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FREEDOM FIGHTER OF UTTARAKHAND - उत्तराखंड के स्वतंत्रता सेनानी

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, August 15, 2008, 05:02:21 PM


एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्व. श्री खीमानन्द पन्त पुत्र स्व.श्री दयाराम पन्त, ग्राम व पोस्ट -गागरीगोल, जनपद - बागेद्गवर, उत्तराखण्ड प्रमाण पत्र में लिखा गया विवरण जो तत्कालीन जिलाध्िाकारी द्वारा दिया गया हैः-



ये स्वतन्त्रता संग्राम के सक्रिय कार्यक्रता थे, सन्‌ १९४१ के व्यक्तिगत सत्याग्रह आन्दोलन में भाग लेने के फलस्वरुप इन्हें अदालत उठने तक की सजा व ५० रुपया अर्थदण्ड न देने पर चार माह के कठोर कारावास की सजा हुई, पुनः सन्‌ १९४२ के स्वतन्त्रता संग्राम में भाग लेने के फलस्वरुप इन्हें ६ वर्च्च की कठोर कारावास की सजा हुई, इन्हें कारावास अवध्िा में बरेली, सेन्टल जेल लखनऊ में रखा गया था।

इतिहास

स्वतंत्रता आन्दोलन के समय जब महात्मा गांध्ाीजी बागेद्गवर आगमन पर थे तब स्व. श्री दयाराम पन्त जी से उन्होने कहा था कि आप अपने एक पुत्र को देद्गा आजाद करने के लिए सौप दे इसी क्रम में स्व.श्री दयाराम पन्त जी ने स्वतन्त्रता संग्राम सेनानी स्व. श्री खीमानन्द पन्त को देद्गा के लिए सक्रिय कर दिया और स्वतंत्रता के बाद ही चेन की सांस ली ।


एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्व. श्री खीमानन्द पन्त पुत्र स्व.श्री दयाराम पन्त, ग्राम व पोस्ट - गागरीगोल, जनपद - बागेद्गवर, उत्तराखण्ड  फोटो, पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती इन्दिरा गांधीजी द्वारा दिया गया ताम्र पत्र! प्रमाण पत्र में लिखा गया विवरण जो तत्कालीन जिलाधिकारी अलमोड़ा द्वारा दिया गया हैः-



ये स्वतन्त्रता संग्राम के सक्रिय कार्यक्रता थे, सन्‌ १९४१ के व्यक्तिगत सत्याग्रह आन्दोलन में भाग लेने के फलस्वरुप इन्हें अदालत उठने तक की सजा व ५० रुपया अर्थदण्ड न देने पर चार माह के कठोर कारावास की सजा हुई, पुनः सन्‌ १९४२ के स्वतन्त्रता संग्राम में भाग लेने के फलस्वरुप इन्हें ६ वर्च्च की कठोर कारावास की सजा हुई, इन्हें कारावास अवधि में बरेली, सेन्टल जेल लखनऊ में रखा गया था।


इतिहास

स्वतंत्रता आन्दोलन के समय जब महात्मा गांधीजी बागेद्गवर आगमन पर थे तब स्व. श्री दयाराम पन्त जी से उन्होने कहा था कि आप अपने एक पुत्र को देद्गा आजाद करने के लिए सौप दे इसी क्रम में स्व. श्री दयाराम पन्त जी ने स्वतन्त्रता संग्राम सेनानी स्व. श्री खीमानन्द पन्त को देद्गा के लिए सक्रिय कर दिया और स्वतंत्रता के बाद ही चेन की सांस ली ।

इनकी वर्तमान पीढ़ी

इनके दो पुत्र हैं श्री द्गिाव प्रसाद पन्त व श्री मोहन चन्द्र पन्त, दोनों पुत्र सरकारी विभागों में सेवारत हैं छोटे पुत्र श्री मोहन चन्द्र पन्त, इण्टर कालेज गागरीगोल में भूगोल विच्चय के प्रवक्ता पद पर सेवारत हैं जिन्हें द्गिाक्षा सत्र २०११-१२ में उत्तराखण्ड सरकार ने द्गिाक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने पर राज्य द्यौक्षिक पुरुस्कार से सम्मानित किया गया है इनके तीन पोत्र द्गिाक्षा विभाग में अध्यापक तथा एक पोत्र स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत हैं, जनपद बागेद्गवर के जनपदीय खेल-कूद प्रतियोगिता में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्व. श्री खीमानन्द पन्त जी की स्मृति में विजयी ब्लाक को द्याील्ड देकर पुरुस्कार दिया गया ।




This information has been provided by his grandson
Deepak Pant
deepak pant deepakpant22@gmail.com

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


आजाद हिंद फौज के सिपाही का निधन

बागेश्वर: आजाद हिंद फौज के सिपाही जैंत सिंह दफौटी का निधन हो गया है। उनकी उम्र 101 साल थी। उनका सरयू गोमती तट पर अंतिम संस्कार किया गया। मूल रूप से नौगांव (दफौट) निवासी जैंत सिंह दफौटी जिले के बिलौना गांव के रहने वाले थे। शुक्रवार सायं उनका देहांत हो गया। परिजनों के मुताबिक उन्होंने सुभाष चंद्र बोस के नेतृत्व में देश की आजादी की लड़ाई में योगदान दिया था। इस दौरान वह कई बार जेल भी गए। उनके निधन पर डीएम डा.वी षणमुगम, एसडीएम फिंचाराम चौहान व तीरथपाल सिंह सहित विधायक चंदन दास व ललित फस्र्वाण, प्रमुख राजेंद्र टंगडि़या, जिपं अध्यक्ष विक्रम शाही, पूर्व अध्यक्ष दीपा आर्या, पालिकाध्यक्ष सुबोध साह, प्रधान धना देवी, जिपं सदस्य भूपेंद्र सुयाल, रणजीत बोरा आदि ने शोक व्यक्त किया है।

(dainik jagran)

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स्वाधीनता सेनानी उपाध्याय का निधन23 अप्रैल 2013 5:30 AM IST पर  रामनगर। आजादी के आंदोलन में अंग्रेजों से लोहा लेने वाले सल्ट (अल्मोड़ा) के खुमाड़ गांव के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रघुवर दत्त उपाध्याय का सोमवार को निधन हो गया। वह कई दिनों से अस्वस्थ थे।
96 वर्षीय रघुवर दत्त के शव का मंगलवार सुबह नौ बजे स्थानीय शमशान घाट में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार होगा। स्थानीय स्वाधीनता सेनानी मोती सिंह नेगी, एसडीएम एसएस जंगपांगी, चंद्रभूषण पांडे आदि ने उनके घर पहुंचकर परिजनों को सांत्वना दी। 25 जनवरी 1917 को खुमाड़ में जन्मे उपाध्याय के दो पुत्र और चार पुत्रियां हैं। उनके पिता पुरुषोत्तम उपाध्याय भी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे। उनकी प्रेरणा से ही उन्होंने 1930 में रानीखेत में शराब विरोधी आंदोलन से अपनी सामाजिक लड़ाई की शुरुआत की। पांच सितंबर 1942 को खुमाड़ में एकजुट हुए आंदोलनकारियाें पर ब्रिटिश फौज ने गोलियां बरसाईं थी। जिसमें कई आंदोलनकारियाें को अपनी शहादत देनी पड़ी थी।

(amar ujala)

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जैती (सालम) के शहीद

    नरसिंह धानक (1886-1942)
    टीका सिंह कन्याल पुत्र जीत सिंह (1919-1942)

तिलाडी के आन्दोलकारी जो कारागार में शहीद हुये

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

तिलाडी के शहीद

       
  • अजीत सिंह पुत्र काशी सिंह (1904-1930)
  • झूना सिंह पुत्र खडग सिंह(1912-1930)
  • गौरू पुत्र सिनकया (1907-1930)
  • नारायण सिंह पुत्र देबू सजवाण (1908-1930)
  • भगीरथ पुत्र रूपराम (1904-1930)

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कीर्तिनगर के शहीद

       
  • नागेन्द्र सकलानी पुत्र कृपा राम (1920-1948)
  • मोलू राम भरदारी पुत्र लीला नन्द (1918-1948)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

खुमाड़ (सल्ट) के शहीद

       
  • सीमानन्द पुत्र टीकाराम (1913-1942)
  • गंगादत्त पुत्र टीकाराम (1909-1942)
  • चुडामणि पुत्र परमदेव (1886-1942)
  • बहादुर सिंह पुत्र पदम सिंह(1890-1942)