Author Topic: Take Pledge 4 Zero Tolerance to Corruption-किसी भी भ्रष्टाचार को ना सहने की शपथ  (Read 5758 times)

Uttarakhand Admin

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Take pledge that you would not tolerate corruption and if you see corruption is happening any where you will tell all about that corruption.

अपने जीवन में आप भ्रष्टाचार को ना सहने की शपथ यहाँ पर ले सकते है। शपथ लीजिये कि आप किसी भी भ्रष्टाचार को नहीं सहेंगे और यदि आप भ्रष्टाचार होते देखें तो उसे सबको बतायेंगे।

हेम पन्त

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मैं शपथ लेता हूँ कि मैं स्वयं कोई भ्रष्टाचार को बढावा देने वाला काम नहीं करुंगा... और भ्रष्टाचार सम्बन्धित कोई घटना होने पर चुप नहीं रहुंगा, किसी उपयुक्त व्यक्ति या संस्था को जरुर इसकी जानकारी दूंगा..

Mohan Bisht -Thet Pahadi/मोहन बिष्ट-ठेठ पहाडी

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mai bhi is muhim mai samil hona chahunga aur sapath laita hoon ki kabhi bhrastha char nahi karunga aur na hi hote dekhunga.. jankari hone per jarur upyukt byakti tak is message ko pahuchanuga...

is muhim ko aage badane mai  mai har sambhay prayas karunga...ye mairi pratigya hai


एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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I also take pledge that i will never keep silent whenever i see any corruption taking place there. No matter who is doing. If it is even my close friend, relative any higher officer, he / she will have to face the law for corruption.

कमल

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मैं शपथ लेता हूँ कि मैं स्वयं कोई भ्रष्टाचार को बढावा देने वाला काम नहीं करुंगा और भ्रष्टाचार सम्बन्धित कोई घटना होने पर चुप नहीं रहुंगा, किसी उपयुक्त व्यक्ति या संस्था को जरुर इसकी जानकारी दूंगा..चाहे भष्टाचार करने वाला कोई भी हो।

पंकज सिंह महर

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मैं कशम लिछूं कि मैं भ्रष्टाचारस बढ़ावा दिन वालो क्वे काम नि करुंलो और भ्रष्टाचार बटी संबंधित कै घटना हुन पर चुप्प ले नी रूं, जो ले आदिम या संस्था ये लिजी बनी रैछ, उस येकी सूचना द्यूंलो....चाहे भ्रष्टाचार करनी वालो क्वे ले हो.....भगवान कसम।

Ashok Pande

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Below is an extract from Itimes.com
http://www.itimes.com/public_main-group.php?gid=17767
"
CORRUPTION FREE INDIA (Public)
Description :

India, and let’s not mince words here, is a cesspool of corruption. The thought of stamping down corruption, deep-rooted in the fabric of the Indian society, has been beaten to death in many a film that depicts a hero valiantly fighting against the evils of corruption and its perpetrators. More often than not, it is violence that showcases itself as the solution to root out corruption. In reality though, and due to the widespread nature of corruption itself, the solution doesn’t lie in someone fronting an amazing repertoire of fighting skills or verbally incisive dialogues to get their points across.
 
Corruption, as we are often reminded, is a malaise that doesn’t need treatment as it could potentially rear its ugly head at unwelcome junctures in the future. It requires a massive effort to raise not just awareness but strategies to tackle and obliterate corruption completely. Due to the massive scale of such an operation, the logistics can be frightening if not downright daunting to say the least.
 
Corruption is a pest and invariably endangers the morals of the entire country. It is the greatest single bane of our society today and is a bondage of our soul and being. Some go as far as saying that corruption is part of our DNA. This is interesting as corruption is never systematic because there is no rhyme nor reason for its existence. It is the cold, calculated theft of opportunity from the men, women and children who are least able to protect themselves. Who is corrupt and who isn’t corrupt? These are the questions that are being raised, but this is not how corruption is solved. The duty of every citizen is to challenge corruption.
 
Despite the obvious hindrances, there are some individuals and organisations who step up to the task and let their good intentions be known to everyone. It only takes a few dedicated and persevering souls to garner support for such a worthy cause."


I Ashok Pande, take pledge for zero tolerance of corruption- I will expose corruption seen in Govt, Quasi Govt undertakings and strive to make my Matru Pitru bhumi  pure, pristine, honest and humane.

Sunder Singh Negi/कुमाऊंनी

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दोस्तो य़ह टोपीक पढकर बहुत अच्छा लगा। हमै सपथ ही नही लेनी है बल्कि इसे उखाड कर नष्ट कर देना है।
यह अच्छी बात है की आप कम से कम सपथ तो ले रहे हो आपका सपथ लेने का मतलब है, और का मागॅ दशॅन करना, औरो को प्रेणा देना।
अब बात रह गयी (मेरी, हमारी) शपथ लेने की तो (मै, हम) भी शपथ लेता हु.
लेकिन शपथ लेने से पहले मै आपको यह बतलाना चाहता हु कि गौर कीजियेगा,

मै भष्टाचार का पैदाईसी दुशमन हु।

Devbhoomi,Uttarakhand

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दोस्तों ये बहुत ही बढ़िया टोपिक है ये लेकिन सबसे पहले हमें भ्रष्टाचार का अर्थ मालुम होने चाहिए,जो की हम सब के लिए जरूरी है! अगर सपथ लेने से भ्रष्टाचार ख़त्म हो जाता तो और क्या चाहिए था एक साधारण इंसान को, सपथ तो हमारे देश के नेता भी लेते हैं, और ये नेता तो गीता महाभारत और कुरान की सपथ लेते है, फिर भी भ्रष्टाचार ख़त्म नहीं होता बल्कि ये भ्रष्टाचार को बढावा देने की सपथ लेते हैं!

मैं तो बिलकुल भ्रष्टाचार के खिलाफ हूँ वो जब से होश संभाला है न कभी किसी को परशान किया और न ही शायद कभी करूंगा और न ही किसी को करने दूंगा,और न किसी के ऊपर ये भ्रष्टाचार की परिछाई पड़ने दूंगा यही मेरी सपथ है! और ये सपथ मैंने तब खाई थी जब मैंने अपने माँ बाप को भ्रस्ताचार के खिलाफ लड़ते और आवाज उठाते देखा था ! दोस्तों मेरे माँ बाप के ऊपर भी लोगों ने कई तरह से परेशान करने की कोशिश थी लेकिन जब से मैंने होश संभाला सबका हिशाब चुक्दा कर दिया जिसने भी मेरे माँ बाप को परशान किया उसके जबाब ब्याज सहित लोटा दिया है! और न ही मैं कभी भी किसी के ऊपर भ्र्श्ताछार होने दूंगा !

लेकिन  भ्रष्टाचार हमारे जीवन का हिस्सा बन गया है। ज्यादातर लोग इसके आदी हो गए हैं। यह खतरे का संकेत है। इससे भ्रष्टाचार के दंड से बचने की प्रवृत्ति बढ़ेगी और भ्रष्टाचार को स्वीकृति देने की संस्कृति और मजबूत होगी। भ्रष्टाचार का खामियाजा सबसे अधिक गरीब और कमजोर वर्ग के लोगों को भुगतना पड़ता है।

गरीबी उन्मूलन की योजनाओं का इससे बंटाढार हो जाता है, कानून एवं न्याय का राज खतरे में पड़ जाता है। नागरिक जिम्मेदारियों और मर्यादित आचरण के आदर्शों की जगह संकीर्ण स्वार्थों पर आधारित दृष्टिकोण हावी हो जाते हैं। आदर्शवादी युवा पीढ़ी के लिए यह जहर का काम करता है। हमें इस भ्रष्टाचार नामक कीटाणु को जड़ से उखाड़ फेंकने की सपथ लेनी और उस पर अमल करना है !     


 

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