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Live Chat With Anuradha Nirala(Folk Singer) On 15th Apr 2009 At 03:00PM

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, April 12, 2009, 12:38:59 PM


Anubhav / अनुभव उपाध्याय

Sabhi sadasyon se anurodh hai ki prashno ki gati dheere rakhiye taaki Anuradha ji jawaab de sake.

Rajen

अनुराधा जी नमस्कार.  इस फोरम में आपका हार्दिक स्वागत है.

मेरा आपसे एक प्रश्न है की - आपकी नजर में उत्तराखंड संगीत अपने किस स्थिति मैं है?  मेरा मतलब आजकल कुछ लोगों द्वारा उत्तराखंड संगीत के नाम पर जो फूहड़ता परोसी जा रही है वो और क्या-२ रंग दिखाने वाली है?

anuradha nirala

Quote from: dinesh bijalwan on April 15, 2009, 01:10:03 PM
Nameste Anuradhaji and many many thanks  for coming on line.  How are you ? Your songs in Meri Tehri were superb.   What is new ? Any new number coming with Negi ji?
My pleasure, I am fine.
There are good numbers I have done for some movies. There are others in which I have worked with new comers. Some good projects are in the process of being finalised. So nice of you for complimenting for my work. Thanks.
Quote from: पंकज सिंह महर on April 15, 2009, 03:14:06 PM
अनुराधा जी, आपका मेरा पहाड़ पोर्टल पर हार्दिक अभिनन्दन है, हम आपके आभारी हैं कि अपने व्यततम क्षणों में से कुछ पल आपने हमें दिये, जिसमें हम लोग आपसे रुबरु हो सकेंगे।

मेरा प्रश्न-

१- आज के साधन सम्पन्न वातावरण और सुख सुविधा के बावजूद कोई दूसरा गोपाल बाबू गोस्वामी या नरेन्द्र सिंह नेगी स्थापित क्यों नहीं हो पा रहा है।
२- व्यवसायिकता की अंधी दौड़ में अपनी संस्कृति से खिलवाड़ करने वाले गायकों को आप क्या दण्ड देना चाहेंगी।
Sabhi jaldi se chalang mar nein ki koshish mein hain. kuch safal hongein aur kuch ko intejar karna pad sakta hain
Quote from: savitanegi06 on April 15, 2009, 03:11:15 PM
Anuradha ji,
Welcome to Mera Pahad Community portal,

अनुराधा जी,
आपके बहुत गीत सुने, पर आज आपसे रूबरू होने का मौका मिल रहा है,
में आपसे यही जानना चाहूंगी की आज का तेज़ तर्रार संगीत (कुमाउनी गढ़वाली पॉप ) हमारे संस्कृति को कितना नुक्सान पहुंचा रहा है, क्या तेज़ तर्रार संगीत को महत्व दिया जाना चाहिए,

hamari sanskriti itni viksit aur majboot hain ki is par koi aghat nahin kar sakta

Quote from: Anubhav / अनुभव उपाध्याय on April 15, 2009, 03:06:50 PM
Anuradha ji Mera Pahad parivar ki taraf se aapka abhinandan aur swagat hai.
mujhe bhee achaa lag raha hai

anuradha nirala

Quote from: एम् एस मेहता /M S Mehta on April 15, 2009, 02:43:07 PM
मेरा प्रशन ३
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आज उत्तराखंड के लोक संगीत ने एक लम्बा सफ़र तय किया है, क्या कारण कि जो उत्तराखंड के लोग महानगरो में रह रहे है उनमे आपने संगीत के प्रति उतना interest नहीं जितना कि अपेक्षा थी ?

Kuch had tak hamein bhed chal se bachna hoga. Hamari sanskriti evam paramparaon ka adhyan kar mool rachnao ko prastut karnein ki awashayakta hai.

मोहन जोशी


एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

anuradha ji.

i am reproducing my question 4..


मेरा प्रशन ४
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आमतौर से देखा गया है आप selected सोंग है गाते है जो कि आप कि एक खाशियत है और ये सोंग सदा आपके क्ष्रोताओ को भाते भी है दूसरी तरफ हमें लोगो से फीडबैक मिलता है कि उत्तराखंड के लोक संगीत के स्तर गिरता जा रहा है !  उत्तराखंड के लोक गानों कि एक विशेष पहचान है और आजकल नए-२ गायक प्रयोग करने में तुले है जहाँ तक कि हामरे गानों में rapture  का इस्तेमाल भी होने लगा है जो कि आमतौर से पॉप संगीत में देखा गया है ! और एक बात हामारे VCD एल्बम के नाम कुछ विचित्र दंग से आने लगे है जैसे ... " लबरा छोरा"  और "how  can i go to द्वाराहाट" ( जो कि एक प्रसिद्ध गाना है ओह भीना कशिके जानो द्वाराहाट")  लगता है गाने का इंग्लिश ट्रांसलेशन है !

इस पूरे विषय पर आप का क्या कहना है ?  क्या आप इन मुद्धो को अपने संगीत कम्युनिटी में जनता के तरफ से एक फीडबैक के रूप चर्चा करंगे ?

हलिया

अनुराधा जी को हलिया का प्रणाम.

पहले खेत खलिहान, नदी, गधेरे, घास, लकडी, घस्यारी, घुगुती आदि पर बहुत गीत लिखे और गाये जाते थे लेकिन अब तो खाली बम्बैया फिल्मी गानों की नक़ल हो रही है जो हमारे जैसे लोगों की तो बिलकूल समझ में नहीं आते|  ये क्या हो रहा है?   

anuradha nirala

Quote from: एम् एस मेहता /M S Mehta on April 15, 2009, 02:43:33 PM
मेरा प्रशन ४
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आमतौर से देखा गया है आप selected सोंग है गाते है जो कि आप कि एक खाशियत है और ये सोंग सदा आपके क्ष्रोताओ को भाते भी है दूसरी तरफ हमें लोगो से फीडबैक मिलता है कि उत्तराखंड के लोक संगीत के स्तर गिरता जा रहा है !  उत्तराखंड के लोक गानों कि एक विशेष पहचान है और आजकल नए-२ गायक प्रयोग करने में तुले है जहाँ तक कि हामरे गानों में rapture  का इस्तेमाल भी होने लगा है जो कि आमतौर से पॉप संगीत में देखा गया है ! और एक बात हामारे VCD एल्बम के नाम कुछ विचित्र दंग से आने लगे है जैसे ... " लबरा छोरा"  और "how  can i go to द्वाराहाट" ( जो कि एक प्रसिद्ध गाना है ओह भीना कशिके जानो द्वाराहाट")  लगता है गाने का इंग्लिश ट्रांसलेशन है !

इस पूरे विषय पर आप का क्या कहना है ?  क्या आप इन मुद्धो को अपने संगीत कम्युनिटी में जनता के तरफ से एक फीडबैक के रूप चर्चा करंगे ?

Change is essence of life.
Mene pehele bhi kaha ki hamari sanskriti aur paramparaon ki jarde bahut majboot hain. Is par war kisi bhee disha se asambhav hai. Aaj ke sangeet ke sandharb mein,
har vayakti ko awsar milna chahiye. pasand na pasand to shrota nirdharit karenge.
Quote from: Mohan Joshi on April 15, 2009, 03:39:05 PM
Anuradha Ji,
Khabi Delhi main bhi aapke programme hote hain aage kaha hoge

M M Joshi Shel Shikher
9990993069
programme mein kam karti hoon.

anuradha nirala

Quote from: हलिया on April 15, 2009, 03:44:59 PM
अनुराधा जी को हलिया का प्रणाम.

पहले खेत खलिहान, नदी, गधेरे, घास, लकडी, घस्यारी, घुगुती आदि पर बहुत गीत लिखे और गाये जाते थे लेकिन अब तो खाली बम्बैया फिल्मी गानों की नक़ल हो रही है जो हमारे जैसे लोगों की तो बिलकूल समझ में नहीं आते|  ये क्या हो रहा है?   
Aap kuch koshish karein main aap ke liye gaongi.