Author Topic: Why Uttarakhand Govt. Ignore Our Great Personalities  (Read 4487 times)

हुक्का बू

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Why Uttarakhand Govt. Ignore Our Great Personalities
« on: January 06, 2010, 10:24:31 AM »
पोथियो,
   एक सवाल बहुत दिन से मेरे मन में था, जब से मैने इस फोरम के इस बोर्ड को देखा, आप सभी ने उत्तराखण्ड की नामी गिरामी विभूतियों और उनके कार्यों का यहां पर उल्लेख किया है। लेकिन खेद की बात यह है कि हमारी उत्तराखण्ड सरकार को यह विभूतियां या तो दिखाई नहीं देती, या फिर ये इनकी उपेक्षा कर रहीं हैं। किसी भी विभूति के नाम पर सरकारी योजनायें या नहर, चौराहे आदि नहीं बनाये जाते, आओ इस बारे में चर्चा करें।

हुक्का बू

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Re: Why Uttarakhand Govt. Ignore Our Great Personalities
« Reply #1 on: January 06, 2010, 10:34:36 AM »
उत्तराखण्ड सरकार समय-समय पर कई योजनायें संचालित करती है और नहरों, चौराहों पर मूर्तियां लगवाती है या सड़क बनवाती है या कोई भी सार्वजनिक निर्माण कराती है और इन योजनाओं का नाम अपनी-अपनी पार्टी के नेताओं के नाम पर रख देती है। अभी तक उत्तराखण्ड की तीन ही विभूतियों के नाम पर योजनायें हैं-
१- चन्द्र सिंह गढ़वाली स्वरोजगार योजना
२- तीलू रौतेली वीरता पुरस्कार
३- गौरा देवी कन्या धन योजना

अभी वर्तमान सरकार ने कई योजनायें संचालित की और अपने आकाओं को खुश करने के लिये इनका नाम अपनी पार्टियों के नेताओं के नाम पर रख दिये। जैसे दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल, दीन दयाल उपाध्याय १०८ योजना, हेडगेवार सचल चिकित्सा वाहन, अटल आवास योजना, इत्यादि।
सवाल यह है कि इन लोगों को उत्तराखण्ड के क्या लेना देना था, ये राष्ट्रीय नेता थे, इनका योगदान था तो पूरे देश में इनके नाम पर योजना चलाओ, हमें नाम रखने पर भी एतराज नहीं है। आप नाम रखो लेकिन इसमें उत्तराखण्ड के लोगों की अनदेखी भी मत करो। यदि किसी योजना का नाम श्रीदेव सुमन, माधो सिंह भण्डारी, गबर सिंह, गोबिन्द वल्लभ पन्त, इन्द्रमणि बड़ोनी आदि, उत्तराखण्ड की महान विभूतियों के नाम पर भी तो रखो, हमारे उत्तराखण्ड आन्दोलन के अमर शहीदों के नाम पर भी तो रखो।
आप लोगों को अपने नेताओं के नाम अमर रखने का तो शौक है, लेकिन जिन लोगों की वजह से आप मुख्यमंत्री, मंत्री बने घूम और इतरा रहे हो, उनकी भी तो सुध लो। यह तो वही हाल हो गया, बच्चे को पाला-ताल, अन्त में उसने ही भुला दिया।

हुक्का बू

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Re: Why Uttarakhand Govt. Ignore Our Great Personalities
« Reply #2 on: January 06, 2010, 10:40:43 AM »
आज ही अखबारों में पढ़ा कि हमारे मुख्यमंत्री जी ने कल हरिद्वार में धोबीघाट पार्किंग का नाम दीन दयाल उपाध्याय पार्क रखा है, यदि उन्हें हरिद्वार और उत्तराखण्ड से प्रेम होता, उसकी पीड़ा होती तो वे हरिद्वार के किसी व्यक्ति के नाम पर उसका नाम रखते तो लोगों को लगता कि भई वास्तव में हमारा राज्य बन गया है, हमारी बातों को समझने वाली सरकार बनी है। क्या इस घाट का नाम बद्री दत्त पाण्डे जी के नाम पर नहीं रखा जा सकता था, जिनका स्वाधीनता संग्राम में अद्वितीय योगदान रहा है, उनका जन्म भी कनखल में हुआ था।

इसी प्रकार से इन सरकारों को गोबिन्द वल्लभ पन्त जी नहीं दिखाई देते, जिन्होंने उत्तराखण्ड का नाम रोशन किया और पूरे उत्तराखण्ड से वे ही अकेले व्यक्ति हैं, जिन्हें भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ’भारत रत्न’ मिला है।

पंकज सिंह महर

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Re: Why Uttarakhand Govt. Ignore Our Great Personalities
« Reply #3 on: January 06, 2010, 10:46:05 AM »
धन्यवाद बूबू, इस सवाल को उठाने के लिये, राष्ट्रीय विभूतियों के साथ-साथ हमारी स्थानीय विभूतियॊं को भी पूरा सम्मान दिया जाना चाहिये।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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Re: Why Uttarakhand Govt. Ignore Our Great Personalities
« Reply #4 on: January 06, 2010, 11:26:09 AM »

I fully support the views of Babooo ji.

There are name of many great who born in Uttarakhand soil and made proud not only the state but the entire nation at national and international level. Govt must recognize these great personality of UK by starting any social scheme by their names and giving name to any major projects so that their deeds can alwasy be rememered in soceity which can work a source of inspiration for new generation.

 

Rajen

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Re: Why Uttarakhand Govt. Ignore Our Great Personalities
« Reply #5 on: January 06, 2010, 11:37:43 AM »
 
 बुबू बिलकुल ठीक कौ हो तुमुले.  हमारा उत्तराखंड का जो हरता करता छन पता न्हें भगवान् उनूं कै कब सदबुधि द्यल.



आज ही अखबारों में पढ़ा कि हमारे मुख्यमंत्री जी ने कल हरिद्वार में धोबीघाट पार्किंग का नाम दीन दयाल उपाध्याय पार्क रखा है, यदि उन्हें हरिद्वार और उत्तराखण्ड से प्रेम होता, उसकी पीड़ा होती तो वे हरिद्वार के किसी व्यक्ति के नाम पर उसका नाम रखते तो लोगों को लगता कि भई वास्तव में हमारा राज्य बन गया है, हमारी बातों को समझने वाली सरकार बनी है। क्या इस घाट का नाम बद्री दत्त पाण्डे जी के नाम पर नहीं रखा जा सकता था, जिनका स्वाधीनता संग्राम में अद्वितीय योगदान रहा है, उनका जन्म भी कनखल में हुआ था।

इसी प्रकार से इन सरकारों को गोबिन्द वल्लभ पन्त जी नहीं दिखाई देते, जिन्होंने उत्तराखण्ड का नाम रोशन किया और पूरे उत्तराखण्ड से वे ही अकेले व्यक्ति हैं, जिन्हें भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ’भारत रत्न’ मिला है।


अड़्याट

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Re: Why Uttarakhand Govt. Ignore Our Great Personalities
« Reply #6 on: January 06, 2010, 04:51:07 PM »
सरकार तो सरकार ठैरी, जो मर्जी आये करेगी, ऐसा ही चलेगा और देखना....माधो सिंह, गबर सिंह, बड़ोनी जी,  और हमारे कई शहीदों और आन्दोलनकारियों की भूमि में किसी दिन हिटलर के नाम पर भी योजनायें शुरु हो जायेंगी और हमारे लोग अनाम रह जायेंगे।
हमने राज्य बनवाया है, छीनकर, लड़कर, मरकर, अपमान सहकर, लेकिन इसे चलाने वाले हैं चापलूस, जिन्होंने चापलूसी करके ही अपने दिन काटे हैं, तो बूबू इनसे कैसे अपेक्षा करते हो, ये तो उत्तराखण्ड को सिर्फ पैसा छापने वाली मशीन ही जानते हैं, समझते हैं और मानते हैं। इन अज्ञानी लोगों से कैसी आस......।
पहल खुद करो किसी भी सार्वजनिक स्थान का नाम आदि अपने आप ही जनता रख ले.....तब ये शरमाते, मुस्कुराते आयेंगे और उस हस्ती के बारे में किसी से लिखवाकर लायेंगे और गुणगान करेंगे। सत्ता अपने हाथ में लो, कोसने से कुछ नहीं होगा, क्योंकि ये सब चिकने घड़े हैं और इनका लक्ष्य उत्तराखण्ड का विकास नहीं, अपना विकास है, इनका विजन और मिशन जोड़-तोड़ कर २०१२ की विधानसभा के चुनाव लड़ना और शराब और पैसे के बूते जीतना और फिर मंत्री, लालबत्ती धारी बनने का ही है।

कलयुग, घोर कलयुग।

Devbhoomi,Uttarakhand

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Re: Why Uttarakhand Govt. Ignore Our Great Personalities
« Reply #7 on: January 06, 2010, 08:57:01 PM »
बहुत  ही शर्म की बात है जो की ये हमारे रानीति मैं रहने वाले लोग एसा कर रहे हैं की ये जितने भी राजनीति मैं ये उत्तराखंड से नहीं हैं!

 या इनको उत्तराखंड के बारे मैं जानकारी नहीं है क्या इन लोगों ने उत्तराखंड का इतिहास नहीं पड़ा,क्या उत्तराखंड की सरकार को उत्तराखंड के आन्दोलन और आन्दोलनकारियों के बारे मैं कुछ भी मालुम नहीं जो की ये उनको भूल जाते हैं और दुसरे लोगों का नाम रोशन करने के लिए इस द्व्भूमि का प्रयोग करते हैं !

शायद ये सरकार नहीं जानती कि जिस कुर्शी ये लोग बैठे हैं वो कुर्सी भी उन्हीं आन्दोलन कारियों और सहिंदों ने दिलाई है,जिस कुर्शी पर बैठ कर ये अपनी जेबें भरते हैं और आज वो लोग इस सहिदों को भूल गए हैं आज हमारे पूरे उत्तराखंड में इन सहिदों का नामों निशान भी नहीं हैं ,इसके जिम्मेदार है ये उत्तराखंड कि साकार और राजनीति में बैठे ये पुतले,जो कि शिर्फ़ अपने मतलब के लिए हो हिलते हैं !

लेकिन हमने सोचा भी नहीं था कि पोखरियाल जी ऐसा करेंगें कि -ये हमारे सहिदों को और आन्दोलन कारियों को भूल जायेंगें !

हुक्का बू

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Re: Why Uttarakhand Govt. Ignore Our Great Personalities
« Reply #8 on: February 01, 2011, 02:50:15 AM »
पं० दीनदयाल उपाध्याय जी ने बहुत अच्छा काम किया कि भारतीय जनता पार्टी बना दी। उन्होंने यह पार्टी एक आदर्श पार्टी के रुप में स्थापित की थी, देश के अन्तिम आदमी की पीड़ा थी उनके मन में, वे कहा करते थे कि देश के सुदूर इलाकों में रहने वाला अंतिम आदमी भी राष्ट्र की मुख्य धारा में लाने का प्रयास होना चाहिये।

आज उन्ही की पार्टी की है हमारे प्रदेश में सरकार। अब सरकार उनके दिखाये हुये रास्तो पर कितना चल रही है, यह तो सभी को मालूम ही ठैरा। लेकिन पं० जी के प्रति कृतज्ञता दिखाने के लिये सरकार कोई कोर-कसर नहीं छोड़ रही। पार्किंग हो या सड़क, १०८ सेवा हो या कोई अस्पताल या कोई स्कूल सभी के नाम पं० जी के नाम पर रखे जा रहे हैं.....लेकिन खाली नाम ही रख रहे हैं। मेरा तो राज्य सरकार को सुझाव है कि उत्तराखण्ड राज्य का नाम ही उनके नाम पर रख दें तो वह सच्ची श्रद्धांजलि हो जायेगी? उनके दिखाये रास्तों और आदर्शों पर मत चलना...खाली नाम रखते रहो बस्स

हुक्का बू

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Re: Why Uttarakhand Govt. Ignore Our Great Personalities
« Reply #9 on: February 01, 2011, 02:58:47 AM »
आज ही अखबार में पढ़ा कि उत्तराखण्ड तकनीकी विश्व विद्यालय का नाम अब पूर्व सर संघ चालक प्रो० राजेन्द्र सिंह "रज्जू भैया" के नाम पर रखा जायेगा। तर्क यह दिया गया है कि रज्जू भैय़ा बहुत बड़े भौतिक विज्ञानी थे करके।

अब रज्जू भैया कितने बड़े सैनटिस्ट थे, मुझे नहीं मालूम। लेकिन हमारे उत्तराखण्ड में भी एक प्रख्यात भौतिक विज्ञानी हुये थे, उनका नाम था डा० देवी दत्त पन्त। वे देश के पहले नोबल पुरस्कार विजेता डा० सी०वी० रमन जी के शिष्य थे और उन्होंने "पन्त रेज" का आविष्कार भी किया था, उनके द्वारा जो-जो काम किये गये वो इस लिंक पर है

http://www.merapahadforum.com/personalities-of-uttarakhand/d-d-pant-famous-physicist/

अब सरकारों को पता नहीं क्यों उत्तराखण्ड के लोग याद नहीं रहते, उसके बारे में आप लोग बताओ पैं

 

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