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PHOTO OF MAANA,LAST VILLAGE OF INDIA(भारत का आखरी गाँव माणा की कुछ तस्वीरें )

Started by Devbhoomi,Uttarakhand, August 31, 2009, 07:53:14 PM


Devbhoomi,Uttarakhand


Devbhoomi,Uttarakhand


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दुकान का साइन बोर्ड पर्यटकों को दूर से ही अपनी तरफ आकर्षित कर लेता है जिस पर अंग्रेजी और हिन्दी सहित दस भारतीय भाषाओं में लिखा है 'भारत की आखिरी चाय की दुकान में आपका हार्दिक स्वागत है'। दुकान पर जो बोर्ड लगा है उस पर उक्त पंक्तियों के नीचे लिखा है

सैलानियों के आकर्षण का केन्द्र चाय की यह दुकान है चंद्रसिंह बड़वाल की जो लगभग पच्चीस साल से इस दुकान को चला रहे हैं। वे बताते हैं कि जब वे दस साल के थे तब उन्होंने अपनी पढ़ाई के लिए धनार्जन के वास्ते यह दुकान खोली थी और वे स्कूल में पढ़ने के लिए जाने से पहले और वहाँ से लौटने के बाद दुकान चलाया करते थे।

उन्होंने बताया कि हर साल उनकी चाय की दुकान बद्रीनाथ के कपाट खुलने के समय खुलती है। अक्टूबर माह के अंत में सर्दियों में वे मवेशियों के साथ गोपेश्वर के निचले इलाकों में चले जाते हैं। समुद्र तल से 11 हजार फुट की ऊँचाई पर स्थित माणा गांव छह महीने तक बर्फ के आगोश में रहता है।


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माणा में माता मूर्ति उत्सव 8 को, तैयारियां जोरों पर
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देश के अंतिम गांव माणा में हर वर्ष की तरह इस बार भी 8 सितंबर को पौराणिक व धार्मिक परंपरा के अनुसार माता मूर्ति का उत्सव आयोजित होगा। उत्सव को लेकर मंदिर समिति व स्थानीय लोगों ने तैयारियां शुरू कर दी हैं।

उल्लेखनीय है कि देश के अंतिम गांव माणा में हर वर्ष वामन द्वादशी को माता मूर्ति का उत्सव आयोजित किया जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान बद्री विशाल अपनी मां से मिलने माणा गांव में आते हैं।

इससे पूर्व 7 सितंबर को पौराणिक परंपरा के अनुसार भगवान घंटाकर्ण जी बदरीनाथ धाम पहुंचकर भगवान बद्री विशाल को न्यौता देने आते हैं।

इस धार्मिक उत्सव की खास बात यह है कि माता मूर्ति के इस आयोजन के बाद ही श्री बदरीनाथ मंदिर के रावल बदरीधाम में आवाजाही कर पाते हैं। मंदिर के धर्माधिकारी जेपी सती ने बताया कि माता मूर्ति आयोजन को लेकर सभी तैयारियां जोरो पर चल रही हैं।

Source dainik jagran

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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


From Manoj Ishtwal Facebook wall

उत्तराखंड का अंतिम गॉव मौन्ड़ा अभाव व समृधि का अंतिम मिश्रण !
(मनोज इष्टवाल)
उत्तरकाशी जनपद के यूँ तो कई छोर हिमाचल व देश की सीमा को चीन से बांटते हैं लेकिन मौन्ड़ा गॉव पट्टी बंगाण उत्तरकाशी,आराकोट क्षेत्र का वह सीमावर्ती गॉव है जिसके शीर्ष में चाईशिल की हिमालयी कम बर्फ़ वाली चोटी के पार हिमाचल प्रदेश का डोडाक्वार क्षेत्र है जिसे ट्रेकर्स जन्नत मानते हैं. हिमाचल के शिमला जिले के डोडाक्वार, रोहडू, चीड़गॉव, डोडरा घाटी (चाईशिल) देशी एवं विदेशी पर्यटकों की जहाँ शैरगाह मानी जाती है वहीँ दूसरी ओर उत्तराखंड राज्य इसे पर्यटन मैप में शामिल कर सुख की नींद सो गया है जबकि उसके पास यह जन्नत और खूबसूरत है क्योंकि चाईशिल में लम्बे चौड़े बुग्याल हैं जिसमे ट्रेकर्स या पर्यटक मौन्डा गॉव से 8 या 10 किमी. ट्रेक करके यहाँ की शैरगाह की आवोहवा का खूब लाभी उठा सकता है. चाईशिल में ही एक बहुत बड़ा तालाब लगभग 95560 फिट की उंचाई पर है जिसे सरूताल कहते हैं.
चाईशिल से हम गजू मलारी के गॉव दूणी-भितरी भी एक दिन के ट्रेक में पहुँच जाते हैं. 65 परिवारों की ग्राम सभा मौन्ड़ा, डोगरी, खख्वाडी ने चंद सालों से अब अन्य फसलों पर ध्यान देना छोड़ दिया है बल्कि अब यहाँ के छोटे बड़े सभी ग्रामीण सिर्फ सेब उगाने का कार्य कर रहे हैं. गॉव के भारत सिंह चौहान बताते हैं कि पहले गेंहूँ, दाल, आलू अदरक इत्यादि उगाया करते थे लेकिन संसाधन न होने के कारण अक्सर सड़ जाया करते थे इसलिए किसानों को फायदा कम व घाटा ज्यादा उठाना पड़ता था अब पिछले 10-15 बर्षों से जब सेब फल देने लगे हैं तब यहाँ प्रत्येक गरीब अमीर किसान हर साल की फसल में लगभग 3 से 25 लाख तक के सेब प्रत्येक साल बेच दिया करते हैं.
यहाँ के लोगों का मानना है कि अगर मौन्ड़ा गॉव से ट्रेकर्स चाईशिल ट्रेक करें और सरकार इसे विकसित करे तो तय मानिए कि इस क्षेत्र के कई युवाओं को रोजगार मिलना सरल हो जाएगा. वे यहाँ से चाईशिल, डोडाक्वार, दूणी-भितरी, मोरी-नैटवाड तक के खूबसूरत बुग्यालों, वाइल्ड लाइफ की शैर करवाकर पर्यटकों के लिए इस क्षेत्र को बेहतरीन शैरगाह बना देंगे लेकिन इसमें सरकार की इच्छा शक्ति आवश्यक है.
एसडीएम शैलेन्द्र नेगी के साथ समाजसेवी रतन असवाल, कांग्रेस प्रवक्ता विजयपाल रावत, देहरादून डिस्कवर के सम्पादक दिनेश कंडवाल, टीवी लाइव के ब्यूरो चीफ़ मनोज इष्टवाल सहित राजस्व महकमें के कई अन्य लोगों ने इस क्षेत्र के कई गॉवों (बलावत, चिंवा, जागटा, मौन्ड़ा इत्यादि का भ्रमण कर यहाँ के लोगों की जनसमस्याओं की जानकारियाँ प्राप्त की. यह पहला अवसर था जब किसी एसडीएम द्वारा गॉव गॉव जाकर बैठकें की गयी हों स्कूलों का पठन- पाठन देखा गया हो. यह देख व सुनकर बेहद ख़ुशी हुई कि क्षेत्र वासियों को अब तक का सबसे लोक प्रिय एसडीएम यहाँ मिला है जो बेहद पारिवारिक ढंग व दृष्टिकोण से हर ग्रामीण की चिंताओं के पार्टी बेहद इमानदारी से सजग व चौकन्ना है.
उप जिलाधिकारी शैलेन्द्र नेगी ने बलावट गॉव के ग्रामीणों से कहा कि चाईशिल को पर्यटन की दृष्टि से विकसित किया जायगा उन्होंने कहा कि सिर्फ वही नहीं बल्कि संयुक्त सचिव पर्यटन डी.एस. चौहान व जिला पर्यटन अधिकारी युद्ध स्तर पर इस सम्बन्ध में कार्य कर रहे हैं ताकि चाईशिल सहित उत्तरकाशी जिले के अन्य उन उपेक्षित स्थानों को भी विकसित किया जा सके जो साहसिक, धार्मिक व अन्य पर्यटन के लिए महत्वपूर्ण हैं.
1- maunda village (photo- dinesh kandwal)
2- maunda village (photo- manoj istwal)
3- maunda village (photo- manoj istwal)
4- trekking route chainshil ( photo- manoj istwal)
5- villagers maunda village (photo- manoj istwal)
6- maunda village (photo- manoj istwal)
7- temple maunda village (photo- manoj istwal)
8- trekkars in chainshil
9- trekkers in chainshil
10- trekkers in chainshil