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गडसीरा (नारायण बगड़  चमोली )   के एक भव्य भवन  में  गढवाली  शैली गत  काष्ठ कला  अलंकरण अंकन

   House Wood Carving Art  from Gadsira , Narayan Bagar    , Chamoli   
 गढ़वाल,  कुमाऊं की भवन (तिबारी, निमदारी, जंगलादार  मकान, बाखली  , खोली  , मोरी , कोटि बनाल ) में  गढवाली  शैली की  काष्ठ कला  अलंकरण अंकन, - 347
(अलंकरण व कला पर केंद्रित) 
 
 संकलन - भीष्म कुकरेती     
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 चमोली में नारायण बगड़ क्षेत्र से अच्छी संख्या  में  काष्ठ  कला युक्त भवनों की सूचनाएं मिल रही है यह सकारात्मक  सोच का प्रमाण है ।  गडसीरा  का  प्रस्तुत  भव्य भवन  दुपुर, दुखंड /तिभित्या है।   भवन में काष्ठ  कला के कई आयाम दृष्टिगोचर होते हैं। 
 गडसीरा (चमोली ) के इस भवन में प्रत्येक तल में  तीन  तीन  कक्ष है और प्रत्येक कक्ष के द्वारों के  सिंगाड़ /स्तम्भ कला युक्त हैं।    सिंगाड़  के आधार में उल्टे कमल पुष्प से  कुम्भी।/घुंडी निर्मित हो रही है जिसके ऊपर ड्यूल है व  ड्यूल के ऊपर  सीधा कमल पुष्प निर्मित हुआ है जो कि  घुंडी /कुम्भी निर्माण करता है।  इस घुंडी के ऊपर से सिंगाड़  सीधा या बेलबूटे युक्त हो ऊपर सिरदल /मुरिन्ड /मथिण्ड  से मिल जाता है।  सभी कक्षों के सिरदल /मुरिन्ड /मथिण्ड  के कड़ी में देव मूर्ति गड़ी हुयी हैं।  कक्षों के द्वारों के पैनल/फलको ज्यामितीय कटान से आकर्षक  आकार में निर्मित हुए हैं। 
प्रत्येक तल में तीन तीन मोरी /लघु गवाक्ष /खिड़कियां निर्मित हैं और एक छोड़ सभी मोरियों के द्वारों के सिंगाड़  कला रूप में  दीर्द्घ कक्षों के प्रतिरूप ही दृष्टिगोचर होते हैं। 
  चमोली जनपद की संस्कृति अनुसार ही गडसीरा  के इस भवन की खोली भी भव्य है।  खोली (आंतरिक सीढ़ी प्रवेश द्वार ) भूतल /भ्यूंतल से पहले तल तक है।  खोली के मुख्य सिंगाड़ /स्तम्भ पांच पांच उप स्तम्भों के युक्ति /युग्म से निर्मित है।  दो उप स्तम्ों के आधार से ही   पर्ण/लताओं से सुस्सज्जित हो ऊपर  जाकर मुरिन्ड /सिरदल का एक स्तर बन जाते हैं। शेष    तीन स्तम्भों के आधार लगभग अन्य कक्षों जैसे ही हैं (कमल दलों से कुम्भी निर्माण ) व ऊपरी पद्म  पुष्प से सभी उप स्तम्भों में पर्ण -लता अंकन से  सजावट हुयी है और सभी उप स्तम्भ ऊपर जाकर सिरदल /मुरिन्ड /मथिण्ड  के स्तर बन जाते हैं।  इस प्रकार मुरिन्ड /मथिण्ड /सिरदल के स्तर  में प्राकृतिक अलंकृत अंकन हुआ है। 
खोली के शीर्ष कड़ियों  सबसे ऊपर में  कई पत्र दल  का अंकन हुआ दृष्टिगोचर होता है। मुरिन्ड  के  ऊपर से नीचे की कड़ी  एक चौखट है जिस पर सूर्यमुखी पुष्प का अंकन हुआ है व आकर्षक छवि प्रदान करते हैं।   मध्य में चतुर्भुज देव आकृति स्थापित हुयी है। खोली के ऊपर छप्परिका  स्थापित है व छपरिका के नीचे कई प्रकार के ज्यामितीय कटान से निर्मित संरचनाएं है।  जो दीवालगीर भी हैं। 
 निष्कर्ष निकलता है कि गडसीरा  (नारायण बगड़, चमोली  )  के भवन में प्राकृतिक, ज्यामितीय व आध्यात्मिक /मानवीय अलंकरण अंकन हुआ है।  भवन  उत्तम श्रेणी में आता है। 
दुपुर = दो तल
दुखंड /दुघर /तिभित्या = दो कक्ष  वाला एक कक्ष  बाहर एक  कक्ष अंदर ,
तिभित्या  = तीन दीवालें  जो दो  कक्ष  निर्माण करती है। 
सूचना व फोटो आभार:विवेका नंद जखमोला   
यह लेख  भवन  कला संबंधित  है न कि मिल्कियत  संबंधी  . मालिकाना   जानकारी  श्रुति से मिलती है अत:  वस्तु स्थिति में  अंतर   हो सकता है जिसके लिए  सूचना  दाता व  संकलन कर्ता  उत्तरदायी  नही हैं .
Copyright @ Bhishma Kukreti, 2020
गढ़वाल,  कुमाऊँ , उत्तराखंड , हिमालय की भवन  (तिबारी, निमदारी , जंगलादार  मकान , बाखली , मोरी , खोली,  कोटि बनाल  ) काष्ठ  कला अंकन ,   श्रंखला जारी   
   House Wood Carving Ornamentation from  Chamoli, Chamoli garhwal , Uttarakhand ;   House Wood Carving Ornamentation/ Art  from  Joshimath ,Chamoli garhwal , Uttarakhand ;  House Wood Carving Ornamentation from  Gairsain Chamoli garhwal , Uttarakhand ;     House Wood Carving Ornamentation from  Karnaprayag Chamoli garhwal , Uttarakhand ;   House Wood Carving Ornamentation from  Pokhari  Chamoli garhwal , Uttarakhand ;   कर्णप्रयाग में  भवन काष्ठ कला,   ;  गपेश्वर में  भवन काष्ठ कला,  ;  नीति,   घाटी में भवन काष्ठ  कला,    ; जोशीमठ में भवन काष्ठ कला,   , पोखरी -गैरसैण  में भवन काष्ठ कला,   श्रृंखला जारी  रहेगी

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सुकई ( बंगार स्यूं  पौड़ी गढ़वाल )   में बुडियाल   रावत के भव्य भवन में   काठ   कुर्याणौ   ब्यूंत '  की   गढ़वाली काष्ठ कला अलंकरण, अंकन
    Tibari House Wood Art in House of  Sukayi  , Bangarsyun Pauri Garhwal       
गढ़वाल, कुमाऊँ, उत्तराखंड,की भवन (तिबारी,निमदारी,जंगलादार मकान,,बाखली,खोली , मोरी, कोटि बनाल ) में 'काठ   कुर्याणौ   ब्यूंत  की  गढ़वाली शैली  '  की  काष्ठ कला अलंकरण, अंकन -345
 संकलन - भीष्म कुकरेती     
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 सुकई  गाँव थोकदारी गाँव के नाम से प्रसिद्ध है।  संतन सिंह रावत ने  सुकई  से कई भवनों की  छायाचित्र सहित सूचनाएं  भेजी हैं।  आज एक भव्य, शक्त   किन्तु जीर्ण शीर्ण  भवन में काष्ठ  कला अंकन पर चर्चा होगी। भवन दुपुर , दुखंड -द्विकक्ष  है।    प्रस्तुत भवन में  गढ़वाली काष्ठ कला , अलंकरण अंकन  हेतु निम्न स्थलों पर ध्यान देना होगा -
खोली व खोली के दीवालगीरों में गढ़वाल  काष्ठ   अंकन कला
खोली के ऊपर छपपरिका  के आधार  में गढ़वाली काष्ठ कला अंकन  पर ध्यान
खोली के  की  बांयी  ओर    छाज / झरोखे   में गढ़वाली  काष्ठ कला  अलंकरण  अंकन
भवन की तिबारी में गढ़वाली  काष्ठ कला  अलंकरण  अंकन
   तिबारी के सिरदल /मुरिन्ड  के ऊपर छत के आधार में   गढ़वाली  काष्ठ कला  अलंकरण  अंकन
    सुकई  के भवन की खोली व खोली के दीवालगीरों में गढ़वाल  काष्ठ   अंकन कला -
  खोली  ( आंतरिक सीढ़ी  हेतु प्रवेश द्वार )   भ्यूं /भूतल से पहले तल  तक पंहुची है। 
खोली के दोनो ओर  मुख्य  अभिनव सिंगाड़ /स्तम्भ हैं व प्रत्येक मुख्य स्तम्भ उप स्तम्भों के युग्म से निर्मित हैं।   उप स्तम्भ  कई प्रकार के हैं -
  किनारे वाला उप स्तम्भ आधार से लेकर  उप्पर सिरदल तक सीधा व प्राकृतिक बेल बूटों  से अंकित है व उपरर जाकर बाह्य सिरदल का ऊपरी स्तर  निर्मित करता है।
 किनारे से अंदर की ओर  एक अन्य  उप स्तम्भ भी किनारे वाले उप स्तम्भ समान है और यह उप स्तम्भ भी ऊपर सिरदल /मुरिन्ड  का  ऊपरी स्तर  के नीचे वाला स्तर निर्मित करता है।  उप स्तम्भ का तीसरे उप स्तम्भ के  आधार में घुंडी (उलटे कमल व सीधे कमल ) हैं व  घुंडी के ऊपर पुनः प्राकृतिक कला अंकन हुआ है।  यह प्राकृतिक अंकन युक्त उप स्तम्भ ऊपर जाकर सिरदल के बाह्य सिरदल का तीसरा स्तर निर्मित करता है। 
 किनारे से चौथे  उप स्तम्भ   जो कुछ मोटा है के आधार में  अधोगामी पद्म पुष्प दल से कुम्भी निर्मित हुयी है जिसके ऊपर ड्यूल है पुनः  ड्यूल के ऊपर उर्घ्वगामी पद्म  पुष्प  अंकन हुआ है जिसके ऊपर ड्यूल है और पुनः सीधा कमल दल से घुंडी /कुम्भी निर्मित हुयी है।  यहां से  गोल उप स्तम्भ सीधा  ऊपर जाता है व सिरदल से पहले उप स्तम्भ में उल्टा कमल दल , ड्यूल व सीधा कमल दल की घुंडियां निर्मित हुयी हैं।  यहां सिरदल से निकला  दीवालगीर  कुम्भी के ऊपरी भाग से     मिलता है।
इस उप स्तम्भ के पश्चात अंदर की ओर  दो अन्य उप स्तम्भ हैं  जिन पर प्राकृतिक अलंकरण अंकन हुआ है।  अंकन गढ़वाली शैली का है। 
   खोली का सिरदल /मुरिंड /मथिण्ड  कई स्तरों  व कई आकार लिए हुए है।   सिरदल /मुरिन्ड /मथिण्ड  के तोरणम में प्राकृतिक कला अंकन हुआ है।  तोरणम के अंदर ऊपरी भाग में गणपति  देव मूर्ती स्थापित है।  तोरणम के सन्कध याने दोनों ओर  के त्रिभुजों में  अतिरिक्त सूरजमुखी पुष्प जैसी आकृति अंकन हुआ है। 
खोली के ऊपर छप्परिका है जिसका आधार काठ।   इस आधार से दसियों  शंकु नुमा आकृतियां लटकी हैं।  शंकुओं के मध्य एक विशेष आकृति निर्मित हुयी जो संभवतया कुरमक (कछुआ ) का प्रतीक है।  यही आकृति  दोनों ओर    बने  दीवालगीर में भी स्थापित है। 
 द्वार के मुरिन्ड /सिरदल के दोनों पहलुओं में छप्परिका  से  दोनों ओर  दो दो  दीवालगीर स्थापित हैं।  दीवालगीरों व् द्वार के सिंगाड़ों मध्य स्तम्भ नुमा लंबी आकृति है जिस पर कुम्भी आकृति अंकित हैं जैसे उप स्तम्भों में।  प्रत्येक दीवालगीर  में कई पद  (step ) हैं जो ऐसे लगते हैं जैसे पक्षी चोंच हो ।  उन उप पदों के ऊपर  काष्ठ हाथी  स्थापित हैं।  प्रत्येक उप दीवालगीर के मध्य काष्ठ  संरचना स्थापित है। यह तख्ता  सपाट  है।   
  पहले तल पर भवन मे भव्य तिबारी स्थापित है।  तिबारी में    6 सिंगाड़/स्तम्भ हैं व 5  ख्वाळ हैं I प्रत्येक सिंगाड़ मे कला एक समान है I  प्रत्येक सिंगाड़ /स्तम्भ  के आधार  देहरी पर स्थापित पत्थर के चौकोर डौळ  के ऊपर स्थापित हैं।  स्तम्भ का आधार अधोगामी पद्म  दल से निर्मित कुम्भी स्थापित है , कुम्भी के ऊपर ड्यूल है (round  ring type  wood plate ) व ड्यूल के ऊपर उर्घ्वगामी पद्म पुष्प दल अंकित है।  पुष्प दल के ऊपर से स्तम्भ लौकी आकार धारण क्र ऊपर चलता है।  जहां पर मोटाई सबसे कम है वहां उल्टा कमल फूल से कुम्भी  निर्मित हुयी है।  फिर ड्यूल है व ड्यूल के ऊपर सीधा कमल दल से  विशेष घुंडी निर्मित है।  यहां से स्तम्भ से थांत (Cricket Bat Blade  नुमा )
   
 




सूचना व फोटो आभार: संतन सिंह रावत
यह लेख  भवन  कला संबंधित  है . भौगोलिक स्थिति व  मालिकाना   जानकारी  श्रुति से मिलती है अत: यथास्थिति में अंतर हो सकता है जिसके लिए  सूचना  दाता व  संकलन कर्ता  उत्तरदायी  नही हैं .
Copyright @ Bhishma Kukreti, 2020
गढ़वाल,  कुमाऊँ , उत्तराखंड , हिमालय की भवन  (तिबारी, निमदारी , जंगलादार  मकान ,बाखली ,  बाखई, कोटि बनाल  ) काष्ठ  कला अंकन नक्काशी श्रृंखला  जारी रहेगी   - 
 
Tibari House Wood Art in Kot , Pauri Garhwal ; Tibari House Wood Art in Pauri block Pauri Garhwal ;   Tibari House Wood Art in Pabo, Pauri Garhwal ;  Tibari House Wood Art in Kaljikhal Pauri Garhwal ;  Tibari House Wood Art in Thalisain , Pauri Garhwal ;   द्वारीखाल पौड़ी  गढवाल में तिबारी,  खोली , भवन काष्ठ  कला, लकड़ी नक्काशी  ;बीरों खाल ,  पौड़ी  गढवाल में तिबारी,  खोली , भवन काष्ठ  कला नक्काशी ; नैनीडांडा  पौड़ी  गढवाल में तिबारी,  खोली , भवन काष्ठ  कला नक्काशी ; लकड़ी नक्काशी पोखरा   पौड़ी  गढवाल पौड़ी  गढवाल में तिबारी,  खोली , भवन काष्ठ  कला नक्काशी ;  में तिबारी,  खोली , भवन काष्ठ  कला नक्काशी ; रिखणीखाळ  पौड़ी  गढवाल में तिबारी,  खोली , भवन काष्ठ  कला नक्काशी ;   पौड़ी  गढवाल में तिबारी,  खोली , भवन काष्ठ  कला नक्काशी ; जहरीखाल  पौड़ी  गढवाल में तिबारी,  खोली , भवन काष्ठ  कला नक्काशी ;  दुग्गड्डा   पौड़ी  गढवाल में तिबारी,  खोली , भवन काष्ठ  कला , लकड़ी नक्काशी ; यमकेश्वर  पौड़ी  गढवाल में तिबारी,  खोली , भवन काष्ठ  कला नक्काशी ;   खम्भों  में  नक्काशी  , 

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सुमल्टा (चमोली ) के पंडित  रामानंद खंडूड़ी कृत  गढ़वाली में ज्योतिष भाष्य /टीका भाग -1

 गढ़वाली का उन्नीसवीं सदी  अंत /   बीसवीं सदी पूर्व  भाग में गढ़वाली - 4
  गढ़वाली में ज्योतिष भाष्य /टीका साहित्य - 4
प्रस्तुति - भीष्म कुकरेती




  यह शुभ सूचना है कि  मेरे द्वारा जसपुर के  बहुगुणा पंडितों द्वारा ज्योतिष गढ़वाली भाष्य /टीका से प्रभावित हो चमोली से आशीष खंडूड़ी ने अपने पितामह श्री द्वारा की गयी ज्योतिष का  गढ़वाली  भाष्य  प्रेषित किया। 
पंडित रामानंद खंडूड़ी ने शीर्षक निर्मित किया है चौकोर। 
उस चौकोर में  बांयीं और हासिये में  लिखा द .  रामा नंद
चौखट में निम्न लिखा मिला -
यह हाश नं   दो पं . रामान्द खंडूड़ी   की है I  श्रीसंम्वतृ  1999  कै  पूर्ण  कीया  है।    ( संभवतया यह 1966   ही है।   अर्थात सन  19 42 )
ततशुभम   I

  II  1  II
 श्रीगणेशाय नम  अथम  जन्म पत्र  परवोद्यिनी लीधते  प्रथम  ( नहीं पढ़ा जा सक रहा है )  .. दिर्थ मंगला चर्णम् II  चूड़ामणी  कृतविधुर्म्वलयीकृतवासुकी II मंवेतभव    तु  भष्याय लीला तांडर्व पण्डित: II 1  II  प्रथमसम्वतसरमा  अका कालघटे रणो  (या उका )  तब १३५  अकनिकल्या इन्कों  शाकालमाजोडनसे  सम्वत् - और सम्वत् माघटोणसे शाकाल उतपन्नहोंद  वाद शाकालमा १४४० हीन  कर्णो  जोशेषरव  तैमा १२ को भागलेणो  जोलबद्धपायेसो चक्रहोयि  शेषां  को १२  तेगुणोदेणो  तेमाचैत्रादि  मासजोड़णा अर्थात जतना अमावस्या गतहोईजावू  वूसंख्या जोड़णी तवद्विज गह पृथग् रखणो एक जह ( ?स्याही मिटी है  )     चक्रद्वि  गुणाकर्णो  १० अंक औरभी युक्त करदेणा   ३३ को भागलेणो  पृथकवाला  मू पौणू  युक्तकरदेणो  ३० तेगुणादेणो और गततिथिभी जोड़णी     द्वितीयाहोवूत  प्रतिपदा  युक्तकरणो कृष्ण शुक्लपक्षविचारीक संस्कार कर्नो कृष्णपक्षमाप्रतिपदा १६ द्विति  व १ ) आदि जाणनो  शुक्लपक्षमाप्रति  पदा दिसीम   येकिसमक्रिया कर्णी  वादचक्रकोछटो ६ ई हिस्सा भी जोड़  ( स्याही मिटी है ) द्विजगह  पृथग = सुरु  धरणो  एकजगह    ६ ७    कोभागले  णो   (स्याही मिटी है )

 सूचना आभार -  स्व रामा नंद खंडूड़ी  के पौत्र आशीष खंडूड़ी

  सुमल्टा (चमोली ) के पंडित  रामा नंद  खंडूड़ी   द्वारा गढ़वाली में ज्योतिष भाष्य /टीका  भाग -2  .. निरंतर रालो   

 सूचना आभार -  स्व रामा नंद खंडूड़ी  के पौत्र आशीष खंडूड़ी


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The reasons for Employees leaving  Organization

Remuneration, Salary and Wages rules as guidelines for CEO -17
 (CEO-Logy, the science of CEO’s working based on Shukra Niti)
(Examples from Shukra Niti helpful for Chief executive Officer)
Successful Strategies for successful Chief executive Officer – 185
Guidelines for Chief Executive Officers (CEO) series – 18   
By: Bhishma Kukreti (Management Acharya)
s = आधी अ
-
नोपकृतं  मन्यते स्म न तुष्यति  सुसेवनै: I
...  II 434
 क्षुब्धस्त्नोति मर्माणि तं न्रिपं भृतक्स्त्यजेत् I
Shukra Niti Second Chapter Yuvrajadi Lakshan, (434)   
Translation –
The servant should leave such a king that does not remembers good job done for him, (  that )  is not pleased by good services, does not remember the servant when there is context and is suspicious and that gives pain to  the  feelings of servant when aggrieved.
Shukra Niti Second Chapter Yuvrajadi Lakshan, (434) 
In modern time to, the employees leave the organizations because –
1-Absence of Trust and autonomy
2-Organization does not appreciate or recognize
3- Absence of Respect or higher authorities insult juniors
4- Bosses suspect or organization works on ‘Everybody is lazy or thief unless..”
5-Low opportunities for growth
6- Mismanagement
7- Bad Mangers
8- Work is more that paid for
9- Weak communication
10- Very Low support to the workers
12- Unhealthy work environment
13-Uninspring environment
14- Usually the good employees leaving
15- Organization does not follow its core values
16- Other reasons as changes in the life of employees
References                     
1-Shukra Niti, Manoj Pocket Books Delhi, page -121   
Copyright@ Bhishma Kukreti, October, 2020
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वीर रसो अभिनय:वीर रसौ अभिनय 

भरत नाट्य  शास्त्र  अध्याय - 6: रस व भाव समीक्षा  भाग -13
भरत नाट्य शास्त्र  गढवाली अनुवाद शास्त्री – भीष्म कुकरेती
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स्तिथिधैर्यवीर्यगवैंर्रूत्साहपराक्रमप्रभावैश्व।
वाक्यैश्वाक्षेपकृतैवीर्रस:  सम्यगभिनेय।।  ।6. 68।   
वीर रसौ अभिनय स्थिरता , धैर्य, ऊर्जापूर्ण, गर्व , उछाह, पराक्रम , प्रभावपूर्ण वाणी अर  साहसिक कार्जों द्वारा करण  चयेंद। 
भरत  नाट्य शास्त्र अनुवाद  , व्याख्या सर्वाधिकार @ भीष्म कुकरेती मुम्बई
भरत नाट्य  शास्त्रौ  शेष  भाग अग्वाड़ी  अध्यायों मा
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CEO must be careful in appointing Advisors (Board of Advisors)

Remuneration, Salary and Wages rules as guidelines for CEO -16
 (CEO-Logy, the science of CEO’s working based on Shukra Niti)
(Examples from Shukra Niti helpful for Chief executive Officer)
Successful Strategies for successful Chief executive Officer – 184
Guidelines for Chief Executive Officers (CEO) series – 184   
By: Bhishma Kukreti (Management Acharya)
s = आधी अ
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दश प्रोक्ता: पुरोधाद्या ब्राह्मणा: सर्व एव ते II 428
..
नैव शुद्रास्तु संयोज्या गुणवन्तोपि पार्थिवै : II 429
Shukra Niti Second Chapter Yuvrajadi Lakshan, (428-429) 
Translation-
Ten advisors had been described earlier beginning with priests. All those are from. Brahmin (top positioned officers) . In their absence Kshatriya (executives) could be appointed or Vishay (Accountant) in case of Kshatriya’s absence but not to appoint the lowest cadre of intellect as advisor
Shukra Niti Second Chapter Yuvrajadi Lakshan, (428-429) 
 Reasons for CEO appointing the Board of Advisors –
The reasons behind CEO appointing board of advisors are follows-
1-Organization gets outside prospective
2-Organization expands its network
3-Organization increases its credibility among investors, customers and vendors
4-Supplimenting Organizational leadership
5-Help in solving inside mistakes
5- Helps in anticipation the markets etc.
 The advisors should be appointed carefully.
References                     
1-Shukra Niti, Manoj Pocket Books Delhi, page -121   
Copyright@ Bhishma Kukreti, October, 2020



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हास्य  रस अभिनय

भरत नाट्य  शास्त्र  अध्याय - 6: रस व भाव समीक्षा  - 12
भरत नाट्य शास्त्र गढवाली अनुवाद – भीष्म कुकरेती
विकृताचारैर्वाक्यैरङ्गविकारैश्च। 
हासयति जनं यस्मात्तस्माज्ज्ञेयो रासो हास्य: II
हास्यौ अभिनय (पाठ  खिलण ) असंगत चेष्टाओं , उल्टी सीधी छ्वीं करिक अर उटपटांग लारा पैरिक जान क्रियाओं से करे जांद I 
अनुवाद  , व्याख्या सर्वाधिकार @ भीष्म कुकरेती मुम्बई
भरत नाट्य  शास्त्रौ  अनुवाद  शेष  भाग अग्वाड़ी  अध्यायों मा

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अथ रौद्रौ अभिनय

भरत नाट्य  शास्त्र  अध्याय - 6: रस व भाव समीक्षा -14
भरत नाट्य शास्त्र गढवाली अनुवाद शास्त्री  – भीष्म कुकरेती
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नानाप्रहारणमोक्षै: शिर:कबंधभुजकर्तनैश्चैव। 
एभिश्चार्थविशेषैरस्याभिनय: प्रयुक्तव्य: । । 
 
 रौद्र रसौ अभिनय (स्वांग) बनि बनि  प्रकारौ  को प्रयोग करण , मुंड , गौळ , पुटुक , बौंळ आदि कटण द्वारा सम्पन हूंद। 
भरत  नाट्य शास्त्र अनुवाद  , व्याख्या सर्वाधिकार @ भीष्म कुकरेती मुम्बई
भरत नाट्य  शास्त्रौ  शेष  भाग अग्वाड़ी  अध्यायों मा

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Insignias for the Employees

Remuneration, Salary and Wages rules as guidelines for CEO -16
 (CEO-Logy, the science of CEO’s working based on Shukra Niti)
(Examples from Shukra Niti helpful for Chief executive Officer)
Successful Strategies for successful Chief executive Officer – 184
Guidelines for Chief Executive Officers (CEO) series – 184   
By: Bhishma Kukreti (Management Acharya)
s= आधी अ
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यत्कार्ये विनियुक्ता ये कार्याकैरकये च II 425
...
..
..
..
..
वाद्यवाहन भेदैश्च भृत्या न्कुर्यात प्रिथक् पृथक् II 427
स्वविशिष्टनम  च यंचिन्हं न दद्यात कस्यचिन्नृप:
Shukra Niti Second Chapter Yuvrajadi Lakshan, (425-427) 
Translation-
The king should mark his employees by the proper insignia of office located on steel, copper, bronze, silver , gold and jewel
Fr distinguishing from distance, the King should separate the officers by clothing, crowns and musical  gadgets etc.
 The King should never give his uniform crown, umbrella to anybody (in any circumstances) 
 
Shukra Niti Second Chapter Yuvrajadi Lakshan, (425-427) 

References                     
1-Shukra Niti, Manoj Pocket Books Delhi, page -121   
Copyright@ Bhishma Kukreti, October, 2020
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  खैंडुड़ी ( ढांगू , द्वारीखाल, पौड़ी गढ़वाल )  में आनंद सिंह रावत के भवन में काष्ठ कला अलंकरण अंकन

 Traditional House wood Carving Art of    Khainduri , Dwarikhal ,  Pauri  Garhwal   
  गढ़वाल, कुमाऊँ,उत्तराखंड के  भवनों  (तिबारी, निमदारी, जंगलादार  मकान,बाखली,खोली,कोटिबनाल  ) ' काठ - कुर्याण-ब्यूंत '   काष्ठ कला अलंकरण अंकन -344
 संकलन - भीष्म कुकरेती
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 ढांगू से भवनों की सूचना निरंतर मिलती रही है।  आज खैंडुड़ी ( ढांगू , द्वारीखाल, पौड़ी गढ़वाल )  में आनंद सिंह रावत के भवन में काष्ठ कला अलंकरण अंकन पर चर्चा होगी।  खैंडुड़ी  में आनंद सिंह रावत का भवन दुपुर -दुघर/दुखंड /  /तिभित्या   है।
खैंडुड़ी  में आनंद सिंह रावत के भवन में काष्ठ कला अंकन विश्लेषण हेतु  पहले तल पर स्थित तिबारी पर दिन देना होगा।  तिबारी चार सिंगाड़ों /स्तम्भों व तीन ख्वाळों की है।  प्रत्येक सिंगाड़ में कला एक सामान है।  प्रत्येक स्तम्भ का आधार पाषाण के चौखट डौळ के ऊपर टिके हैं। आधार में अधोगामी पद्म पुष्प दल से कुम्भी निर्मित हुयी है कुम्भी के ऊपर ड्यूल है जिसके ऊपर उर्घ्वगामी पद्म पुष्प है।  यहां से स्तम्भ चौकोर रूप में सीधे ऊपर मुरिन्ड।/सिरदल से मिल जाते हैं।  आधार से ऊपर मुरिन्ड /सिरदल में प्राकृतिक (बेल बूटे ) का अंकन हुआ है।  मुरिन्ड /मथिण्ड के कड़ी के ऊपर भी प्राकृतिक कला अंकन हुआ है। 
निष्कर्ष निकलता है कि    खैंडुड़ी ( ढांगू , द्वारीखाल, पौड़ी गढ़वाल )  में आनंद सिंह रावत के भवन में  प्राकृतिक व ज्यामितीय  काष्ठ कला अलंकरण , अंकन हुआ है।     खैंडुड़ी ( ढांगू , द्वारीखाल, पौड़ी गढ़वाल )  में आनंद सिंह रावत के भवन में कहीं  भी  मानवीय अलंकरण के चिन्ह नहीं दृष्टिगोचर होते हैं।   
   
सूचना व फोटो आभार:विवेका नंद जखमोला 
यह लेख  भवन  कला,  नक्काशी संबंधित  है न कि मिल्कियत  संबंधी  . मालिकाना   जानकारी  श्रुति से मिलती है अत:   वस्तु स्थिति में अंतर      हो सकता है जिसके लिए  सूचना  दाता व  संकलन कर्ता  उत्तरदायी  नही हैं .
Copyright @ Bhishma Kukreti, 2020
 Traditional House wood Carving Art of West South Garhwal l  (Dhangu, Udaypur, Ajmer, Dabralsyun,Langur , Shila ),  Uttarakhand , Himalaya   
  दक्षिण पश्चिम  गढ़वाल (ढांगू , उदयपुर ,  डबरालस्यूं  अजमेर ,  लंगूर , शीला पट्टियां )   तिबारियों , निमदारियों , डंड्यळियों, बाखलियों  ,खोली , कोटि बनाल  में काष्ठ उत्कीर्णन कला /अलंकरण,   श्रृंखला  -
  गढ़वाल,  कुमाऊँ , उत्तराखंड , हिमालय की भवन  (तिबारी, निमदारी , जंगलादार  मकान ,  बाखली , खोली, कोटि बनाल   ) काष्ठ अंकन लोक कला)  - 
Traditional House Wood Carving Art (Tibari) of Garhwal , Uttarakhand , Himalaya - 

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