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Chopta Tungnath Mini Switzerland of Uttarakhand-चोपता तुंगनाथ उत्तराखंड

Started by Devbhoomi,Uttarakhand, January 17, 2010, 08:16:24 AM



Devbhoomi,Uttarakhand


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मिनी स्वीट्जरलैंड को 'दीदवर' का इंतजार

ऊखीमठ। चार धाम यात्रा के रफ्तार पकड़ते ही जनपद के सभी पर्यटक स्थल सैलानियों से गुलजार होने लगते हैं। मिनी स्वीट्जरलैंड के नाम से विख्यात चोपता में इन दिनाें देश विदेश से हजारों पर्यटक हसीन वादियाें का लुत्फ उठाने पहुंच रहे हैं। लेकिन विद्युत, संचार, सफाई, स्वास्थ्य और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधा नहीं मिलने से पर्यटकाें को हर साल मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।


ऊखीमठ-मंडल-गोपेश्वर मोटर मार्ग पर ऊखीमठ से 27 किमी. दूर चोपता हिल स्टेशन है। बदरी-केदार के दर्शन को आने वाले तीर्थयात्री हर साल बड़ी संख्या में यहां पहुंचते हैं। लेकिन प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर इस रमणीक स्थल पर बुनियादी सुविधाओं का अभाव बना हुआ है।


पर्यटक लालटेन व कैंडल के सहारे रात गुजारते हैं। स्वास्थ्य सुविधा के नाम पर विभाग प्राथमिक उपचार के लिए सिर्फ मरहम पट्टी, आक्सीजन और दवाईयां ही उपलब्ध रहती है। जिससे सैलानी यहां दुबारा आने से कतराते हैं। बंगाल से परिजनाें संग चोपता घूमने पहुंचे मनोज घोष बताते हैं कि प्रकृति ने क्षेत्र की खूबसूरती को खूब निखारा है, मगर सुविधाओं के नाम पर कुछ नहीं किया गया। जिससे परेशानी उठानी पड़ती है।


स्थानीय व्यापारी सुबोध मैठाणी, राजेंद्र मैठाणी, विक्रम भंडारी, विजयपाल राणा आदि बताते हैं कि सेंचुरी एरिया होने से यहां का विकास ठप पड़ा हुआ है। विद्युत व्यवस्था के लिए सौर ऊर्जा का प्लांट लगाने की मांग कई बार शासन प्रशासन से की गई, लेकिन कोई सुध नहीं ले रहा। बुनियादी सुविधाएं नहीं मिलने से पर्यटकों को होती है निराशा


Amarujala

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 ऊखीमठ:भगवान तुंगनाथ के कपाट 16 और मद्महेश्वर के कपाट 20 मई को श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए जाएंगे।

रविवार को बैसाखी पर्व के अवसर पर पंचाग गणना के अनुसार धर्माधिकारी, वेदपाठी, हक-हकूधारी एवं पंचगाई के लोगों की मौजूदगी में अपने-अपने शीतकालीन गद्दीस्थलों में कपाट खोलने की घोषणा की गई है। पंचगद्दी स्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ में द्वितीय केदार भगवान मद्महेश्वर के कपाट खुलने की तिथि 20 मई को निर्धारित की गई। 16 मई को ओंकारेश्वर मंदिर से सभामंडप में लाई जाएगी, 17 मई को ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ ही अविस्थान करेगी। 18 मई को भगवान की चलविग्रह डोली ओंकारेश्वर मंदिर से अपने धाम के लिए प्रस्थान कर रांसी में रात्रि विश्राम करेगी। 19 को रांसी से चलकर गौंडार तथा 20 मई को गौंडार से मद्महेश्वर धाम पहुंचेगी, इसी दिन शुभलग्नानुसार प्रात: 11 बजे भगवान के कपाट आम श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए जाएंगे। वहीं मक्कूमठ के मार्कंडेय मंदिर में तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ की कपाट खोलने की तिथि 16 मई निर्धारित की गई। 14 मई को भगवान तुंगनाथ की डोली मुख्य मंदिर से प्रस्थान कर रात्रि विश्राम के लिए भूतनाथ मंदिर पहुंचेगी। 15 को भूतनाथ मंदिर से चोपता तथा 16 मई को तुंगनाथ पहुंचेगी, जहां इसी दिन शुभलग्नानुसार प्रात: 7.15 बजे भगवान के कपाट आम श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए

Dainik Jagran

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

पहाड़ों की गोद में बसे इस मंदिर में छिपा है भगवान शिव का एक बड़ा रहस्य

देवभूमि उत्तराखंड में स्थित यह अद्भुत मंदिर महाभारत काल में भगवान शिव के क्रोध को शांत करने के लिए बनाया गया था।  यह मंदिर एक हजार साल पुराना है और पंच केदारों में यह सबसे ऊंचाई पर मौजूद है। तुंगनाथ की चोटी तीन धाराओं का स्रोत है, जिनसे अक्षकामिनी नदी बनती है। यह मंदिर चोपता से 03 किमी दूर स्थित है। माना जाता है कि कुरुक्षेत्र में हुए नरसंहार के कारण शिवजी पांडवों से नाराज हो गए थे। उनका गुस्सा शांत करने के लिए ‌ही पांडवों ने तुंगनाथ मंदिर का निर्माण किया था। तुंगनाथ उत्तराखंड में गढ़वाल मंडल के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित एक पर्वत है। इस पर्वत पर ही तुंगनाथ स्थित मंदिर है। तुंगनाथ मंदिर 3,680 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यहां पंच केदारों में से एक रूप में भगवान शिव की पूजा होती है. ये क्षेत्र गढ़वाल हिमालय के सबसे सुंदर स्थानों में से एक है। जुलाई-अगस्त के महीनों में यहां मीलों तक फैले मखमली घास के बुग्याल स्वर्ग में होने का अहसास कराते हैं। यहां के मैदानों की तुलना स्विट्जरलैंड से की जाती है।

    Source amar ujala