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Articles By Hem Pandey - हेम पाण्डेय जी के लेख

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, September 20, 2008, 01:10:54 PM

hem

वैसे तो उत्तराखंड में विशिष्ट साहित्यकारों की लम्बी सूची है,लेकिन मैं यहाँ दो अल्पज्ञात कवियों की कविता प्रस्तुत कर रहा हूँ, शायद आपको पसंद  आये -



अपने भविष्य का चित्र बना, आशा का उसमें रंग भरा
सोचा था न तनिक मन में मैंने, क्या है मेरी ललाट रेखा
वह रंग मिटा, मिट गया चित्र,मैं भी उसमें मिट जाऊंगी
पर मिटा नहीं सकती हूँ क्या मैं विधि! तेरा निर्मम लेखा ?

                                                - तारा पाण्डे

जानता हूँ जो न मिलती चाह है वह
जो न मंजिल तक पहुँचती राह है वह
जो हृदय की पीर बनी वह भावना है
जो आधूरी रह गयी वह  साधना है.

                                                                          - जीवन प्रकाश जोशी                   

hem

पद्मश्री श्री रमेश चन्द्र शाह हिन्दी साहित्य की जानी मानी हस्ती हैं.गोबर गणेश उनका चर्चित उपन्यास रहा है. यहाँ मैं उनकी एक कुमाऊनी कविता प्रस्तुत कर रहा हूँ -

भान कुननां बार में !


कांहुणि गे उ डिगची भड्डू ?
कांहुणि गे उ फौंल उ कस्यार ?
कांहूँ हराणि कांसैकि कटोरि ?
जत्थै चौ, उत्थै स्टीला टिटार |

भान जोडिगो, भल भै कूनेर
जो लै आल आब, गालि खैबेर जाल |
भान छां सब्बै हम भगवानाक,
जस्सै हम छां. उस्सै भान ह्वाल |

hem

प्रोफेसर रमेश चन्द्र शाह की एक और पहाड़ी कविता -


के छी वीक नौं जाणि


गदुवा फुल्यूड़ जसि
पाकि बिरूड़ जसि
उलाली च्यूड़ जसि

आई ली वी याद ईं
केछी जाणि नौं वीक |

ऊ द्याप्ता थान जसि
सुकिल असमान जसि
जोगीनां ध्यान जसि

आई ली वी याद ईं
के छी वीक नौं जाणि |

मीकिणी चै रै जाणि
मिहुणी भै रै जाणि
के छी वीक नौं जाणि |

hem

अनेक वर्ष पहले मजाक के तौर पर अपने बच्चों को दो प्रचलित नर्सरी राइम पहाड़ी में बना के सुनाईं थीं. वही नर्सरी राइम यहाँ भी मनोरंजन के लिये दे रहा हूँ.



Johny Johny
Yes Papa
Eating sugar
No Papa
Telling lies
No Papa
Open your mouth
Ha Ha Ha


जैंतुआ जैंतु
अँ ईजा
चिनि खाणोछे
नैं ईजा
झुठी बुलाणोछे
नैं ईजा
खाप खोल धे तू
हा हा हा


Cobbler Cobbler mend my shoe
Get it done by half past two
Stich it up and stich it down
And I will give you half a crown.


मोछी मोछी ज्वात बणे दे 
ढाई बाजी तक दी दिये यकैं
माथ बै सिणिये मुणि बै सिणिये
और मैंथे बै ढेपू ल्हि लिये .

हेम पन्त

bahut sundar..
sabhi parents jo kumaoni ko agli pidhi tak le jana chahte hain.. unhe apne bachcho ko english aur kumaoni mein bhi ye poem sikhani chahiye..


Quote from: hem on August 25, 2009, 07:10:56 PM
अनेक वर्ष पहले मजाक के तौर पर अपने बच्चों को दो प्रचलित नर्सरी राइम पहाड़ी में बना के सुनाईं थीं. वही नर्सरी राइम यहाँ भी मनोरंजन के लिये दे रहा हूँ.



Johny Johny
Yes Papa
Eating sugar
No Papa
Telling lies
No Papa
Open your mouth
Ha Ha Ha


जैंतुआ जैंतु
अँ ईजा
चिनि खाणोछे
नैं ईजा
झुठी बुलाणोछे
नैं ईजा
खाप खोल धे तू
हा हा हा

Devbhoomi,Uttarakhand


हेम जी अपने तो मुझे मेरा बचपन और माँ की या दिला दी है ,क्या लिखते हैं आप,
माँ---कितना अद्भुत और सम्पूर्ण शब्द है --जिसकी कोई तुलना ही नहीं है..!सभी भाषाओँ में ये शब्द सबसे लोकप्रिय है..!जब भी कोई व्यक्ति दुखी होता है तो उसके. मुंह से यही शब्द निकलता है!माँ होती भी ऐसी है तभी तो बच्चा माँ की उपस्थिति मात्र से चुप हो जाता है..!उसके आँचल और सानिध्य में ही वह सुरक्षित महसूस करता है !

कहा भी गया है पूत ,कपूत हो सकता. है पर माता कभी कुमाता नहीं हो सकती..!वह स्वंय.. भूखी रह कर भी बच्चे को खिलाती है,स्वंय. गीले में सोकर भी उसे सूखे में सुलाती है..ऐसी होती है..माँ!कहते है की एक अकेली माता अपने सभी बच्चों को प्यार से पाल लेती है,लेकिन वही बच्चे सारे मिल कर भी एक माँ को नहीं पाल सकते!

माँ सभी के लिए ममता लुटाती है,उसे अपने सभी बच्चे समान .रूप से..प्रिय होते है! बच्चे कोई भूल कर दे तो भी वह बच्चों को भूलती नहीं है.!पन्ना धाय जैसी माँ को कौन भूल सकता है?हँसते हँसते अपने बेटों को युद्घ भूमि में भेजने वाली माँ की क्या तुलना करें?हे माँ तू हर रूप में महान है!सात बार जन्म लेकर भी हम माँ का क़र्ज़ नहीं उतार सकते

M S JAKHI





Quote from: hem on November 10, 2008, 02:48:28 PM
यह लेख मैंने अपने ब्लॉग http://www.shakunaakhar.blogspot.com/ में पोस्ट किया है | यहाँ इसलिए दे रहा हूँ कि मेरा पहाड़ के विजिटर भी इस उत्तराखंडी माँ और बच्ची के बारे में जान सकें |  


                                      माँ को नमन




भोपाल में रुचिका नाम की १२ साल की एक बच्ची है जो सामान्य बुद्धि ले कर नहीं जन्मी थी|वह ऑटिज्म  से पीड़ित पाई गयी | जन्म के समय शारीरिक रूप से वह पूर्णत: सामान्य थी, किंतु ढाई - तीन साल बाद लगने लगा कि वह सामान्य बुद्धि की नहीं है | वह आवश्यकता से अधिक चपल और सक्रिय थी | पल दो पल के लिए भी स्थिर या निष्क्रिय रहना उसके लिए असह्य था | माता - पिता को इस बात का  भान भी नहीं था कि बच्ची की  अत्यधिक चंचलता किसी रोग का कारण हो सकता है | जब उन्होंने पाया कि बच्ची किसी भी एक कार्य पर ध्यान केंद्रित नहीं कर पाती तो उन्होंने चिकित्सकों से संपर्क साधा |  

पिता शरद पांडे और माँ सुमनलता  ने हरसम्भव यत्न किया कि उनकी बच्ची सामान्य बच्चों का जीवन जिए| पिता की कार्यालयीन व्यस्तता और फ़िर मुंबई पोस्टिंग हो जाने के कारण रुचिका का पूरा दायित्व माँ पर आ पड़ा | माँ ने बच्ची की परवरिश को पूजा मान लिया और अपने दायित्व का निष्ठापूर्वक निर्वहन करते हुए उस असामान्य बच्ची को इस योग्य बना दिया कि वह हिन्दी ,अंग्रेजी,गणित आदि सभी विषयों का स्कूली ज्ञान तो प्राप्त कर ही रही है साथ ही गायन की एक अद्भुत प्रतिभा लेकर संगीत के क्षेत्र में अपना कौशल दिखा रही है | उसकी प्रतिभा से चमत्कृत हो कर ही दैनिक भास्कर के भोपाल संस्करण के साथ प्रकाशित होने वाले डी बी स्टार ने बहुत बड़ा कवरेज़ दे कर उसकी इस प्रतिभा से पाठकों को रूबरू कराया है | मैं भी रुचिका की प्रतिभा और संगीत में उसकी पकड़ का कायल हूँ , किंतु उसकी योग्यता से अधिक महत्त्व उसकी माँ के त्याग को देते हुए  नमन करता हूँ उस माँ को जिसने उस असामान्य बच्ची को इस योग्य बना दिया |

समाज में असामान्य बुद्धि या असामान्य शारीरिक बनावट के साथ हजारों बच्चे पैदा होते हैं और उनके माँ-बाप यथा सम्भव उनका उपचार भी करवाते हैं | लेकिन जिस प्रकार इस माँ ने अपने जीवन का सर्वोपरि लक्ष्य बच्ची की उचित परवरिश को बना कर अपने सारे व्यक्तिगत और सामाजिक दायित्वों को गौण बना दिया वह अनुकरणीय है |  

प्रारंभ में बच्ची को अनेक मनोचिकित्सकों को दिखाया गया | उन्होंने बच्ची को हायपरएक्टिव पाया और सलाह दी कि बच्ची को चौबीसों घंटे व्यस्त रखने की आवश्यकता है | माँ ने इस राय को सर माथे लिया | आगे चल कर  चिकित्सकों ने कुछ दवाएं देने की राय दी | माँ ने देखा कि इस प्रकार के बच्चे जो कुछ वर्षों से दवाओं का सेवन कर रहे हैं, अत्यन्त आक्रामक हो गए हैं | माँ ने बच्ची को दवाओं का सेवन न करने देने और केवल प्रशिक्षण पर ही निर्भर रहने का निश्चय किया |    

प्राय: देखा गया है कि इस प्रकार के बच्चों के माता-पिता अपने बच्चों को किसी प्रशिक्षण गृह में भेज कर अपने कर्तव्य की इतिश्री मान लेते हैं |  लेकिन इस माँ ने प्रशिक्षण गृह में पल रहे बच्चों के आचरण का अध्ययन कर निष्कर्ष निकाला कि केवल प्रशिक्षण गृह में भेज देना समस्या का समाधान नहीं है अपितु बच्ची की चौबीसों घंटे निगरानी आवश्यक है |

बच्ची को लेकर माँ ने स्कूलों के चक्कर काटे | कुछ ने लेने से मना कर दिया, कुछ ने फीस लेकर एडमिशन दिया और हायपरएक्टिव बताकर निकाल दिया | अंत में एक स्कूल ने सहानुभूति दिखाई | उस स्कूल में माँ को बच्ची के साथ ही क्लास में बैठने की अनुमति दी गयी ताकि बच्ची को नियंत्रण में रखा जा सके | यह क्रम तीन वर्षों तक चला |  

इसी बीच बच्ची की गायन प्रतिभा और संगीत की उसकी समझ का पता चला | महसूस किया गया कि बच्ची का संगीत के प्रति लगाव ईश्वर प्रदत्त है | बस क्या था - माँ ने उसकी इस प्रतिभा को निखारने का निश्चय किया | जाने माने संगीत शिक्षकों से संपर्क साधा | बच्ची को लेकर माँ स्कूल जाती | उसके बाद तीन अलग अलग दिशाओं में अलग अलग शिक्षकों के पास जा कर बच्ची को संगीत का अभ्यास करवाती | अंतत: बच्ची की संगीत के प्रति रूचि बढ़ती ही गयी | यही नहीं संगीत के साथ साथ अब पढ़ाई में भी उसकी रूचि बढ़ने लगी |  

इस सारी भाग दौड़ में माँ को अपने व्यक्तिगत और सामाजिक दायित्वों से मुँह मोड़ना पड़ा| माँ योग प्रशिक्षक थी| उस कार्य को तिलांजलि दी | दैनिक पूजा पाठ भी यदि नियमित न हो पाई तो बच्ची की सेवा को ही पूजा मान लिया -
ऐ खुदा मेरी बख्श दे खता
फूल पूजा के तुझ पे चढ़ा न सका
हाथ बन्दों की खिदमत में मशगूल थे
हाथ बंदगी के लिए उठा न सका  
परिचितों, रिश्तेदारों के यहाँ आना जाना, उनके सुख - दुःख के कार्यक्रमों में शामिल होना छोड़ना पड़ा और उनकी नाराज़गी झेलनी पड़ी |      

कुल मिला कर माँ ने सब कुछ भूल कर केवल बच्ची को सामान्य बनाने के लिए अपना जीवन होम कर दिया और उसी का फल है कि बारह साल पहले जन्मी एक असामान्य बच्ची सामान्य लोगों को पीछे छोड़ कर संगीत - क्षितिज पर उभर रही है | वह ध्रुपद का प्रशिक्षण ले रही है | आठ भाषाओं में गा सकती है | उसकी प्रतिभा से प्रभावित हो विकलांगों के लिए काम करने वाले दिल्ली के एक एन. जी. ओ. ने उसके गानों का एल्बम बनाया है जो तीन दिसम्बर को रिलीज होगा |  

यह सबक है उन माता - पिताओं के लिए जिनकी संतानें किसी प्रकार की असामान्यता से ग्रसित हैं | यदि वे इस प्रकार की संतान के लिए स्वयं के जीवन को उत्सर्ग करने के लिए तैयार हैं तो संतान का भविष्य सुधर सकता है |      


hem

देवभूमि जी  (जखी जी ) मुझे खुशी है कि आपने माँ से सम्बंधित इस लेख का नोटिस लिया. आपने सच ही कहा है कि सात बार जन्म ले कर भी हम माँ का कर्ज नहीं उतार सकते.समाज में अनेक लोगों को असामान्य बच्चों के माता पिता होने का अभिशाप झेलना पड़ता है.वे लोग यथा संभव उनका उपचार भी करते हैं,लेकिन लेख में उल्लेखित माँ के जैसा त्याग करने वाले लोग नहीं के बराबर हैं.

hem

कुमाऊनी व्यंजन सिंहल से सभी कुमाऊनी बन्धु परिचित हैं. लेकिन यदि कोई प्रवासी पर्वतीय या पर्यटक  पहाड़ जाने पर इस व्यंजन का आनंद लेना चाहता है तो किसी परिचित की शरण में जाना पड़ेगा,  जो अपने घर पर सिंहल बनवा कर उसे खिला दे. पहाड़ में इसका व्यावसायिक उत्पादन कहीं नहीं होता. मैं समझता हूँ कि उन स्थानों  में जहां पर्यटक प्रायः आते हैं, सिंहल होटलों या मिठाई की दुकानों में उपलब्ध होने लगे तो उसकी बिक्री होगी.उदाहरणतः   यदि नैनीताल के फ़्लैट में कोई युवक या युवती सीजन में शाम को गरम गरम ताजे सिंहल बना कर बेचने लगे तो दस या बीस रुपये प्रति सिंहल के हिसाब से आसानी से बिक जायेंगे. पर्वतीय बेरोजगारों को इस तरह के रोजगार के प्रति भी पहल करनी चाहिए. यही नहीं, पहाड़ के बाहर भी प्रवासी पर्वतीय मेलों ठेलों में सिंहल का स्टोल लगा सकते हैं.

राजेश जोशी/rajesh.joshee

पाण्डे जी,
आपकी इस कविता पर एक सच्ची और रोचक घटना मेरे एक रिश्तेदार जो यहां देहरादून में रहते हैं के साथ हुयी, सुनाता हूं।  उन्होने अपनी ३ साल की बेटी को सिखाया है कि उनको पापा नही बौज्यू कहकर सम्बोधित करे तो वह उनको पापा की बजाय बौज्यू कह्कर सम्बोधित करती है।
पर मुसीबत इस अंग्रेजी ने कर दी,
जब उसके स्कूल में टीचर ने बोला जोनी - जोनी
तो वो बोल पड़ी यश बौज्यू।
अब टीचर कुमाऊनी तो थी नही उसके समझ में नही आया कि वह क्या कह रही है।
बाद में जब हमारे रिश्तेदार ने टीचर को समझाया तब बात सबकी समझ में आयी।

Quote from: hem on August 25, 2009, 07:10:56 PM
अनेक वर्ष पहले मजाक के तौर पर अपने बच्चों को दो प्रचलित नर्सरी राइम पहाड़ी में बना के सुनाईं थीं. वही नर्सरी राइम यहाँ भी मनोरंजन के लिये दे रहा हूँ.



Johny Johny
Yes Papa
Eating sugar
No Papa
Telling lies
No Papa
Open your mouth
Ha Ha Ha


जैंतुआ जैंतु
अँ ईजा
चिनि खाणोछे
नैं ईजा
झुठी बुलाणोछे
नैं ईजा
खाप खोल धे तू
हा हा हा


Cobbler Cobbler mend my shoe
Get it done by half past two
Stich it up and stich it down
And I will give you half a crown.


मोछी मोछी ज्वात बणे दे 
ढाई बाजी तक दी दिये यकैं
माथ बै सिणिये मुणि बै सिणिये
और मैंथे बै ढेपू ल्हि लिये .


हेम पन्त

बहुत दिनों से हेम पाण्डे जी के की-बोर्ड से निकले शब्द फोरम पर देखने को नहीं मिले... आशा है वो यह सन्देश देखकर कुछ सन्देश जरूर लिखेंगे..