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Dehradun Capital of Uttarakhand-देहरादून, उत्तराखण्ड की राजधानी(अस्थाई)

Started by Devbhoomi,Uttarakhand, December 13, 2009, 07:34:42 AM

Devbhoomi,Uttarakhand

                                        देहरादून के धार्मिक स्थल
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'टपकेश्वर मंदिर,देहरादून




यह मंदिर सिटी बस स्टेंड से 5.5 कि.मी. की दूरी पर गढ़ी कैंट क्षेत्र में एक छोटी नदी के किनारे बना है। सड़क मार्ग द्वारा यहां आसानी से पहुंचा जा सकता है। यहां एक गुफा में स्थित शिवलिंग पर एक चट्टान से पानी की बूंदे टपकती रहती हैं। इसी कारण इसका नाम टपकेश्वर पड़ा है।

शिवरात्रि के पर्व पर आयोजित मेले में लोग बड़ी संख्या में यहां एकत्र होते हैं और यहां स्थित शिव मूर्ति पर श्रद्धा-सुमन अर्पित करते हैं।

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गुरु रामराय दरबार,देहरादून

क्षेत्र की कला ने दरवार साहिब की पेंटिग, गुरू रामराय की सीट को 17 वी शताब्दी के मध्य तक बहुत अधिक प्रभावित किया हैं। ये देखने योग्य दृश्य है। आर्चियोलोजिकल सर्वे आफ इण्डिया ने दरवार साहिब की पेटिंग का एकाकिकरण किया है जो मुगल, राजस्थान और काँगडा शैली का है।

गुरू रामराय के आँगन की दीवारे विभिन्न विषयो पर बहुत अच्छी सजी हुई है पेटिंग को प्रस्तुत करती हैं। कुछ मुख्य दृश्य महाभारत, गीता, रामायण और कृष्ण लीला से है। इसके अतिरिक्त नूरजहाँ, हीर-राँझा और लैला-मजनू के है और ब्रिटेनवासी भी प्रसिद्ध दरवार साहिब के पैटिंग में स्थान पाते है।

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संतौला देवी मंदिर,देहरादून

देहरादून से लगभग 15 कि.मी. दूर स्थित प्रसिद्ध संतौला देवी मंदिर पहुंचने के लिए बस द्वारा जैतांवाला तक जाकर वहां से पंजाबीवाला तक 2 कि.मी. जीप या किसी हल्के वाहन द्वारा तथा पंजाबीवाला के बाद 2 कि.मी. तक पैदल रास्ते से मंदिर पहुंचा जा सकता है।

यह मंदिर लोगों के विश्वास का प्रतीक है और इसका बहुत सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व है। लोकप्रिय कथानक के अनुसार दुश्मनों से मुकाबला करने में खुद को अक्षम पाने के बाद संतलादेवी और उनके भाई ने इसी जगह पर अपने हथियार फैंकने के बाद ईश्वर की प्रार्थना की थी।

उनकी प्रार्थना सुनी गई और वे पत्थर की मुर्तियों में तब्दील हो गए। शनिवार को देवी और उनके भाई के पत्थर में बदलने के दिवस के रूप में देखा जाता है।

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लक्ष्मण सिद्ध,देहरादून

ऋषिकेश की ओर देहरादून से 12 कि.मी. दूर यह एक प्रसिद्ध मंदिर है। मंदिर के पास स्थित सुसवा नदी इसकी खूबसूरती और अधिक बढ़ा देती है। प्रत्येक रविवार को जब लक्ष्मण मेले का आयोजन किया जाता है,

उस अवसर पर काफी संख्या में लोग यहां आते हैं। स्थानीय दंतकथा के अनुसार राम के भाई लक्ष्मण ने एक ब्राह्मण की हत्या के पाप से खुद को मुक्त करने के लिए यहां पर तपस्या की थी।



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चन्द्रबाणी या चंद्रबनी,देहरादून



देहरादून-दिल्ली मार्ग पर देहरादून से 7 कि.मी. दूर यह मंदिर चन्द्रबाणी (गौतम कुंड) के लिए प्रसिद्ध है। पौराणिक कथाओं के अनुसार इस स्थान पर महर्षि गौतम अपनी पत्नी और पुत्री अंजनी के साथ निवास करते थे.

इस कारण मंदिर में इनकी पूजा की जाती है। ऐसा कहा जाता है कि स्वर्ग-पुत्री गंगा इसी स्थान पर अवतरित हुई, जो अब गौतम कुंड के नाम से प्रसिद्ध है। प्रत्येक वर्ष श्रद्धालु इस पवित्र कुंड में डुबकी लगाते हैं। मुख्य सड़क से 2 कि.मी. दूर, शिवालिक पहाड़ियों के मध्य में यह एक सुंदर पर्यटन स्थल है।

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साई दरबार,देहरादून

राजपुर रोड पर शहर से 8 कि.मी. की दूरी पर घंटाघर के समीप साई दरबार मंदिर है। इसका बहुत अधिक सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व है तथा देश-विदेश से दर्शनार्थी यहं आते हैं। साई दरबार के समीप राजपुर रोड पर ही भगवान बुद्ध का बहुत विशाल और भव्य तिब्बती मंदिर है।

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बुद्ध की मूर्ति,देहरादून

यह देहरादून का एक अन्य बड़ा आकर्षण है। 103 फीट ऊंची यह मूर्ति दलाई लामा को समर्पित है। यह खूबसूरत बगीचे से घिरा हुआ है जिसमें तरह-तरह के रंग-बिरंगे फूल हैं। देश-विदेश के काफी सारे पर्यटक शांति के इस प्रतीक को श्रद्धांजलि देने के लिए यहां पर आते हैं।



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घंटाघर  देहरादून

ईंट और पत्थर से बना देहारादून का यह घंटा घर यहां आनेवाले लोगों में आकर्षण का केंद्र है। इसमें एक मुख्य सीढ़ी है, जिसके सहारे सबसे ऊपरी तल पर पहुँचा जा सकता है।

इसमें अर्द्ध गोलाकार खिड़कियाँ हैं। मीनार के शिखर पर सभी 6 आकृतियों में प्रत्येक पर घड़ी रखी हुई है। लाल और पीले रंग की संरचना वाली मीनार के सभी 6 भागों पर सीमेंट की जाली सजाई गई है। सभी 6 दरवाजों के ऊपर खूबसूरत झरोखे लगे हुए हैं।