Semwal Bhagat Ram
19 hrs
अलग हुँया हम थैंई, ह्वेगीं साल पन्दरेक /
क्या पाया हमाल ए बीच, गैणै द्या उपलब्धि एक //
कांग्रेस-बीजेपी अदला बदली कै, सरकार बणाणा छीन /
जनता बिचरी तणि-तणि मोरणि, यो ऐश उडाणा छीन //
अलग राज्य लीणू खुणि, कतिग्यूँ ल खून पसीना बोगाया /
नौणा की गुन्दकि कोपणि खाणू, वूँ बिचरूँ ल क्य पाया //
यो कुछ करलो मुछ्याळ ब्वाडा फर, सब्यूँ की नजर टिकी छै /
पर राजनीति का ये खेल म, वे की जड़ काटिगीं वे कै भै //
अरे नेतौ, राजनीतिज्ञों तुम खुणि ता, शरम भी हरचा /
जै कोष लुटणा छवा, जनता को च वो, वे थैं अँक्वेकी खरचा //
बदरी केदार की पावन धरती थैं, किलै बदनाम करणा छवा /
गंगा-जमुना की पावन धरती थैं, डामुल किलै डमणा छवा //
सरकार-जनता मिलि कैकि, कुछ उद्योग धंदा लगान्दा /
त पुटिग्यूँ की खातिर लोग, परदेशूँ किलै जान्दा //
घ्वीड़ थैं त चाँतो प्यारु, वे थैं बगड़ नि सुहान्दा /
ह्वेली क्वी मजबूरी वे कि, जो वो बगड़ूँ छोड़ आन्दा //
अबी भी बिगडु क्या च, अब ता सँभिळि जावा /
बड़ा न सै, छोटा-मोटै कल कारखाना लगावा //
पलायन इनी हूणू रालो त पाड़ ल खाली ह्वे जाणा /
तुमुल तब क्य रिख-बाग-स्याळ अर बन्दुरू की सरकार चलाणा ?