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Major Development News Of Uttarakhand - उत्तराखंड के विकास की प्रमुख खबरे

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 05, 2007, 11:54:46 AM

Devbhoomi,Uttarakhand

बागेश्वर में बनेगा हाइटेक बस डिपो



देहरादून। वन विभाग की एनओसी मिलने के बाद बागेश्वर रोडवेज बस डिपो निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। पांच करोड़ की लागत से बनने वाले इस हाइटेक डिपो के लिए 433 लाख की स्वीकृति भी मिल गई है।

परिवहन व्यवस्था को बेहतर करने को लेकर सूबे में चार हाइटेक रोडवेज बस अड्डा बनाये जाने की योजना करीब दो वर्ष बनाई गई। इसके तहत सबसे पहले बागेश्वर में काम शुरू करने का निर्णय लिया गया, पर किन्हीं कारणों से योजना परवान नहीं चढ़ पा रही थी। विभागीय समीक्षा में पता चला कि डिपो में बस स्टेशन के साथ ही एक कार्यशाला का निर्माण भी प्रस्तावित है। इसके लिए जरूरी 0.75 हेक्टेयर भूमि के लिए वन विभाग से अनुमति लेनी होगी। नवंबर में राज्य स्थापना दिवस के मौके पर मुख्यमंत्री डा.रमेश पोखरियाल निशंक द्वारा प्रस्तावित सभी बस डिपो के निर्माण शीघ्र कराए जाने की घोषणा के बाद इस पर तेजी से काम शुरू हुआ।

परिवहन और वन विभाग के बीच हाल ही में हुई वार्ता में बागेश्वर डिपो के लिए आवश्यक भूमि को वन विभाग द्वारा रोडवेज को हस्तांतरित किये जाने पर सहमति बनी। इसके बाद डिपो के निर्माण का रास्ता खुल गया। इधर शासन ने डिपो की प्रस्तावित लागत पांच करोड़ के सापेक्ष 433 लाख रूपये मंजूर कर लिए हैं। इसे देखते हुए परिवहन विभाग योजना पर काम शुरू करने की तैयारी में जुट गया है। सूत्रों के मुताबिक शेष तीनों डिपो के निर्माण शुरू कराने को लेकर विभागीय स्तर से कार्यवाही की जा रही है। इस पर जल्द काम शुरू होने की उम्मीद है।

http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_6190310.html

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Dehradun: With economic conditions showing a sign of recovery, Uttarakhand is giving a serious thought to developing one more industrial estate.


The state Infrastructure and Industrial Development Corporation of Uttarakhand Ltd (SIDCUL), the state government's nodal agency for the industrial development, is focusing on Sitarganj town in Kumaon region, where 1,100 acres of land is available in the non-notified area.

A decision in this regard by the SIDCUL Board has already been taken, top officials said. The master plan of Sitraganj has already been prepared, which would help the SIDCUL in developing the industrial estate.

"We are looking forward (towards) industries like pharma, IT, biotech, packaging and others areas to set up their new units at Sitarganj," said the official.

The agency has developed top industrial estates like Pantnagar and Haridwar.

The SIDCUL is also of the view that the economic conditions would improve further, which would goad the companies to take advantage of the suitable industrial scenario in the hill state

http://www.dnaindia.com/india/report_uttarakhand-to-set-up-one-more-industrial-estate_1349010

Devbhoomi,Uttarakhand

पथरीली पहाड़ों पर छुक-छुक दौड़ेगी रेल..



श्रीनगर (पौड़ी गढ़वाल)। गविवि के कार्यकारी कुलपति प्रो. एमएसएम रावत ने साहित्यकार राजीव कगडियाल की लिखी किताब उमाल का विमोचन किया।

साहित्यिक संस्था परिवेश ने नगरपालिका सभागार में विमोचन समारोह आयोजित किया। समारोह में रचनाकारों ने होली से जुड़ी रचनाओं के साथ ही करारे हास्य व्यंग्य प्रस्तुत कर दर्शकों को लोटपोट किया। रेल बजट पर अंबिका जोशी ने अपनी रचना सुनाते हुए कहा कि पथरीली पहाड़ों पर छक-छक दौड़ेगी रेल.., जयकृष्ण पैन्यूली ने अपनी नई रचना गंगा ने औकात बता दी गंगा हरने वालों को.. और सुबोध हटवाल की रचना बये बये की गैरसैंण निकल गैनि सिस्करि निशंक जी का कंदूड़ पर मारा जरा पिचकारी.. और अवनीन्द्र उनियाल की रचना होली के हुड़दंग में श्रोताओं द्वारा भरपूर सराही गयी। डा. उमाशंकर थपलियाल ने छि भै कन होली खेलणा छन, प्रेमदत्त नौटियाल ने आओ बच्चों तुम्हें दिखोंदा., अनुसूया प्रसाद नौटियाल ने ढोल मंजीरे करताल हाथ ले. के साथ ही लता तिवारी, राजेश जैन, कु. पुनर्वा घिल्डियाल ने भी रचनाएं सुनाई।पूर्व पालिका अध्यक्ष कृष्णानंद मैठाणी, सुभाष थपलियाल, त्रिलोक सिंह, इंद्रमोहन नैथानी, अनीता सेमवाल भी इस अवसर पर उपस्थित थे।


http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_6222639.html

Devbhoomi,Uttarakhand

उत्ताराखंड के विकास को औद्योगिक पैकेज बढ़ाना जरूरी

अशोक लेलैंड के पंतनगर के उद्घाटन समारोह में राज्य को औद्योगिक पैकेज का मुद्दा छाया रहा। मुख्यमंत्री ने जहां राज्य की जवानी व पानी की रक्षा के लिए पैकेज बढ़ाने की हिमायत की वहीं केंद्रीय मंत्री भारी उद्योग ने इस दिशा में दिल्ली में पैरवी करने का भरोसा दिलाया।

पंतनगर औद्योगिक आस्थान में स्थित अशोक लेलैंड के प्लांट का मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने रिमोट का बटन दबाकर शिलापट का लोकार्पण किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि देश की एकता, सुरक्षा, पर्यावरण की सुरक्षा तथा युवा शक्ति के पलायन को रोकने के लिए विशेष औद्योगिक पैकेज का बढ़ाया जाना जरूरी है। उत्ताराखंड देश का माथा है। इसके सम्मान की रक्षा आवश्यक है। यहां की विषम परिस्थितियों के कारण ही पैकेज की अवधि बढ़ाये जाने की मांग की जा रही है।

http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_6231724.html

सत्यदेव सिंह नेगी


योग बना बड़ा कारोबार
बाउंटीफुल, ब्यूटीफुल औऱ ब्लिसफुल-ये है योग का नया नारा। यह नारा पूरा होता है एक और बी के साथ और वो है बिजनेस। ऋषिकेश में चल रहे अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव में योग के कई नए रूप नजर आ रहे हैं। योग की साधना अब उद्योग की सफलता में बदल रही है।

अमेरिका में कुंडलिनी ध्यान योग की मशहूर संस्था गोल्डन ब्रिज की संस्थापक गुरुमुख कौर खालसा का दावा है कि वो छह हजार से अधिक लोगों को योग प्रशिक्षक बना चुकी है। उनके शिष्यों में ग्लैमर की दुनिया की हस्तियाँ मैडोना और एंजेलिना जोली जैसे लोग भी शामिल हैं। गुरुमुख कौर कहती हैं कि योग लोगों को राहत दे रहा है। इसमें बुराई क्या है अगर इससे लोगों को रोजगार मिल रहा है।

डिजाइनर कपड़े, डिजाइनर जूते-चश्मा, कीमती मोबाइल और लैपटॉप का नवीनतम मॉडल, महीने में एक हफ्ते अमेरिका, एक हफ्ते अफ्रीका या यूरोप और शेष दिन भारत में। और आय हर महीने लगभग डेढ़ से दो लाख रुपए। ये परिचय है अष्टांग विन्यास योग की शिक्षक भाविनी कलण का।

भाविनी एक पाँच सितारा स्पॉ केंद्र में मुख्य योग सलाहकार और शिक्षिका हैं और दुनिया के कई देशों के योग स्टूडियोज में बतौर विशेष प्रशिक्षक बुलाई जाती हैं। 11 साल पहले भाविनी बिजनेस कंसल्टेंट थीं, लेकिन योग के प्रति रुझान उन्हें इस ओर खींच लाया।

बकौल भाविनी, आज मुझे खुशी है कि एक मिशन के साथ मैं पैसे भी कमा रही हूँ। जहाँ जुनून होता है, पैसा अपने-आप आ जाता है। योग आज काफी पेशेवर उद्यम बन चुका है। लंदनClick here to see more news from this city से लेकर स्वीडन और अटलांटा तक में योग के एक से बढ़कर एक स्टूडियोज खुलते जा रहे हैं।

चीन और अमेरिका तक : चीन के रामदेव कहे जानेवाले योग गुरू मोहन भंडारी के अनुसार, योग एक हीलिंग इंडस्ट्री है। एक थैरपी है। चीन में योगी योग के संस्थापक मोहन भंडारी पर चीनी सेंट्रल टेलीविजन ने 52 योग डीवीडी बनाई गई हैं।

चीन ही नहीं पूरी दुनिया में उनकी डीवीडी और किताबें बेशुमार बिक रही हैं। चीन के विभिन्न शहरों में उनके सात योग उपचार केंद्र हैं। इन आधुनिक योग गुरुओं से मिलकर लगता है कि आप किसी योगी से नहीं बल्कि बहुराष्ट्रीय कंपनी के प्रबंधकों से बात कर रहे हैं।

यह गलत भी नहीं है। अगर ऐसा नहीं होता तो शायद अमेरिका के सबसे महँगे व्यावसायिक केंद्र एंपायर एस्टेट और मैनहट्टन एस्टेट में योग स्टूडियोज नहीं खोले जाते। ये जानना दिलचस्प है कि योग के इस अंतरराष्ट्रीयकरण के बावजूद इसका केंद्र अब भी भारत ही बना हुआ है।

जैसे अगर किसी को विज्ञान में कोई पीएचडी करनी होती है तो वो अमेरिका जाता है, कला में मान्यता हासिल करनी हो तो यूरोप जाता है वैसे ही योग सीखने और सिखाने वालों के लिए भारत में आकर योग सीखना उनके ज्ञान पर एक मुहर है। एक सर्टिफिकेट की तरह है। इसीलिए यहाँ योग सिखाने और योग की वस्तुओं का कारोबार भी तेजी से पनप रहा है।

योगा क्लॉथ, योगा मैट्स, योगा बैंड, योगा एक्सेसरीज, योगा स्टूडियोज की डिजाइनिंग और निर्माण भी एक कौशलपूर्ण पेशा है।

योग सीखना अब सस्ता नहीं : योग सीखना सस्ता सौदा नहीं रह गया है। इसका अंदाजा भी इसी बात से लगाया जा सकता है कि ऋषिकेश के एक मशहूर योग केंद्र में एक महीने के कोर्स की फीस दो हजार डॉलर है और पश्चिमी देशों में तीन सौ से पाँच सौ घंटे तक के लिए तीन हजार से पाँच हजार डॉलर की फीस ली जाती है।

इसके अलावा मशहूर योग विशेषज्ञों के वर्कशॉप उनके नाम से बिकते हैं। साधना और ध्यान की ये कठिन विधा इतनी लोकप्रिय कैसे हो रही है। ऑस्ट्रेलिया के सिडनी शहर से आए क्लाइव ह्यू कहते हैं, कि प्रतियोगिता और आपा-धापी वाले जीवन में जहाँ मानवीय मूल्य खत्म हो गए हैं, वहीं योग लोगों को सुकून और शांति देता है। वो बताते हैं कि ऑस्ट्रेलिया में योग फिटनेस का तीसरा सबसे लोकप्रिय माध्यम है।

क्लाइव कहते हैं कि आमतौर पर लोग शुरू में सेहत के लिए योग सीखने आते हैं लेकिन जल्दी ही वो इसके आत्मिक और आध्यात्मिक पक्ष से भी जुड़ जाते हैं। उनके अनुसार ऑस्ट्रेलिया में करीब 10 हजार योग केंद्र हैं। योग के इस प्रसार से कई अलग-अलग शैलियाँ भी निकली हैं और विविध उपयोग भी।

लॉस एंजिल्स के सांता बारबरा योग केंद्र में कुंडलिनी योग और नाम योग की शिक्षक सिद्धि प्रेगनेंसी योग की प्रचारक हैं। आचार्य श्यामदास भक्ति योग के प्रचारक हैं जिनके पैकेज में योगासनों के साथ-साथ पृष्ठभूमि में भक्ति संगीत और कृष्ण कथाएँ भी चलती हैं। सुंदरी राम और भाव राम (पति-पत्नी) सैंडियागो में दीप योग के संस्थापक हैं।
उन्होंने शास्त्रीय योग अयंगार, अनुसारा, विनियोग और आयुर्वेद को जोड़कर फ्यूजन शैली विकसित की है। इसके तहत गंभीर अस्थिरोगों और मनोरोगों की चिकित्सा की जा रही है। डिप्रेशन और इंसोम्निया से जूझ रहे लोगों के लिए योगनिद्रा और नाद योग वरदान साबित हो रहा है।

मार्शल आर्ट और नृत्य से जुड़ा योग : भाविनी कलण ने कुंडलिनी योग की कक्षाओं को गति और तेजी देने के लिए कराली मार्शल आर्ट्स की मुद्राओं को योगासनों से जोड़ा है।

इसी तरह से संगीत और नृत्य पर आधारित शिव-शक्ति योग आज उन योगार्थियों को खूब भा रहा है जो सेहत के साथ-साथ नृत्य का आनंद उठाना चाहते हैं। जापान में हिकारो हाशिमोतो 23 साल की उम्र से योग का प्रसार कर रहे हैं।

उन्होंने जापान की प्राचीन विधा शिंतो, हठयोग औऱ धर्मयोग के मेल से शिंतो योगा की कला विकसित की है और आज पूरे जापान में अकेले उनके सात सौ से ज्यादा केंद्र हैं। लेकिन परंपरागत योग साधक चाहते हैं कि योग का यह जुनून मौलिक रूप में बना रहना चाहिए।

स्वामी चिदानंद मुनि कहते हैं कि नृत्य से जोड़ें या संगीत से जोड़ें लेकिन योग की मूल भावना को न छोड़ें। कम से कम योग के क्षेत्र के लोग इसे उद्योग न बनाएँ। नहीं तो उपभोग की अन्य वस्तुओं की तरह ही लोग इसे भी बहुत हल्के ढंग से लेने लगेंगे।

कुछ जगहों पर ऐसा हो भी रहा है और आज योग से जुड़ी चिंता यही है कि ये पैशन कहीं फैशन बनकर न रह जाए।


सत्यदेव सिंह नेगी

ऑटो हब बनेगा पंतनगर : देशमुख

रूद्रपुर (एसएनबी)। उत्तराखंड की धरती पर हिन्दूजा ग्रुप की औघोगिक इकाई की स्थापना होने से राज्य के विकास को गति मिलेगी। यह बात मुख्यमंत्री डॉ.रमेश पोखरियाल निशंक ने हिंदुजा ग्रुप की अशोका लीलेंड औघोगिक इकाई का शुभारंभ करने के बाद कही। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा औघोगिक पैकेज की पूर्व निर्धारित अवधि कम कर दी गई है। इसे बढ़वाने के लिए प्रयास किये जाएंगे। उन्होंने कहा कि हिंदुजा समूह का 36 देशों में कारोबार है। उत्तराखंड में उघोग की स्थापना कर समूह ने नया आयाम स्थापित किया है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेटी ने 2013 तक विशेष पैकेज दिया था लेकिन उसके बाद पैकेज की अवधि को कम कर दिया गया। इस मौके पर केंद्रीय उघोग मंत्री बिलासराव देशमुख ने कहा कि देश का विकास तभी संभव है, जब राज्य विकसित होंगे। हिंदुजा ग्रुप की औघोगिक इकाई उत्तराखंड के विकास में मील का पत्थर साबित होगी। पंतनगर आटो उघोग का हब बन चुका है। उघोग जगत प्रथम चरण में महाराष्ट्र में उघोग लगाना चाहता है, लेकिन अब उसकी निगाह उत्तराखंड पर है। उन्होंने कहा कि विशेष पैकेज के सम्बन्ध में वार्ता की जाएगी और उनका प्रयास होगा कि उत्तराखंड के विशेष पैकेज की समय सीमा बढ़ा दी जाए। देशमुख ने कहा कि पंतनगर कृषि विश्वविघालय की विश्व में अलग पहचान है। औघोगिक इकाइयों की स्थापना होने से इस क्षेत्र की ख्याति में चार चांद लग गये हैं। ऋषिकेश से आये स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि योग एवं आयुर्वेद की भूमि पर उघोगों का समागम अदभुत नजारा पेश करता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इन इकाइयों की स्थापना से प्रदेश के युवाओं को नई दिशा मिलेगी तथा पलायन रूकेगा। हिंदूजा समूह के आईजी साहनी ने आगंतुकों का स्वागत किया तथा प्रबंधक आर. शेषसाय ने धन्यवाद दिया। इस अवसर पर प्रदेश के उघोग एवं परिवहन मंत्री बंशीधर भगत, बीस सूत्रीय कार्यक्रम कियान्वयन एवं अनुश्रवण के उपाध्यक्ष हरभजन सिंह चीमा, टीडीसी के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी, सांसद विजय बहुगुणा, विधायक प्रेमानंद महाजन, बहुउद्देशीय वित्त एवं विकास निगम के उपाध्यक्ष विजय मंडल, अल्पसंख्यक आयोग के उपाध्यक्ष मजहर नईम नवाब, पंतनगर विश्वविघालय के कुलपति डॉ.बी.एस.बष्टि, आईजी कुमाऊं जी.सी.पांडे, जिलाधिकारी मोहन चंद्र उप्रेती के अलावा हिन्दूजा समूह के गोपीचंद हिंदूजा, प्रकाशबीर हिंदूजा, अशोक हिन्दूजा तथा धीरज हिन्दूजा सहित बड़ी संख्या में गणमान्य व्यक्ति-उघमी तथा सभी जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित थे। हिन्दूजा समूह के प्रबंधक श्रीचंद हिंदूजा ने कहा कि औघोगिक इकाई की स्थापना का उद्देश्य धन कमाना नहीं बल्कि प्रदेश के युवाओं को रोजगार के अवसर प्रदान करना है। इसके तहत आशीर्वाद योजना शुरू की गई है। समूह प्रत्येक वर्ष एक हजार इंटर पास छात्रों का चयन करेगा और चार वर्ष का तकनीकी शिक्षा का डिप्लोमा दिलाएगा। इस शिक्षा के दौरान प्रत्येक छात्र को 5500 रूपये छात्रवृत्ति भी प्रदान की जाएगी।
http://www.rashtriyasahara.com/NewsDetails.aspx?lNewsID=139726&lCategoryID=49

सत्यदेव सिंह नेगी


पावर प्रोजेक्ट का जिन्न फिर बाहर

देहरादून (एसएनबी)। हाल ही में आवंटित लघु जल विघुत परियोजनाओं का 'जिन्न' एक बार फिर बोतल से बाहर आ गया। इस प्रकरण पर दोनों विपक्षी दलों, कांग्रेस व बहुजन समाज पार्टी ने विधानसभा में जमकर हंगामा किया। विपक्षी सदस्यों ने बिजली परियोजनाओं के आवंटन में सरकार पर घोटाले का आरोप लगाते हुए सीबीआई जांच के साथ ही सदन में इस प्रकरण पर चर्चा कराने की मांग की। भारी शोर-शराबे के बीच जब सदन व्यवस्थित नहीं हो सका तो विधानसभा अध्यक्ष ने प्रश्नोत्तरकाल के बाद कार्यवाही स्थगित कर दी। भोजनावकाश के बाद भी जब विपक्षी सदस्यों का हंगामा नहीं रूका तो सदन की कार्यवाही बुधवार 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। इससे पूर्व विपक्ष ने प्रश्नोत्तरकाल चलने दिया। बजट सत्र के दूसरे दिन आज जब प्रश्नोत्तरकाल के बाद जब दोपहर एक बजे शून्यकाल प्रारंभ हुआ तो कांग्रेस व बहुजन समाज पाटी के सभी सदस्य हंगामा करते हुए वेल में आ गए। विपक्षी सदस्य हाल ही में आवंटित लघु जल विघुत परियोजनाओं के आवंटन में कथित घोटाले की सीबीआई जांच व इस पर सदन में चर्चा कराए जाने की मांग कर रहे थे। विपक्षी दलों की आ॓र से सरकार पर आरोप लगाया गया कि लघु जल विघुत परियोजनाओं के आवंटन में स्थानीय लोगों के साथ भेदभाव किया गया है जबकि निजी स्वार्थपूर्ति के लिए कुछ माफिया के हाथ परियोजनाओं को गिरवी रख दिया गया है। सरकार ने प्रदेश की लगभग 56 लघु जल विघुत परियोजनाओं को निजी क्षेत्र को सौंप दिया है। यह परियोजनाएं लगभग 965 मेगावाट की हैं। निर्धारित प्रक्रियाओं को दरकिनार करते हुए सरकार के इस कदम से भविष्य में प्रदेश के हितों को भारी क्षति पहुंचेगी। कांग्रेस की आ॓र से नेता प्रतिपक्ष डा. हरक सिंह रावत, प्रीतम सिंह, यशपाल आर्य, दिनेश अग्रवाल, किशोर उपाध्याय, मनोज तिवारी, रणजीत सिंह रावत, अमृता रावत, बलवीर सिंह नेगी, महेंद्र सिंह माहरा, गोपाल सिंह राणा व बसपा की आ॓र से नेता विधायक दल मोहम्मद शहजाद , हरिदास, सुरेंद्र राकेश, नारायण पाल आदि ने बिजली परियोजनाओं के मामले में नियम 310 के तहत विधानसभा अध्यक्ष को दी गई सूचना में कहा कि प्रदेश की प्राकृतिक संपदाओं पर पहला अधिकार यहां के निवासियों का है। यह परियोजनाएं स्थानीय निवासियों न देकर माफिया को दी गई हैं।

सौजन्य राष्ट्रीय सहारा

सत्यदेव सिंह नेगी


25 से आवंटित होंगी शराब की दुकानें

देहरादून। शासन ने मदिरा की दुकानों के आवंटन को हरी-झंडी प्रदान कर दी है। मदिरा के दुकानों का आवंटन तीन चरणों में किया जाएगा। पहले चरण में 25 मार्च को शाम 5 बजे तक आवेदन प्राप्त किए जा सकेंगे। इसके अलावा 28 मार्च को सुबह 10 बजे से आवंटन की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। दूसरे चरण के आवेदन 29 मार्च को शाम 5 बजे तक लिए जाएंगे। इस चरण की लाटरी की तिथि 30 मार्च होगी। तृतीय चरण में 31 मार्च को शाम 5 बजे तक आवेदन लिए जाएंगे। 31 मार्च को ही शाम साढ़े पांच बजे के बाद से आवंटन की प्रक्रिया शुरू होगी।

सौजन्य राष्ट्रीय सहारा

सत्यदेव सिंह नेगी


4 वर्षो से पूरा नहीं हो सका डामरीकरण

सोमेश्वर (अल्मोड़ा) : ताकुला-बसौली-बागेश्वर मोटर मार्ग में गत 4 वर्षो से डामरीकरण तथा सड़क विस्तारीकरण का कार्य चल रहा है। लेकिन इन 4 वर्षो से इस सड़क पर यात्रा करने वालों व वाहन चालकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। विभागीय हीलाहवाली के चलते जिला मुख्यालय अल्मोड़ा तथा बागेश्वर को जोड़ने वाली इस मुख्य सड़क का डामरीकरण जहां निर्माण के तुरंत बाद उखड़ने लगा है। वहीं दूसरी ओर कलमठों का निर्माण सही नहीं होने के कारण इन स्थानों में सड़क की स्थिति बनते ही बिगड़ने लगी है।

इसके अलावा बिनसर अभ्यारण्य से ताकुला के बीच लगभग 15 किमी में जगह-जगह पड़े मलबे के ढेर दुर्घटनाओं को न्यौता दे रहे हैं। क्षेत्रजनों, जनप्रतिनिधियों तथा पंचायत सदस्यों द्वारा गत वर्षो से सड़क निर्माण शीघ्र व गुणवत्तापूर्ण तरीके से करने की मांग के बावजूद सड़क की निर्माणदायी संस्था लोक निर्माण विभाग की कानों में जूं तक नहीं रेंगी है। राष्ट्रीय राजमार्ग की इस सड़क का निर्माण 4 वर्षो में भी 20 किमी पूरा नहीं हो सका है। जिसकी परिणति यह है कि सड़क बनने के साथ ही कई जगह उखड़कर मरम्मत मांगने लगी है।

क्षेत्र पंचायत सदस्य ताकुला जगदीश चन्द्र पंत, उप प्रधान संगठन अध्यक्ष कृष्ण सिंह भाकुनी, प्रभाकर भाकुनी तथा मोहन सिंह डंगवाल सहित अनेक पंचायत सदस्यों व क्षेत्रवासियों ने निर्माणदायी संस्था से डामरीकरण कार्य की गुणवत्ता के साथ कलमठों का सही निर्माण करने, यत्र-तत्र पड़े मलबे के ढेरों को हटाने की मांग की है। उल्लेखनीय है कि इस सड़क से विकासखण्ड ताकुला के दो दर्जन से अधिक गांवों के ग्रामीण आवाजाही करते हैं।
http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_6239364.html