Author Topic: Kumauni & Garhwali Poems by Various Poet-कुमाऊंनी-गढ़वाली कविताएं  (Read 515466 times)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

  • Core Team
  • Hero Member
  • *******
  • Posts: 40,912
  • Karma: +76/-0
कल से देशभर मे रामलीलाये होगी रामलीलाओ पर्व को देखते हुए एक हास्य विनोद से जुड़ा प्रेम गीत अपनी लोकभाषा मे

मेरा गौ होणी रामलीला
तू भि छोरि ऐ जयी
मि बनलू राम तू बणी जयी सीता
आहा मेरा राम तेरु निचा कुछ काम धाम
मुखडी देख ऐना मा बांदर सी च तेरी अनवार
कुस्वाणा बैखो की फौज च तेरा गौ
मै जनि सीता तै फिट नि बैठलू क्वी राम
पूरा गौ की त क्या देण गरंटी
अपणी दे सक दा
मि छो तेरा लैक राम
तू ही च मेरी सीता
खोज ले छोरा अपना गौ का आस पास
मै जनि सीता त्वे जनों नि दे दी घास
मेरा गौ होणा नौरता पाठ
होली खुटी तेरी दैणी देवी सी
रैलू सीता की जग्वाल मा तेरू राम
मेरा गौ मा होणी रामलीला
तू भी छोरि ऐ जयी
मि बनलू राम तू बणी जै सीता
मेरा गोंउ होणी रामलीला...................शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

  • Core Team
  • Hero Member
  • *******
  • Posts: 40,912
  • Karma: +76/-0
नीति माणा कि भोटिया या रोंग्पा भाषा कि कविता

हिन्नी नीति घाटी

कविता - रोमी राणा , केदारनाथ
इन्न हिन्नी नीती घाटी च रम्पा
स्वर्ग समान इन्त नीती घाटी
रोफू किस्म जड़ी-बूटियाँ
स्वास्थ्य तै लाभदायक याँ
इन्न हिन्नी नीती घाटी च रम्पा
कटुकी इन्त नीती घाटी हुन्न
धौरू त्वींज-खौच दर्द ओर हुन
इन्न हिन्नी ..
चौरू इन्त नीती घाटी हुन्न
धुरु इन्न दाल छंवाम पर चरासिन
इन्न हिन्नी ...
जड़ी शरीर स्वस्थ गुस्कन
इन्न नीती घाटी स्वर्ग समान
इन्न हिन्नी ...
--------------
शब्द रूपांतर
हिन्नी=- हमारि
रौग्पा = भोटिया
इन्त = यह
रोफू = बहुत
हुन्न - होता है
त्वींज खौच = पेट दर्द
छंवाम/छावामा = दाल या साग
चरासिन = तड़का /छौंका
गुसकन = ठीक होंना

साभार: दीपक बेंजवाल सम्पादक, दस्तक, २०११ अंक ३ अगस्त्यमुनि , रुद्रप्रयाग

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

  • Core Team
  • Hero Member
  • *******
  • Posts: 40,912
  • Karma: +76/-0
बांकी तड़याली तिलोगा बांकी
सेर कि भिडाल्यूं बांकी
सडक तिरवाली बांकी
राति जुनख्याळी सिरवाणी कि कूल
कु होली घसेर बांकी
छोटी च मिंडाळी , ठुल्ली च घसेर
छुणक्याळी चुड़ीयूँ की क्वा होली घसेर बांकी
तू बेटी छे कि ब्वारी
तू बेटूलि होली कैकी, मांगणा कै जौलो
तू ब्वारी होली कैकी , छुड़ेणो कै जौलो
Reference Dr Shiva Nand Nautiyal, Garhwal ke Nrity-Geet
Copyright @ Bhishma Kukreti, bckukreti@gmail.com

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

  • Core Team
  • Hero Member
  • *******
  • Posts: 40,912
  • Karma: +76/-0
Gyan Pant


..... मेरी पहली कुमाऊँनी रचना !

दै मोटरा ~~~~
त्यार् ख्वार् बज्जर पड़ि जौ
घर बटी
लखनौ त नजीक बँणै देछ , मगर
लखनौ बटी घर
त्वीलि कत्थप पुजै देछ ! कत्थप -- कहीं दूर
दै मोटरा ~~~

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

  • Core Team
  • Hero Member
  • *******
  • Posts: 40,912
  • Karma: +76/-0
चिफळि ढुंगी मा.....

जिंदगी यनि लगणि,
बैठ्युं छौं जन मैं,
कब रड़ि जौ,
जन चिफळि ढुंगी मा.....हिंट आप सब्‍यौं का खातिर।

मेरा प्‍यारा उत्‍तराखण्‍डी भै बंधो जरा अपणा मन की बात बतावा कुछ लैन कविता की बणैक। गढ़वाळि भाषा का प्रति आपकु प्रेम भी झलकलु अनुभूति का माध्‍यम सी।

-जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु
दिनांक 7.10.2015

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

  • Core Team
  • Hero Member
  • *******
  • Posts: 40,912
  • Karma: +76/-0
श्री भरत सिंह नेगी पहाड़ी मित्र.....

कांधी मा काखड़ि,
मुंड मा अमेर्थ,
कख होलु जाणु भुला,
प्‍यारा पहाड़ मा.......

मन मा ऊलार छ,
पहाड़ सी प्‍यार छ,
खाणु वख की सब्‍बि धाणि,
पेणु छोया ढुंग्‍यौं कू पाणी,
किलैकि पहाड़ सी प्‍यार छ......

-जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु
दिनांक 29.9.2015

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

  • Core Team
  • Hero Member
  • *******
  • Posts: 40,912
  • Karma: +76/-0
मेरी या कविता आप मेरा ब्‍लाग फर पढ़ि सकदा छन।

चला हे दगड़्यौ........

आज बग्‍त यनु ऐगि,
हमारु पहाड़ भारी ऊदास,
घौ हमारा हि दिन्‍यां छन,
तौ भी वेका मन मा आस......

http://jagmohansinghjayarajigyansu.blogspot.in/

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

  • Core Team
  • Hero Member
  • *******
  • Posts: 40,912
  • Karma: +76/-0
भटट भुजेंण लग्‍यां था....

तवा मा भटट भुजेंण लग्‍यां था,
ह्युंद कू मैनु लग्‍युं थौ,
तवा मा तिड़ तिड़ होण लग्‍युं थौ,
कोन्‍ना मा लम्‍पु जग्‍युं थौ.....

एक भग्‍यान देळि मा आई,
भूत छौं यनु बताई,
दादिन गाळी भौत दिनिन,
वे जथैं भटट की मुटट चलाई....

-जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु
रचना सर्वाधिकार सुरक्षित
दिनांक 23.9.2015

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

  • Core Team
  • Hero Member
  • *******
  • Posts: 40,912
  • Karma: +76/-0
भाई ओंकार नेगी जी की रचना.....

कन बिसरि्या हम,
वू कौथिग वा बग्वाळ,
जब करदा छा हम,
पुंगड़ियों मा बैठी जग्वाळ....

रचना पढिक मेरा कविमन कू कबलाट.....

कबरि होन्‍दि थै,
हमारा मुल्‍क मा,
रौनक अर बग्‍वाळ,
आज त होयिं छ,
मनख्‍यौं की जग्‍वाळ...

जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु
दिनांक 23.9.2015

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

  • Core Team
  • Hero Member
  • *******
  • Posts: 40,912
  • Karma: +76/-0
अपणि बांजी पुंगड़यौं मा तू हौळ लगौ,
मुल्‍की मयाळु मनख्‍यौं का मन मा,
ह्वै सकु त पहाड़ प्रेम जगौ......मेरा कविमन कू कबलाट
.जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु
दिनांक 21.9.2013
सर्वाधिकार सुरक्षित

 

Sitemap 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 13 14 15 16 17 18 19 20 21 22