,Uttarakhand

नंदा राजजात यात्रा मार्ग पर मिले सैटेलाइट फोन सुविधा
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श्रीनगर गढ़वाल: बीएसएनएल महाप्रबंधक कार्यालय कक्ष में आयोजित दूरसंचार सलाहकार समिति की बैठक में गढ़वाल परिक्षेत्र की दूरसंचार सेवाओं की समीक्षा की गयी। सलाहकार समिति के सदस्य कर्णप्रयाग के विधायक अनुसूया प्रसाद मैखुरी ने नंदादेवी राजजात यात्रा के समय यात्रा मार्ग पर सैटेलाइट फोन सुविधा उपलब्ध कराने पर जोर देते हुए मोबाइल टॉवर लगाने के भी सुझाव दिए।

हल्दूखाल, सिधौली, डांडानागराजा, लोहाजंग, निजमुला घाटी, देवालीखाल, नैनीसैंण, सिद्धसौड़, लंगूरगढ़ी, घांघरिया आदि स्थानों पर मोबाइल टॉवर लगाने के सुझाव विधायक अनुसूया प्रसाद मैखुरी और राजेन्द्र शाह ने बैठक में दिए जिस पर वरिष्ठ महाप्रबन्धक जीसी श्रीवास्तव ने कहा कि इन सभी सुझावों को मोबाइल टॉवर योजना में शामिल किया गया है।

सड़क चौड़ीकरण के कारण बार-बार कट रही ओएफसी, अनियमित विद्युत आपूर्ति समस्याओं से भी वरिष्ठ महाप्रबन्धक जीसी श्रीवास्तव ने सलाहकार समिति के सदस्यों को अवगत कराया जिस पर सदस्यों ने कहा कि इस संदर्भ में वह गढ़वाल सांसद सतपाल महाराज को भी अवगत कराएंगे।



Source Dainik Jagran

Devbhoomi,Uttarakhand

गढ़वाल: भारी बारिश और भूस्खलन से चार धाम यात्रा मार्गो पर मुसाफिरों की दुश्वारियां शुक्रवार को भी कम नहीं हुई। मार्गो के खुलने और बंद होने का क्रम लगातार जारी है।

बुधवार रात बड़कोट के पास सड़क धंसने से यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर तीसरे दिन भी यातायात बहाल न हो सका। हालांकि सुबह पातालगंगा, बिरही, और भीमतला में बंद बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग शाम को खोल दिया गया। इससे करीब तीन हजार यात्रियों ने राहत की सांस ली।

यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर बड़कोट के पास बाड़िया में रुक-रुक कर हो रहे भूस्खलन से यमुनोत्री यात्रा पूरी तरह बाधित है। मंगलवार रात को सड़क धंसने के बाद बुधवार देर शाम मरम्मत हुई ही थी कि गुरुवार को फिर मलबा आने से यातायात ठप हो गया है।

दरकते पहाड़ के कारण सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के जवानों को मलबा हटाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

इससे जानकीचट्टी में करीब डेढ़ सौ तीर्थयात्री व एक दर्जन से अधिक यात्री वाहन फंसे हुए हैं। एसडीएम बड़कोट परमानंद राम ने बताया कि मार्ग खोलने के प्रयास जारी है जल्दी ही मार्ग को आवागमन के लिए खोल दिया जायेगा।


Source Dainik jagran

Devbhoomi,Uttarakhand

हेमकुंड साहिब व लोकपाल लक्ष्मण मंदिर के कपाट बंद
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जोशीमठ: सिखों के प्रसिद्ध तीर्थ हेमकुंड साहिब के कपाट शीतकाल के लिए अंतिम अरदास के बाद बंद कर दिए गए हैं। अब गुरु ग्रंथ साहिब की अरदार कपाट खुलने तक गोविंदघाट में की जाएगी। दूसरी ओर हिंदुओं के प्रसिद्ध तीर्थ लोकपाल (लक्ष्मण मंदिर) के कपाट भी वैदिक मंत्रोच्चार व पूजा अर्चना के बाद बंद कर दिए गए हैं।

शुक्रवार को सुबह नौ बजे से हेमकुंड साहिब के कपाट बंद करने की प्रक्रिया शुरू हुई। हेमकुंड साहिब में सुबह डेढ़ घंटे तक सुखमणि साहब का पाठ तथा कीर्तन किया गया। उसके बाद आधे घंटे तक अरदास व हुक्मराना की प्रक्रिया संपन्न की।

ठीक 11:30 बजे हेमकुंड साहिब में अंतिम अरदास पूजा संपन्न हुई। मुख्य ग्रंथी जस्सा सिंह के नेतृत्व में श्रद्धालुओं ने अंतिम अरदास में हिस्सा लिया। अंतिम अरदास के बाद पहली बार गुरु ग्रंथ साहिब को पालकी में रखकर गुरुद्वारे से बाहर लाया गया तथा 12:30 बजे हेमकुंड साहिब के कपाट बंद किए गए।

उसके बाद पंच प्यारों के साथ गुरु ग्रंथ साहिब की पालकी यात्रा घांघरिया के लिए रवाना हुई। इस यात्रा में शामिल हजारों श्रद्धालु शबद कीर्तन के साथ शुक्रवार की सांय को घांघरिया स्थित गुरुद्वारे पहुंचे। यहां ग्रंथी सर्वजीत सिंह द्वारा अरदास की। यहां से शनिवार को गुरु ग्रंथ साहब गोविंदघाट लाए जाएंगे। अब शीतकाल में गुरु ग्रंथ साहब की अरदास श्रद्धालु गोविंदघाट में कर सकेंगे।


http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_9725969.html

Devbhoomi,Uttarakhand

उत्तरकाशी: चारधाम यात्रा का पहला धाम यमुनोत्री इस बार भी दुरुह बना हुआ है। बुरी तरह जर्जर हो चुकी सड़क और ध्वस्त हो चुका पैदल मार्ग आवागमन को चुनौती दे रहे हैं। सरकारी तंत्र समय पर नहीं जागा तो कपाट खुलने तक सुखद यात्रा के इंतजाम करना दूर की कौड़ी साबित होगी।

बीते साल बाढ़ और भूस्खलन के चलते यमुनोत्री धाम की यात्रा करीब डेढ़ माह तक बाधित रही थी। बाडिया गांव से लेकर जानकीचट्टी तक सड़क पर भूधंसाव, भूस्खलन समेत यमुना व हनुमान गंगा के जलप्रवाह से बुरी तरह ध्वस्त हो गई थी। हाइवे के ये जख्म अभी तक हरे हैं। करीब 20 किमी के हिस्से में इस सड़क पर लोग सांस थाम कर सफर करते हैं। थोड़ी सी चूक बड़ी दुर्घटना को अंजाम दे सकती है।

वहीं सड़क के ऊपर मिट्टी में धंसे बोल्डर कब नीचे लुढ़क जाएं इसका अंदाजा भी नहीं लगाया जा सकता। जानकीचट्टी तक इसी तरह डर के साये में पहुंचने के बाद पैदल मार्ग शुरू होता है। यह मार्ग पांच जगहों पर गिरे हुए पेड़ों और चट्टानों से बेहद खतरनाक हो चला है। वहीं मंदिर से पहले पांच से छह फीट बर्फ की बर्फ की परत हटने में अभी काफी वक्त लग सकता है। बीते साल वन विभाग की ओर से तैयार किया दो किमी का पैदल मार्ग पूरी तरह बर्फ से ढका हुआ है। इस मार्ग को भी बर्फ हटने के बाद ही दुरुस्त किया जा सकता है।

आगामी 13 मई को यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने हैं। इसके लिये सड़क व पैदल मार्ग को दुरुस्त करने के साथ ही पानी, बिजली, आवास, स्वास्थ्य, पार्किंग, शौचालय व साफ सफाई आदि बुनियादी सुविधाएं कम समय में जुटाने की चुनौती है। सीजन में यमुनोत्री धाम में ही सबसे पहले श्रद्धालुओं व पर्यटकों की आमद शुरू होती है। ऐसे में समय पर तैयारियां शुरू न होने से यात्रा व्यवस्थाएं पटरी से उतर सकती हैं।

Source Jagran

Devbhoomi,Uttarakhand

चारधाम यात्रा पर इस बार प्रशासन को दोगुना बोझ झेलना पड़ेगा। 13 मई से चारधाम यात्रा हो रही है, जबकि 25 मई से हेमकुंड साहिब यात्रा भी शुरू हो रही है। आमतौर पर हेमकुंड साहिब यात्रा 10 जून से शुरू होती है, लेकिन इस बार हेमकुंड साहिब यात्रा जल्दी शुरू हो रही है।

चारधाम यात्रा के लिए प्रशासन इन दिनों तैयारियों में जुटा है, लेकिन इस बार चारधाम यात्रा के दौरान प्रशासन को कड़ी परीक्षा के लिए तैयार रहना पड़ेगा। ऐसे में यात्रा के दौरान प्रशासन को पिछले साल के मुकाबले इस बार ज्यादा श्रद्धालुओं की भीड़ को संभालना पड़ेगा।

जबकि पिछले साल तक प्रशासन को शुरुआत में सिर्फ चारधाम यात्रा की भीड़ को ही नियंत्रित करना पड़ता था, लेकिन इस बार दोनों यात्राओं के श्रद्धालुओं को संभालना पड़ेगा। हालांकि प्रशासन का दावा है कि यात्रा के लिए तैयारियां चल रही हैं।

दोनों यात्राएं सकुशल संपन्न कराई जाएंगी। यात्रा के लिए अभी तक टीजीएमओ के पास 200 बसों की बुकिंग का आर्डर आ गया है। जबकि हेमकुंड साहिब यात्रा के लिए भी कुछ दिनों बाद बुकिंग शुरू हो जाएगी।
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'इस बार दोनों यात्राएं आसपास शुरू होने से श्रद्धालुओं का ज्यादा प्रेशर रहेगा। लेकिन सभी के सहयोग से यात्रा सकुशल संपन्न कराई जाएगी'
सुरेंद्र कुमार, एआरटीओ , टिहरी गढ़वाल
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'अभी तक चारधाम यात्रा के लिए 200 बसें बुक हो गई हैं। हेमकुंड यात्रा भी कुछ दिन बाद शुरू होने से इस बार ज्यादा भीड़ रहेगी'
विजयपाल धनै, अध्यक्ष , टीजीएमओ


source Dainik jagran

विनोद सिंह गढ़िया

पर्यटन के लिए उत्तराखंड को चमकाएगा केंद्र

केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय ने उत्तराखंड को पर्यटन के लिहाज से चमकाने का खाका तैयार कर लिया है। केंद्र ने इस वर्ष राज्यों को मिलने वाले तिमाही बजट में उत्तराखंड को सबसे ज्यादा केंद्रीय आर्थिक सहायता (सीएफए) देने का फैसला किया है। पर्यटन मंत्रालय के मुताबिक उत्तराखंड को विशेष आर्थिक सहायता देकर उसे देश के अहम पर्यटन केंद्रों में शुमार कराने की योजना है।
पर्यटन मंत्रालय ने इस कड़ी में उत्तराखंड पर विशेष मेहरबानी दिखाते हुए राज्य के दस नए प्रोजेक्टों को स्वीकृति दे दी है। केंद्र ने इन नए प्रोजेक्टों के लिए 95.78 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित किया है। प्रस्तावित बजट में से केंद्र ने उत्तराखंड को 11.89 करोड़ रुपये का बजट जारी भी कर दिया है। हालांकि राज्य सरकार ने केंद्र से 20 नए प्रोजेक्टों पर स्वीकृति मांगी थी। शेष 10 प्रोजेक्टों पर पर्यटन मंत्रालय विचार कर रहा है।
केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय ने चमोली में कुरूर नंद केसरी वॉन-बीदिनि, चमोली में नॉटी कसाव-इंटिग्रेटेड सर्किट, राज्य में वे-साइड एमिनिटीस, मनेरी में वॉटर स्पोर्ट्स एवं इको पर्यटन, नैनीताल में इंटिग्रेटेड इंफ्रास्टक्चर, दरगाह हजरत अलाउद्दीन अली अहमद अल में इंटीग्रेटेड विकास, बद्री सुलभ कांप्लेक्स, रामनगर में कनवेंशन सेंटर, घनशाली में फ्लोेटिंग मरीनाऔर टेहरी लेक में मेगा प्रोजेक्ट बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है।  
देव भूमि के नाम से मशहूर उत्तराखंड का देश के धार्मिक स्थलों में भी काफी महत्वपूर्ण स्थान है। इसके साथ ही उत्तराखंड की दिलकश वादियां देश-विदेश से आने वाले सैलानियों के लिए भी विशेष आर्कषण का केंद्र रहती है। उत्तराखंड में देशी-विदेशी सैलानियों की संख्या दिन-ब-दिन बढ़ती ही जा रही हैं। उत्तराखंड के बढ़ते पर्यटन व्यवसाय को ध्यान में रखकर पर्यटन मंत्रालय राज्य को विश्व प्रसिद्ध पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करना चाहता है।

साभार: अमर उजाला