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Historical Visits by Great Personalities in Uttarakhand - एतिहासिक यात्राये

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, January 19, 2010, 08:09:42 AM

पंकज सिंह महर

अपनी आध्यात्मिक यात्रा के दौरान स्वामी विवेकानन्द जी उत्तराखण्ड में  आये, इस दौरान वे अल्मोड़ा शहर और लोहाघाट की एक चोटी पर स्थित आश्रम की स्थापना की, जिसे अद्वैत आश्रम (मायावती) के रुप में जाना जाता है।

पंकज सिंह महर

भारतवर्ष के चक्रवती सम्राट विक्रमादित्य ने अल्मोड़ा जिले के जागेश्वर में मृत्युंजय का मंदिर वहां आकर बनवाया था तथा सम्राट शालिवाहन ने जागीश्वर का मंदिर बनवाया। पश्चात में शंकराचार्य ने आकर इन तमाम मंदिरों की फिर से प्रतिष्ठा करवाई तथा कत्यूरी राजाओं ने भी इसका जीर्णोद्धार किया।
भगवान राम के पुत्र लव और कुश ने भी यहां पर एक विशाल यज्ञ करवाया था, जिसमें कई देवी-देवताओं ने भी भाग लिया था, इस कारण यहां पर यग्य में भाग लेने वाले देवी-देवताओं के मंदिरों का भी निर्माण करवाया गया। मुख्य मंदिर का निर्माण स्वयं देवताओं के शिल्पी विश्वकर्मा जी ने किया था

पंकज सिंह महर

उत्तराखण्ड के पवित्र शहर हरिद्वार में स्थित हर की पैड़ी परराजा विक्रमादित्य के भाई भर्तृहरि ने तपस्या करके अमर पद प्राप्त किया था । उन्ही की स्मृति में राजा विक्रमादित्य ने यहां पर पैडियों का निर्माण कराया जिसके कारण यह स्थल हर की पैडी के नाम से प्रसिद्व हुआ।

हरिद्वार में ही स्थित कुशावर्त घाट पर दत्तात्रेय ऋषि ने एक पैर पर खडे होकर घोर तपस्या की थी । गंगा के प्रवाह मे उनके कुश आदि बह गये । उनके कुपित होने पर गंगा ने उन्हे वापस किया और इस स्थान का नाम कुशावर्त घाट पडा । यहां पर स्नान एवं पिण्डदान का विशेष महत्व है । इस घाट का निर्माण महारानी अहिल्याबाई ने कराया था ।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720



When Father of Nation - Mahatma Gandhi Visited Almora.. He said the following about almora.


"इन पहाड़ों पर, प्रकृति के आतिथ्य के आगे मनुष्य द्वारा कुछ भी किया जाना बहुत छोटा हो जाता है। यहाँ हिमालय की मनमोहक सुंदरता, प्राणपोषक मौसम, और आरामदायक हरियाली जो आपके चारों ओर होती है, के बाद किसी और चीज़ की इच्छा नहीं रह जाती। मैं बड़े आश्चर्य के साथ ये सोचता हूँ की क्या विश्व में कोई और ऐसा स्थान है जो यहाँ की दृश्यावली और मौसम की बराबरी भी कर सकता है, इसे पछाड़ना तो दूर की बात है। यहाँ अल्मोड़ा में तीन सप्ताह रहने के बात मैं पहले से अधिक आश्चर्यचकित हूँ की हमारे देश के लोग स्वास्थ्य लाभ के लिए यूरोप क्यों जाते है।" - महात्मा गांधी


एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Mahatma Gandhi Visit to Sult
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देश की आजादी के लिए अल्मोड़ा जनपद के
सल्ट विकास खंड के लोगों का बलिदान किसी से
छिपा नहीं है। आजादी की लड़ाई में क्रान्ति की प्रबल
भावना को देखते हुए गाँधी जी ने इस क्षेत्र को कुमाऊँ
की बारदोली का नाम दिया।
कुमाऊँ व गढ़वाल की सीमा पर बसे सल्ट के
इतिहास के पन्नों को पलटें तो यह क्षेत्र शुरू से ही
आजादी की लड़ाई में जुटा हुआ था। सविनय अवज्ञा
आंदोलन में सर्वाधिक भाग लेने वाला यह अकेला
इलाका था। यही कारण था कि आजादी मिलने तक
अंग्रेजी हुकूमत ने इस इलाके के प्रति बेहद सख्त रुख
रखा और दमन की सारी हदें तोड़ दी। 1929-30 में
पाँच पट्टियों में बसे सल्ट में कांग्रेस की सदस्य संख्या
1000 तक रही। इसी के साथ गाँव-गाँव में महात्मा
गाँधी के कार्यक्रमों की धूम मच गई। 65 में से 61
मालदारों ने इस्तीफा दे दिया तथा तंबाकू और विदेशी
वस्तुओं का बहिष्कार कर दिया। सभाओं और प्रार्थना
के लिए रणसिंघ बजाकर सूचना दी जाती थी। 17

अगस्त 1930 को सल्ट के सत्याग्रही संचालक हरगोविन्द
पंत को हिरासत में ले लिया गया। इससे पूरे इलाके में
आक्रोश फैल गया। आंदोलन को दबाने के लिए इलाकाई
हाकिम हबीबुर्रहमान गोरी फौज के साथ सल्ट के विभिन्न
इलाकों में दमन करता हुआ पहुँच गया।
महात्मा गाँधी के नेतृत्व में जब-जब आंदोलन चले,
यह क्षेत्र इन आंदोलनों से कभी अछूता नहीं रहा लेकिन
सन् 1920 के दशक में क्षेत्र में पुरुषोत्तम उपाध्याय की
अगुवाई में लोंगों ने आजादी का बिगुल बजाया। 1922
में गाँधी जी के जेल जाने पर लोगों ने इसका जमकर
विरोध किया। श्री उपाध्याय 1927 में सरकारी नौकरी
छोड़कर पूरी तरह संघर्ष में कूद गए। 1927 में नशाबंदी,
तंबाकू बंदी आंदोलन के दौरान धर्म सिंह मालगुजार के
गोदामों में रखा मनांे तंबाकू फूंक दिया गया। इस क्षेत्र में
सविनय अवज्ञा, नमक सत्याग्रह, जंगल सत्याग्रह, कुली
बेगार, अंग्रेजो भारत छोड़ो जैसे आंदोलन सर्वव्यापी रूप
धारण कर चुके थे। 5 सितम्बर 1942 को खुमाड़ में चार
लोगों की वजह से आंदोलन और तेज हो गया। जब-जब
आंदोलनों की आग यहाँ तेज होती, तब-तब अंग्रेजों की
बर्बरता और दमन भी तेज हो जाता। 5 सितम्बर 194

को खुमाड़ में सभा की सूचना जब अंग्रेज हाकिमों को
मिली, तब एसडीएम जॉनसन को सेना समेत यहाँ के
लिए रवाना कर दिया गया। सभा में पहुँचकर जॉनसन
ने गोली चलाने के आदेश दे दिए। दो सगे भाई गंगाराम
और खीमानंद मौके पर ही शहीद हो गए जबकि चार
दिन तक घायल रहे चूड़ामणी व बहादुर सिंह भी
शहीद हो गए। इसके अलावा गंगा दत्त शास्त्री,
मधुसूदन, गोपाल सिंह, बचे सिंह व नारायण सिंह
गंभीर रूप से घायल हो गए। भगदड़ के दौरान कई
लोग चुटैल भी हुए।
इस घटना से आहत होकर व ग्रामीणों की
देशभक्ति की भावना को देखते हुए महात्मा गाँधी ने
सल्ट को कुमाऊँ की बारदोली नाम दिया। गाँधी जी
ने संदेश भेजकर अहिंसात्मक आंदोलन चलाने का
आग्रह किया। सन् 1947 में जब देश आजाद हुआ
तब लोगों ने सर्वाधिक दीप जलाकर खुशियाँ मनाई।
तब से हर वर्ष 5 सितम्बर के दिन शहीदों की स्मृति में
शहीद दिवस मनाया जाता है। अनेक राजनैतिक,
सामाजिक व स्थानीय ग्रामीण शहीदों को यहाँ
श्र(ांजलि देते हैं।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Apple Company CEO Steve Jobs had visited Kaichi Dham (Temple Near Bhawali) Uttarakhand in 1970. He was great devotee of Kaichi Dham.

Thul Nantin

पता नहीं चलता की ये कुछ बातें  सच्ची हैं या मनगड़ंत . बिलकुल ऐसा  ही किस्सा इंदिराजी के आगमन के बारे में  मैंने पिथोरागढ़ और द्वाराहाट में भी सुना है |
इसके अलावा जंगल में गाय द्वारा शिवलिंग को दूध चडाने वाला किस्सा भी अनेक मंदिरों के बारे में सुना गया है | 
Quote from: Risky Pathak on January 19, 2010, 06:34:41 PM
Ye baat meine apni Mummy se bhi suni hai....
Initial 1980's ki baat hai..

Indira gandhi ka helicopter Namaiyash Khet(bageshwar) mwe utra tha. Unhe dekhne door door se gaanv ki auratein aayi thi. Or jewaro se saj dhaj ke.

Jise dekh kar indira jee ko lgaa ki yha ke logo ke pass bahot paisa hai. and jaisa mehta jee ne kha negative feedback pda...

Quote from: एम.एस. मेहता /M S Mehta on January 19, 2010, 10:55:44 AM

इंदिरा गांधी के बागेश्वर दौरा
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कहा जाता है एक बार इंदिरा गाँधी को नारायण दत्त तिवारी जी ने बागेश्वर जिले के visit करवाया! शायद तिवारी जी ने इंदिरा जी से पहले कहा होगा, की वहां की जनता काफी गरीब है और वहां बेरोजगारी है !

लेकिन हुआ ये की जब लोगो को पता चला कि इंदिरा गाँधी वहां आने वाली है, वहां कि महिलाये काफी सज धज कर और आभूषण पहन कर वहां गयी ! जब इंदिरा गाँधी ने यह देखा, उन्होंने प्रतिक्रिया शायद तिवारी जी कही, तिवारी जी,.. आप तो कहते है यहाँ गरीबी है लेकिन यहाँ तो लोग आभूषण से लदे है! शायद महिलाओ का ज्यादे सज धज कर जाना एक नकारात्मक फीडबैक आया!

कहा जाता है, इंदिरा गाँधी अपने इस यात्रा में बागेश्वर में ही अपना डायरी भूल गयी जिसे लेने हेलीकाप्टर दुबारा आया बागेश्वर में !