जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु
August 13 ·
भौत खूब गुरु जी, कथ्गा ऊलार सी झलकणु छ आपकी मयाळु मुखड़ि मा।
जल्मबार नरु दा कू,
तुम दाळ पिसणा,
झळ झळ हम देखि,
सिलोटि घिसणा....
सब सिख्युं काम,
अब काम औणु,
हुनरवान छन आप,
अहसास होणु......
राजि खुशी चैन्दा भैजि,
तुमारु उलारया पराण,
खुश होयुं मन तुमारु,
नरु दा कू जल्मबार मनौण........
-जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु,
दिनांक 13.8.2015