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Poet Gumani - लोककवि गुमानी : साहित्य का विलक्षण लेकिन गुमनाम व्यक्तित्व

Started by हेम पन्त, May 21, 2008, 03:03:35 PM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


उत्तराखंड के प्रथम कवि गुमानी पन्त की यह कविता काफल पर!

खाणा लायक इन्द्र का हम छियां भूलोक आयी पड़ो
प्रथ्वी में लग यो पहाड़, हमरी थाती रची देव ले
एसो चित्त विचारी काफल सबै राता भया क्रोध लै!
कोई और बुड़ा खुडा शरम ले नीला धुमैला भया!

Kafal

We were created for Indra, the King of Gods
But unfortunately dropped down below
Among the Mortals here
And even here, on this planets, Alas!
We were made to dwell on these rugged hills
How unfair is the play of destiny
Thinking thus in their hearts against God's injustice
All the kafals turned red fury
And yet other, who were old and haggard
Turned dusky blue in utter shame !


एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

.गुमानी जी  संस्कृत के महापंडित थे ही ....साथ ही कुमाउंनी, नेपाली, हिन्दी और उर्दू के भी सशक्त हस्ताक्षर थे .....राजकवि के रूप में गुमानी जी सर्वप्रथम काशीपुर नरेश गुमान सिंह देव की राजसभा में नियुक्त हुये ...जिन राजाओं से उन्हें सम्मान मिला उनमें टिहरी नरेश सुदर्शन शाह ,पटियाला के राजा श्री कर्ण सिंह, अलवर के राजा श्री बनेसिंह देव और नहान के राजा फ़तेह प्रकाश शामिल हैं ...सन् 1846 में यह महान शख्सियत इस जहाँ से कूच कर गयी ....उनकी एक बानगी देखिये ........

विलायत से चला फिरंगी पहले पहुँचा कलकत्ते....
अजब टोप बन्नाती कुर्ती ना कपड़े ना कुछ लत्ते....
सारा हिन्दुस्तान किया सर बिना लड़ाई कर फत्ते....
कहत गुमानी कलयुग ने यो सुब्बा भेजा अलबत्ते....
विष्णु का देवाल उखाड़ा ऊपर बंगला बना खरा....
महाराज का महल ढवाया बेडी खाना तहां धरा....
मल्ले महल उड़ाई नंदा बंगलो से भी तहां भरा....
अंग्रजों ने अल्मोड़े का नक्षा ओरी और किया...

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

अँग्रेज़ों के ज़माने में कुमाऊँ की समृद्धि नष्ट हो गई। कवि का भावुक ह्रदय कुमाऊँ की दुर्दशा पर कराह उठा-

आई रहा कलि भूतल में छाई रहा सब पाप निशानी ।
हेरत हैं पहरा कछु और ही हेरत है कवि विप्र गुमानी ।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

जजमान भोला परपंचि नारी ।
द्‍वी भुड़ गडेरी मे दयो पूजा सारी ।
रिसानी खिसानी विशा ज्यू रिसानी ।
यो वॄत्ति देखी मन में गिलानी ।
हरि ओम तच्छत के पुन्तुरी थामी ।
नमः शिवायेति समर्पयामी ।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

यहाँ ढेला नद्दी, उत बहत गंगा निकट में / गुमानी

यहाँ ढेला नद्दी, उत बहत गंगा निकट में
यहाँ भोला मोटेश्वर,रहत विश्वेश्वर वहाँ
यहाँ सन्डे डंडे कर धर फिरें, सांड उत हैं
फर्क क्या है काशीपुर नगर काशी नगर में

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

उत्तर दिशि में वन उपवन हिसालू काफल किल्मोड़ा / गुमानी

उत्तर दिशि में वन उपवन हिसालू काफल किल्मोड़ा ।
दक्षिण में छन गाड़ गधेरा बैदी बगाड़ नाम पड़ा ।
पूरब में छौ ब्रह्म मंडली पश्चिम हाट बाजार बड़ा ।
तैका तलि बटि काली मंदिर जगदम्बा को नाम बड़ा ।
धन्वन्तरि का सेवक सब छन भेषज कर्म प्रचार बड़ा ।
धन्य धन्य यो ग्राम बड़ो छौ थातिन में उत्तम उपराड़ा ।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

By Bhishma Kukreti


गुमानी पन्त का काव्य (गुमानी पन्त (1780 -1846 )

१- उत्तम ढम्क पाद्न्ति , मध्यमम च टुरा टूरी
निष्षदम फस्क पाद्न्ति , कछड़ि माँ च थुकाथुकी।

२- बर्धुलोक बीरस्य लंकेश्वरस्य , प्रसुर्मे घनादस्य मयस्य
रते देवरे हन्त मंदोदरी सा , ह्वई रांड नारी गई लाज सारी