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Exclusive Photos of Tehri Dam, Uttarakhand-टिहरी गढ़वाल और डाम की कुछ तस्वीरें

Started by Devbhoomi,Uttarakhand, July 22, 2009, 07:31:18 PM

Devbhoomi,Uttarakhand

टिहरी और गढ़वाल दो अलग नामों को मिलाकर इस जिले का नाम रखा गया है। जहाँ टिहरी बना है शब्‍द 'त्रिहरी' से, जिसका मतलब है एक ऐसा स्‍थान जो तीन तरह के पाप (जो जन्‍मते है मनसा, वचना, कर्मा से) धो देता है वहीं दूसरा शब्‍द बना है 'गढ़' से, जिसका मतलब होता है किला। सन्‌ 888 से पूर्व सारा गढ़वाल क्षेत्र छोटे छोटे 'गढ़ों' में विभाजित था, जिनमें अलग-अलग राजा राज्‍य करते थे जिन्‍हें 'राणा', 'राय' या 'ठाकुर' के नाम से जाना जाता था।



ऐसा कहा जाता है कि मालवा के राजकुमार कनकपाल एक बार बद्रीनाथ जी (जो आजकल चमोली जिले में है) के दर्शन को गये जहाँ वो पराक्रमी राजा भानु प्रताप से मिले। राजा भानु प्रताप उनसे काफी प्रभावित हुए और अपनी इकलौती बेटी का विवाह कनकपाल से करवा दिया साथ ही अपना राज्‍य भी उन्‍हें दे दिया। धीरे-धीरे कनकपाल और उनकी आने वाली पीढ़ियाँ एक-एक कर सारे गढ़ जीत कर अपना राज्‍य बड़ाती गयीं। इस तरह से सन्‌ 1803 तक सारा (918 सालों में) गढ़वाल क्षेत्र इनके कब्‍जे में आ गया।

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टेहरी डूबने के दौरान , नरेन्द्र सिंह नेगी जी ने ये बहुत ही सुंदर गीत गया था , जिसको आज भी लोग गया करते है , और करते रहेगें , उस समय टेहरी डाम बनने की बात चल रही थी या डाम का काम सुरु हो गया था , बेटा परदेस मैं होता है , उस समय माँ बाप ये गाना गाते हैं

अबारी दाँ तू , लम्बी छुटी लेके आई , एगी बगत आख़िर
टीरी डूबन लागियुं च बेटा , डाम का खातिर !!

अबारी दाँ तू लम्बी छुटी लेके ई


भेंटी जा यूँ गौला गुथ्यरों , जाऊँ माँ खैलिक सायाणु व्हे तू
गवाया लगैनी जों डंडी यालियों जै चौक
जों बाटू आणू जाणू रै तू !!

कखन देखण लठयाला त्वैन, जनम भूमि आख़िर
टीरी डूबन लागियुं च बेटा डाम का खातिर !!

लषण प्याज की बाड़ी सागोडी ,शेरा द्वाखरी फ्युंग डी
डूबी जाली पाणी मा भोल बाबू दादों  की कूड़ी!!
बाबू दादों की कूड़ी !!!

अंखियों मा रिंगनी राली सदानी, हमारी तिबारी सतीर !
टीरी डूबन लागियुं च बेटा डाम का खातीर!!

पितरू कु बसयों गाओं, सैन्तियों पालियों बाण!
धारा मंदरा ग्वाठ्यारा चौक कण क्वे छुडाना , कंठ भारिक ओंदु उमाल ओ बाँध जा धीर
टीरी डूबन लागियुं च बेटा डाम का खातीर !!

हे नागराजा हे भैरू तुमारु हुमुमना क्या जी खायी

हे बौलंदा बद्री त्वेन कख मुख लुकाई ,हे विधाता कनि रुठिना हमुक देवतओं का मन्दिर

रजा कु दरबार घंटा घर आमू का बागवान, पाणी मा डूबी जाली भोल सिंगौरियों की दूकान
सिंगौरियों की दूकान, टीरी डूबन लागियों च बेटा डाम का खातीर



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