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Gairsain: Uttarakhand Capital - गैरसैण मुद्दा : अब यह चुप्पी तोड़नी ही होगी

Started by गैरसैंण/ Gairsain, August 03, 2009, 10:17:17 AM

dinesh dhyani

गर कर सके तो गैरसैंण की बात कर

दिनेश ध्यानी

करनी है तो भाषण नही बात कर
समय से साक्षात्कार कर
और कुछ नही सुनना हमें
बात छिड़ी है गैरसैंण की,

उसकी बात कर।

तुम्हारे अपने सरोकार
तुम्हारी अपनी सरकार
हमारी गैरसैंण की बात
जनता को गैरसैंण की दरकार।

गैरसैंण हमारा सपना है
ये पहाड़ हमारा अपना है
तुम्हें शायद पता नही
अब पहाड़ सोया नही
जाग रहा है और
अपने अधिकार के लिए ललकार रहा है।
जरा कान देकर देख
आरजू नही शेर की दहाड़ सुन।


बात नही सुलझेगी अब
बात और फरियाद से
जानते हैं हम
फिर एक बार तैयार हैं
हम आर-पार के लिए।

अब नही चलेगी राजनीति बिसात
अब होगी पहाड़ में
हमारी मर्जी से दिन और रात
अगर तुम सोचते हो
तुम जीत गये हो
तो देख नीलकंठ में
उगते सूरज की गरमाहट को
अहसास का जमीन की गर्मी को
जमीन से जुड़कर।

गैरसैंण हमारा सपना नहीं
गैरसैंण हमारा अधिकार है
अब नही मांगना हमें
अब तो हमें राजधानी
बनानी है गैरसैंण
गर मादा है तुझमें
बरगला मत,
बात छिड़ी है गैरसैंण की तो
गैरसैंण की बात कर
गैरसैंण की बात कर।।









हेम पन्त

बहुत सुन्दर कविता है! अगर यही जोश और जुनून कायम रहे तो गैरसैंण को राज्य की राजधानी बनने से कोई नही रोक पायेगा. ध्यानी जी आपका बहुत-बहुत धन्यवाद!

dayal pandey/ दयाल पाण्डे

Dhyani Ji Rongate khade ho gaye, wah bahut khub, bahut achchhi kavita hai Lagata hai tazi likhi hai, yahi prohatsahan raha to hum jeet jayange Rajdhani ki jang,'
aapka bahut bahut Shikriya,


dhyani ji sachi mai bahut hi jyada josh aagaya hai is kavita ko pad kar.. aur isi joshi aur jajbe ke sath apni maag aur sakaar karna hoga... tab tak ladna hoga.. jab tak ki rajdhani ban na jay..


Quote from: dinesh dhyani on August 03, 2009, 02:40:45 PM
गर कर सके तो गैरसैंण की बात कर

दिनेश ध्यानी

करनी है तो भाषण नही बात कर
समय से साक्षात्कार कर
और कुछ नही सुनना हमें
बात छिड़ी है गैरसैंण की बात कर।

तुम्हारे अपने सरोकार
तुम्हारी अपनी सरकार
हमारी गैरसैंण की बात
जनता को गैरसैंण की दरकार।

गैरसैंण हमारा सपना है
ये पहाड़ हमारा अपना है
तुम्हें शायद पता नही
अब पहाड़ सोया नही
जाग रहा है और
अपने अधिकार के लिए ललकार रहा है।
जरा कान देकर देख
आरजू नही शेह की दहाड़ सुन।


बात नही सुलझेगी अब
बात और फरियाद से
जानते हैं हम
फिर एक बार तैयार हैं
हम आरपार के लिए।

अब नही चलेगी राजनीति बिसात
अब होगी पहाड़ में
हमारी मर्जी से दिन और रात
अगर तुम सोचते हो
तुम जीत गये हो
तो देख नीलकंठ में
उगते सूरज की गरमाहट को
अहसास का जमीन की गर्मी को
जमीन से जुड़कर।

गैरसैंण हमारा सपना नही
गैरसैंण हमारा अधिकार है
अब नही मांगना हमें
अब तो हमें राजधानी
बनानी है गैरसैंण
गर मादा है तुझमें
बरगला मत
बात छिड़ी है तो
गैरसैंण की बात कर
गैरसैंण की बात कर।।









dayal pandey/ दयाल पाण्डे

अन्यारपट्ट रै नि सकूँ जल्दी ब्याली रात,
राजधानी जिक्र जब आलो, होलि गैरसैण की बात,

दीक्षित आयोग कुलै जाल, सरकार लै पलटि है जाल,
उत्तराखंडी मुनव उठाला - ह्वै जाला सब साथ,
राजधानी जिक्र जब आलो होलि गैरसैंण की बात,

गौं-गौं बै आवाज़ उठी गै, अन्यायी अब भौती है गे,
जनुल राजधानी नाम सुझाछी, उन लै बागियुं का सांथ,
राजधानी जिक्र....................

आंदोलनकारी उसीकी रैगिन, दमनकारी गद्दी में भैगिन,
अब ज्यादे दिन नि चलल, यो गोर्खियुं  जस राज,
राजधानी जिक्र..............

9 सालूं में 5 बदल गिन, बात ग्वै हैंत उसीकी राइ गिन,
उन लोग लै नि नजर उनै जेल पैर यो ताज,
राजधानी जिक्र जब.............

विकास हुन जरुरी छू, गैरसैण बनुनी छू,
वचन दयुछ म्योर पहाड़ और उठून हाथ,
राजधानी जिक्र जब आलो होलि गैरसैण की बात....

wah dajyu is kavita ka to mai fan hoon maharaz.. aapka to hoon hi...

Quote from: dayal pandey/ दयाल पाण्डे on August 03, 2009, 03:29:55 PM
अन्यारपट्ट रै नि सकूँ जल्दी ब्याली रात,
राजधानी जिक्र जब आलो, होलि गैरसैण की बात,

दीक्षित आयोग कुलै जाल, सरकार लै पलटि है जाल,
उत्तराखंडी मुनव उठाला - ह्वै जाला सब साथ,
राजधानी जिक्र जब आलो होलि गैरसैंण की बात,

गौं-गौं बै आवाज़ उठी गै, अन्यायी अब भौती है गे,
जनुल राजधानी नाम सुझाछी, उन लै बागियुं का सांथ,
राजधानी जिक्र....................

आंदोलनकारी उसीकी रैगिन, दमनकारी गद्दी में भैगिन,
अब ज्यादे दिन नि चलल, यो गोर्खियुं  जस राज,
राजधानी जिक्र..............

9 सालूं में 5 बदल गिन, बात ग्वै हैंत उसीकी राइ गिन,
उन लोग लै नि नजर उनै जेल पैर यो ताज,
राजधानी जिक्र जब.............

विकास हुन जरुरी छू, गैरसैण बनुनी छू,
वचन दयुछ म्योर पहाड़ और उठून हाथ,
राजधानी जिक्र जब आलो होलि गैरसैण की बात....

हेम पन्त

दयाल जी आपकी यह कविता गैरसैंण के प्रति आम लोगों की भावनाओं को प्रदर्शित कर रही है. अब जब हम लोगों ने यह संकल्प ले ही लिया है तो गैरसैंण पर निर्णायक लड़ाई जरूर लड़ी जायेगी...

हेम पन्त

A massage from Mr. Chandramohan Jyoti, Delhi:

नमस्कार पन्त जी, मुझे ये जानकर अत्यंत हर्ष हो रहा है कि आप लोग इस संघर्ष को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने जा रहे हो... सर्वविदित है कि क्रिएटिव उत्तराखंड और म्योर पहाड़ ये दोनों ही संगठन देल्ही में युवाओं के मध्य अपनी acahhi पहचान banae हुए हैं... राजधानी गैरसैण बनाये जाने के लिए अभियान चलाना ati aavashyak है... मेरी shubhkamnaiyen आप लोगों के साथ हैं... में भी अपना yogdaan सुनिश्चित करने की कोशिश करूँगा...


Dr. Sushil Joshi

प्रिय मोहन जी
अवश्य ये मशाल जलनी ही चाहिये
सुशील

हेम पन्त

A massage from Mr. Mayank Nauni (Orkut)

भाईयों,
अभी मेरी गैरसैण मुद्दे के उप्पर श्री चारू तिवारी जी ( गैरसैण अभियान के रचियेता ) से बात हुई.... उन्हें बहोत दुःख है की गैरसैण जैसे गंभीर मुद्दे के ऊपर मजाक बनाया जा रहा है, ये मजाक हमारी नयी पीड़ी कर रही है... उन्होंने मुझ से कहा की हमारे सदस्यों को चाहिए की इन विषयों के बारे मैं पूरी जानकारी लिए बगैर इनके बारे मै गलत चीज़ें बोलना अथवा परिहास करना अशोभनीय है... ये परिहास है उन बलिदानों पर है जो उत्तराखंड आन्दोलन के दौरान दिए गए...
या तो हम ये मान लें की हम योग्य नहीं हैं ऐसे गंभीर विषयों पर वाद विवाद करने के... या फिर इस बारे मै पूरी जानकारी ले कर फिर इन पर चर्चा करें....

थोडी और गंभीरता की जरुरत है यहाँ... अब जरुरत है इन चीज़ों के ऊपर कार्य करने की... बहस तो बहोत हो चुकी... हालाकि मै हेम और चारू तिवारी के साथ ये कार्य करना चाहता था परन्तु तिवारी जी की बातों मै नयी पीड़ी को लेकर नाउमीदी झलकी... हम अपने कार्यों से उनका विश्वास जीत सकते हैं... सब आप के हाथ मै है...

मै शुरू करने वाला हूँ ये अभियान... चाहे कोई साथ हो या न हो....

हर हर महादेव ... जय उत्तराखंड.... जय बद्री विशाल.......

Mayank ji works with HCL Noida as a software consultant......