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Exclusive Photos Of Village Life - उत्तराखण्ड के ग्राम्य जीवन की एक झलक

Started by kesharsingh.bist, August 13, 2008, 10:09:02 PM

Hemant Kapkoti

पहाड़ की चेली ले , पहाड़ की ब्वारी ले .....कभे नी खाया द्वी रोव्ट सुख ले .....
काम धामक दिन छा हो महाराज ... फुर्सते नात रोव्ट खाडक...

नमस्कार दोस्तों,
दोस्तों आपको तो पता ही है की पहाड़ की नारी का जीवन कितना कठिनाई पूर्ण है.. हमारी माँ बहने सुबह सवेरे ही खेतो में गेहू टीपने चली जाती है .. दिन में घर आकर गेहू को बालियों से अलग करती है और शाम को फिर खेतो में चली जाती है... कितनी मेहनती है हमारे पहाड़ की औरते जो खुद तो तपती धुप में दिन भर खेतो में काम करती है फिर भी उफ़ तक नहीं करती और हमे २ मिनट के लिए भी धुप में नहीं जाने देती.. हम तो बस अपने में ही मगन रहे ...लेकिन कभी सोचा है की हमारी माँ बहने कही खेती में कड़ी धुप में काम क्यों कर रही है? किसके लिए कर रही है ? बेशक हमारे लिए ही...क्यों सुबह उठकर बिना खाए पिए दूर जंगल में से गाय.. भैस के लिए चारा लेने जाती है? ताकि हमारे लिए दूध, दही और छाछ की कमी न हो ... और जब बुड़ापे में उन्हें हमारी जरूरत होती है तो हम उन्हें क्या देते है ? सोचा है कभी.... जब तक उनके हाथ पैर चलते है तब तक तो हम लोग उनकी सेवा करते है ... मीठी मीठी बातें करते है ...किसलिए? .. ताकि वो घर का कुछ काम करे... लेकिन जब उनपर बुढ़ापा असर दिखने लगता है तो हम लोग भी उनसे कन्नी काटने लगते है... जबकि वो कुछ ज्यादा भी नहीं मांगते .. बस अपने बेटे, बहु, नाती पोतो का प्यार और दो वक़्त की रोटी ...... और हमारे कुछ भाई लोग उन्हें ये भी देने में असमर्थ हो जाते है.... अब सोचो जिसने हमारी लिए तपती धुप में अन्न पैदा किया हो उन्हें हम दो वक़्त की रोटी, प्यार और देखभाल न दे पाए तो इससे शर्मनाक बात और क्या हो सकती है ..फिर क्या फ़ायदा देवभूमि में जन्म लेने का यदि अपने ही माँ बाप की सेवा न कर पाए... किसी ने सही कहा है " हर बात को तुम भूलो भले माँ बाप को मत भूलना "
मेरा प्रणाम है पहाड़ की माँ एवं बहनों को
धन्यवाद
हेमंत कपकोटी




C.S.Mehta


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