Author Topic: Kumauni & Garhwali Poems by Various Poet-कुमाऊंनी-गढ़वाली कविताएं  (Read 515533 times)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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वा त्यार बान दिनभर
भुख तीस बैठीं च
सांकी सुकी ग्या बिचरी क
गली तीसन उबयीं च
हथ्यूं मां मेहंदी रचैकी
श्रृंगार खुब कर्युं च
त्यार बान दादा बौ
बिगरेली ब्योंली बंणी च
जरा भी फिकर ह्वैली
बगत पर घर यैली
आज किसा मा पव्वा ना दा
कुई नई निशाणी लैली
वा त्यार बान हे नरबै
भुख तीसी बैठीं च
त्वै कन नी फिकर भैजी
तेरी अपणी महफिल सजयीं च
ठ्यकों मा बैठीक त्यारु
स्वीच भीआफ कर्यूं च
नशा मा चुर भुनी
यांमा कुछ नी धर्युं च
वा बिचरी त्यार बान
भैर भितर कनी च
त्वै कन नी फिकर वा
जुगली जुनी क कनी च
वा तुमरी बान दिनभर
भुख तीस बैठीं च
परबात च दीदों
करवाचौथ कु त्योहार
लखांणु च सुदेश भटट
तुमकुन पैली यु रैबार
बगत पर घर पौंछी क
अपणी पुजा करै लेन
दोस्तु की महफिल
फिर कभी सजै लेन
वा तुमरी बान दिनभर
भुख तीसी बैठीं
सर्वाधिकार सुरक्षित@सुदेश भटट(दगडया) सबी दीदी भूल्युं भै बंधुओं तै करवाचौथ की शुभकामनाओ की दगड यु संदेश

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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मेरु अपणु विचार ' जु काफ़ी हद तक सच च। मेरी या रचना ,मेरु लेख आप सब्यु क तरफ़ ।
शीर्षक - मेरी ब्वारी

ब्यो मेरु कैरी बाबाजी न
नोनी मैकु लैयिनी।
अपर जिदंगी भरक कमायीक
सोदा केरीयेनी।
बुढ्या म्यार ब्वे, बाबा
आस उकी ब्वारी पन।
ब्वारी बिचारी भुनी ए जी
यू काम कनक्वे कन।
जु क्वीं काम बतादु
आखीं मै देखी घुरादी।
कुछ बोल दिदू त
मैतक धौस मे दिखादी।
भूलना छया तुम दहेजक केस
ज़मानत बी नी हूदी।
मेरु बसमा नी तुमरा सी
गोरु,गुठ्यारुक काम।
नी कटैद सी पुगडियो क घास
धाण-धंधा तुमारु।
अर एक ओर ज़रूरी बात
टक लगैकी सुना।
अपर ब्वै,बुबा बी जरा समझे दिया
ज़्यादा बरड-बरड नी कना रया।
द्धी रुटी जु मिलना छिन
टुप-टुप खै लिया।
अर गोर,बखरा,ढिबरा
झट बेच द्यावा।
आज , भोल डेरा एकी
मै बी दगडी लैजावा।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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हैंसदी रै ख्यल्दी रै
टिकुली बिंदुली चमकदी रै
मुंड मा सिंदुर तेरो
फूलु सी डाली हैंसदी रै
द्वी हथी चुडयुं न भरै
हतेली मा मेहंदी रचदी रैन
नाक मा फुल की चमक
खुट्य माुं पैजीब बजदी रैन
हैंसदी रै ख्यल्दी रै
टिकुली बिंदुली चमकदी रै
देवी दयबतों की दीदी भुली
आशीर्वाद तुमतै मिलणा रैन
घर ह्वा या परदेश स्वामी
सुखी श्यांदी रखणा रैन
तेरी दुनिया की डाली मा दीदी
खुशियों क फूल लगदी रैन
तेरी जुनी सी ऊज्याली मुखडी
मुल मुल हैंसदी रैन
हैंसदी रै ख्यल्दी रै
तेरी टिकुली बिंदुली....
सर्वाधिकार सुरक्षित@सुदेश भटट(दगडया) की करवाचौथ पर दीदी भूल्युं कुन सादर सप्रेम भेंट

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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Shailendra Joshi
October 25 at 1:26am · Edited ·

ऐ क्या बोलती तू चलती क्या गैरसैंण
ऐ क्या करू मै आके गैरसैण
नाचेगे गायेगे भाषण देगे तिरपाल
लगाके विधानसभा सत्र करेगे
महरूम रंग की ऐपण डिजायन वाली
पहाड़ी टोपी पहनेगे
कौन सी टोपी जानू
वही जो आजकल
हर उतराखंडी मुंड दिख जाती है
फिर क्या करेगे
फोटो खिचवायेगे
फेसबुक अपलोड करेगे
दाल भात खायेगे
घाम तापेगे
खटाई खायेगे माल्टे नारंगी की
उतराखंड दिवस मनायेगे
गैरसैंण दो दिन मौज मनायेगे
फिर देहरादून आ जायेगे .........................................शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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उत्तरखंड स्थापना दिवस हास्य व्यंग .......शैलेन्द्र जोशी

नेता जी बोलते है
उत्तराखंड का हर डांडा स्विजरलैंड है

पर हर डाण्डे पर सिर्फ नाच गाना हो रहा है
स्थापना दिवस भी सिर्फ मेला कौथिग भर रह गया .
नेता जी बोलते है
संगीत दर्द मिटाने की दवा है विकास हो सकता है नहीं
इसलिये नाच गाना जरुरी है स्थापना दिवस पर
नेता जी शेर सुनाते है रटा रटाया
शहीदो की चिताओ पर लगे मेले
वतन पर मर मिटने वालो का यही बाकी निशान होगा
जय भारत जय उत्तराखंड मुझे कही स्थापना दिवस पर जाना नाच गाना सुनने जाना है .

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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कविता उत्तराखंड की बालकृष्ण डी ध्यानी
October 20 at 7:53am ·

फिर बी फैशन हो ऐसा जी

खानु कू नि पैंसा
फिर बी जमानु चैणु ऐसा जी
फिर बी फैशन हो ऐसा जी

छोरी जनि लट्लु
ब्याल च की बैठूल नि समझने हो
फिर बी फैशन हो ऐसा जी

बोबा व्हैगे बोई जी
बोई व्हैगे अब बोबा हो
फिर बी फैशन हो ऐसा जी

कन बदली हुणि च
वो कख जाने की सोचणी हो
फिर बी फैशन हो ऐसा जी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
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पहली बार मुझे लगा है ऐसा
पहली बार मुझे लगा है ऐसा
कोई मिला मुझे बिलकुल मेरे जैसा
पहली बार मुझे लगा है ऐसा .......
आँखें बंद करूँ या खोले रखूं मै
उठ जाऊं या फिर सोये रहूँ मै
ये अँधेरी रात वो सुबह के सवेरे
कुछ भी नहीं रहा अब बस में मेरे
पहली बार मुझे लगा है ऐसा .......
वो मीठी मीठी नींद जगी है मुझ में
भीनी माटी की वो सुगंध मिली है उसमे
पहली बरखा की फ़ुवार ने छुआ है
नेमतों ने आकर मेरे दिल से कहा है
पहली बार मुझे लगा है ऐसा .......
प्यार में जीना गुनाह लगता था
तुम से ना मिला था मै तब लगता था
मिली है जब से ये तेरी रंग नूर की आँखें
पागल था मै तब या मै अब लगता हूँ
पहली बार मुझे लगा है ऐसा .......
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
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दरा बौ उवाच (जोक्स, हंसुड़ी , हँसिकाएँ ) -भाग 13
संकलन - भीष्म कुकरेती -
कजे (पति ) - मेरी कज्याणिन मि तै धार्मिक मनिख बणै
दुसर -सच्ची ?
कजे - हाँ जब तक ब्यौ नि ह्वे छौ मि नरक पर क्त्तै बि विश्वास नि करदो छौ।
XXX
कज्याणि -
यदि भारत जैल्या तो साड़ी लै जयाँ जी
यदि दुबई जैल्या तो गहणा लै जयां जी
यदि फ्रांस जैल्या तो इतर लै जयां जी
कजे चिरड़ेक - यदि मि नरक जौलु तो ?
कज्याणि - अपण वीडिओ MMS भेजी दियां जी
XXX
कज्याणि -मि जू बि बुल्दु तुम एक कंदूड़न सूणिक हैंक कंदूड़न भैर गाडि दींदा।
कजे - अर मि जू बि बुल्दु तू द्वी कंदूड़न सूणिक गिच्च बिटेन भैर गाड़ि दींदी।
XXX
कज्याणि - द्याखदी ! तुम कथगा म्वाट ह्वे गेवां धौं
कजे - त्वी बि त मोटी हूंदी जाणि छे ?
कज्याणि - ह्यां मि त ब्वे बणन वाळ छौं
कजे - मी बि त बुबा बणन वाळ छौं।
2 /11 /2015 Copyright ? चुरायुं माल च तो म्यार क्वी अधिकार नी च

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फिर बी फैशन हो ऐसा जी
खानु कू नि पैंसा
फिर बी जमानु चैणु ऐसा जी
फिर बी फैशन हो ऐसा जी
छोरी जनि लट्लु
ब्याल च की बैठूल नि समझने हो
फिर बी फैशन हो ऐसा जी
बोबा व्हैगे बोई जी
बोई व्हैगे अब बोबा हो
फिर बी फैशन हो ऐसा जी
कन बदली हुणि च
वो कख जाने की सोचणी हो
फिर बी फैशन हो ऐसा जी
बालकृष्ण डी ध्यानी
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जखि म्यारा स्वामी वखि मि जी
जखि म्यारा स्वामी वखि मि जी
देश हो या हो अब भैरदेशा जी
जखि म्यारा स्वामी वखि मि जी
लुन रोटी अब मिल नि खाणु जी
बर्गर पिज्जा जब म्यारा स्वामी लाणु जी
जखि म्यारा स्वामी वखि मि जी
रामी नि बनने ना मीथै बहूरानी जी
पैल टिकिट कटै जब स्वामी मुंबई दिखाणु जी
जखि म्यारा स्वामी वखि मि जी
ये उकाला का बाटा अब व्हैजा टाटा
दोई मैन की छुट्टी मा स्वामी स्विजरलैंड घुमाणु जी
जखि म्यारा स्वामी वखि मि जी
हीटे हीटे ये पहाड़ किले अब कमरी पटणु जी
हवाई जहाज मा जब म्यारा स्वामी मि थे उढणु जी
जखि म्यारा स्वामी वखि मि जी
बालकृष्ण डी ध्यानी
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