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Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 10, 2007, 01:13:01 PM

pandey


अरुण भंडारी / Arun Bhandari

नहीं रहेगी अब चिल्लर की किल्लत

दिल्ली वालों को अब खुले पैसे की तंगी नहीं सताएगी। एटीएम की तर्ज पर जगह-जगह क्वॉइन वैडिंग मशीन (सीवीएम) लगाने की तैयारी की जा रही है। नोट के अलावा डेबिट और क्रेडिट कार्ड से भी मशीन से खुले पैसे निकलेंगे। आने वाले समय में बैंकों, रेलवे स्टेशनों, बाजारों और शॉपिंग मॉल जैसे प्रमुख स्थानों पर यह सुविधा उपलब्ध होगी। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) इसे अमली जामा पहनाने की तैयारी में जुटा हुआ है।

शुरू में ये मशीनें दिल्ली के अलावा सभी बड़े शहरों में लगाई जाएंगी। इससे खुले पैसे की कमी से अक्सर परेशान रहने वालों को अगले चार-पांच महीनों में बड़ी राहत मिल सकती है। आरबीआई के रीजनल डायरेक्टर आर. गांधी के मुताबिक, पायलट प्रॉजेक्ट पर काम चल रहा है। संसद मार्ग पर मौजूद मेन ब्रांच में सीवीएम मशीन लगाया गया है। देखा जा रहा है कि उसमें क्या-क्या खामियां हैं। इसे ऑपरेट करने का आसान से आसान तरीका क्या हो सकता है, इस पर इंजीनियरों की टीम दिन रात काम कर रही है।

उन्होंने बताया कि हर स्तर पर जांच पड़ताल के बाद अगले चार-पांच महीनों में मशीनों को जगह-जगह इंस्टॉल करने का काम शुरू कर दिया जाएगा। शुरुआत में सभी बैंकों को सलाह दी जाएगी कि वे अपने परिसर में मशीन लगाएं। बाद में प्रमुख रेलवे स्टेशन और बस अड्डों पर मशीन को इंस्टाल किया जाएगा। आर. गांधी ने बताया कि लोगों के लिए खुले पैसे की कमी कहीं भी परेशानी का सबब न बने, इसे ध्यान में रखते हुए हर पहलू पर विचार विमर्श किया जा रहा है। इस पर भी विचार चल रहा है कि कोई दुकानदार या फिर माकेर्ट एसोसिएशन अपनी जरूरत के मुताबिक कहीं सीवीएम लगाना चाहे, तो लगा ले।

उन्होंने बताया कि शुरुआती तौर पर मशीन में नोट डालकर जरूरत के मुताबिक, पांच, दो और एक रुपये के सिक्के निकाले जा सकेंगे। उसके बाद ऐसी व्यवस्था भी की जाएगी कि क्रेडिट व डेबिट कार्ड डालकर सीधे खुले पैसे निकाले जाएं। यानी एटीएम से 1000, 500 और 100 के नोट ही नहीं 1, 2, 5, 10 के सिक्के भी निकाले जा सकेंगे। इससे दुकानदारों, खासकर छोटे दुकानदारों की सिरदर्दी काफी हद तक कम हो सकती है।

bhanupathak

फिर एक uttrakhandi लड़का


खिला एक फूल फिर इन पहाडों में.
मुरझाने फिर चला delhi की गलियों में.
graduate की डिग्री हाथ में थामे निकल गया.
फिर एक uttrakhandi लड़का जिंदा लांश बन गया.......

खो गया इस भागती भीड़ में वो.
रोज़ मारा बस के धक्कों में वो.
दिन है या रात वो भूल गया.
फिर एक uttrakhandi लड़का जिंदा लांश बन गया......

देर से रात घर आता है पर कोई टोकता नहीं.
भूख लगती है उसे पर माँ अब आवाज लगाती नहीं.
कितने दिन केवल चाय पीकर वो सोता गया.
फिर एक uttrakhandi लड़का जिंदा लांश बन गया......

अब साल में चार दिन घर जाता है वो.
सारी खुशियाँ घर से समेट लाता है वो.
अपने घर में अब वो मेहमान बन गया
फिर एक uttrakhandi लड़का जिंदा लांश बन गया......

मिलजाए कोई गाँव का तो हँसे लेता है वो.
पूरी अनजानी भीड़ में उसे अपना लगता है वो.
पहाडी  गाने सुने तो उदास होता गया..
फिर एक uttrakhandi लड़का जिंदा लांश बन गया......

न जाने कितने फूल पहाड के यूँ ही मुरझाते हैं..
नौकरी के बाज़ार में वो बिक जाते है.
रोते हैं माली रोता है चमन..
उत्तराखंड का फूल उत्तराखंड में महकेगा की नहीं...............?

भानू पाठक
गंगोलीहाट , पिथोरागढ़
हाल: देहरादून
9412001141


अरुण भंडारी / Arun Bhandari

बी.कॉम (पास) कोर्स अगले साल होगा फेल!
डीयू के कॉलिजों में अगले साल से बी. कॉम (पास) आउट हो सकता है और सिर्फ बी. कॉम (ऑनर्स) चलेगा। दिल्ली
यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर प्रफेसर दीपक पेंटल का कहना है कि केवल बी.कॉम ऑनर्स कोर्स की स्कीम वह इसी साल से लागू करना चाहते थे, इसकी तैयारी भी शुरू हो गई थी लेकिन टीचर्स इसे ठीक से समझ नहीं पाए और विरोध के चलते यह स्कीम लागू नहीं हो सकी। अगले साल डीयू की पूरी कोशिश होगी कि कॉलिजों में बी. कॉम. आनर्स और स्कूल ऑफ ओपन लर्निन्ग (कॉरिस्पॉडेंस) में केवल बी. कॉम पास कोर्स चले। हालांकि डूटा के जॉइंट सेक्रटरी संजय कुमार का कहना है कि किसी कोर्स को बंद नहीं किया जाना चाहिए बल्कि उसमें सुधार की संभावनाएं तलाशने चाहिए।

प्रो. पेंटल का कहना है कि जो स्टूडंट्स कॉलिज में पढ़े, उसके सामने एक चैलिंज होना चाहिए, पढ़ाई का स्टैंडर्ड बढ़ाने और कंपटीशन के इस दौर में डीयू के स्टूडंट्स को आगे रखने के लिए इस तरह के कदम उठाए जाने बहुत जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि इस बार कॉलिजों में बी. कॉम और बी. कॉम ऑनर्स दोनों के ही ऐडमिशन होंगे। वीसी के मुताबिक इस स्कीम को वह जल्द ही ऐकडेमिक काउंसिल की मीटिंग में लेकर आएंगे। चूंकि इस बार तो ऐडमिशन प्रोसेस शुरू होने में अधिक दिन नहीं रह गए हैं और इस स्कीम पर काफी काम होना है, इसलिए अगले साल के लिए तैयारी शुरू की जाएगी।

प्रो. पेंटल कहते हैं कि बी. कॉम करने वाले बहुत से स्टूडंट्स साथ-साथ सीए भी करते हैं जबकि बी. कॉम अपने आप में महत्वपूर्ण कोर्स है। ऐसे स्टूडंट्स जो सीए या दूसरे प्रफेशनल कोर्स साथ करना चाहते हैं, वे स्कूल ऑफ ओपन लर्निन्ग से बी. कॉम करें। उन्होंने टीचर्स से अपील भी की कि इतनी बेहतर स्कीम को इस तरह से न नकारें और इस पर गंभीरता से विचार करें।

वाइस चांसलर की राय में कॉलिजों में केवल बी. कॉम ऑनर्स कोर्स चले और बी. काम पास को केवल स्कूल ऑफ ओपन लर्निन्ग (कॉरिस्पॉडेंस) में ही चलाया जाए। साथ ही कॉरिस्पॉडेंस में चलने वाले बी. कॉम ऑनर्स कोर्स भी विदा कर दिया जाए।

डीयू में कॉमर्स के सीनियर रीडर डॉ. आर. बी. सोलंकी का कहना है कि बी. कॉम ऑनर्स एक स्पेशलाइज्ड कोर्स है और टेक्निकल भी है, ऐसे में इस कोर्स की रेग्युलर पढ़ाई होनी जरूरी है। उनका कहना है कि बी. कॉम ऑनर्स की रेग्युलर पढ़ाई से ही स्टूडंट्स सब्जेक्ट को बेहतर तरीके से समझ सकता है। डीयू के 55 से अधिक कॉलिजों में बी. कॉम पास कोर्स चलता है और यह कोर्स स्टूडंट्स के बीच काफी पॉपुलर भी है। यह कोर्स करने वाले स्टूडंट्स की संख्या करीब 30000 है।

अरुण भंडारी / Arun Bhandari

बैंक ऑफ इंडिया के गार्ड राजेंद्र सिंह नेगी जब इस बैंक के कस्टमर को लुटने से बचाने के लिए सिर्फ एक खुखरी के दम पर बदमाशों से जूझ रहे थे तो उस वक्त वहां मदर डेरी, केबल नेटवर्क कंपनी के गार्ड और मौके पर मौजूद लोग तमाशबीन बने हुए थे। खास बात यह भी है कि जो लोग इस घटना के चश्मदीद हैं वे पुलिस के सामने मुंह तक खोलने को तैयार नहीं हैं। नेगी के परिवार ने बैंक पर लापरवाही बरतने का आरोप भी लगाया है।

विजय प्रकाश गुप्ता का आईपी एक्सटेंशन में ही पेट्रोलपंप है। वह रूटीन में बैंक में कैश जमा कराने आते थे। बैंक गार्ड राजेंद्र सिंह नेगी उन्हें अच्छी तरह पहचानते थे। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शायद इसीलिए जब गार्ड ने बदमाशों को गुप्ता से नोटों से भरा बैग छीनते हुए देखा तो वह अपने आपको रोक नहीं पाए और मदद के लिए दौड़ पड़े। पर, खुखरी के बल पर वह हथियारबंद बदमाशों को कब तक रोक सकते थे। बदमाशों ने इसी का फायदा उठाकर उनके सीने में गोली उतार दी। पुलिस अधिकारियों का यह भी कहना है कि अगर गार्ड के पास बंदूक होती तो शायद बदमाश हत्या और लूट इस सनसनीखेज वारदात को अंजाम नहीं दे पाते।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि जिस वक्त हथियारबंद बदमाशों ने हत्या और लूटपाट की इस वारदात को अंजाम दिया वहां से कुछ कदम की दूरी पर मदर डेरी और केबल नेटवर्क कंपनी के गार्ड मौजूद थे। इनके अलावा भी मार्किट में कुछ लोग मौजूद थे, लेकिन उनमें से किसी ने भी बदमाशों को पकड़ने की हिम्मत नहीं दिखाई। इतना ही नहीं पुलिस ने जब उनसे वारदात के बारे में पूछताछ करनी चाही तो उन्होंने कुछ भी बोलने से साफ मना कर दिया। यही नहीं कई लोग काम छोड़कर अपने घर चले गए।

गार्ड के रिश्तेदार हरीराम ने बताया कि नेगी गढ़वाल रेजिमंट से नायक पद से रिटायर हुए थे। रिटायर होने के बाद वह आईपी एक्सटेंशन स्थित बैंक ऑफ इंडिया में गार्ड की नौकरी करने लगे थे। वह गणेश नगर में रहते थे। उनकी तीन संतानों में सबसे बड़ी बेटी है। हरीराम ने इस घटना के लिए पूरी तरह से बैंक को दोषी ठहराया है। उनका कहना है कि बैंक ने उन्हें बंदूक तक उपलब्ध नहीं कराई। हथियारबंद बदमाशों ने इसी का लाभ उठाकर इतनी बड़ी वारदात को अंजाम दे डाला। वहीं इस घटना के बाद बैंक अधिकारियों ने भी चुप्पी साध ली है। कोई भी अधिकारी इस घटना के संबंध में मीडिया से बात करने के लिए तैयार नहीं हुआ।

सत्यदेव सिंह नेगी

भरपूर नींद लो वजन घटाआ॓
लंदन। ऊपर दिया शीर्षक आपको कुछ अटपटा लगा होगा, क्योंकि माना जाता है कि ज्यादा सोने से मोटापा बढ़ता है, लेकिन अगर आप वाकई अपना वजन घटाने चाहते हैं ज्यादा देर तक टेलीविजन न देखकर जल्द सो जाइए। एक नए अध्ययन में अधिक नींद लेने से वजन कम हो जाने की बात का खुलासा हुआ है।
वाशिंगटन के वॉल्टर रीड आर्मी मेडिकल सेंटर के नेतृत्व में एक अंतरराष्ट्रीय टीम ने पाया है कि रात में नींद की कमी से व्यक्ति के हार्मोन का स्तर गड़बड़ा सकता है, जिसकी वजह से अधिक भूख लग सकती है और उपपाचन (मेटाबॉलिज्म)प्रक्रिया की गति धीमी हो सकती है तथा इसका नतीजा वजन बढ़ने के रूप में निकल सकता है। प्रमुख अनुसंधानकर्ता डॉ. एर्न एलियासन के अनुसार किसी व्यक्ति का 'बाडी मास इंडेक्स' (बीएमआई) नींद की अवधि और इसकी गुणवत्ता से जुड़ा होता है। यदि किसी का बीएमआई 30 या इससे अधिक है तो वह मोटे लोगों की श्रेणी में गिना जाएगा।
अनुसंधानकर्ताओं ने यह बात 14 नर्सों की नींद, उनके ऊर्जा व्यय और उनकी गतिविधियों के विश्लेषण के आधार पर कही है। ये नर्सें वॉल्टर रीड में कार्यरत हैं, जो हृदय स्वास्थ्य संबंधी एक कार्यक्रम में स्वेच्छा से शामिल हुईं थीं। अनुसंधान करने वालों ने पाया कि जिन नर्सों ने नींद अधिक ली, वे अधिक नींद न लेने वाली नर्सों की तुलना में पतली थीं। अखबार 'द टेलीग्राफ' ने डॉ. एलियासन के हवाले से कहा, 'जब हमने कम अवधि तक सोने वालों और अधिक अवधि तक सोने वालों को लेकर विश्लेषण किया तो पाया कि कम नींद लेने वालों का बीएमआई 28.3 और अधिक नींद लेने वालों का बीएमआई 24.5 यानी कि औसत दर्जे का था।'
अनुसंधानकर्ताओं के अनुसार नींद की अवधि और गुणवत्ता घटने तथा भूख बढ़ने में तनाव की भूमिका भी अहम होती है, जिसका परिणाम वजन बढ़ने के रूप में निकल सकता है। डॉ. एलियासन ने कहा, 'अध्ययन में हमें बहुत-सी रोचक बातें देखने को मिलीं, जिससे भविष्य की जांचों के लिए संभावनाओं के द्वार खुलते हैं। प्राथमिक तौर पर हम यह जानना चाहते हैं कि ऐसी कौन-सी चीज है, जो वजन संबंधी संचालन कार्य से जुड़ी है और नींद तथा वजन एक-दूसरे से जुड़े क्यों प्रतीत होते हैं।' इस अध्ययन के परिणाम सैन डियागो में 'अमेरिकन थोरैसिक सोसायटी इंटरनेशनल कान्फ्रेंस में पेश किए गए हैं।' (एजेंसी)

सत्यदेव सिंह नेगी

छुटि्टयों में आजमायें हुनर
स्कूल–कॉलेज की छुटि्टयां होने को हैं। धमाचौकड़ी मचाने का अब न तो समय है और न ही उम्र। खाली वक्त में कुछ कमाई का भी रास्ता बनायें। इससे होगा यह कि जेब खर्च के साथ छुट्टी की मस्ती दोगुनी होगी। साथ ही, कहीं काम करने का अनुभव भी होगा। अखबार, पत्रिकाओं और केबल को खंगालिए- मनमाफिक समर जॉब। फिलहाल इन पर भी एक नजर डालें

बन सकते हैं होस्ट
एलजी, वीडियोकॉन, लेक्मे जैसे बड़े ब्रांड मॉल्स आदि में इवेंट करवाते रहते हैं, जहां उन्हें होस्ट, एंकर, वॉलेंटियर और कॉआर्डिनेटर की आवश्यकता पड़ती है। आपने प्राय: देखा होगा कि इस तरह के इवेंट में होस्ट लोगों को गाने, गुनगुनाने और कुछ उल्टी–पुल्टी हरकत करने के लिए कहते हैं, जिसके लिए वह जीतने वाले को प्राइस भी देते हैं। अगर आपको लगता है कि हजार लोगों के सामने आप खुलकर बोल सकते हैं। आपके पास उन्हें हंसाने के लिए ढेर सारे जोक्स हैं। हाजिरजवाब हैं आप। तब यह काम आपके लिए बेहतर होगा। इसमें ज्यादा सिरदर्दी भी नहीं है, क्योंकि यहां आपका ज्यादा समय बर्बाद नहीं होता। बाकी समय आपका है। कुछ भी करें। इवेंट बड़ा हो, तो फूड भी साथ मिलता है। कहीं–कहीं घंटे के हिसाब से पेमेंट होती है। कुछ ब्रांड कंपनियां दिन के हिसाब से पेमेंट करती हैं।

डेलीवेज पर काम
सरकारी ऑफिसों में डेलीवेज पर लोगों को रखने की प्रथा है। इस काम के लिए 4 से 5 हजार रूपए मिलते हैं। शनिवार–रविवार की छुट्टी के अलावा दूसरी सरकारी छुटि्टयां भी मिलती हैं। अगर आपके पास सीए, सेक्रेट्रियल प्रैक्टिस आदि का कोर्स किया है, तो फिर इससे ज्यादा सेलेरी भी मिल सकती है। जब तक मन लगे, काम कीजिए। जब जी चाहे, काम छोड़ दीजिए।
डोर टू डोर सर्वे बुरा नहीं
लोगों को अपनी बातों से राजी कराते हैं। बातें घुमाना जानते हैं। आपमें सेल्फ मार्केटिंग के गुण हैं, तो आप डोर टू डोर सर्वे को पूरे मन के साथ करेंगे। तपती धूप और लू के थपेड़े भी आपको नहीं करेंगे परेशान। अक्सर छोटी–बड़ी कंपनियां अपना कोई नया उत्पाद या स्कीम शुरू करती हैं, जिसके लिए वे डोर टू डोर सर्वे या मार्केटिंग करवाती हैं। अगर आप किसी को पटाकर अपना उत्पाद बेचते हैं, तो आपके लिए यह ट्रीट हो जाएगी, वरना सर्वे में ऐसी कोई बाध्यता नहीं रहती कि आप उत्पाद को बेचकर ही लाएं। मार्केटिंग करना ही मूल उद्देश्य होता है। इस तरह के सर्वे कई बार महीनों चलते हैं। ऐसे में आप अच्छी कमाई कर सकते हैं।
गाने-बजाने का शौक करें पूरा
नाचना-गाना-बजाना किसी भी कला में निपुण हैं, तो क्या सोचना! अपनी सोसायटी के बच्चों को छुट्टी में साल्सा, बॉलीवुड, हिपहॉप, ब्रेक और क्लासिकल डांस कुछ भी सीखा सकते हैं। गाना–बजाना जो भी आता है, उसका रिहर्सल छुटि्टयों में जमकर करें
कैंपस में नौकरी
विश्वविघालय कैंपस में छात्रों-छात्राओं को आसानी से समर जॉब मिल जाती है। यदि कैंपस से लाइब्रेरी साइंस, पत्रकारिता या कोई भी प्रोफेशनल कोर्स कर रहे हैं, तो यहां अच्छे पेमेंट के साथ नौकरी मिल जाएगी। लाइब्रेरी असिस्टेंट, कैफेटेरिया मैनेजर, वेबसाइट डेटा बेस डेवलेपर, स्विमिंग कोच, फिजिकल इंस्ट्रक्टर, होस्टल केयर-टेकर कुछ भी कर सकते हैं। जिसे करने में आपको आसानी हो यानी वह सब जिसे करते हुए शर्म भी न आए।
हिसाब-किताब में पक्के
हिसाब–किताब में पक्के हैं, तो मार्केट में सीए, वकील और एलआईसी एजेंट की भरमार है। उनके साथ आप काम कर सकते हैं। ये ज्यादा चिकचिक का काम भी नहीं है। यह समझदारी वाला और जिम्मेदारी का काम है। आपको यहां करना यह होता है कि इनके क्लाइंट के पास जाकर जरूरी कागज कलेक्ट करना होता है या इन तक जरूरी पेपर पहुंचाने होते हैं। कंप्यूटर चलाने में निपुण हैं, तब तो काम आसान भी हो जाता है।
बच्चों के संग करें मस्ती
बच्चों को हैंडल करना सबके बस की बात नहीं। उनके चिल्लपौं को सहने का सामर्थ्य आपमें है, तब बेबी सिटिंग भी बुरा नहीं है। यह काम तो आप अपनी सोसाइटी में भी कर सकते हैं। ऐसा नहीं है कि लड़कियां ही इस काम को अच्छे से कर सकती हैं। लड़कों में भी ये गुण होते हैं कि वे बच्चों को खुश रख सकते हैं। छुटि्टयों में अक्सर मियां–बीवी अकेले घूमने जाना चाहते हैं। कुछ के घर में मां अक्सर बीमार होती हैं। कोई मेहमान भी इतनी जल्दी-जल्दी नहीं आता-जाता रहता। ऐसे में आप है न!
हिंदी को भुनाइए
आजकल हिंदी टाइपिंग का काम खूब बढ़ गया है। हिंदी के टाइपराइटर कम ही मिलते हैं। हिंदी की कंपोजिंग अंग्रेजी की टाइपिंग से महंगी होती है। अगर आपको हिंदी टाइपिंग आती है, तो इंतजार किसका कर रहे हैं? प्रकाशक घरों से प्रूफ रीडिंग का काम भी खूब मिलता है। इसमें घर पर बैठकर ही करना होता है। चाहें तो बाद में भी इस काम को जारी रख सकते हैं।


सत्यदेव सिंह नेगी

रोशनी की पूंछ का होगा ऑपरेशन
इंदौर जिले के चोरल गांव की तीन साल की रोशनी के शरीर से डॉक्टर मंगलवार को पूंछहटाएंगे। रोशनी के जन्म से ही यह पूंछ थी जो उसके शरीर के विकास के साथ-साथ बढ़ती जा रही है। गरीब परिवार में पैदा हुई रोशनी के परिवार के पास पूंछ हटाने के लिए होने वाले ऑपरेशन का पैसा नहीं था लेकिन डायरेक्टर इंडस्ट्रियल हेल्थ आलोक शर्मा द्वारा दी गई आर्थिक सहायता से यह संभव होने जा रहा है।

सीएचएल अपोलो में होने जा रहे इस ऑपरेशन के लिए श्री शर्मा ने सोमवार को दस हजार रुपए की राशि जमा कराई। रोशनी की बुआ सोरम कलम ऑपरेशन के लिए उसे इंदौर लाई हैं। उनका कहना है जन्म से ही रोशनी को पूंछ थी लेकिन हमारे पास इतना पैसा नहीं था कि इसका इलाज करवा लें। हमें डर था कि बड़ी होने पर बच्चे इसे परेशान न करें। मंगलवार को डॉ. राकेश शिवहरे व डॉ. मनीष कासलीवाल रोशनी का ऑपरेशन करेंगे।


सत्यदेव सिंह नेगी

किसी दोस्त की ऑरकुट प्रोफाइल से कॉपी किया है
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बहुत दिन हुए वो तूफ़ान नही आया,
उस हसीं दोस्त का कोई पैगाम नही आया,
सोचा में ही कलाम लिख देता हूँ,
उसे अपना हाल- ए- दिल तमाम लिख देता हूँ,
ज़माना हुआ मुस्कुराए हुए,
आपका हाल सुने... अपना हाल सुनाए हुए,
आज आपकी याद आई तो सोचा आवाज़ दे दूं,
अपने दोस्त की सलामती की कुछ ख़बर तो ले लूं
खुशी भी दोस्तो से है,
गम भी दोस्तो से है,

तकरार भी दोस्तो से है,
प्यार भी दोस्तो से है,

रुठना भी दोस्तो से है,
मनाना भी दोस्तो से है,

बात भी दोस्तो से है,
मिसाल भी दोस्तो से है,

नशा भी दोस्तो से है,
शाम भी दोस्तो से है,

जिन्दगी की शुरुआत भी दोस्तो से है,
जिन्दगी मे मुलाकात भी दोस्तो से है,

मौहब्बत भी दोस्तो से है,
इनायत भी दोस्तो से है,

काम भी दोस्तो से है,
नाम भी दोस्तो से है,

ख्याल भी दोस्तो से है,
अरमान भी दोस्तो से है,

ख्वाब भी दोस्तो से है,
माहौल भी दोस्तो से है,

यादे भी दोस्तो से है,
मुलाकाते भी दोस्तो से है,

सपने भी दोस्तो से है,
अपने भी दोस्तो से है,

या यूं कहो यारो,
अपनी तो दुनिया ही दोस्तो से है

सत्यदेव सिंह नेगी

निवासी मैदान का, फ ायदा लिया पहाड़ का
May 20, 02:34 am

देहरादून। आईटीबीपी के एक एसआई पर फर्जी पता बताकर लंबाई में छूट प्राप्त कर नौकरी पाने का आरोप है। आईटीबीपी की ओर से जिलाधिकारी को लिखे पत्र में उक्त एसआई के मैदानी मूल का होने के बावजूद पहाड़ी क्षेत्र के अनुसार छूट लेने के बारे में अवगत कराया गया है। जिलाधिकारी से मामले की जांच का अनुरोध किया गया है।

आईटीबीपी के उपमहानिरीक्षक (कार्मिक व प्रशासन) प्रमोद श्रीपाद फलणीकर ने जिलाधिकारी अमित सिंह नेगी को लिखे पत्र में उल्लेख किया है कि एक भूतपूर्व सैनिक ने मुख्यमंत्री को पत्र प्रेषित कर एक प्रति उन्हें भी भेजी। पत्र में आरोप है कि भारत तिब्बत सीमा पुलिस में उपनिरीक्षक के पद पर तैनात एक व्यक्ति 2003 में भर्ती हुआ। उसने अपना मूल निवास गांव साहिया, तहसील भकराला जिला देहरादून बताया। पत्र में आरोप है कि हकीकत में वह गांधी कालोनी, छुटमलपुर, जिला सहारनपुर का मूल निवासी है। जबकि जिस स्थान को मूल निवास दर्शाया गया है, वहां उसका कोई रिश्तेदार रहता है। पत्र में कहा गया है कि इसके अलावा उक्त एसआई का एक भाई भी आईटीबीपी में ही हेडकांस्टेबल है। विभाग के पास मौजूद अभिलेखों में दोनों के पिता और मां का नाम समान हैं, लेकिन, पते अलग-अलग हैं। इस संबंध में जिलाधिकारी से जांच का अनुरोध किया गया है। जिलाधिकारी ने मामले की जांच एडीएम प्रशासन यूसी कबड़वाल को सौंपी है।