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Flora Of Uttarakhand - उत्तराखंड के फल, फूल एव वनस्पति

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, November 02, 2007, 10:20:14 AM


Devbhoomi,Uttarakhand


Devbhoomi,Uttarakhand

उत्तरांचल में विविध प्रकार की दुर्लभ वनस्पति एवं वनजीव पाये जाते हैं। ये सभी सम्मिलित रुप में उत्तरांचल को पारिस्थितिक पर्यटन के लिए एक आदर्श स्थल बनाते हैं।
पारिस्थितिक पर्यटन के अन्तर्गत जंगल सफारी, वन पगडंडियों पर ट्रेकिंग, प्राकृतिक रुप में टहलना, पंचेश्वर में महाशीर एवं अन्य मत्सय प्रजातियों को पकडना एवं छोडना सम्मिलित है।
तथापि क्षेत्र की पारिस्थितिक सुकुमारता को बनाये रखने के लिए इन समस्त गतिविधियों को अत्याधिक प्राथमिकता दी गई है। स्वच्छ एवं बलवर्धक पर्यावरण उत्तरांचल को विश्राम हेतु एक वटीय स्थल बनाता है।
आधुनिक सुविधाओं सहित मसूरी एवं नैनीताल के अछूते सौन्दर्य, हिमाच्छादित शिखरों के प्राचीन सौन्दर्य, नदियों एवं पर्वतों सहित उत्तरांचल पर्यटकों को वह सभी प्रदान करता है जिसकी एक पर्यटक आनन्द प्राप्ति के लिए चाह कर सकता है।

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Saffron petunia flowers blooming wild at Tapovan near Joshimath, Garhwal Himalaya, Uttarakhand, North India. The forests of Tapovan in their green shade hide the temple of Bhavishya Badri

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हर्बल व फूलों की खेती से समृद्ध होंगे काश्तकार

परंपरागत खेती से हटकर हर्बल व फूलों की खेती आदि के समग्र विकास के लिए विशेष कार्य योजना बनाने में प्राथमिकता देनी होगी। ताकि काश्तकारों की आर्थिक स्थिति मजबूत हो सके। यह बात जिलाधिकारी सुव‌र्द्धन ने कही। वह विकासखण्ड हवालबाग मुख्यालय में जड़ी-बूटी शोध संस्थान गोपेश्वर व उद्यान विभाग के संयुक्त जनपद स्तरीय गोष्ठी में बोल रहे थे।

जिलाधिकारी ने जिले के सभी विकासखण्डों में कम से कम 3 कलस्टर बनाए जाने पर जोर देते हुए कहा कि हर्बल की खेती को बढ़ावा देने के लिए इनमें डिमोस्ट्रेशन कर काश्तकारों को जागरूक करना होगा। जिले में कुल 38 कलस्टर बनाए जाने की सहमति जिलाधिकारी ने दी। औषधीय व सगंध पादकों के समग्र विकास की दिशा में कार्य करने की बात कही। गोष्ठी में आए विशेषज्ञों से जिलाधिकारी ने कहा कि काश्तकारों को उन्नत तकनीक जानकारी ग्राम स्तर तक मिले, इसके लिए विशेष प्रयास करने होंगे। जड़ी-बूटी शोध संस्थान गोपेश्वर के निदेशक आरसी सुंदरियाल ने उत्तराखण्ड राज्य औषधि एवं सगंध पादकों की विविधता, विभिन्नता के लिए उत्तराखण्ड को विख्यात बताया।

इस मौके पर जिला पंचायत अध्यक्ष मोहन राम आर्या, ब्लाक प्रमुख श्रीमती आशा आर्या, एसएसजे परिसर के वनस्पति विज्ञान के प्रो.पीसी पांडे, वनाधिकारी सिविल सोयम प्रेम कुमार, सुरेश उप्रेती, मुख्य विकास अधिकारी हरगोविन्द भट्ट, डीसी गुणवंत, जिला उद्यान अधिकारी डा.आरके सिंह, खण्ड विकास अधिकारी कैलाश चन्द्र जोशी, आनंद डंगवाल, गीता देवी, संजीव कुमार, डा.विजय भट्ट सहित अनेक काश्तकार व विभिन्न विभागों के अधिकारी कर्मचारी मौजूद थे।

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The Brahma Kamal, the much reverred flower of the Himalayas, is an excellent example of plant life at the upper limit of high mountains (3,000-4,600 m). The flowerheads are actually purple, but are enclosed in layers of greenish-yellow,
papery, boat-shaped bracts. The flowers bloom at the height of the monsoons and abundant in high-altitude places like The Valley of Flowers. The bract-cover provides the warm space needed to bloom in the cold mountains. The flowers are used as offering in the hill temples, like the shrines of Badrinath. The thick curved root of the plant is applied to bruises and cuts, as part of local medicine. Brahma Kamal is the state flower of Uttarakhand. A postal stamp was issued by the Indian Postal Department to commemorate this flower



एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

This is photo of Bird which is found in Uttarakhand which has a long tail. In common languge this is called Lambh Poonchi.


एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720



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