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Greetings - शुभकामना संदेश

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 20, 2007, 11:20:54 AM

kya aapko lagta hain ki hamare sabhi kamkaj hindi bhasha mein hone chahiye?

ha
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nahi
1 (3.6%)
dono mein
12 (42.9%)

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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

आपको और आपके परिवार को होली की हार्दिक शुभकामनाये !

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानी
9 minutes ago · Edited ·

वो मेरी खोली

दस बाय दस कि वो मेरी खोली
वो मेरा जीवन , सुन जा मेरी बोली
वो मेरी खोली मेरी हमजोली

एक ही खिड़की एक ही वो दरवाज
उस से ही होता मेरा बाहर देखना,आना जाना
वो मेरी खोली मेरी हमजोली

कुछ ना था छुपाने को बस सब कुछ था दिखाने को
चार कोना चार दिवारी पड़ी ,वंही वो यांदें पुरानी
वो मेरी खोली मेरी हमजोली

बचपन बिता बित गयी वो आधी जवानी
ना मिट सकी वो बीते दिनों कि कहानी
वो मेरी खोली मेरी हमजोली

खोली नंबर था तेरह वो मेरा
दस बाय दस गरीब में था वो प्रेम गहरा
वो मेरी खोली मेरी हमजोली

टूटी फुट गयी किसी कोने में अकेले पड़ी
वो खोली मेरी दो बेड रूम कि चाह में खो गयी
वो मेरी खोली मेरी हमजोली

दस बाय दस कि वो मेरी खोली
वो मेरा जीवन , सुन जा मेरी बोली
वो मेरी खोली मेरी हमजोली

एक उत्तराखंडी
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

विनोद सिंह गढ़िया

  • आप सभी को चैत्र शुक्ल प्रतिपदा नववर्ष विक्रम सम्वत २०७१ एवं नवरात्र की मंगलकामनायें।


एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Devbhoomi,Uttarakhand

म्यारा सभी उत्तराखंडी भै-बैणु तैं नमस्कार,प्रणाम,पैलाग दगड़ियों खूब होला आप लोग ,अच्गालु बरखा खूब होणी छ,और गौं म बरखा दिनों खूब मजा औंदी दगड़ियों आप सौण का मैना कु आनंद लेवा और अफडू ध्यान रखा,भैजियों-भुलाऊँ आप सभी लोगों तैं का लोकपर्व हरेला की ढेरों शुभकामनायें
जी रया जागि रया
आकाश जस उच्च, धरती जस चाकव है जया
स्यावै क जस बुद्धि, सूरज जस तराण है जौ
सिल पिसी भात खाया जाँठि टेकि भैर जया

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

 गजाननं भूतगणादिसेवितं
   कपित्थजंबूफलसारभक्षितम् |
   उमासुतं शोकविनाशकारणं
   नमामि विघ्नेश्वरपादपङ्कजम् || ||


Salutations to Lord Ganesha who has an elephant head, who is attended
by the band of his followers, who eats his favorite wood-apple and
rose-apple fruits, who is  the son of Goddess Uma, who is the cause of
destruction of all sorrow. And I salute to his feet which are like lotus.

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

गजाननं = one who is having an elephant face;
भूतगणादि = by the group of ogres and the like who are the attendants of Lord shiva;
सेवितं = the one who has been served worshipped;
कपित्थजंबू = wood-apple and `jAmun', rose apple, trees or fruits;
फलसार = the essence of the fruit;
भक्षितं = that which has been eaten;
उमासुतं = the son of Uma;
शोकविनाश = for the destruction of sorrow;
कारणं = the cause;
नमामि = I bow; salute; pay my respects;
विघ्नेश्वर = the Master or controller of all obstacles;
पादपङ्कजं = the lotus feet;

विनोद सिंह गढ़िया

आप सभी को सपरिवार दीपों का पर्व दीपावली की हार्दिक शुभकामनायें.


एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

आप सभी मित्रो को दिवाली की हार्दिक शुभकामनाएँ !