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SURPRISE & UNIQUE NEWS OF RELATED TO UTTARAKHAND- जरा हट के खबर उत्तराखंड की

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 13, 2009, 07:40:35 AM

Devbhoomi,Uttarakhand

बुलंद विरासत की बुलंद तस्वीर
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फलक से तोड़कर देखो सितारे लोग लाए हैं, मगर मैं वो नहीं लाया जो सारे लोग लाए हैं।' यहां भी ऐसा ही है। कई प्रांतों के लोग भांति-भांति की नेमतें साथ लेकर लाए हैं, लेकिन इन्हीं में एक शख्स ऐसा भी है, जिसके पास अतीत की ऐसी धरोहर है, जिसे देख आपकी आंखें विस्मय से खुली की खुली रह जाएंगी।

इस शख्स का नाम है एसए शाह। काम है बुनकरी। ठिकाना है हुब्बी कालोनी, जो वादी-ए-कश्मीर के श्रीनगर के लाल बाजार में पड़ती है। बुनकरी उसके खून में है। उसे खुद नहीं मालूम कब से उसका खानदान इस पेशे से जुड़ा है। इसी पेशे ने उसे देश-दुनिया दिखा दी। इन दिनों इस युवक ने राजधानी में चल रही ग्रामीण खादी, ऊनी एवं हस्तशिल्प प्रदर्शनी में अपना स्टाल लगाया हुआ है।

आप सोच रहे होंगे कि हम खामखां उसका महिमामंडन किए जा रहे हैं। मित्रों ऐसा नहीं है। असल में इस युवक के पास एक ऐसा शॉल है, जिसे चार पीढ़ी पूर्व उसी के परिवार में बनाया गया। तब से 158 बरस बीत गए, लेकिन शॉल में सलवट तक नहीं आई। 'कानी जामावार' नाम के इस शॉल को कानी से बनाया गया, जिनमें आज भी पूरी तरह तरोताजगी है।

बकौल शाह, 'इस शॉल को बुनने में उनके पूर्वजों को छह बरस लगे। कलर कांबिनेशन ऐसा है कि उसका एक भी रंग फीका नहीं पड़ा। गर्मियों में इसे हम मलमल में लपेट कर रखते हैं तो सर्दियों के दौरान तीन-चार बार हवा देते हैं। कई बार लोगों ने मुंहमांगी कीमत पर इसे खरीदने की कोशिश की, लेकिन हमने नहीं बेचा। यह हमारे बाप-दादाओं की ऐसी निशानी है, जो हमें आगे बढ़ने को प्रेरित करती है।'


http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_6959765.html

lpsemwal

Dear friends, I would like to shar the video of our initiative in nogaon area of uttarkashi:

www.youtube.com/watch?v=gBHHiIm8ZHE

Uttrakhand Govt. also focused on the value chain dev. (as per todays news) but surprisingly no one from Govt. side visited this project.

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

  जय बजरंग बली..और वजन हो जाता है 'उड़नछू' 
इंदौर. उम्र सौ के पार, लेकिन इस पड़ाव पर ऐसी सक्रियता जो युवाओं को भी पीछे छोड़ दे। ऐसी ही सेहत के धनी उत्तराखंड के प्रेमकांत ध्यानी (104 वर्ष) मंगलवार शाम को रेलवे स्टेशन पर पहुंचे तो रिजर्वेशन काउंटर पर तैनात अधिकारी उनकी उम्र जानकर हैरत में पड़ गए। श्री ध्यानी ने वडोदरा के लिए रात में जाने वाली शांति एक्सप्रेस में स्लीपर श्रेणी का टिकट बुक कराया।
मूलत: टिहरी गढ़वाल (जिला देवप्रयाग) के रहने वाले प्रेमकांत ध्यानी बद्रीनाथ धाम में पूजा-पाठ करवाते हैं। उन्होंने बताया कि वे इसलिए तंदुरुस्त हैं क्योंकि रोज काली मिर्च के साथ 250 ग्राम घी का भोग पहले भगवान को लगाते हैं और फिर उसे पीते हैं। वे रोज 16 किमी पैदल चलते भी हैं। उन्होंने बताया कि सामान उठाने में उन्हें परेशानी नहीं होती। 'जय बजरंग बली' कहते हैं तो लगता ही नहीं कि वजन है।
बकौल श्री ध्यानी, उनका जन्म 22 अगस्त 1907 को हुआ था। रिजर्वेशन कराते समय जब अधिकारियों ने उनसे जिज्ञासावश कागजात दिखाने को कहा तो उन्होंने पिछली रेल यात्राओं के टिकट और कानपुर के कलेक्टर का प्रमाणित पत्र पेश किया। इसमें उनकी उम्र का भी उल्लेख था। उन्होंने बताया हर साल ठंड में वे परिचितों से मिलने के लिए देश भ्रमण करते हैं।
मिला सम्मान
इस अति बुजुर्ग को स्टेशन प्रशासन ने पूरा सम्मान दिया। स्टेशन अधीक्षक एन.आर. मीणा ने उनका रिजर्वेशन फॉर्म भरा और वीआईपी कोटे के तहत बर्थ कन्फर्म करवाई। बाद में उन्हें प्लेटफॉर्म पांच के एयरकंडीशंड वेटिंग रूम में ठहराया गया। मंगलवार रात वे ट्रेन से रवाना हुए।
पत्नी 98 साल की, बेटा 80 साल का
श्री ध्यानी ने बताया उनकी 98 साल की पत्नी विद्यादेवी, आठ बेटियां और दो बेटे हैं। एक बेटा 80 साल का है। चार बेटे देश सेवा करते हुए शहीद हुए हैं।
अति बुजुर्गो को मिले फ्री यात्रा सुविधा
रेलवे मामलों के जानकार नागेश नामजोशी कहते हैं 100 या इससे ज्यादा साल के अति बुजुर्गो को मुफ्त कॉम्प्लिमेंट्री यात्रा टिकट दिया जाना चाहिए। जनप्रतिनिधि ऐसा प्रस्ताव रेल मंत्रालय को दे सकते हैं। अभी रेलवे वरिष्ठ नागरिकों को किराए में 30 फीसदी और महिलाओं को 50 फीसदी की रियायत देता है। इस मामले में श्री जोशी सांसद सुमित्रा महाजन की ओर से मंत्रालय को प्रस्ताव भिजवाएंगे।

http://www.bhaskar.com/article/MP-IND-104-years-old-man-in-indore-1654161.html?HF=

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


   
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   01.01.2011 का अदभुत संयोग
 
रायपुर। 1 + 1 = 11 पर 11, यानी 1 जनवरी 2011 को राजधानी के अम्बेडकर अस्पताल में 11 बच्चों ने जन्म लिया। नवजात में ज्यादातर लड़कियां हैं। अस्पताल में बने 11 अंकों के इस अद्भुत संयोग से लोग रोमांचित हैं। वे कन्यारत्न को लक्ष्मी के रूप में देख रहे हैं। ये बच्चे करीब एक-एक घंटे के अंतराल में पैदा हुए।

पहला बच्चा शुक्रवार रात दो बजकर 40 मिनट पर पैदा हुआ। शनिवार को जन्म लिए बच्चों के भविष्य के बारे में ज्योतिषाचार्यो का मानना है कि ये सेल्फमेड होंगे। अत्यधिक भावुक, रचनात्मक और काल्पनिक होंगे। सभी बच्चों का भाग्योदय 28 वर्ष के बाद होगा। बच्चों के माता-पिता 21वीं सदी के दूसरे दशक के प्रथम दिन नए मेहमान आने पर खासे खुश हैं।


नए वर्ष में मुझे लड़की के रूप में लक्ष्मी की प्राप्ति हुई है। मैं उत्तराखंड का रहने वाला हूं और यहां अपनी बहन के घर पत्नी दीपा के साथ घूमने आया था। दो दिन पहले पत्नी को अचानक दर्द उठा तो अस्पताल ले आए। जहां प्रसूति रूम में भर्ती किया और बच्ची ने जन्म लिया।
वीरेंद्र सिंह राणा, गढ़वाल


नए वर्ष में मैं मामी बनी हूं। मुझे बहुत अच्छा लग रहा है। आज का दिन वाकई हम सभी को हमेशा याद रहेगा। मेरी ननद लता बंधे को पहले से एक लड़का है। भांजी का जन्मदिन सदा याद रहेगा। इनके पापा महेंद्र बंधे गांव में हैं। लड़की होने की खबर मिलने के बाद से वे बहुत खुश है।
पुष्पा लहरे, गुमा, हीरापुर

नए वर्ष की स्वर्णिम बेला में सुबह 5.28 बजे पिता बनने का समाचार मिलते ही मेरे पति रिपुसदन की खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा। वैसे डॉक्टर ने डिलीवरी का समय 26 जनवरी दिया था, लेकिन 26 दिन पहले वह भी दुर्लभ संयोग 1.1.11 को लड़का होना वाकई खुशी की बात है।

http://www.patrika.com/news.aspx?id=504869
शकुंतला देवांगन, बेरला, दुर्ग [/t][/t][/t]
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

 
'वेलकम टु उत्तराखंड' इन दिल्ली

रामेश्वर दयाल ॥ नई दिल्ली
क्या देश की राजधानी दिल्ली में ऐसा संभव है कि आपके मोबाइल की कनेक्टिविटी अचानक दिल्ली से निकलकर उत्तराखंड से जुड़ जाए और यह देखकर आप हैरत मंे पड़ जाएं। जी हां, ऐसा संभव हो रहा है दिल्ली की सबसे ऊंची इमारत डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी सिविक सेंटर में। इस इमारत की 17वीं मंजिल से ऊपर की तरफ चलते हुए आपके मोबाइल की कनेक्टिविटी या तो पूरी तरह गायब हो जाएगी या उस पर लिखा आएगा 'वेलकम टु उत्तराखंड।' एमसीडी के इस नए मुख्यालय के अफसरों ने इस समस्या से निजात पाने की पहल शुरू कर दी है। खास बात यह है कि इस कवायद में एमसीडी को अपनी कमाई बढ़ाने का मौका मिल रहा है।
एमसीडी के इस नए मुख्यालय में जब से थोड़ी बहुत चहल-पहल बढ़ी है, तब से वहां बैठने वाले अधिकारी इस समस्या से काफी परेशान हैं। दिक्कत यह है कि इस 28 मंजिला इमारत की 15-16 मंजिल तक तो मोबाइल फोन ठीक से काम कर रहे हैं, लेकिन उसके ऊपर की मंजिलों पर मोबाइल पर आने वाले संदेश अफसरों के लिए परेशानी का सबब बने हुए हैं। उसका कारण है कि ऊपर की मंजिलांे पर मोबाइल या तो काम ही नहीं कर रहे हैं या उनका कनेक्शन सीधे उत्तराखंड से जुड़ रहा है। अधिकारी हैरान हैं कि यह अचानक कैसे और क्यों हो रहा है। इसकी शिकायत एमसीडी प्रशासन तक पहुंच चुकी है। प्रशासन परेशान है कि इस समस्या का निजात किए बिना अगर यह इमारत पूरी तरह गुलजार हो गई, तो मोबाइल फोन डेड रहने या उसके उत्तराखंड से जुड़ने के कारण एमसीडी की खासी किरकिरी हो सकती है।
एमसीडी के इंजीनियरिंग विभाग के एक आला अधिकारी के मुताबिक, इस बात की जांच की गई थी कि अगर मोबाइल को कनेक्ट होना है तो उसे उत्तराखंड के बजाय समीपवर्ती राज्य हरियाणा से जुड़ना चाहिए। लेकिन पता चला कि दिल्ली और हरियाणा की ऊंचाई तो बराबर है, इसलिए समस्या दिल्ली में होगी तो वह हरियाणा में भी वैसे ही मानी जाएगी। चूंकि, उत्तराखंड की हाईट दिल्ली से ऊंची है और सिविक सेंटर भी खासा ऊंचा है, इसलिए उसकी ऊपरी मंजिलों की कनेक्टिविटी सबसे पास के पहाड़ी इलाके उत्तराखंड से जुड़ रही है। अब इस समस्या से निजात के लिए एमसीडी ने सिविक सेंटर के हर फ्लोर पर बूस्टर सिस्टम लगाने का निर्णय लिया है, जिनकी कनेक्टिविटी सभी कंपनियों के नेटवर्क सिस्टम से जुड़ी होगी। एमसीडी का कहना है कि इसके लिए टेंडर जारी किए जा चुके हैं, जिस कंपनी को इसका ठेका मिलेगा, वह हमें धनराशि भी मुहैया कराएगी। उसका कारण यह है कि यह कंपनी मोबाइल सर्विस प्रोवाइडर कंपनियों से पैसा लेगी, ताकि उनके कनेक्शन दिल्ली की सबसे ऊंची इमारत में भी काम कर सकें।

http://navbharattimes.indiatimes.com/articleshow/7298857.cms

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

  समय से पहले खिला बुरांश, खतरे का संकेत
देहरादून। चैत माह में खिलने वाला उत्तराखंड का राज्य वृक्ष बुरांश इस बार माघ महीने में ही अपना सौंदर्य बिखेरने लगा है। वैज्ञानिक और पर्यावरण प्रेमी इसे जलवायु परिवर्तन का खतरा मान रहे है।
राज्य वृक्ष बुरांश अमूमन समुद्र की सतह से पांच से आठ हजार फिट की ऊंचाई वाले भूभाग में होता है और यह चैत माह यानी मार्च से अप्रैल महीने में खिलता है। करीब 15 से 20 दिन के अंदर फूल खिलने की प्रक्रिया संपन्न होती है। बुरांश का जूस हृदय रोगियों के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है।
गोविंद बल्लभ वानिकी एवं कृषि विश्वविद्यालय रानीचौरी के पारिस्थितिकी के वरिष्ठ शोध अधिकारी वी.के. शाह का कहना है कि जलवायु परिवर्तन और शीतकाल में देर से बारिश होने के चलते बुरांश का फूल समय से पहले खिल गया है। उन्होंने बताया कि इस समय पर्यावरण का तापमान छह डिग्री सेल्सियस के हिसाब से बढ़ रहा है।
नागरिक सम्मानों पद्म श्री, पद्म भूषण से सम्मानित और विश्व विख्यात चिपको आंदोलन के प्रेरक चंडी प्रसाद भट्ट का कहना है कि मौसम में आ रहे बदलावों के कारण हमारी वनस्पति भी इससे प्रभावित हो रही है और इसके कारण ही बुरांश समय से पहले खिल गया है।
उन्होंने कहा कि इसका असर फसल चक्र पर पड़ने के साथ ही जीव जंतुओं पर भी पड़ रहा है। पहाड़ी इलाकों में वनस्पतियां धीरे धीरे लुप्त होने लगी है। उन्होंने इस बारे में शोध किए जाने की बात कही।



http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_7237148.html

   





सुधीर चतुर्वेदी

कल शाम T . V . 100 (२३/०२/११)  न्यूज़ चैनल देख रहा था उसमे न्यूज़ आ रही थी उत्तराखंड के मौन विधायक , हमारे 70 विधायको मे 17  ऐशे विधायक है जिन्होने अपने विधान सभा की सीटो और वहा की समस्याओ के बारे मे एक भी प्रशन उत्तराखंड विधान सभा मे नहीं रखा , ये हमारे जन प्रतिनिधि है जो हमारे राज्य का पर्तीनिधितव   करते है | इन 17 विधायको मे 10 सत्ताधारी भाजपा के है 5 हमारे विपक्षी दल कांग्रेस के है 1  बसपा से और एक निर्दलीय है |


जय भारत ................................ जय उत्तराखंड