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Articles By Parashar Gaur On Uttarakhand - पराशर गौर जी के उत्तराखंड पर लेख

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, September 19, 2008, 06:42:35 PM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Parashar Gaur
July 5 at 8:10pm

आज का अनुबादित गढ़वाली शेर

बुल्दा छा जू कभी कि बिन तेरा लगुदु नि *१ ज्यु
जाणा छन वो लुक लुक्की , बच बची *२ कुणो कुणो
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१ ज्यु = दिल ,मन ! *२ कुणो कुणो = आड़ ले ले कर , छुप छुप कर

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Parashar Gaur
July 1 at 11:19pm

आज का अनुबादित गढ़वाली शेर :

देखी नी *1जुनल् कभी भी अपणी मुखड़ी कु दाग

तभित * 2 नखरा कै कि इतगा *3 बौलीणी च वा !

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*1जुनल् = chaand ! * नखरा= mijaaj/swang *3 बौलीणी = unmat/ khush

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

अमेरिका में गढ़वाली नाटक पहली बार !

अमेरिका में पहली बार --- १९९९ में पराशर गौर जी द्वारा निरेशित्त गढ़वाली एकाँकी नाटक " 2६ जनबरी "

संन १९९9 में नार्थ अमेरिका में बेस उत्तराखंडीयुं का न्यूयार्क यु इस य में दुसरा अधिबेसन हुवा था जिसमे कनाडा से माधुरी बह्गुना /शीला फारसी एवं सोहनी गौर साथ में पराशर गौर ने पहली बार अमेरिका में गढ़वाली एकाँकी नाटक "२६ जनबरी " किया था जिसे लोगो ने बहुत सरहाया था !
पहली तस्बी में माधुरी बहुगुणा और सोहनी गौर ! दूसरी में शीला फारशी पराशर गौर , माधुरी बहगना साथ में सोहनी गौर

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Parashar Gaur
2 hrs · Edited ·

Mera ek roop ye bhei

Gadwale theater NATAK " AUNSI S KE RAAT " ( written and directed by me in 60 and 70 s ) In this play in delhi first time ladies took part in play otherwise man always playas ladies characters. LILA NEGI was the first heroin in gadwali natak who participate in aunshi ke raat in 1964

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Parashar Gaur
1 hr ·
राही जी के निधन पर
माँ /बोली गीत / संगीत के ध्वज बाहक
रचनाओं के रचनाकार , लिपि के सम्बाहक
ओ मधुर मई धुनों के रचियता -----------
ओ, अपार जई , गीतों के शिल्पकार "राही"
तुमको तुम्हारे अनुज का अभिनन्दा बार बार !!
------ पाराशर गौड़ कनाडा ९ जनबरी २०१६

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Parashar Gaur
8 hrs ·
बसंती बिष्ट ऍम पद्मश्री
एक बात मैं साफ़ करदु जो ये कह रहे है की उन्हें क्यों मिली , क्यों मिला , तो मेरा उत्तर है क्योंकि वो इसके हकदार थी ! भारत सरकार ने उनका ही सन्मान नहीं किया इस पुरष्कार को दे कर बल्कि हम सब उत्तराखँडीयू को भी समानित किया है .. ! आज हम सब कलाकार चाहिय वो किसे भे धारा से जुड़ा हुआ हो अपने को गौरवित मह्सुश कर रहा है ! हम (कलाकार ) जिनको इससे कुछ जलन होनी चाहिए थी वो सब तो गर्व महसूस कर रहा है तो फिर आप क्यों इस तरह के बेहूदे प्रश्न खड़े कर रहे हो !
उनकी गायकी जो पद्धति है वो हम मे से किससे भी कलाकार के पास नहीं है ! वे स्वयम में स्वयं है ! उनकी कला की जितनी भी प्रशंशा के जाये उतनी ही कम है ! किसी की भी अगर आलोचना करनी हो तो स्वस्थ आलोचना होनी चाहिए .. दुराग्रह से नहीं ! आप किसे एक के प्रसंशक हो सकते है इसमें कोई बुरी बात नहीं , लेकिन पुरुष्कार आप के चहितो को मिले ऐसा संभव भी नहीं , अगर मिलता है तो सबसे पहिले मुझे खुशी होगी. इसलिए की जिसे पुरष्कार मिलेगा वो भी तो मेरे ही उत्तराखंड से ही होगा ! बसंती बिष्ट जी को मेरी ,मेरे परिवार व तमाम उत्तराखण्डियों के और से बहुत बहुत बधाई !