Author Topic: शेर दा अनपढ -उत्तराखंड के प्रसिद्ध कवि-SHER DA ANPAD-FAMOUS POET OF UTTARAKHAND  (Read 83472 times)

पंकज सिंह महर

  • Core Team
  • Hero Member
  • *******
  • Posts: 7,401
  • Karma: +83/-0
Mere Pass To Bus Hasne bhaar padi Hai.

Jiska 1 Or

च्योल  कुणा मी बाब कै  चूटूल
ब्वारि कुणे मी सास को कुटूल
भाई कूणी मी भाई कै लूटूल
और दुनि कुणे मी ठूल रे मी ठूल 

 


शेर दा अनपड़ की दो ऑडियो कैसेट उनकी कविताओं पर बाज़ार मे बहुत पहले ही आ चुकी है..

   -     पंच मियाव
  -     हसन बाहर

maja aa gaya himansu jee, samajik vyawastha par kya prahar kiya hai SHER DA ne

Risky Pathak

  • Core Team
  • Hero Member
  • *******
  • Posts: 2,502
  • Karma: +51/-0
घर मे न्हेति म्येर छबेली
मे कै  दगेड खेलु होलि
होई घमिक रे चैत मे
ओ इजा सैन लतिक रे मैत मे

कैक करू मुख लाल
कै कै लगु रंग गुलाल
कैक लूसू फूल धमेली
मी कै दगेड खेलु होलि

Risky Pathak

  • Core Team
  • Hero Member
  • *******
  • Posts: 2,502
  • Karma: +51/-0
होलि जो यो तयार भय
सैन बैग न्यार भय
मैस रनकर भिदेर बे   
स्यें रंकर भैर बे

लोग मारने बोली टोली
मे कै  दगेड खेलु होलि
घर मे न्हेति म्येर छबेली
मे कै  दगेड खेलु होलि



पंकज सिंह महर

  • Core Team
  • Hero Member
  • *******
  • Posts: 7,401
  • Karma: +83/-0
घर मे न्हेति म्येर छबेली
मे कै  दगेड खेलु होलि
होई घमिक रे चैत मे
ओ इजा सैन लतिक रे मैत मे

कैक करू मुख लाल
कै कै लगु रंग गुलाल
कैक लूसू फूल धमेली
मी कै दगेड खेलु होलि


होली फटिक रै चैत में, सैंणी लटिक रै मैत में,
कैकी करुं मुखड़ी लाल, कै के लगुं रंग गुलाल।

हिमांशु भाई शेर दा की वह कविता भी सुनाओ, जिसमें वह ससुराल जाते हैं और वहां उनको द्स्त लग जाते हैं.....।

Risky Pathak

  • Core Team
  • Hero Member
  • *******
  • Posts: 2,502
  • Karma: +51/-0
Lo Jee pankaj Jee, Aapki farmaish puri karte hai... Kavita ko me   Mukhdo me sunaunga

Sherdaa ki Jabaani me, 1 baar jab wo apne sasuraal pahunche
ह्युनक छी कूसा रात
और सौरासक छी बात
अन्यारपट कै  मुख ले  परन  पड़ने पुजू सौरास
जाले कूसा स्येन्न  हाल ने भैस कै घास
घर मे न्हेति म्येर छबेली
मे कै  दगेड खेलु होलि
होई घमिक रे चैत मे
ओ इजा सैन लतिक रे मैत मे

कैक करू मुख लाल
कै कै लगु रंग गुलाल
कैक लूसू फूल धमेली
मी कै दगेड खेलु होलि


होली फटिक रै चैत में, सैंणी लटिक रै मैत में,
कैकी करुं मुखड़ी लाल, कै के लगुं रंग गुलाल।

हिमांशु भाई शेर दा की वह कविता भी सुनाओ, जिसमें वह ससुराल जाते हैं और वहां उनको द्स्त लग जाते हैं.....।


Risky Pathak

  • Core Team
  • Hero Member
  • *******
  • Posts: 2,502
  • Karma: +51/-0
अब हो कूसा उसू केबेर मील ने जानि
और मी छु केबेर उवील ने पछ्यानी
उवील सोचो हे भगवान् यो अन्यारपट मे को हेरो ठाद
और मीके ले हो महाराज उके देख्बेर लागन भेगो मणि मणि जाड

Risky Pathak

  • Core Team
  • Hero Member
  • *******
  • Posts: 2,502
  • Karma: +51/-0
उवील को तू को छे
मील को तू को छे
उवील को मी सैण छू
मील को मी मैन्स छू ..

अब महारज इदु मे मील  उके जान्यी ल्हें
और उवील ले मीकू पंछ्यान  ल्हें
अब ऊ जरा शर्मान फेटी
और मी जरा रिशान फेटी 

Risky Pathak

  • Core Team
  • Hero Member
  • *******
  • Posts: 2,502
  • Karma: +51/-0
ऊ भाज्बेर चुल्यान बेठी
और मी रंकर भिदेर  बेथ्यु
 महाराज भिदेर चाछी कूछा सास पकुने चहा
और सौर को पड़ी रो दहा

 

Sitemap 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 13 14 15 16 17 18 19 20 21 22